धरती गगन में होती है तेरी जय जैकार हो मैया - माँ दुर्गा का पावन भजन
सनातन संस्कृति और हिन्दू धर्म में आदिशक्ति माँ दुर्गा की उपासना का अनंत महत्व है। 'धरती गगन में होती है तेरी जय जैकार हो मैया' यह अत्यंत ही लोकप्रिय, कर्णप्रिय और भक्ति रस से ओत-प्रोत भजन है जो संपूर्ण ब्रह्मांड में भगवती जगदम्बा की सर्वव्यापकता, करुणा और महिमा का गुणगान करता है। जब साधक या भक्त श्रद्धा, विश्वास और प्रेम भाव के साथ इस भजन का गायन या श्रवण करता है, तो उसके अंतःकरण में व्याप्त समस्त प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा, भय, अज्ञानता और मानसिक अशांति का नाश होता है। नवरात्रि के पावन दिनों में, माता के जागरण में, कन्या पूजन के समय या किसी भी विशेष अनुष्ठान और दैनिक पूजा-आराधना में इस भजन का विशेष स्थान है। यह भजन हमें स्मरण कराता है कि यह संपूर्ण चराचर जगत, धरती से लेकर गगन तक, उसी महाशक्ति की प्रेरणा और संचालन से चल रहा है जो समस्त सृष्टि की पालनहारी और दुःख-हर्त्री हैं।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
धरती गगन में होती है तेरी जय जैकार हो मैया,
सारे जग के पालनहारी, तेरी जय जैकार हो मैया।
तू ही दुर्गा, तू ही काली, तू ही है शेरों वाली,
भक्तों की तू बिगड़ी बनाती, तू ही है दुख हरने वाली,
तेरी महिमा अपरंपार, तेरी जय जैकार हो मैया।
धरती गगन में होती है तेरी जय जैकार हो मैया...
अंधियारे में ज्योति बनकर, तू ही राह दिखाती है,
भटके हुए राही को मैया, तू ही पार लगाती है,
तेरी करुणा का है विस्तार, तेरी जय जैकार हो मैया।
धरती गगन में होती है तेरी जय जैकार हो मैया...
घर-घर में तेरी जोत जगे, सब तेरा नाम पुकारें,
चरणों में तेरे झुककर मैया, दुखिया जीवन संवारें,
तू है सबकी तारनहार, तेरी जय जैकार हो मैया।
धरती गगन में होती है तेरी जय जैकार हो मैया...
जो भी दिल से शरण तिहारी, मैया जो आ जाता है,
उसकी हर एक मनोकामना, झोली भर जाता है,
तेरा ममता भरा संसार, तेरी जय जैकार हो मैया।
धरती गगन में होती है तेरी जय जैकार हो मैया,
सारे जग के पालनहारी, तेरी जय जैकार हो मैया।
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
इस पावन भजन की प्रत्येक पंक्ति में माँ दुर्गा के प्रति अनन्य समर्पण और उनकी सर्वशक्तिमत्ता का अद्भुत वर्णन किया गया है। भजन की शुरुआत इस सार्वभौमिक सत्य से होती है कि इस पृथ्वी से लेकर अनंत आकाश तक केवल माँ जगदम्बा की ही जय-जयकार गूंजती है। वे इस संपूर्ण ब्रह्मांड की पालनहारी हैं, जो जीव-मात्र का भरण-पोषण करती हैं।
आगे की पंक्तियों में भक्त माता के विभिन्न स्वरूपों का स्मरण करते हुए कहता है कि हे मैया! तू ही आदि शक्ति दुर्गा है, तू ही संहारक और भक्तों के भय को हरने वाली महाकाली है, और तू ही सिंह पर सवार होकर दुष्टों का नाश करने वाली शेरोंवाली माता है। संसार के कष्टों से घिरे हुए मनुष्य की बिगड़ी हुई किस्मत को बनाने वाली और उसके दुखों का निवारण करने वाली केवल तुम्हारी ही कृपा है। तुम्हारी महिमा अपरंपार है, जिसे शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता।
अज्ञान रूपी अंधकार में डूबे हुए संसार में माँ ही ज्ञान की ज्योति बनकर सही मार्ग दिखाती है। जीवन की आंधी और संघर्षों में भटके हुए राही को अपनी करुणा की छांव में लेकर भवसागर से पार लगाती है। अंत में भक्त यह निवेदन करता है कि जो भी व्यक्ति सच्चे मन और निष्कलंक भाव से माता के चरणों में शरण लेता है, माता उसकी सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करती हैं और उसकी झोली खुशियों से भर देती हैं। यह भजन साधक को यह सिखाता है कि जीवन में कितनी भी विपत्तियाँ क्यों न आएं, माँ जगदम्बा की शरण में जाने मात्र से सारे कष्ट दूर हो जाते हैं।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
यह भजन सनातन भक्तों के बीच अत्यधिक आदरणीय है क्योंकि इसमें भक्ति (Devotion), शरणागति (Surrender), और वात्सल्य (Motherly Affection) का त्रिवेणी संगम देखने को मिलता है। इस भजन की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
- सर्वव्यापकता का बोध: भजन यह स्थापित करता है कि ईश्वर या शक्ति किसी एक स्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि धरती और गगन दोनों में उसका वास है।
- भय मुक्ति: माँ को 'दुख हरने वाली' और 'अंधियारे में ज्योति' कहकर संबोधित किया गया है, जो साधक के मन से भय को दूर करता है।
- सुलभता एवं लयबद्धता: इसकी सरल शब्दावली और मधुर लय इसे किसी भी भजन संध्या, नवरात्रि उत्सव या दैनिक पूजा में आसानी से गाने योग्य बनाती है।
- अन्य समान शक्ति उपासना के लिए आप दुर्गा सप्तशती पाठ विधि और माँ दुर्गा के 108 नाम का भी अध्ययन कर सकते हैं जो आपकी साधना को और अधिक पुष्ट करेंगे।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
भक्ति संगीत के लिए भाव और पवित्रता का होना सबसे आवश्यक है, फिर भी कुछ पारंपरिक नियमों का पालन करने से साधना का फल कई गुना बढ़ जाता है:
- उचित समय: प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त में या संध्या बेला में (दीपक प्रज्वलित करने के पश्चात) इस भजन का श्रवण या गायन अत्यंत फलदायी माना जाता है।
- नवरात्रि के विशेष अवसर: शारदीय और चैत्र नवरात्रि के नौ दिनों में माँ दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की आराधना करते समय इस भजन का गान करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
- पूजा स्थल पर: अपने घर के मंदिर में माता की प्रतिमा या ज्योत के समक्ष बैठकर शांत चित्त से इस भजन को गुनगुनाना मानसिक शांति प्रदान करता है।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
इस भजन की केंद्र बिंदु हैं आदिशक्ति माँ जगदम्बा, जिन्हें सनातन धर्म में ब्रह्मांड की मूल ऊर्जा (Energy of Universe) माना गया है। हिन्दू दर्शन के अनुसार, भगवान शिव की शक्ति के रूप में देवी दुर्गा ही इस सृष्टि की रचना, पालन और संहार की अधिष्ठात्री हैं। पुराणों में वर्णित कथाओं के अनुसार, जब-जब पृथ्वी पर अधर्म और पाप बढ़ा है, तब-तब महाशक्ति ने विभिन्न रूपों (दुर्गा, काली, लक्ष्मी, सरस्वती) में अवतार लेकर साधकों और देवताओं की रक्षा की है।
भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background
इस प्रकार के लोक-प्रचलित भजन पारंपरिक भक्ति परंपरा (Traditional Bhakti Tradition) का हिस्सा रहे हैं, जिन्हें पीढ़ियों से संतों, लोक गायकों और श्रद्धालुओं द्वारा आगे बढ़ाया गया है। इनका कोई एक निश्चित रचयिता ज्ञात नहीं होना इस बात का प्रमाण है कि ये जन-जन के कंठ में बस चुके हैं और हर भक्त ने अपनी श्रद्धा के अनुसार इसके शब्दों को आत्मसात किया है। यह मौखिक और सांगीतिक परंपरा भारतीय सनातन संस्कृति की जीवंतता का प्रतीक है।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
इस भजन की भाषा अत्यंत सरल, सुबोध और मधुर हिंदी (तद्भव युक्त ब्रज-अवधि मिश्रित लोक शैली) है। इसमें अनुप्रास और यमक अलंकारों का सहज प्रयोग हुआ है जैसे "जय जैकार हो मैया", "पालनहारी", और "शेरोंवाली"। शब्दों की ऐसी रचना है जो किसी भी आम श्रोता या बच्चे के मन में भी आसानी से बैठ जाती है और गानों के दौरान एक समां बांध देती है.
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
यह भजन केवल शब्दों का समूह नहीं है बल्कि जीवन जीने का एक आध्यात्मिक दर्शन है:
- अटूट विश्वास: कठिन समय में भी ईश्वर या माता की शक्ति पर भरोसा रखना चाहिए।
- नम्रता और शरणागति: अहंकार का त्याग करके माँ के चरणों में अपनी झोली फैलाना ही सच्चा समर्पण है।
- सकारात्मकता का संचार: जीवन के अंधकारमय क्षणों में भी आशा की ज्योति को बुझने नहीं देना चाहिए क्योंकि अंततः सत्य और प्रकाश की ही जीत होती है।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / वाक्यांश | सरल हिंदी अर्थ | संधर्भित प्रसंग |
|---|---|---|
| पालनहारी | पोषण करने वाली, रक्षा करने वाली | संपूर्ण जगत का ध्यान रखने वाली माँ |
| अपरंपार | जिसकी कोई सीमा न हो, असीम | माता की महिमा और शक्ति की विशालता |
| तारनहार | भवसागर से पार लगाने वाली | भक्तों को दुखों से मुक्ति दिलाने वाली |
| मनोकामना | मन की इच्छा या मुराद | भक्तों द्वारा माँ से मांगी जाने वाली प्रार्थना |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
"धरती गगन में होती है तेरी जय जैकार हो मैया..."
इसका अर्थ है कि हे माँ! तुम्हारी महिमा केवल पृथ्वी तक सीमित नहीं है, बल्कि इस भूमंडल से लेकर आकाश और संपूर्ण ब्रह्मांड में तुम्हारी ही जय-जयकार हो रही है। तुम ही इस समस्त सृष्टि की सृजनकर्ता और पालनकर्ता हो।
"तू ही दुर्गा, तू ही काली, तू ही है शेरोंवाली..."
यहाँ भक्त माता के विभिन्न रूपों को एक ही शक्ति का विस्तार मानता है। संकट के समय जो वीरता का प्रतीक है वह शेरोंवाली दुर्गा है, और जो दुष्टों का नाश करती है वह महाकाली है।
"अंधियारे में ज्योति बनकर, तू ही राह दिखाती है..."
जब मनुष्य जीवन में अज्ञान, भ्रम या निराशा के अंधकार से घिर जाता है, तब माता ज्ञान का दीपक बनकर उसे सही मार्ग दिखाती हैं और भटके हुए जीवन को सही दिशा प्रदान करती हैं.
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
माँ दुर्गा की उपासना के साथ निम्नलिखित पावन मंत्र का स्मरण करना अत्यंत फलदायी होता है:
ॐ सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यंबके గౌरी नारायणि नमोऽस्तु ते॥
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| भजन का नाम | धरती गगन में होती है तेरी जय जैकार हो मैया |
|---|---|
| आराध्य देवी | माँ दुर्गा / आदिशक्ति |
| भाषा | सरल हिंदी / लोक भाषा |
| मुख्य भाव | भक्ति, समर्पण, करुणा और शरणागति |
| उपयुक्त अवसर | नवरात्रि, जागरण, माता की चौकी, दैनिक पूजा |
| श्रेणी | दुर्गा भजन / देवी गीत |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
यह पावन भजन सनातन धर्म की सर्वोच्च शक्ति, आदिशक्ति जगत जननी माँ दुर्गा को समर्पित है।
इस भजन को नवरात्रि, माता के जागरण, कन्या पूजन, दुर्गा पूजा तथा किसी भी मंगलवार या शुक्रवार की संध्या आरती के समय गाया जा सकता है।
हाँ, प्रातःकाल या संध्याकाल में घर के मंदिर में दीपक प्रज्वलित करने के पश्चात इस भजन का गायन या श्रवण करने से मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।
माता दुर्गा की सच्ची भक्ति से भक्तों को मानसिक बल, भय से मुक्ति, संकटों से रक्षा तथा अंततः आध्यात्मिक शांति की प्राप्ति होती है।
इस पृष्ठ पर दिए गए संपूर्ण लिरिक्स को पढ़कर और इसकी सरल लय को समझकर आप इसे आसानी से याद कर सकते हैं।
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह सामग्री Bhaktilok.in के उच्च गुणवत्ता मानकों के तहत सनातन धर्म की लोक परंपराओं, भक्ति साहित्य और धार्मिक ग्रंथों के अध्ययन के आधार पर तैयार की गई है। इस लेख का उद्देश्य पाठकों को माँ दुर्गा के इस सुंदर भजन के सही बोल, उसका भावार्थ और उसकी आध्यात्मिक महत्ता से अवगत कराना है। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- पारंपरिक सनातन भजन एवं लोकगाथा परंपरा
- श्रीमद्देवीभागवत पुराण एवं दुर्गा सप्तशती संदर्भ
- भक्ति संगीत एवं सांस्कृतिक संकलन
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