"तुही तू माँ" भजन सनातन धर्म में देवी शक्ति की सर्वव्यापकता और उनकी असीम अनुकंपा को समर्पित एक अत्यंत ही मधुर और भावपूर्ण देवी गीत है। शिव भारद्वाज द्वारा गाए गए इस भजन में भक्त का अपनी आराध्य माँ भगवती के प्रति अनन्य समर्पण और अगाध श्रद्धा का सुंदर चित्रण मिलता है। यह भजन विशेष रूप से पंजाबी देवी भजन और उत्तर भारतीय जगराता परंपरा में अत्यंत लोकप्रिय है। इस भजन का मुख्य भाव 'शरणागति' और 'अद्वैत दर्शन' है, जहाँ भक्त सृष्टि के कण-कण में केवल अपनी परम माँ आदि शक्ति का ही स्वरूप देखता है। जब कोई साधक इस भजन का गायन करता है, तो उसका अंतर्मन माँ के वात्सल्य रस से सराबोर हो जाता है। यह भजन न केवल मानसिक शांति प्रदान करता है, बल्कि साधक के भीतर आध्यात्मिक चेतना का संचार भी करता है।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
स्थायी (मुखड़ा):
तुही तू माँ, तुही तू माँ, तुही तू माँ।
हर तरफ है तेरा जलवा, हर जगह तू ही तू माँ।
तुही तू माँ, तुही तू माँ, तुही तू माँ॥
अंतरा १:
पहाड़ों पे भी तू ही विराजे,
गुफाओं में भी तू ही विराजे,
भक्तों के दिलों में भी तू ही विराजे,
हर तरफ है तेरा जलवा, हर जगह तू ही तू माँ।
तुही तू माँ, तुही तू माँ, तुही तू माँ॥
अंतरा २:
तू ही दुर्गा, तू ही काली,
तू ही शेरोंवाली माँ,
तू ही लक्ष्मी, तू ही सरस्वती,
तू ही जोतांवाली माँ,
हर तरफ है तेरा जलवा, हर जगह तू ही तू माँ।
तुही तू माँ, तुही तू माँ, तुही तू माँ॥
अंतरा ३:
तेरी शरण में जो भी आया,
उसने मनचाहा फल पाया,
तूने सबकी बिगड़ी बनाई,
तूने सबका भाग्य जगाया,
हर तरफ है तेरा जलवा, हर जगह तू ही तू माँ।
तुही तू माँ, तुही तू माँ, तुही तू माँ॥
अंतरा ४:
कण-कण में है वास तुम्हारा,
तू ही जग का एक सहारा,
तेरे बिना कोई और न मेरा,
तू ही मेरी नैया का किनारा,
हर तरफ है तेरा जलवा, हर जगह तू ही तू माँ।
तुही तू माँ, तुही तू माँ, तुही तू माँ॥
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
इस पावन भजन "तुही तू माँ" का मूल भाव ईश्वर की सर्वव्यापकता और भक्त की पूर्ण शरणागति पर आधारित है। यहाँ 'माँ' शब्द केवल एक भौतिक माता का सूचक नहीं है, बल्कि यह उस आदि शक्ति, जगदम्बा का प्रतीक है जो इस संपूर्ण ब्रह्मांड की उत्पत्ति, पालन और संहार की अधिष्ठात्री देवी हैं।
भजन की शुरुआत में ही भक्त उद्घोष करता है कि हे माँ! इस संसार में केवल तेरा ही अस्तित्व है। "हर तरफ है तेरा जलवा" का अर्थ है कि इस दृश्यमान जगत में जो भी सौंदर्य, तेज, और जीवन दिखाई दे रहा है, वह सब माँ भगवती की ही माया और उनकी शक्ति का प्रकटीकरण है। पहाड़ों की ऊंचाइयों से लेकर गुफाओं की गहराइयों तक और अंततः प्रत्येक जीव के हृदय कमल में वही परम चेतना विराजमान है।
यह भजन साधक को यह सिखाता है कि जब हम अपने अहंकार को त्यागकर माँ के चरणों में समर्पित हो जाते हैं, तब हमें सर्वत्र माँ का ही रूप दिखाई देने लगता है। यह श्रीमद्भगवद्गीता के उस श्लोक के अनुरूप है जहाँ भगवान कहते हैं कि जो मुझे सर्वत्र देखता है और सब कुछ मुझमें देखता है, उसके लिए मैं कभी अदृश्य नहीं होता।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
- सर्वव्यापकता का संदेश: यह भजन माँ दुर्गा को केवल एक मंदिर या मूर्ति तक सीमित न मानकर उन्हें कण-कण में व्याप्त परम शक्ति के रूप में स्थापित करता है।
- अद्वैत भाव की अभिव्यक्ति: "तुही तू माँ" का बार-बार जप करने से साधक के भीतर 'द्वैत' (मैं और तुम का अंतर) समाप्त होता है और वह अद्वैत आनंद का अनुभव करता है।
- सरलता और सुगमता: इस भजन के शब्द इतने सरल और सुगम हैं कि कोई भी सामान्य भक्त इसे आसानी से गा सकता है और माँ की भक्ति में लीन हो सकता है।
- मानसिक शांति का प्रदाता: इस भजन का लयबद्ध संकीर्तन मस्तिष्क की चंचलता को शांत कर एकाग्रता बढ़ाता है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
यद्यपि माँ की आराधना के लिए हर क्षण पवित्र है, परंतु इस भजन के गायन और श्रवण के लिए निम्नलिखित समय और विधियां अत्यंत फलदायी मानी गई हैं:
- नवरात्रि पर्व: चैत्र और आश्विन मास की नवरात्रि के पावन दिनों में इस भजन का गायन करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।
- दैनिक संध्या आरती: शाम के समय घर के मंदिर में घी का दीपक जलाकर परिवार के साथ इस भजन का संकीर्तन करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
- माता की चौकी और जगराता: माता के जागरण या चौकी के प्रारंभ में इस भजन को गाने से वातावरण भक्तिमय और सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है।
- गायन की विधि: इसे शांत चित्त होकर, आँखें बंद करके और माँ के दिव्य स्वरूप का ध्यान करते हुए गाना चाहिए। तालियों की थाप के साथ इसका संकीर्तन करने से हृदय में भक्ति का विशेष संचार होता है।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
यह भजन साक्षात् आदि शक्ति माँ दुर्गा को समर्पित है। सनातन परंपरा में माँ दुर्गा को शक्ति, करुणा, और बुद्धि की देवी माना गया है। वे ही महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती के रूप में सृष्टि का संचालन करती हैं।
इस भजन के माध्यम से भक्त माँ के ममतामयी रूप की वंदना करता है। भगवान शिव की अर्धांगिनी होने के कारण वे शिवा भी हैं और भक्तों का कल्याण करने वाली कल्याणकारी माता भी हैं। इस भजन को अपनी सुरीली आवाज से सजाने वाले गायक शिव भारद्वाज ने अपनी गायकी के माध्यम से लाखों भक्तों के दिलों में माँ के प्रति प्रेम की अलख जगाई है।
भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background
"तुही तू माँ" भजन आधुनिक युग के सबसे लोकप्रिय देवी गीतों में से एक है। इसकी पृष्ठभूमि उत्तर भारतीय लोक संगीत, विशेषकर पंजाबी और हिमाचली देवी गीतों से प्रेरित है। पहाड़ों में माँ वैष्णो देवी, माँ चिंतपूर्णी, माँ ज्वालाजी और माँ कांगड़ा देवी के दरबारों में गाए जाने वाले पारंपरिक भजनों की शैली इस गीत में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
इस भजन की रचना का मुख्य उद्देश्य भक्तों को बहुत ही सरल भाषा में ईश्वर के विराट रूप से परिचित कराना था। जटिल संस्कृत श्लोकों को न समझ पाने वाले साधारण भक्तों के लिए यह भजन माँ की स्तुति का एक सुलभ माध्यम बन गया है।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
इस भजन की भाषा सरल खड़ी बोली हिंदी है, जिसमें पंजाबी लोक भाषा का मधुर पुट शामिल है। इसकी काव्य शैली "संकीर्तन शैली" है, जहाँ मुख्य पंक्तियों (मुखड़े) को बार-बार दोहराया जाता है।
इस दोहराव के कारण यह भजन एक मंत्र की तरह काम करता है। इसमें अनुप्रास और रूपक अलंकारों का सहज प्रयोग हुआ है। "नैया का किनारा" और "बिगड़ी बनाना" जैसे मुहावरों का प्रयोग भक्त और भगवान के बीच के आत्मीय संबंध को बहुत ही खूबसूरती से दर्शाता है।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
यह भजन हमें केवल भक्ति करना ही नहीं सिखाता, बल्कि व्यावहारिक जीवन के लिए भी कई महत्वपूर्ण सीख देता है:
- पूर्ण समर्पण (Surrender): जब हम अपनी चिंताओं और अहंकार को माँ के चरणों में सौंप देते हैं, तो हमारा जीवन तनावमुक्त हो जाता है।
- समानता का भाव: यदि माँ हर जगह और हर जीव में व्याप्त हैं, तो हमें किसी भी जीव से घृणा नहीं करनी चाहिए। सभी के प्रति दया और प्रेम का भाव रखना ही माँ की सच्ची पूजा है।
- धैर्य और विश्वास: "तूने सबकी बिगड़ी बनाई" यह पंक्ति हमें सिखाती है कि कठिन समय में भी हमें धैर्य नहीं खोना चाहिए; माँ समय आने पर सब ठीक कर देती हैं।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / वाक्यांश | सरल हिंदी अर्थ | आध्यात्मिक संदर्भ |
|---|---|---|
| जलवा | तेज, महिमा, प्रकटीकरण | माँ की दिव्य शक्ति का सर्वत्र दिखाई देना। |
| विराजे | सुशोभित होना, निवास करना | माँ का हर स्थान पर जीवंत रूप में उपस्थित होना। |
| जोतांवाली | अग्नि स्वरूप, ज्योति रूप | ज्ञान की ज्योति जो अज्ञान के अंधकार को मिटाती है। |
| बिगड़ी बनाई | संकट दूर करना | भक्तों के जीवन के कष्टों का निवारण करना। |
| नैया का किनारा | जीवन रूपी नाव को पार लगाने वाला | संसार रूपी भवसागर से मुक्ति (मोक्ष) प्रदान करना। |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
"तुही तू माँ, तुही तू माँ, तुही तू माँ..."
हे माता! इस चराचर जगत में केवल आपकी ही सत्ता है। मेरे भीतर और बाहर जो कुछ भी है, वह केवल आप ही हैं।
"हर तरफ है तेरा जलवा, हर जगह तू ही तू माँ..."
सृष्टि के प्रत्येक दृश्य में, सूर्य की किरणों में, फूलों की महक में और बहती हवाओं में केवल आपकी ही महिमा का प्रकाश फैल रहा है।
"पहाड़ों पे भी तू ही विराजे, गुफाओं में भी तू ही विराजे..."
आप ऊंचे पर्वतों (जैसे वैष्णो देवी) पर भी निवास करती हैं और शांत, एकांत गुफाओं में भी आपकी दिव्य चेतना का वास है।
"भक्तों के दिलों में भी तू ही विराजे..."
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आप केवल बाहरी स्थानों पर ही नहीं, बल्कि अपने सच्चे भक्तों के हृदय मंदिर में भी सदैव निवास करती हैं।
"तू ही दुर्गा, तू ही काली, तू ही शेरोंवाली माँ..."
आप ही दुष्टों का संहार करने वाली माँ दुर्गा और महाकाली हैं। सिंह पर सवारी करने वाली आप ही आदि शक्ति हैं।
"तू ही लक्ष्मी, तू ही सरस्वती, तू ही जोतांवाली माँ..."
आप ही ऐश्वर्य देने वाली महालक्ष्मी और ज्ञान की देवी महासरस्वती हैं। मंदिर में जलने वाली पावन ज्योति भी आपका ही स्वरूप है।
भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
इस भजन के भाव को और अधिक गहराई से समझने के लिए माँ दुर्गा के इस प्रसिद्ध श्लोक का स्मरण करना चाहिए:
"सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोऽस्तु ते॥"
अर्थ: हे नारायणी! आप सब प्रकार का मंगल प्रदान करने वाली मंगलमयी हैं। आप कल्याणकारिणी हैं, सब पुरुषार्थों (धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष) को सिद्ध करने वाली हैं। शरण में आए हुए भक्तों की रक्षा करने वाली तीन नेत्रों वाली गौरी हैं, आपको नमस्कार है।
इसी प्रकार, माँ की सर्वव्यापकता को दर्शाने वाला एक और मंत्र इस भजन के भाव से मेल खाता है:
"या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥"
अर्थ: जो देवी सभी प्राणियों में शक्ति के रूप में स्थित हैं, उन्हें बारंबार नमस्कार है, बारंबार नमस्कार है।
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| विवरण बिंदु | जानकारी |
|---|---|
| भजन का नाम | तुही तू माँ (Tuhi Tu Maa) |
| मुख्य देवी-देवता | माँ दुर्गा, आदि शक्ति जगदम्बा |
| प्रसिद्ध गायक | शिव भारद्वाज (Shiv Bhardwaj) |
| भजन की भाषा | हिंदी (पंजाबी लोक शैली के साथ) |
| मुख्य रस / भाव | भक्ति रस, समर्पण भाव (शरणागति) |
| उपयुक्त अवसर | नवरात्रि, माता का जगराता, चौकी, शुक्रवार व्रत पूजा |
| दार्शनिक संदेश | ईश्वर की सर्वव्यापकता (Omnipresence of Divine) |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
१. "तुही तू माँ" भजन के मुख्य गायक कौन हैं?
इस भजन के सबसे प्रसिद्ध और लोकप्रिय संस्करण को सुप्रसिद्ध भजन गायक शिव भारद्वाज (Shiv Bhardwaj) ने गाया है।
२. इस भजन का मुख्य आध्यात्मिक संदेश क्या है?
इस भजन का मुख्य संदेश यह है कि माँ भगवती सर्वव्यापी हैं। वे सृष्टि के कण-कण में, पहाड़ों, गुफाओं और प्रत्येक भक्त के हृदय में निवास करती हैं।
३. क्या इस भजन को नवरात्रि के दौरान गाया जा सकता है?
हाँ, नवरात्रि के पावन नौ दिनों में इस भजन का गायन और श्रवण अत्यंत फलदायी और शुभ माना जाता है।
४. इस भजन में माँ के किन-किन रूपों का वर्णन है?
इस भजन में माँ दुर्गा, माँ काली, माँ लक्ष्मी, माँ सरस्वती और जोतांवाली माता के रूपों का वर्णन किया गया है।
५. "हर तरफ है तेरा जलवा" पंक्ति का क्या अर्थ है?
इसका अर्थ है कि इस संसार में जो भी सुंदरता, जीवन और ऊर्जा दिखाई देती है, वह सब माँ भगवती की ही शक्ति का प्रकटीकरण है।
६. यह भजन किस श्रेणी के अंतर्गत आता है?
यह भजन "Devi Bhajan", "Devi Geet" और "Punjabi Devi Bhajan" की श्रेणी में आता है।
७. इस भजन को सुनने से क्या लाभ होते हैं?
इस भजन को सुनने से मानसिक तनाव दूर होता है, मन को शांति मिलती है और साधक के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
८. क्या इस भजन का पाठ दैनिक पूजा में किया जा सकता है?
हाँ, आप अपनी दैनिक सुबह या शाम की आरती के समय इस भजन को गाकर माँ की आराधना कर सकते हैं।
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह लेख "तुही तू माँ भजन इन हिंदी लिरिक्स" के प्रामाणिक स्रोतों, पारंपरिक संकीर्तन पद्धतियों और सनातन धर्म के ग्रंथों के आधार पर तैयार किया गया है। हमारी संपादकीय टीम ने यह सुनिश्चित किया है कि भजन के शब्द और उनका भावार्थ पूरी तरह से शुद्ध और त्रुटिहीन हो। यह सामग्री पूरी तरह से संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है, जो पाठकों को उच्च गुणवत्ता और प्रामाणिक आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- श्रीमद्देवीभागवत महापुराण - माँ आदि शक्ति की महिमा और सर्वव्यापकता का वर्णन।
- पारंपरिक उत्तर भारतीय और पंजाबी देवी जगराता भजन संग्रह।
- शिव भारद्वाज द्वारा गाए गए आधिकारिक भक्ति संगीत एल्बम।
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