पावन देवस्थान एवं तीर्थ दर्शन

मां कामाख्या शक्तिपीठ मंदिर, गुवाहाटी (असम)

86 दर्शनार्थी
गुवाहाटी, असम
प्रकाशित: 30 Sep 2026
दर्शन व इतिहास पढ़ें
मुख्य आराध्य देव
माता कामाख्या (महाशक्ति)
दर्शन समय सारिणी
सुबह 08:00 बजे से दोपहर 01:00 बजे तक और दोपहर 02:30 बजे से शाम 05:30 बजे तक
नित्य आरती समय
मंगला आरती: 05:30 AM | भोग आरती: 12:00 PM | संध्या आरती: 07:00 PM
स्थान / नगर
गुवाहाटी, असम
आराध्य देव
माता कामाख्या (महाशक्ति)
दर्शन समय
सुबह 08:00 बजे से दोपहर 01:00 बजे तक और दोपहर 02:30 बजे से शाम 05:30 बजे तक
आरती समय
मंगला आरती: 05:30 AM | भोग आरती: 12:00 PM | संध्या आरती: 07:00 PM
स्थान / धाम
Kamakhya Temple, Nilachal Hill, Guwahati, Assam 781010
अक्षर आकार:
पठन थीम:

माता कामाख्या (महाशक्ति)

मां कामाख्या शक्तिपीठ: एक परिचय

गुवाहाटी के नीलांचल पर्वत पर स्थित मां कामाख्या मंदिर 51 शक्तिपीठों में सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। यह मंदिर न केवल अपनी धार्मिक महत्ता के लिए, बल्कि अपनी अनूठी वास्तुकला और तंत्र साधना के केंद्र के रूप में विश्वभर में प्रसिद्ध है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान शिव सती के पार्थिव शरीर को लेकर तांडव कर रहे थे, तब भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के 51 टुकड़े किए थे। माना जाता है कि यहां माता सती की 'योनि' गिरी थी, जिसके कारण यह स्थान स्त्री शक्ति और सृजन का प्रतीक बन गया।

ऐतिहासिक और पौराणिक पृष्ठभूमि

कामाख्या मंदिर का उल्लेख कालिका पुराण और योगिनी तंत्र जैसे प्राचीन ग्रंथों में मिलता है। मंदिर का वर्तमान स्वरूप 16वीं शताब्दी में कूच बिहार के राजाओं द्वारा पुनर्निर्मित किया गया था। यह मंदिर सदियों से तांत्रिकों और साधकों के लिए साधना का मुख्य केंद्र रहा है। मंदिर के गर्भगृह में कोई मूर्ति नहीं है, बल्कि एक प्राकृतिक रूप से बनी योनि के आकार की शिला है, जिससे निरंतर जलधारा प्रवाहित होती रहती है।

वास्तुकला की भव्यता

कामाख्या मंदिर की वास्तुकला 'नीलांचल शैली' का उत्कृष्ट उदाहरण है, जो नागर और मुगल वास्तुकला का एक अद्भुत मिश्रण है। मंदिर का मुख्य शिखर मधुमक्खी के छत्ते के आकार का है, जिस पर सुंदर नक्काशी की गई है। मंदिर परिसर में दस महाविद्याओं के छोटे-छोटे मंदिर भी स्थित हैं, जो इसे एक पूर्ण शक्ति केंद्र बनाते हैं।

दस महाविद्याएं: काली, तारा, षोडशी, भुवनेश्वरी, भैरवी, छिन्नमस्ता, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला।

प्रमुख उत्सव: अंबुवाची मेला

अंबुवाची मेला कामाख्या मंदिर का सबसे महत्वपूर्ण उत्सव है। माना जाता है कि इस दौरान माता कामाख्या रजस्वला होती हैं। इस अवधि में मंदिर के कपाट तीन दिनों के लिए बंद कर दिए जाते हैं और चौथे दिन विशेष अनुष्ठानों के बाद भक्तों के लिए खोले जाते हैं। यह समय आध्यात्मिक ऊर्जा के संचय के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।

दर्शन और यात्रा संबंधी जानकारी

विषय विवरण
दर्शन व्यवस्था सामान्य और विशेष दर्शन (VIP) सुविधा उपलब्ध।
निकटतम हवाई अड्डा लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (20 किमी)।
आवास मंदिर के पास धर्मशालाएं और होटल उपलब्ध।
भोजन मंदिर ट्रस्ट द्वारा संचालित निःशुल्क अन्नक्षेत्र।
तीर्थ यात्रा विधि

मंदिर दर्शन व पूजा के 4 सरल चरण

प्रभु के अलौकिक दर्शन का पूर्ण फल प्राप्त करने हेतु आवश्यक नियम

१. शुद्ध भाव व स्नान

दर्शन से पूर्व पवित्र भाव से स्नान कर सात्विक वस्त्र धारण करें।

२. आरती समय ज्ञान

मंगला, भोग अथवा शयन आरती के समय उपस्थित होकर दर्शन करें।

३. नैवेद्य व अर्पण

तुलसी, पुष्प, धूप, दीप व नैवेद्य श्रद्धापूर्वक प्रभु चरणों में अर्पित करें।

४. परिक्रमा व ध्यान

गर्भगृह की विधिवत परिक्रमा कर शांत भाव से प्रभु का ध्यान करें।

संदर्भ-आधारित एवं संपादकीय रूप से तैयार सामग्री

भक्तिलोक पर उपलब्ध सभी मंदिर दर्शन समय, आरती सारिणी व इतिहास की जानकारी संबंधित देवस्थानम ट्रस्ट, प्रमाणिक धार्मिक पुस्तकों एवं तीर्थ यात्रियों के अनुभवों के आधार पर निरंतर अद्यतन की जाती है।

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