"बाघवा लेके चलल बा माई के" (Baghawa Leke Chalal Ba Mai Ke) भोजपुरी लोक-संस्कृति और भक्ति परंपरा का एक अत्यंत लोकप्रिय देवी गीत है, जिसे सुप्रसिद्ध गायक प्रेम सिंह प्रियांशु (Prem Singh Priyanshu) ने अपने मधुर और ओजस्वी स्वर से सजाया है। यह गीत विशेष रूप से शारदीय और चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर देवी भक्तों के बीच अत्यंत श्रद्धा के साथ सुना और गाया जाता है। सनातन धर्म में आदिशक्ति मां दुर्गा के सिंह या व्याघ्र (बाघ) वाहन को अदम्य साहस, तेज और समस्त ब्रह्मांडीय ऊर्जा के नियंत्रण का प्रतीक माना गया है। इस गीत के माध्यम से भक्त अपनी आराध्या देवी मां के भव्य आगमन, उनके अलौकिक रूप और भक्तों पर बरसने वाली उनकी असीम अनुकंपा का अत्यंत सजीव चित्रण करते हैं। यह देवी गीत केवल एक संगीतमय प्रस्तुति नहीं है, बल्कि यह साधक के हृदय में मां के प्रति अनन्य समर्पण, श्रद्धा और विश्वास की दिव्य लौ प्रज्वलित करता है।
सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics
॥ बाघवा लेके चलल बा माई के ॥
(मुखड़ा)
बाघवा लेके चलल बा माई के, सभकर बिगड़ी बनावेली माई।
शेर पर सवार होके आवतारी माई, दुख-दरद सब मिटावेली माई।
बाघवा लेके चलल बा माई के, सभकर बिगड़ी बनावेली माई॥
(अंतरा 1)
मस्तक पर सोहे मैया के बिंदिया लाल लाल,
हाथ में त्रिशूल चमके, रूप बा विशाल।
भक्तन के भीर लागल बा मैया के दरबार में,
मैया के जयकारा गूंजे सारा संसार में।
बाघवा लेके चलल बा माई के, सभकर बिगड़ी बनावेली माई॥
(अंतरा 2)
लाल चुनरिया सोहे मैया के गात पर,
कृपा बरसेला हरदम भक्तन के बात पर।
प्रेम सिंह गावे मैया के महिमा अपार,
प्रियांशु झुकेला मैया तोहरे दुआर।
बाघवा लेके चलल बा माई के, सभकर बिगड़ी बनावेली माई॥
(अंतरा 3)
नारियल चुनरी चढ़े, बाजे पैजनिया,
महिमा महान बाटे, जानेला दुनिया।
दुष्टन के संहार करे, भक्तन के तारे,
मैया के सरन में जे आवे, ओकर बेड़ा पार करे।
बाघवा लेके चलल बा माई के, सभकर बिगड़ी बनावेली माई॥
गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth
इस सुंदर देवी गीत का भावार्थ अत्यंत गहरा और भक्ति रस से सराबोर है। यहाँ गीत के प्रत्येक भाग का विस्तृत हिंदी अनुवाद और आध्यात्मिक विश्लेषण प्रस्तुत किया जा रहा है:
मुखड़ा: गीत की शुरुआत में भक्त अत्यंत हर्षित होकर गाता है कि जगत जननी मां दुर्गा अपने दिव्य वाहन 'बाघ' (सिंह) पर सवार होकर अपने भक्तों के कल्याण के लिए चल पड़ी हैं। मां दुर्गा का यह स्वरूप अत्यंत कल्याणकारी है, क्योंकि वे अपने शरण में आने वाले हर दुखी जीव की बिगड़ी हुई बात बना देती हैं। जब मां शेर पर सवार होकर आती हैं, तो भक्तों के जीवन के समस्त भय, दुख, दरद और संताप स्वतः ही समाप्त हो जाते हैं।
प्रथम अंतरा: इस अंतरे में माता के अलौकिक और मनमोहक श्रृंगार का वर्णन है। मां के मस्तक पर लाल रंग की दिव्य बिंदिया सुशोभित हो रही है, जो सुहाग, सौभाग्य और तेज का प्रतीक है। उनके हाथों में दुष्टों का दमन करने वाला और भक्तों को अभय प्रदान करने वाला त्रिशूल चमक रहा है। मां का यह विराट और विशाल रूप देखकर संपूर्ण सृष्टि नतमस्तक है। मैया के भव्य दरबार में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी हुई है और चारों दिशाओं में मां के नाम का जयकारा गूंज रहा है।
द्वितीय अंतरा: यहाँ मां के वस्त्रों और उनकी असीम करुणा का वर्णन है। मां के श्रीअंग पर लाल रंग की चुनरी अत्यंत सुंदर लग रही है। मां अपने भक्तों की हर पुकार को सुनती हैं और उनकी हर प्रार्थना पर अपनी असीम कृपा बरसाती हैं। गीतकार प्रेम सिंह प्रियांशु कहते हैं कि मां की महिमा अनंत और अपार है, जिसका पार पाना किसी के लिए संभव नहीं है। वे स्वयं को मां के चरणों का दास मानते हुए उनके पावन द्वार पर शीश झुकाते हैं।
तृतीय अंतरा: इस अंतिम अंतरे में मां की पूजा-अर्चना और उनके संहारक व रक्षक रूप का वर्णन है। भक्त मां को नारियल, चुनरी और विभिन्न पूजन सामग्रियां अर्पित कर रहे हैं। मां के चरणों में बंधी पैजनिया (पायल) की रुनझुन आवाज भक्तों के हृदय को आनंदित कर रही है। मां दुर्गा जहाँ एक ओर दुष्टों और असुरों का संहार करती हैं, वहीं दूसरी ओर अपने सरल हृदय भक्तों का उद्धार करती हैं। जो भी प्राणी सच्चे मन से मां की शरण में आता है, मां उसका भवसागर से बेड़ा पार कर देती हैं।
गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message
इस देवी गीत की मुख्य भावना 'शरणागति' (Surrender) और 'वात्सल्य' (Maternal Love) है। सनातन दर्शन में मां को प्रथम गुरु और करुणा का परम स्रोत माना गया है। इस गीत के माध्यम से निम्नलिखित मुख्य संदेश प्रसारित होते हैं:
- भयमुक्ति का संदेश: मां दुर्गा का सिंह पर सवार होना इस बात का प्रतीक है कि जब हम ईश्वर की शरण में जाते हैं, तो हमारे भीतर का पशुत्व और भय समाप्त हो जाता है।
- सच्ची भक्ति की शक्ति: गीत यह संदेश देता है कि सांसारिक कष्टों से मुक्ति का एकमात्र मार्ग मां के चरणों में पूर्ण समर्पण है।
- समानता और करुणा: मां के दरबार में अमीर-गरीब का कोई भेद नहीं होता। जो भी सच्चे भाव से पुकारता है, मां उसकी झोली भर देती हैं।
गीत की जानकारी | Song Information
| विवरण (Parameter) | जानकारी (Information) |
|---|---|
| गीत का नाम (Song Name) | बाघवा लेके चलल बा माई के (Baghawa Leke Chalal Ba Mai Ke) |
| गायक (Singer) | प्रेम सिंह प्रियांशु (Prem Singh Priyanshu) |
| गीतकार (Lyricist) | पारंपरिक एवं प्रेम सिंह प्रियांशु |
| श्रेणी (Category) | देवी भजन / भोजपुरी देवी गीत (Devi Geet) |
| मुख्य विषय (Theme) | मां दुर्गा का आगमन, महिमा गान और श्रृंगार वर्णन |
| भाषा (Language) | भोजपुरी (Bhojpuri) |
| उपयुक्त अवसर (Occasion) | नवरात्रि व्रत, दुर्गा पूजा, जगराता, देवी पूजन |
गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators
इस गीत को अपनी सुरीली आवाज से जीवंत करने वाले कलाकार प्रेम सिंह प्रियांशु भोजपुरी लोक संगीत और विशेषकर भक्ति संगीत के क्षेत्र में एक जाना-माना नाम हैं। उनकी गायकी की मुख्य विशेषता यह है कि वे पारंपरिक भोजपुरी धुनों को आधुनिक संगीत के साथ इस प्रकार पिरोते हैं कि वह युवा पीढ़ी को भी आकर्षित करती है और बुजुर्गों को भी अपनी जड़ों से जोड़े रखती है। इस गीत में प्रयुक्त वाद्य यंत्र जैसे ढोलक, मंजीरा, और शहनाई की धुनें श्रोताओं को सीधे मां के पंडाल और मंदिर के गर्भगृह का अनुभव कराती हैं।
कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings
| शब्द (Word) | सरल हिंदी अर्थ (Meaning) | संदर्भ (Context) |
|---|---|---|
| बाघवा (Baghawa) | बाघ या सिंह (Tiger/Lion) | मां दुर्गा का दिव्य वाहन |
| चलल बा (Chalal Ba) | चल पड़े हैं / प्रस्थान कर चुके हैं | मां का भक्तों के घर की ओर आना |
| बिंदिया (Bindiya) | माथे की बिंदी | सौभाग्य और सुहाग का प्रतीक श्रृंगार |
| गात (Gaat) | शरीर / श्रीअंग (Body) | मां के दिव्य विग्रह पर लाल चुनरी का सोहना |
| पैजनिया (Paijaniya) | पायल / नूपुर (Anklet) | मां के चरणों में बजने वाले घुंघरू |
| बेड़ा पार (Beda Paar) | भवसागर से मुक्ति / उद्धार | कष्टों से मुक्ति दिलाना |
गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance
भोजपुरी भाषी क्षेत्रों (जैसे बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड और नेपाल के तराई क्षेत्रों) में देवी गीतों का एक विशेष सांस्कृतिक महत्व है। इन गीतों को केवल मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि सामूहिक साधना के रूप में गाया जाता है।
आध्यात्मिक दृष्टिकोण: देवीभागवत पुराण के अनुसार, जब-जब पृथ्वी पर असुरता और अधर्म बढ़ता है, तब-तब आदिशक्ति महालक्ष्मी, महासरस्वती और महाकाली के रूप में अवतार लेकर धर्म की स्थापना करती हैं। इस गीत में "बाघवा" का उल्लेख केवल एक पशु के रूप में नहीं है, बल्कि वह प्रकृति की प्रचंड शक्ति का प्रतीक है जिसे केवल मां दुर्गा ही नियंत्रित कर सकती हैं। यह दर्शाता है कि जब हम मां की शरण में होते हैं, तो प्रकृति की सभी विपरीत परिस्थितियां हमारे अनुकूल हो जाती हैं।
गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons
यह पावन देवी गीत हमें केवल भक्ति का मार्ग ही नहीं दिखाता, बल्कि व्यावहारिक जीवन के लिए कई महत्वपूर्ण सीख भी देता है:
- धैर्य और विश्वास: जीवन में कितनी भी बड़ी कठिनाई क्यों न हो, यदि हमारा विश्वास मां के प्रति दृढ़ है, तो वे हमारी "बिगड़ी" अवश्य बनाएंगी।
- अहंकार का त्याग: मां के द्वार पर सभी भक्त समान हैं। समर्पण के लिए हृदय में विनम्रता का होना अनिवार्य है।
- बुराई पर अच्छाई की जीत: मां का त्रिशूल हमें यह सिखाता है कि हमें अपने भीतर के काम, क्रोध, लोभ और मोह रूपी असुरों का संहार करना चाहिए।
गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing
यद्यपि मां की आराधना किसी भी समय की जा सकती है, परंतु इस गीत को सुनने और गाने के कुछ विशेष अवसर निर्धारित हैं:
- शारदीय एवं चैत्र नवरात्रि: इन नौ दिनों में सुबह और शाम के समय घरों और पूजा पंडालों में यह गीत अत्यंत श्रद्धा से बजाया जाता है।
- देवी जागरण (माता का जगराता): रात्रि जागरण के समय जब मां की चौकी स्थापित की जाती है, तब भक्तों को नृत्य और कीर्तन के लिए प्रेरित करने में यह गीत मुख्य भूमिका निभाता है।
- मंगला आरती के समय: सुबह के समय मां के मंदिर में इस गीत के गायन से वातावरण अत्यंत पवित्र और ऊर्जावान हो जाता है।
एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance
| मुख्य बिंदु | संक्षिप्त विवरण |
|---|---|
| भजन का नाम | बाघवा लेके चलल बा माई के |
| मुख्य देवी | मां दुर्गा / आदिशक्ति |
| गायक | प्रेम सिंह प्रियांशु |
| काव्य शैली | भोजपुरी लोक देवी गीत |
| मुख्य रस | भक्ति रस एवं वीर रस (उत्साह) |
| संबंधित पाठ | दुर्गा चालीसा और दुर्गा आरती |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
"संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" — भक्तिलोक के विद्वान संपादकों और संगीत समीक्षकों द्वारा इस गीत का विश्लेषण लोक-संस्कृति और शास्त्रीय ग्रंथों के आलोक में किया गया है। यह गीत भोजपुरी लोक-साहित्य की उस समृद्ध धरोहर को प्रदर्शित करता है जहाँ भक्ति और संगीत का अनूठा संगम देखने को मिलता है। प्रेम सिंह प्रियांशु की यह प्रस्तुति न केवल कानों को प्रिय लगती है, बल्कि आत्मा को भी शांति प्रदान करती है।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- श्रीमद्देवीभागवत पुराण: मां दुर्गा के सिंहवाहिनी स्वरूप और उनके दिव्य आयुधों (त्रिशूल आदि) का शास्त्रीय वर्णन।
- भोजपुरी लोक संगीत परंपरा: पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के पारंपरिक देवी गीतों का संकलन एवं मौखिक इतिहास।
- भक्तिलोक संगीत समीक्षा प्रभाग: भक्ति गीतों के आध्यात्मिक प्रभाव और जनमानस पर उनके सांस्कृतिक प्रभाव का अध्ययन।
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