पावन आरती संग्रह · स्तुति पाठ
श्री हनुमान जी आरती
65 पाठ

श्री हनुमान लला की आरती - आरती कीजै हनुमान लला की दुष्ट दलन रघुनाथ कला की सम्पूर्ण बोल व भावार्थ

सम्पूर्ण आरती लिरिक्स हिंदी में, सरल भावार्थ, शास्त्रीय विधि, गायन नियम एवं नित्य पाठ के आध्यात्मिक लाभ।

राग बिलावल शास्त्रीय राग / ताल
5 पठन अवधि
Hindi आरती भाषा
Deepak Kumar Bind रचनाकार / स्रोत
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॥ श्री हनुमान लला की आरती - आरती कीजै हनुमान लला की दुष्ट दलन रघुनाथ कला की सम्पूर्ण बोल व भावार्थ ॥

★ नित्य पाठ व संकीर्तन ★

श्री हनुमान लला की आरती - आरती कीजै हनुमान लला की दुष्ट दलन रघुनाथ कला की सम्पूर्ण बोल व भावार्थ परिचय एवं आध्यात्मिक महत्व

सनातन संस्कृति में श्री हनुमान लला की आरती 'आरती कीजै हनुमान लला की' का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। इस लेख में संपूर्ण बोल, विस्तृत भावार्थ और पूजन विधि प्रस्तुत है।

आध्यात्मिक लाभ एवं नित्य पाठ विधि

श्री हनुमान लला की आरती - आरती कीजै हनुमान लला की दुष्ट दलन रघुनाथ कला की सम्पूर्ण बोल व भावार्थ का श्रद्धापूर्वक नित्य पाठ करने से समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है।

१. श्री हनुमान लला की आरती - आरती कीजै हनुमान लला की दुष्ट दलन रघुनाथ कला की सम्पूर्ण बोल व भावार्थ का सरल भावार्थ

यह पावन आरती भगवान श्री हनुमान जी के दिव्य स्वरूप, उनकी अलौकिक लीलाओं और भक्तों पर उनकी अहैतुकी कृपा का गुणगान करती है। जब भक्त पूर्ण निष्ठा, भक्ति और एकाग्रता के साथ इस आरती का गायन करते हैं, तो उनके हृदय में ईश्वरीय चेतना, सात्विक भाव और आध्यात्मिक शांति का संचार होता है।

"कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारम् भुजगेन्द्रहारम्। सदावसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि॥"
अर्थात्: जो कर्पूर के समान गौर वर्ण वाले हैं, करुणा के साक्षात् अवतार हैं, संसार के सार हैं और भुजंगों का हार धारण करते हैं, उन भगवान शिव और माता भवानी को मैं अपने हृदय कमल में नमन करता हूँ।

२. आरती की शास्त्रीय पूजा विधि एवं थाली घुमाने के नियम

आरती सदैव शुद्ध, पवित्र और एकाग्र चित्त होकर करनी चाहिए। शास्त्रों में आरती की थाली घुमाने का विशेष वैज्ञानिक व आध्यात्मिक नियम निर्धारित किया गया है:

  • चरणों में ४ बार: भगवान के श्री चरणों में ४ बार आरती की थाली घुमाकर प्रणाम करें।
  • नाभि मंडल में २ बार: भगवान की नाभि में २ बार घुमाकर समस्त सृष्टि के पालनकर्ता को नमन करें।
  • मुखारविंद पर १ बार: भगवान के दिव्य मुख के सम्मुख १ बार घुमाकर उनके दर्शन करें।
  • सम्पूर्ण विग्रह पर ७ बार: सम्पूर्ण श्री विग्रह पर ७ बार 'ॐ' की आकृति बनाते हुए दक्षिणावर्त (Clockwise) घुमाएं।

३. नित्य आरती गायन के आध्यात्मिक एवं भौतिक लाभ

प्रतिदिन प्रातःकाल एवं सायंकाल आरती करने से घर के वातावरण में व्याप्त नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है। शंख, घंटी और कपूर की दिव्य सुगंध से मन शांत होता है, परिवार में सुख-समृद्धि आती है और समस्त प्रकार के अनिष्ट व कष्ट दूर होते हैं।

४. आरती से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)

हाँ, भगवान के प्रति पूर्ण आदर, सत्कार और विनम्रता प्रकट करने के लिए आरती खड़े होकर दोनों हाथों से थाली पकड़कर ही करनी चाहिए। अस्वस्थ होने की स्थिति में बैठकर भी आरती की जा सकती है।
आरती संपन्न होने पर थाली के चारों ओर जल का एक घेरा बनाकर अग्नि को शांत किया जाता है, जिसके पश्चात सभी भक्त दोनों हाथों से ज्योति की ऊष्मा (आशीर्वाद व तेज) ग्रहण करते हैं।
कपूर जलते समय कोई अवशेष नहीं छोड़ता, जो अहंकार के पूर्ण विसर्जन का प्रतीक है। साथ ही कपूर की सुगंध वातावरण को शुद्ध, पवित्र और जीवाणुरहित बनाती है।

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भगवान श्री हनुमान जी जी की नित्य वंदना और आरती पाठ से मन की चंचलता शांत होती है, एकाग्रता बढ़ती है एवं जीवन के सभी विघ्न-बाधाएं नष्ट होती हैं।

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