पावन देवस्थान एवं तीर्थ दर्शन

श्री सुकलेश्वर महादेव मंदिर, गुवाहाटी (असम) - ब्रह्मपुत्र तट, इतिहास, दर्शन समय एवं संपूर्ण यात्रा गाइड

9 दर्शनार्थी
गुवाहाटी, असम
प्रकाशित: 17 Oct 2026
दर्शन व इतिहास पढ़ें
मुख्य आराध्य देव
भगवान शिव
दर्शन समय सारिणी
सुबह 05:00 बजे से रात्रि 10:00 बजे तक
नित्य आरती समय
मंगला आरती: 05:30 AM | भोग आरती: 12:00 PM | संध्या आरती: 07:00 PM
स्थान / नगर
गुवाहाटी, असम
आराध्य देव
भगवान शिव
दर्शन समय
सुबह 05:00 बजे से रात्रि 10:00 बजे तक
आरती समय
मंगला आरती: 05:30 AM | भोग आरती: 12:00 PM | संध्या आरती: 07:00 PM
स्थान / धाम
सुकलेश्वर घाट, पान बाजार, गुवाहाटी, असम 781001
अक्षर आकार:
पठन थीम:

ब्रह्मपुत्र नदी के शांत और विशाल तट पर स्थित श्री सुकलेश्वर महादेव मंदिर गुवाहाटी के सबसे महत्वपूर्ण और प्राचीन धार्मिक स्थलों में से एक है। यह मंदिर न केवल भगवान शिव की भक्ति का केंद्र है, बल्कि असम की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का एक जीवंत प्रमाण भी है।

मंदिर का परिचय एवं पौराणिक इतिहास (History & Legend)

श्री सुकलेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास सदियों पुराना है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस स्थान का नाम 'सुकलेश्वर' ऋषि शुकदेव से जुड़ा है, जिन्होंने यहाँ कठोर तपस्या की थी। ब्रह्मपुत्र नदी के तट पर स्थित होने के कारण, यह स्थान अत्यंत पवित्र माना जाता है। ऐतिहासिक रूप से, इस मंदिर का पुनरुद्धार 18वीं शताब्दी में अहोम राजाओं के शासनकाल के दौरान किया गया था। मंदिर की वास्तुकला और यहाँ की ऊर्जा भक्तों को एक अलग ही आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करती है। कहा जाता है कि इस मंदिर में दर्शन करने से मनुष्य के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। ब्रह्मपुत्र की लहरों के बीच स्थित यह मंदिर भक्तों के लिए शांति का एक प्रमुख स्रोत है।

मंदिर की स्थापत्य कला एवं गर्भगृह संरचना (Architecture & Structure)

सुकलेश्वर मंदिर की वास्तुकला असमिया शैली और पारंपरिक हिंदू मंदिर वास्तुकला का एक अद्भुत मिश्रण है। मंदिर का गर्भगृह अत्यंत प्राचीन है, जहाँ भगवान शिव का शिवलिंग स्थापित है। मंदिर के चारों ओर की नक्काशी और पत्थर के खंभे उस समय के कुशल कारीगरों की कला का परिचय देते हैं। मंदिर का शिखर ऊँचा और भव्य है, जो दूर से ही भक्तों को आकर्षित करता है। मंदिर परिसर में अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियाँ भी स्थापित हैं, जो पूरे वातावरण को दिव्य बनाती हैं।

दर्शन, आरती एवं पूजा का समय (Darshan & Aarti Timings)

मंदिर के कपाट प्रतिदिन सुबह 05:00 बजे खुलते हैं और रात्रि 10:00 बजे तक दर्शन के लिए खुले रहते हैं। आरती का समय निम्नलिखित है:

  • मंगला आरती: 05:30 AM
  • भोग आरती: 12:00 PM
  • संध्या आरती: 07:00 PM

प्रमुख त्यौहार एवं उत्सव (Festivals & Special Celebrations)

महाशिवरात्रि यहाँ का सबसे प्रमुख त्यौहार है। इस दिन मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। इसके अलावा, सावन के महीने में यहाँ विशेष पूजा और अभिषेक का आयोजन किया जाता है। असमिया नव वर्ष (बिहू) के दौरान भी मंदिर में विशेष सजावट की जाती है।

मंदिर तक कैसे पहुंचे (How to Reach - Air, Train, Road)

वायु मार्ग: गुवाहाटी का लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा निकटतम है। यहाँ से टैक्सी द्वारा मंदिर तक पहुँचा जा सकता है।

रेल मार्ग: गुवाहाटी रेलवे स्टेशन मुख्य शहर में स्थित है, जहाँ से मंदिर की दूरी मात्र 2-3 किलोमीटर है।

सड़क मार्ग: गुवाहाटी देश के सभी प्रमुख शहरों से सड़क मार्ग द्वारा अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।

यात्रियों के लिए उपयोगी सुझाव (Best Season, Dress Code, Accommodation)

मंदिर दर्शन के लिए अक्टूबर से मार्च का समय सबसे अच्छा है। भक्तों को शालीन वस्त्र धारण करने चाहिए। मंदिर के आसपास कई होटल और धर्मशालाएं उपलब्ध हैं।

आस-पास के अन्य प्रमुख दर्शनीय स्थल (Nearby Places to Visit)

उमानंद मंदिर, कामाख्या देवी मंदिर, और ब्रह्मपुत्र रिवर क्रूज।

तीर्थ यात्रा विधि

मंदिर दर्शन व पूजा के 4 सरल चरण

प्रभु के अलौकिक दर्शन का पूर्ण फल प्राप्त करने हेतु आवश्यक नियम

१. शुद्ध भाव व स्नान

दर्शन से पूर्व पवित्र भाव से स्नान कर सात्विक वस्त्र धारण करें।

२. आरती समय ज्ञान

मंगला, भोग अथवा शयन आरती के समय उपस्थित होकर दर्शन करें।

३. नैवेद्य व अर्पण

तुलसी, पुष्प, धूप, दीप व नैवेद्य श्रद्धापूर्वक प्रभु चरणों में अर्पित करें।

४. परिक्रमा व ध्यान

गर्भगृह की विधिवत परिक्रमा कर शांत भाव से प्रभु का ध्यान करें।

संदर्भ-आधारित एवं संपादकीय रूप से तैयार सामग्री

भक्तिलोक पर उपलब्ध सभी मंदिर दर्शन समय, आरती सारिणी व इतिहास की जानकारी संबंधित देवस्थानम ट्रस्ट, प्रमाणिक धार्मिक पुस्तकों एवं तीर्थ यात्रियों के अनुभवों के आधार पर निरंतर अद्यतन की जाती है।

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