bhakti gana bhojpuri mein मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

HD - दउरा उठाके माथे चली छठी घाटे - Daura Uthake Mathe Chali Chhathi Ghate - Shilpi Raj

भजन "HD - दउरा उठाके माथे चली छठी घाटे - Daura Uthake Mathe Chali Chhathi Ghate - Shilpi Raj - Bhojpuri" के हिन्दी लिरिक्स, विस्तृत अर्थ, और पौराणिक महत्त्व। यह भोजपुरी भजन छठी माता की पूजा और भक्ति का गहन संदेश प्रस्तुत करता है। 'दउरा उठाके माथे च

प्रस्तावना एवं परिचय

मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें
दउरा उठाके माथे चली छठी घाटे
दउरा उठाके माथे चली छठी घाटे
घाटे पर देवी का मंदिर बसत है

हर घड़ी भक्तन की आरती बसत है
छठी माता के दरबार में
भक्ति का करत विचार में
दउरा उठाके माथे चली छठी घाटे

घाट घाट में देवी विराजत हैं
भक्तन की लाज बचाइत हैं
छठी माता के चरण में
सब कष्ट मिटत हैं वरन में

दउरा उठाके माथे चली छठी घाटे
घाटे पर देवी का मंदिर बसत है
हर घड़ी भक्तन की आरती बसत है
दउरा उठाके माथे चली छठी घाटे

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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ यह भोजपुरी भजन छठी माता की पूजा और भक्ति का गहन संदेश प्रस्तुत करता है। 'दउरा उठाके माथे चली छठी घाटे' पंक्ति में भक्त अपनी भक्ति की पूर्ण समर्पणा को व्यक्त करता है, जहाँ माथे पर धार्मिक प्रतीक धारण करके छठी माता के घाट की ओर यात्रा करता है। छठी माता की पूजा विशेषकर पूर्वी भारत, विशेषकर बिहार और उत्तर प्रदेश में महत्वपूर्ण है। 'घाटे पर देवी का मंदिर बसत है' इंगित करता है कि देवी केवल भौतिक मंदिरों में नहीं, बल्कि प्रत्येक घाट पर, प्रत्येक जल स्रोत पर विद्यमान हैं। 'हर घड़ी भक्तन की आरती बसत है' दर्शाता है कि देवी निरंतर अपने भक्तों की सेवा और रक्षा में तत्पर हैं। यह भजन भक्ति मार्ग पर चलने वाले प्रत्येक भक्त को प्रेरित करता है कि वह पूर्ण श्रद्धा और समर्पण के साथ माता की शरण में जाए।
इस भजन का भावार्थ गहरी भक्ति भावना और माता के प्रति अपार श्रद्धा से निहित है। 'छठी माता के दरबार में भक्ति का करत विचार में' पंक्ति में भक्त का हृदय पूर्णतः माता की भक्ति में लगा हुआ है, जहाँ वह निरंतर माता के दरबार में अपनी भक्ति को समर्पित करता है। छठी माता की पूजा महिलाओं और बच्चों की कल्याण के लिए विशेष महत्व रखती है, क्योंकि माता को संतान की रक्षक के रूप में माना जाता है। 'घाट घाट में देवी विराजत हैं' और 'भक्तन की लाज बचाइत हैं' इंगित करता है कि देवी सर्वव्यापी हैं और अपने भक्तों की सम्मान तथा कल्याण की रक्षा में सदा सजग रहती हैं। यह भावनात्मक पहलू बताता है कि भक्ति में निहित पवित्र संबंध माता और भक्त के बीच एक चिरस्थायी बंधन को स्थापित करता है।
इस भजन की दार्शनिक और आध्यात्मिक गहराई छठी माता की देवीत्व को समझने में निहित है। छठी माता को शक्ति, सुरक्षा और मातृत्व की देवी के रूप में माना जाता है। भक्ति मार्ग पर इस गीत का संदेश यह है कि भक्त को पूर्ण आत्मसमर्पण के साथ माता की शरण लेनी चाहिए। 'दउरा उठाके' शारीरिक और मानसिक तैयारी का प्रतीक है, जो दर्शाता है कि भक्ति पथ पर चलने के लिए आत्मनियंत्रण और समर्पण आवश्यक है। माता को घाट से जोड़ना जल, पवित्रता और जीवन के प्रवाह का प्रतीक है। भक्ति मार्ग में यह संदेश है कि जीवन की सभी कठिनाइयों में माता की करुणा ही एकमात्र आश्रय है। छठी माता की पूजा का मूल तत्व है सर्वव्यापी शक्ति के प्रति समर्पण और विश्वास।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ छठी माता की पूजा परंपरा वैदिक काल से ही भारतीय संस्कृति में निहित है। पुराणों में माता दुर्गा के विभिन्न रूपों का वर्णन मिलता है, जिनमें छठी माता एक प्रमुख रूप हैं। महाभारत में भी देवी को शक्ति और रक्षा की देवी के रूप में चित्रित किया गया है। विशेषकर बिहार क्षेत्र में छठी माता की पूजा प्रमुख त्योहार के रूप में मनाई जाती है, जहाँ महिलाएं और परिवार मिलकर छठी पूजा करते हैं। माता गंगा और अन्य जल स्रोतों से छठी माता का गहरा संबंध है, जो जीवन की शुद्धता और पवित्रता को दर्शाता है। यह पूजा संतान की सुरक्षा, परिवार की समृद्धि और महिलाओं की कल्याण के लिए की जाती है। धार्मिक ग्रंथों में छठी माता को आदि शक्ति का अवतार माना गया है।
सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा शुभ मुहूर्त">दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का नियमित चिंतन और गायन मन को शांति और प्रसन्नता प्रदान करता है। छठी माता की भक्ति से भक्त को आंतरिक शक्ति, साहस और आत्मविश्वास की वृद्धि होती है। यह गीत सुनने और गाने से भय, चिंता और नकारात्मक विचार क्षीण होते हैं। मानसिक स्तर पर यह भजन मन को पवित्र भावनाओं से भर देता है। शारीरिक स्तर पर निरंतर चिंतन से आत्मचेतना जागृत होती है। आध्यात्मिक दृष्टि से यह भक्ति का मार्ग प्रशस्त करता है और भक्त को दिव्य शक्ति से जुड़ाता है।
🕒 साधना एवं गायन विधि इस भजन का गायन प्रातः काल सूर्योदय से पहले या संध्या काल में सर्वोत्तम फल देता है। पूजा के समय स्नान कर पवित्र वस्त्र धारण करें और एक शांत स्थान का चयन करें। दीप जलाएँ, फूल और अगरबत्ती से माता को अर्पित करें। भजन को भक्ति भाव से, श्रद्धा के साथ गाएँ। आरामदायक आसन पर बैठकर सीधी रीढ़ के साथ ध्यान लगाएँ। मन को पवित्र विचारों में केंद्रित रखें और माता की कृपा के लिए प्रार्थना करें। नियमित रूप से इसे पढ़ने से अधिक लाभ मिलता है।
�� अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ) छठी माता की पूजा का विशेष महत्व क्या है?छठी माता को संतान की रक्षक और महिलाओं की कल्याणकारी देवी माना जाता है। उनकी पूजा परिवार की समृद्धि, स्वास्थ्य और सुख के लिए की जाती है। विशेषकर बिहार, उत्तर प्रदेश में छठी पूजा प्रमुख त्योहार है जो संतान सुरक्षा के लिए मनाया जाता है।

दउरा और छठी घाट का क्या प्रतीकात्मक अर्थ है?दउरा भक्ति के प्रतीक के रूप में मस्तक पर धारण किया जाता है, जो आत्मसमर्पण का संकेत है। छठी घाट जल की पवित्रता, जीवन के प्रवाह और माता की सर्वव्यापी शक्ति को दर्शाता है। ये दोनों भक्ति पथ के अभिन्न तत्व हैं।
इस भजन को नियमित गायन से क्या आध्यात्मिक लाभ मिलता है?नियमित गायन से मन को शांति, आंतरिक शक्ति और देवीय साक्षात्कार का अनुभव होता है। भय और चिंता दूर होती है, आत्मविश्वास बढ़ता है और भक्ति की भावना गहन होती है। माता की कृपा और सुरक्षा का अनुभव करना संभव होता है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 08 Oct 2026

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