"किसने सजाया तेरा भवन" (Kisne Sajaya Tera Bhawan) सनातन धर्म में मां भगवती दुर्गा की आराधना का एक अत्यंत लोकप्रिय, मधुर और हृदयस्पर्शी भजन है। विशेष रूप से शारदीय और चैत्र नवरात्रि के पावन पर्व पर इस भजन का गायन और श्रवण भक्तों के हृदय में असीम श्रद्धा, भक्ति और आनंद का संचार करता है। यह भजन देवी दुर्गा के दिव्य दरबार की अलौकिक सुंदरता, उनकी महिमा और उनके प्रति भक्तों के अनन्य समर्पण को दर्शाता है। इस भजन का मुख्य भाव 'उत्सव' और 'विनय' है, जहां भक्त मां के भव्य भवन की सुंदरता को देखकर विस्मित और आनंदित होता है। इस लेख में हम इस पावन भजन के संपूर्ण लिरिक्स, उसका गहरा आध्यात्मिक भावार्थ, पंक्ति-दर-पंक्ति व्याख्या, और इससे जुड़े महत्वपूर्ण धार्मिक प्रसंगों का सविस्तार वर्णन करेंगे। इस भजन के माध्यम से साधक अपनी चेतना को मां के चरणों में समर्पित कर देता है।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
॥ किसने सजाया तेरा भवन मैया बड़ा प्यारा सजा है ॥
(मुखड़ा)
किसने सजाया तेरा भवन मैया बड़ा प्यारा सजा है।
बड़ा प्यारा सजा है, बड़ा न्यारा सजा है॥
किसने सजाया तेरा भवन मैया बड़ा प्यारा सजा है...
(अंतरा - 1)
गंगा भी आई मैया यमुना भी आई,
चरण पखारने को पावन जल लाई।
किसने चढ़ाया पावन जल मैया बड़ा प्यारा सजा है...
किसने सजाया तेरा भवन मैया बड़ा प्यारा सजा है॥
(अंतरा - 2)
ब्रह्मा भी आये मैया विष्णु भी आये,
वेद पुराणों के मंत्र सुनाये।
किसने सुनाये पावन मंत्र मैया बड़ा प्यारा सजा है...
किसने सजाया तेरा भवन मैया बड़ा प्यारा सजा है॥
(अंतरा - 3)
चंदा भी आया मैया सूरज भी आया,
आरती उतारने को थाल सजाया।
किसने सजाया आरती का थाल मैया बड़ा प्यारा सजा है...
किसने सजाया तेरा भवन मैया बड़ा प्यारा सजा है॥
(अंतरा - 4)
भक्त भी आये मैया बालक भी आये,
चरणों में आकर शीश झुकाये।
किसने चढ़ाया श्रद्धा का फूल मैया बड़ा प्यारा सजा है...
किसने सजाया तेरा भवन मैया बड़ा प्यारा सजा है॥
(अंतरा - 5)
लाल चोला सोहे मैया हाथ में त्रिशूल है,
मैया के चरणों में अर्पित हर फूल है।
किसने चढ़ाया लाल चोला मैया बड़ा प्यारा सजा है...
किसने सजाया तेरा भवन मैया बड़ा प्यारा सजा है॥
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
यह भजन "किसने सजाया तेरा भवन" मां दुर्गा के दिव्य स्वरूप और उनके अलौकिक दरबार की महिमा का गुणगान करता है। इसका सरल अर्थ यह है कि मां का भवन इतना सुंदर और भव्य सजा हुआ है कि भक्त विस्मित होकर पूछता है कि इस पावन भवन को किसने सजाया है? यह सजावट केवल भौतिक नहीं है, बल्कि यह आध्यात्मिक और ब्रह्मांडीय है।
भजन के प्रथम भाग में गंगा और यमुना जैसी पवित्र नदियों के आगमन का वर्णन है, जो मां के चरणों को धोने के लिए अपना पवित्र जल लेकर आई हैं। यह इस बात का प्रतीक है कि संपूर्ण प्रकृति और उसके पावन तत्व मां की सेवा में सदैव तत्पर रहते हैं। दूसरे भाग में त्रिदेवों (ब्रह्मा और विष्णु) के आगमन का उल्लेख है, जो वेदों के मंत्रों का उच्चारण कर मां की स्तुति कर रहे हैं। यह दर्शाता है कि मां आदि शक्ति हैं, जिनकी आराधना स्वयं सृष्टि के रचयिता और पालनकर्ता भी करते हैं।
तीसरे भाग में सूर्य और चंद्रमा के माध्यम से मां की महाआरती का चित्रण है, जो यह स्पष्ट करता है कि संपूर्ण ब्रह्मांड मां की ही ज्योति से प्रकाशित है। अंतिम भाग में भक्तों और बालकों के समर्पण का वर्णन है, जो मां के चरणों में श्रद्धा के पुष्प अर्पित कर रहे हैं। संपूर्ण भजन का भावार्थ यह है कि मां का दरबार वह परम स्थान है जहां प्रकृति, देवता, मनुष्य और संपूर्ण ब्रह्मांड एक होकर मां की आराधना में लीन हो जाते हैं।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
यह भजन केवल एक गीत नहीं है, बल्कि यह मां दुर्गा की आराधना का एक शक्तिशाली माध्यम है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
- ब्रह्मांडीय आराधना का चित्रण: इस भजन में दर्शाया गया है कि किस प्रकार सूर्य, चंद्रमा, नदियां और देवता सभी मिलकर मां की सेवा और आराधना करते हैं।
- भक्ति और समर्पण का भाव: भजन की प्रत्येक पंक्ति भक्त के मन में मां के प्रति गहरी श्रद्धा और समर्पण की भावना जाग्रत करती है।
- सरलता और मधुरता: इसकी भाषा अत्यंत सरल और सुगम है, जिससे कोई भी सामान्य भक्त इसे आसानी से गा सकता है और मां की भक्ति में लीन हो सकता है।
- नवरात्रि का विशेष महत्व: नवरात्रि के दिनों में इस भजन को सुनने और गाने से घर का वातावरण अत्यंत पवित्र और सकारात्मक हो जाता है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
यद्यपि मां की आराधना किसी भी समय की जा सकती है, परंतु इस भजन के गायन और श्रवण के लिए कुछ विशेष समय और विधियां अत्यंत फलदायी मानी गई हैं:
सर्वोत्तम समय: इस भजन का गायन सुबह की पूजा के समय या संध्या आरती के समय करना अत्यंत शुभ माना जाता है। विशेष रूप से नवरात्रि के नौ दिनों में प्रतिदिन इस भजन का श्रवण करने से मानसिक शांति और देवी की कृपा प्राप्त होती है।
गायन की विधि:
- सर्वप्रथम स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- मां दुर्गा की प्रतिमा या चित्र के सम्मुख घी का दीपक और धूप जलाएं।
- मां को लाल फूल, कुमकुम और अक्षत अर्पित करें।
- पूर्ण श्रद्धा और शांत मन से इस भजन का गायन करें। यदि संभव हो तो परिवार के सभी सदस्यों के साथ मिलकर संकीर्तन के रूप में इसे गाएं।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
यह भजन मुख्य रूप से मां दुर्गा (आदि शक्ति) को समर्पित है। सनातन धर्म में मां दुर्गा को शक्ति, करुणा, और दुष्टों का संहार करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। इस भजन में मां के ममतामयी और भव्य रूप का वर्णन है। इसके साथ ही, भजन में त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु) और प्रकृति के देवताओं (सूर्य, चंद्र, गंगा, यमुना) का भी उल्लेख है, जो मां की सर्वोच्च सत्ता को स्वीकार करते हुए उनकी आराधना करते हैं।
यह भजन पारंपरिक लोक भक्ति शैली में रचा गया है, जिसका उद्देश्य जन-साधारण को अत्यंत सरल शब्दों में मां की महिमा से जोड़ना है। अनेक संतों और गायकों ने समय-समय पर इसे गाकर जन-जन तक पहुंचाया है।
भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background
"किसने सजाया तेरा भवन" भजन की पृष्ठभूमि पारंपरिक देवी जागरण और संकीर्तन से जुड़ी है। भारत के उत्तरी और पश्चिमी राज्यों में माता के जागरण (चौकी) की एक समृद्ध परंपरा रही है। इन जागरणों में भक्तों को मां के साक्षात दरबार का अनुभव कराने के लिए इस प्रकार के भजनों की रचना की गई। इस भजन की रचना का मुख्य उद्देश्य भक्तों के मन में यह भाव जगाना है कि वे साक्षात मां के दिव्य भवन में उपस्थित हैं और वहां चल रहे अलौकिक उत्सव का हिस्सा हैं।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
इस भजन की भाषा सरल और सुबोध खड़ी बोली हिंदी है, जिसमें ब्रजभाषा और लोकगीतों की मिठास का मिश्रण है। इसकी काव्य शैली अत्यंत प्रवाहमयी और गेय (गाने योग्य) है। इसमें अनुप्रास और रूपक अलंकारों का सुंदर प्रयोग हुआ है। "बड़ा प्यारा सजा है, बड़ा न्यारा सजा है" जैसी पंक्तियां भजन में एक सुंदर लय और नाद-सौंदर्य उत्पन्न करती हैं, जिससे श्रोता मंत्रमुग्ध हो जाता है।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
यह भजन हमें कई महत्वपूर्ण आध्यात्मिक और व्यावहारिक सीख देता है:
- अहंकार का त्याग: जब ब्रह्मा और विष्णु जैसे महान देवता भी मां के चरणों में शीश झुकाते हैं, तो यह हमें सिखाता है कि मनुष्य को अपने ज्ञान और शक्ति का अहंकार छोड़कर ईश्वर के प्रति समर्पित होना चाहिए।
- प्रकृति के प्रति सम्मान: गंगा, यमुना, सूर्य और चंद्रमा का मां की सेवा में उपस्थित होना यह दर्शाता है कि प्रकृति का प्रत्येक तत्व ईश्वर की ही अभिव्यक्ति है, अतः हमें प्रकृति का सम्मान और संरक्षण करना चाहिए।
- सामूहिकता की भावना: भजन में भक्तों और बालकों के एक साथ आने का वर्णन है, जो हमें समाज में एकता, समरसता और मिलजुलकर रहने का संदेश देता है।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / वाक्यांश | सरल हिंदी अर्थ | आध्यात्मिक संदर्भ |
|---|---|---|
| भवन | मंदिर / दरबार | मां दुर्गा का दिव्य निवास स्थान या हृदय रूपी मंदिर। |
| न्यारा | अद्भुत / सबसे अलग | मां के दरबार की अलौकिक और अद्वितीय सुंदरता। |
| चरण पखारने | पैर धोना | अत्यंत आदर और सेवा भाव से ईश्वर के चरणों का प्रक्षालन करना। |
| चोला | वस्त्र / पोशाक | मां दुर्गा का पारंपरिक लाल रंग का दिव्य वस्त्र। |
| शीश झुकाना | प्रणाम करना | पूर्ण समर्पण और विनम्रता का प्रतीक। |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
"किसने सजाया तेरा भवन मैया बड़ा प्यारा सजा है..."
भक्त मां के मंदिर की अलौकिक सुंदरता को देखकर भाव-विभोर हो जाता है और पूछता है कि हे मां! आपके इस भव्य भवन को किसने इतनी सुंदरता से सजाया है? यह अत्यंत मनमोहक और अद्भुत लग रहा है।
"गंगा भी आई मैया यमुना भी आई, चरण पखारने को पावन जल लाई..."
भारत की सबसे पवित्र नदियां गंगा और यमुना स्वयं मां के चरणों को धोने के लिए अपना पावन जल लेकर उपस्थित हुई हैं। यह दर्शाता है कि समस्त तीर्थ और पवित्रताएं मां के चरणों में ही समाहित हैं।
"ब्रह्मा भी आये मैया विष्णु भी आये, वेद पुराणों के मंत्र सुनाये..."
सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी और पालनकर्ता भगवान विष्णु भी मां के दरबार में उपस्थित हैं और वेदों तथा पुराणों के दिव्य मंत्रों का उच्चारण कर मां की स्तुति कर रहे हैं।
"चंदा भी आया मैया सूरज भी आया, आरती उतारने को थाल सजाया..."
ब्रह्मांड के दो प्रमुख तेजपुंज - सूर्य और चंद्रमा - मां की आरती उतारने के लिए थाल सजाकर आए हैं। यह दर्शाता है कि संपूर्ण सृष्टि की ज्योति मां आदि शक्ति की ही देन है।
"भक्त भी आये मैया बालक भी आये, चरणों में आकर शीश झुकाये..."
मां के सभी भक्त और अबोध बालक उनके चरणों में आकर अपना शीश झुका रहे हैं और अपनी श्रद्धा के पुष्प अर्पित कर रहे हैं। मां अपने सभी बच्चों पर समान रूप से कृपा बरसाती हैं।
भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
मां दुर्गा की आराधना करते समय इस भजन के साथ-साथ निम्नलिखित मंत्रों और श्लोकों का संपुट लगाना अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है। आप मां की विशेष कृपा के लिए गायत्री मंत्र और सुख-समृद्धि के लिए लक्ष्मी गायत्री मंत्र का भी जप कर सकते हैं:
॥ देवी मंत्र ॥
सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥
अर्थ: हे नारायणी! आप सब मंगलों में मंगल करने वाली, कल्याणदायिनी, सब पुरुषार्थों को सिद्ध करने वाली, शरणागतवत्सला, तीन नेत्रों वाली गौरी हैं, आपको नमस्कार है।
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| भजन का नाम | किसने सजाया तेरा भवन |
| मुख्य देवी/देवता | मां दुर्गा (आदि शक्ति) |
| मुख्य भाव | भक्ति, समर्पण, उत्सव, विनय |
| उपयुक्त अवसर | नवरात्रि, दुर्गा पूजा, माता की चौकी, जागरण, दैनिक संध्या आरती |
| भाषा | खड़ी बोली हिंदी (भक्ति रस प्रधान) |
| संबंधित श्रेणियां | देवी भजन, नवरात्रि विशेष |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह लेख "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" के अंतर्गत आता है। इस भजन के पाठ और भावार्थ को विभिन्न प्रामाणिक स्रोतों, पारंपरिक संकीर्तन पद्धतियों और सनातन धर्म के ग्रंथों के आधार पर संकलित और विश्लेषित किया गया है। हमारा उद्देश्य पाठकों तक शुद्ध, त्रुटिहीन और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध सामग्री पहुंचाना है ताकि वे अपनी साधना को और अधिक प्रगाढ़ बना सकें।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- श्रीमद्देवीभागवत महापुराण - मां आदि शक्ति की महिमा और उनके दिव्य स्वरूप का वर्णन।
- पारंपरिक भजन संग्रह एवं संकीर्तन परंपरा।
- सनातन धर्म के प्रमुख त्यौहार और उनकी पूजा पद्धतियां।
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