सातवें अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण ज्ञान और विज्ञान (साक्षात्कार) का वर्णन करते हैं। वह अपनी योगमाया, अपने दो प्रकार के स्वरूप (परा और अपरा प्रकृति) तथा भक्ति द्वारा उन्हें जानने के मार्ग की व्याख्या करते हैं।
श्रीमद्भगवद्गीता के इस पावन अध्याय का शीर्षक "ज्ञान विज्ञान योग (Gyan Vigyan Yoga)" है। यह अध्याय कर्म, भक्ति और ज्ञान के मूलभूत सिद्धांतों का एक उत्कृष्ट समन्वय है।
अध्याय संदेश
सातवें अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण ज्ञान और विज्ञान (साक्षात्कार) का वर्णन करते हैं। वह अपनी योगमाया, अपने दो प्रकार के स्वरूप (परा और अपरा प्रकृति) तथा भक्ति द्वारा उन्हें जानने के मार्ग की व्याख्या करते हैं।
२. अध्याय के पावन श्लोक (Gita Shlokas)
प्रत्येक श्लोक को उसके मूल देवनागरी पाठ और हिंदी-अंग्रेजी अनुवाद के साथ नीचे सूचीबद्ध किया गया है।
स तया श्रद्धया युक्तस्तस्याराधनमीहते । लभते च ततः कामान्मयैव विहितान्हि तान् ॥ २२॥
हिंदी अनुवाद: “वह उस श्रद्धा से युक्त होकर उस (देवता) की आराधना करता है और उससे अपने अभीष्ट पदार्थों को प्राप्त करता है – वे सब मेरे द्वारा ही नियत किए गए होते हैं।”
English Translation: Endowed with that faith, he engages in the worship of that (form) and from it obtains his desires, these being decreed by Me alone.
हिंदी अनुवाद: “उन अल्पबुद्धि वालों का वह फल नाशवान् होता है। देवताओं के पूजक देवताओं को प्राप्त होते हैं, परन्तु मेरे भक्त मुझको ही प्राप्त होते हैं।”
English Translation: But the fruit (accruing) to these men of little understanding is limited. The worshippers of the gods go to the gods, but My devotees come to Me.
हिंदी अनुवाद: “अबुद्धि लोग मुझ अव्यक्त को व्यक्त रूप में प्राप्त मानते हैं, वे मेरे परम, अविनाशी और अनुत्तम भाव को नहीं जानते।”
English Translation: The unintelligent think of Me, the Unmanifest, as having become manifest, not knowing My supreme, imperishable and transcendental state.
हिंदी अनुवाद: “हे भरतवंशी! इच्छा और द्वेष से उत्पन्न द्वन्द्वमोह के कारण समस्त प्राणी जन्म लेते ही मोह को प्राप्त हो जाते हैं।”
English Translation: O Bharata (Arjuna), all beings are born into delusion, O conqueror of foes, overcome by the delusion of duality arising from desire and aversion.
हिंदी अनुवाद: “परन्तु जिन पुण्यकर्मी मनुष्यों के पाप समाप्त हो गए हैं, वे द्वन्द्व-मोह से मुक्त होकर दृढ़ व्रत से मेरा भजन करते हैं।”
English Translation: But those men of virtuous deeds, whose sins have come to an end, are freed from the delusion of dualities and worship Me with firm resolve.
जरामरणमोक्षाय मामाश्रित्य यतन्ति ये । ते ब्रह्म तद्विदुः कृत्स्नमध्यात्मं कर्म चाखिलम् ॥ २९॥
हिंदी अनुवाद: “जो पुरुष जरा और मरण से मुक्ति के लिए मेरी शरण ग्रहण करके प्रयत्न करते हैं, वे उस ब्रह्म, सम्पूर्ण अध्यात्म और समस्त कर्म को जान लेते हैं।”
English Translation: Those who strive for freedom from old age and death, taking refuge in Me, know Brahman, the whole of Adhyatma, and all Karma.
साधिभूताधिदैवं मां साधियज्ञं च ये विदुः । प्रयाणकालेऽपि च मां ते विदुर्युक्तचेतसः ॥ ३०॥
हिंदी अनुवाद: “जो मुझे अधिभूत, अधिदैव और अधियज्ञ के रूप में जानते हैं, वे युक्तचित्त होकर मृत्युकाल में भी मुझे जानते हैं (अर्थात् मुझे प्राप्त होते हैं)।”
English Translation: Those who know Me as the Adhibhuta (the basis of material existence), Adhidaiva (the basis of all gods), and Adhiyajna (the basis of all sacrifices), they, with their minds steadfast, know Me even at the time of death.