पावन देवस्थान एवं तीर्थ दर्शन

श्री स्तंभेश्वर महादेव मंदिर, कवि कंबोई (गुजरात)

18 दर्शनार्थी
कवि कंबोई, गुजरात
प्रकाशित: 26 Oct 2026
दर्शन व इतिहास पढ़ें
मुख्य आराध्य देव
भगवान शिव
दर्शन समय सारिणी
सुबह 06:00 बजे से रात्रि 08:00 बजे तक (समुद्र के ज्वार-भाटा के अनुसार)
नित्य आरती समय
मंगला आरती: 06:30 AM | मध्याह्न आरती: 12:30 PM | संध्या आरती: 07:30 PM
स्थान / नगर
कवि कंबोई, गुजरात
आराध्य देव
भगवान शिव
दर्शन समय
सुबह 06:00 बजे से रात्रि 08:00 बजे तक (समुद्र के ज्वार-भाटा के अनुसार)
आरती समय
मंगला आरती: 06:30 AM | मध्याह्न आरती: 12:30 PM | संध्या आरती: 07:30 PM
स्थान / धाम
श्री स्तंभेश्वर महादेव मंदिर, कवि कंबोई, जिला भरूच, गुजरात - 392170
अक्षर आकार:
पठन थीम:

श्री स्तंभेश्वर महादेव: समुद्र की लहरों में विलीन होने वाला दिव्य धाम

गुजरात के भरूच जिले के कवि कंबोई गांव में स्थित श्री स्तंभेश्वर महादेव मंदिर न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि प्रकृति और आध्यात्मिकता का एक अद्भुत संगम है। यह मंदिर विश्व का एकमात्र ऐसा शिव मंदिर माना जाता है जो दिन में दो बार समुद्र की लहरों में पूरी तरह समा जाता है। इसे 'गायब होने वाला मंदिर' भी कहा जाता है।

पौराणिक पृष्ठभूमि और स्थापना

स्कंद पुराण के अनुसार, इस मंदिर की स्थापना स्वयं भगवान कार्तिकेय ने की थी। तारकासुर नामक राक्षस का वध करने के बाद, भगवान कार्तिकेय को ग्लानि हुई कि उन्होंने एक शिव भक्त का वध किया है। भगवान विष्णु की सलाह पर, उन्होंने उस स्थान पर शिवलिंग की स्थापना की और प्रायश्चित किया। भगवान शिव ने प्रसन्न होकर उन्हें दर्शन दिए और वहां 'स्तंभेश्वर' के रूप में विराजमान हुए।

वास्तुकला और गर्भगृह

मंदिर की वास्तुकला सादगी और दिव्यता का प्रतीक है। गर्भगृह में लगभग 4 फीट ऊंचा शिवलिंग स्थापित है। मंदिर का निर्माण इस प्रकार किया गया है कि ज्वार (High Tide) के समय समुद्र का जल स्वयं शिवलिंग का अभिषेक करता है। यह दृश्य किसी चमत्कार से कम नहीं है। मंदिर का शिखर और प्रांगण पारंपरिक नागर शैली की झलक प्रस्तुत करते हैं।

दर्शन और ज्वार-भाटा का महत्व

दर्शन के लिए आने वाले भक्तों को ज्वार-भाटा की समय-सारणी का विशेष ध्यान रखना चाहिए। समुद्र का जल स्तर बढ़ने पर मंदिर पूरी तरह जलमग्न हो जाता है, जिससे दर्शन संभव नहीं होते। अतः, मंदिर आने से पहले स्थानीय पंचांग या मंदिर ट्रस्ट द्वारा जारी ज्वार-भाटा की समय-सारणी अवश्य देख लें।

प्रमुख उत्सव

महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां भक्तों का तांता लगा रहता है। इसके अलावा, श्रावण मास के सोमवार और कार्तिक पूर्णिमा पर विशेष अनुष्ठान और अभिषेक किए जाते हैं।

यात्रा और पहुंच

निकटतम हवाई अड्डा वडोदरा (लगभग 80 किमी) है। भरूच रेलवे स्टेशन निकटतम प्रमुख स्टेशन है। सड़क मार्ग से यह वडोदरा और भरूच से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।

आवास और सुविधाएं

मंदिर परिसर के पास ट्रस्ट द्वारा संचालित धर्मशालाएं उपलब्ध हैं। भक्तों के लिए निःशुल्क भोजन प्रसादम की व्यवस्था भी की जाती है।

तीर्थ यात्रा विधि

मंदिर दर्शन व पूजा के 4 सरल चरण

प्रभु के अलौकिक दर्शन का पूर्ण फल प्राप्त करने हेतु आवश्यक नियम

१. शुद्ध भाव व स्नान

दर्शन से पूर्व पवित्र भाव से स्नान कर सात्विक वस्त्र धारण करें।

२. आरती समय ज्ञान

मंगला, भोग अथवा शयन आरती के समय उपस्थित होकर दर्शन करें।

३. नैवेद्य व अर्पण

तुलसी, पुष्प, धूप, दीप व नैवेद्य श्रद्धापूर्वक प्रभु चरणों में अर्पित करें।

४. परिक्रमा व ध्यान

गर्भगृह की विधिवत परिक्रमा कर शांत भाव से प्रभु का ध्यान करें।

संदर्भ-आधारित एवं संपादकीय रूप से तैयार सामग्री

भक्तिलोक पर उपलब्ध सभी मंदिर दर्शन समय, आरती सारिणी व इतिहास की जानकारी संबंधित देवस्थानम ट्रस्ट, प्रमाणिक धार्मिक पुस्तकों एवं तीर्थ यात्रियों के अनुभवों के आधार पर निरंतर अद्यतन की जाती है।

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