Parvati Stotram

माटी में मिले माटी पानी में पानी भजन इन हिंदी लिरिक्स

94 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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"माटी में मिले माटी, पानी में पानी" यह भजन सनातन धर्म के उस परम सत्य को उद्घाटित करता है, जो नश्वर शरीर और शाश्वत आत्मा के भेद को स्पष्ट करता है। यह भजन वैराग्य, आत्म-बोध और ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण का एक अद्भुत संगम है। हरियाणवी लोक शैली में रचित यह भजन सरल शब्दों में जीवन की नश्वरता और परमात्मा की व्यापकता को समझाता है। जब मनुष्य यह समझ लेता है कि यह देह पंचतत्वों से बनी है और अंततः उन्हीं में विलीन हो जानी है, तब वह अहंकार से मुक्त होकर प्रभु की शरण में आता है। यह भजन विशेष रूप से सत्संग, कीर्तन और आत्म-चिंतन के अवसरों पर गाया जाता है, जो साधक को संसार के मोह-माया से ऊपर उठकर परम पद की प्राप्ति हेतु प्रेरित करता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

माटी में मिले माटी, पानी में पानी,
देख ले तू बंदे, ये है दुनिया की कहानी।
माटी में मिले माटी, पानी में पानी॥

सांसों की माला पे, नाम तेरा जपूँ,
छोड़ के ये दुनिया, मैं चरणों में आऊं।
तू ही है दाता, तू ही है ज्ञानी,
देख ले तू बंदे, ये है दुनिया की कहानी॥

काया ये माटी की, माटी में जाएगी,
खाली हाथ आया था, खाली हाथ जाएगी।
क्यों करता अभिमान, ओ अज्ञानी,
देख ले तू बंदे, ये है दुनिया की कहानी॥

राम नाम सत्य है, यही एक सार है,
बाकी सब झूठा, ये संसार असार है।
भज ले तू प्रभु को, ओ प्राणी,
देख ले तू बंदे, ये है दुनिया की कहानी॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का भावार्थ अत्यंत गहरा है। "माटी में मिले माटी" का अर्थ है कि यह शरीर पंचतत्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश) से निर्मित है और मृत्यु के पश्चात यह पुनः प्रकृति में विलीन हो जाता है। भजनकार हमें याद दिलाता है कि हम इस संसार में कुछ भी अपना लेकर नहीं आए थे और न ही कुछ साथ ले जाएंगे।

भजन का मुख्य संदेश 'अहंकार का त्याग' है। जब मनुष्य यह जान लेता है कि उसका शरीर नश्वर है, तो वह व्यर्थ के मोह और अभिमान को त्याग देता है। "सांसों की माला पे नाम तेरा जपूँ" पंक्ति यह दर्शाती है कि जीवन का एकमात्र उद्देश्य प्रभु का स्मरण है। यह भजन हमें सिखाता है कि संसार एक रंगमंच है, जहाँ हमें अपने कर्म तो करने हैं, लेकिन मन को सदैव परमात्मा के चरणों में समर्पित रखना है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • वैराग्य भाव: यह भजन साधक के मन में संसार के प्रति अनासक्ति पैदा करता है।
  • आत्म-साक्षात्कार: शरीर की नश्वरता का बोध कराकर आत्मा की अमरता की ओर ध्यान आकर्षित करता है।
  • सरलता: लोक भाषा में होने के कारण यह जन-जन के हृदय को छूने में सक्षम है।
  • भक्ति रस: यह भजन विनय और समर्पण के भाव से ओत-प्रोत है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को किसी भी समय गाया जा सकता है, परंतु ब्रह्म मुहूर्त या संध्या काल में इसका गायन विशेष शांति प्रदान करता है। इसे एकांत में बैठकर या सत्संग के दौरान सामूहिक रूप से गाया जा सकता है। गाते समय मन में प्रभु के प्रति पूर्ण शरणागति का भाव होना अनिवार्य है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द अर्थ
माटी मिट्टी (शरीर का प्रतीक)
काया शरीर
असार जिसका कोई सार न हो, नश्वर
अज्ञानी जिसे सत्य का ज्ञान न हो

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम माटी में मिले माटी
विषय वैराग्य एवं भक्ति
भाषा हिंदी/हरियाणवी
भाव समर्पण एवं आत्म-बोध

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश जीवन की नश्वरता को समझना और अहंकार त्यागकर प्रभु की भक्ति में लीन होना है।

क्या यह भजन किसी विशेष अवसर पर गाया जाता है?

इसे किसी भी समय गाया जा सकता है, विशेषकर सत्संग या शांति के समय।

क्या यह भजन बच्चों को सिखाना चाहिए?

हाँ, यह भजन बच्चों में जीवन के प्रति सही दृष्टिकोण और सादगी विकसित करने में सहायक है।

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।

स्रोत एवं संदर्भ: सनातन भक्ति परंपरा एवं लोक भजन संग्रह।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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