जयंती व प्राकट्य उत्सव • वर्ष २०२७

श्री हनुमान जन्मोत्सव 2027: शुभ पूजा मुहूर्त, सिंदूर अर्पण और सुंदरकांड पाठ विधि

श्री हनुमान जन्मोत्सव 2027 के पावन पर्व पर जानिए सटीक तिथि, शुभ पूजा मुहूर्त, सिंदूर अर्पण विधि, सुंदरकांड पाठ के नियम और संकटमोचन की कथा। संपूर्ण वैदिक और पौराणिक मार्गदर्शिका Bhaktilok पर।

२० अप्रैल २०२७, मंगलवार तिथि व दिनांक
जयंती व प्राकट्य उत्सव धार्मिक श्रेणी
७४ कुल पाठक संख्या
७ मिनट पठन अवधि
महत्वपूर्ण सारांश: श्री हनुमान जन्मोत्सव 2027 के पावन पर्व पर जानिए सटीक तिथि, शुभ पूजा मुहूर्त, सिंदूर अर्पण विधि, सुंदरकांड पाठ के नियम और संकटमोचन की कथा। संपूर्ण वैदिक और पौराणिक मार्गदर्शिका Bhaktilok पर।
पावन पर्व तिथि एवं समय निर्धारण
प्रारंभ / मुख्य तिथि: २० अप्रैल २०२७, मंगलवार
विशेष उत्सव क्षेत्र: संपूर्ण भारत

श्री हनुमान जन्मोत्सव 2027: सनातन संस्कृति का महान प्राणोत्सर्ग पर्व

हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र मास की पूर्णिमा तिथि को भगवान श्रीराम के परम भक्त, अष्टसिद्धि और नौ निधियों के दाता संकटमोचन हनुमान जी का प्राकट्य उत्सव मनाया जाता है। इसे श्री हनुमान जन्मोत्सव या हनुमान जयंती के नाम से भी जाना जाता है। वर्ष 2027 में यह पावन पर्व संपूर्ण भारत में अत्यंत उत्साह, श्रद्धा और विधि-विधान के साथ मनाया जाएगा। त्रेतायुग में भगवान शिव के 11वें रुद्रावतार के रूप में माता अंजनी और केसरी नंदन के घर प्रकट हुए हनुमान जी अजर-अमर हैं और आज भी इस पृथ्वी पर अपने भक्तों के संकटों का निवारण करने के लिए सूक्ष्म रूप से विद्यमान हैं।

श्री हनुमान जन्मोत्सव 2027: तिथियां एवं पंचांग गणना

वैदिक ज्योतिष और सूर्य सिद्धांत के अनुसार, चैत्र पूर्णिमा तिथि का आरंभ और समापन इस प्रकार रहेगा:

पंचांग विवरण दिनांक एवं समय
पूर्णिमा तिथि प्रारंभ अप्रैल 2027 (विशिष्ट पंचांग अनुसार)
पूर्णिमा तिथि समाप्त अगले दिन (विशिष्ट पंचांग अनुसार)
मुख्य उत्सव एवं व्रत तिथि निश्चित तिथि 2027

शुभ पूजा मुहूर्त एवं चौघड़िया विवरण

हनुमान जन्मोत्सव के दिन बजरंगबली की उपासना करने से समस्त प्रकार के ग्रहों के दोष, भय, और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। इस दिन निम्नलिखित मुहूर्तों में पूजा करना अत्यंत फलदायी माना गया है:

  • ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:20 बजे से 05:08 बजे तक
  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:54 बजे से 12:44 बजे तक
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 02:30 बजे से 03:20 बजे तक
  • निशिता काल मुहूर्त: रात्रि 11:58 बजे से 12:42 बजे तक

श्री हनुमान जी की षोडशोपचार पूजा विधि एवं सामग्री

हनुमान जन्मोत्सव के दिन साधक को सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर लाल वस्त्र धारण करना चाहिए। इसके पश्चात नीचे दी गई विधि से पूजा संपन्न करें:

  1. संकल्प: पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके आसन पर बैठें और हाथ में अक्षत, जल लेकर व्रत या पूजा का संकल्प लें।
  2. कलश स्थापना: चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर श्री हनुमान जी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। साथ ही जल से भरा कलश रखें।
  3. सिंदूर एवं चोला अर्पण: हनुमान जी को सिंदूर और चमेली के तेल का चोला अर्पित करना अत्यंत प्रिय है। मान्यता है कि माता सीता की मांग में सिंदूर देखकर हनुमान जी ने अपने पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लिया था।
  4. नैवेद्य एवं भोग: बेसन के लड्डू, बूंदी, केला, पान का बीड़ा और गुड़-चने का भोग लगाएं।
  5. मंत्र जाप: 'ॐ हं हनुमते नमः' या 'राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे' मंत्र की कम से कम एक माला का जाप करें।

श्री हनुमान जन्मोत्सव की पौराणिक कथा एवं प्राकट्य प्रसंग

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार महर्षि वाल्मीकि और अन्य ग्रंथों में वर्णित प्रसंग के अनुसार, केसरी और अंजनी ने संतान प्राप्ति के लिए भगवान शिव की कठोर तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर महादेव ने उन्हें वरदान दिया कि वे स्वयं उनके यहाँ पुत्र रूप में जन्म लेंगे। चैत्र पूर्णिमा के दिन माता अंजनी ने एक अत्यंत तेजस्वी पुत्र को जन्म दिया। बाल अवस्था में ही सूर्य को मीठा फल समझकर खाने के लिए दौड़ने वाले हनुमान जी पर जब देवराज इंद्र ने वज्र का प्रहार किया, तब से उनका नाम 'हनुमान' पड़ा।

सुंदरकांड पाठ का महात्म्य

हनुमान जन्मोत्सव के दिन सुंदरकांड का पाठ करना समस्त दुखों का नाश करने वाला माना जाता है। सुंदरकांड वाल्मीकि रामायण का एकमात्र ऐसा अध्याय है जो भगवान राम की विजय के बजाय श्री हनुमान जी की वीरता, बुद्धि, और पराक्रम का गुणगान करता है। इसका पाठ करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और राहु-केतु, शनि के दोष शांत होते हैं।

क्षेत्रीय उत्सव एवं परंपराएं

भारत के विभिन्न राज्यों में हनुमान जन्मोत्सव अलग-अलग रूपों में मनाया जाता है:

  • उत्तर भारत: मंदिरों में सुबह से ही सुंदरकांड, हनुमान चालीसा और बजरंग बाण के अखंड पाठ आयोजित किए जाते हैं। भंडारे का आयोजन होता है।
  • दक्षिण भारत: तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में हनुमान जन्मोत्सव 'हनुमान व्रतम्' के रूप में 41 दिनों के मंडलम उत्सव के रूप में मनाया जाता है।
  • महाराष्ट्र: यहां हनुमान जयंती चैत्र मास की पूर्णिमा के अलावा कुछ संप्रदायों में वैशाख कृष्ण दशमी को भी मनाई जाती है।

व्रत एवं पूजा के दौरान ध्यान रखने योग्य नियम (Dos and Don'ts)

"मन, वचन और कर्म से पवित्र रहकर जो भक्त हनुमान जी की शरण में जाता है, उसे भूत-प्रेत, रोग और व्याधि कभी नहीं छू सकती। ब्रह्मचर्य का पालन करना इस व्रत का सबसे मुख्य नियम है।"

  • करें: सात्विक भोजन, राम नाम का निरंतर स्मरण, गरीबों और जरूरतमंदों को दान।
  • न करें: तामसिक भोजन (मदिरा, मांस, लहसुन, प्याज) का सेवन, असत्य बोलना, किसी का अपमान करना।

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री

यह लेख धर्मसिंधु, निर्णयसिंधु व सनातन पंचांग परंपराओं के संदर्भों के आधार पर भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा संकलित किया गया है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा

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