Parvati Stotram

झुला झूले सातो बेह्नियाँ लिरिक्स || Jhoola jhoole saato bahaniyaan lyrics in hindi || Bhaktilok

101 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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झुला झूले सातो बेह्नियाँ भजन परिचय एवं भक्ति महत्व

"झुला झूले सातो बेह्नियाँ" अत्यंत मधुर, लोक-साहित्य से ओत-प्रोत और पारंपरिक भक्ति रस से परिपूर्ण एक प्रसिद्ध भजन है। यह पावन रचना सनातन संस्कृति में माता भगवती, कुलदेवी, मैया रानी अथवा लोक देवियों (सात बहनों) के प्रति अनन्य प्रेम, श्रद्धा और उत्सवधर्मिता का जीवंत दर्शन कराती है। भारतीय लोक परंपरा में जब भी सावन मास, चैत्र नवरात्रि या किसी विशेष मांगलिक पर्व का आगमन होता है, तब संपूर्ण ग्रामीण और शहरी परिवेश मैया के जयकारों और पारंपरिक गीतों से गूंज उठता है। यह भजन केवल एक गीत नहीं, बल्कि जीवात्मा द्वारा अपनी आराध्य शक्ति के प्रति समर्पित एक आत्मीय पुकार है।

सनातन धर्म में उत्सव और भक्ति का अटूट संबंध रहा है। जब भक्त अपनी सातों बहनों (विभिन्न देवियों या मातृकाओं के स्वरूप) को झूला झूलते हुए कल्पित करते हैं, तो उनके हृदय में एक आनंदमयी अलौकिक अनुभूति जागृत होती है। सावन के महीने में झूले डालने की हमारी प्राचीन संस्कृति केवल प्रकृति के स्वागत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देवियों के प्रति आनंद और उल्लास व्यक्त करने का सर्वोत्तम माध्यम भी है। इस भजन का प्रत्येक शब्द साधक को एक ऐसी मानसिक अवस्था में ले जाता है जहाँ सांसारिक दुखों का शमन हो जाता है और केवल भगवत्कृपा एवं आनंद का साम्राज्य रहता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

झुला झूले सातो बेह्नियाँ, भवनवा सोने के...

झुला झूले सातो बेह्नियाँ, भवनवा सोने के,
सोने के कटोरवा में मेवा परोसे के।
झूला पड़े कदंब की डार, मैया झूले रे...

सबसे बड़ी जो बहिनिया कहलाई,
हाथ में त्रिशूल मैया सोभा अधिकाई।
शेर सवारी मैया दर्शन को आई,
भक्तन के मन भाई, मैया झूले रे...

दूजी बहिनिया मैया शारदा भवानी,
मुख से बरसे सदा अमृत की बानी。
वीणा बजावे मैया सुर ताल ज्ञानी,
सुख बरसावे रानी, मैया झूले रे...

तीजी बहिनिया मैया महाकाली रूपा,
असुरन के मारे मैया तेज अनूपा।
गले मुण्डमाल साजे विकराल रूपा,
भक्तन के दुख हरती, मैया झूले रे...

चौथी बहिनिया मैया शीतला कहलाई,
चेचक बहराइनी सब पीड़ा नसाई।
ठंडा जल ले मैया पूजन को आई,
शीतल करे जियरा, मैया झूले रे...

पांचवी बहिनिया मैया नैना देवी प्यारी,
पहाड़न पे बैठे मैया महिमा है न्यारी।
दूर-दूर से आवे दर्शन बलिहारी,
झूला झूले सारी, मैया झूले रे...

छठी बहिनिया मैया मनसा कहलाई,
नागों के रक्षक मैया महिमा सवाई।
जो कोई ध्यावे मन इच्छा फल पाई,
झूला झूलन आई, मैया झूले रे...

सांतवीं बहिनिया मैया दुर्गा कहलाई,
तीन लोकन में जिनकी ज्योति समाई।
चरणन में झुके संसार सीस झुकाई,
भक्ति दीप जलाई, मैया झूले रे...

सातो बहिनिया मिल झूला जो झुलावै,
गावे जो भजनिया सो नर सुख पावै।
'भक्तिलोक' गावे महिमा अति भारी,
नैया भव से तारी, मैया झूले रे...

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस दिव्य भजन के माध्यम से रचनाकार ने उन सात देवियों (मातृकाओं या बहनों) का अत्यंत सुंदर और जीवंत वर्णन किया है जो सनातन संस्कृति में लोक कल्याण के लिए पूजी जाती हैं। पहले पद में बताया गया है कि सातो बहनें स्वर्ण जड़ित भवन में बड़े आनंद के साथ झूला झूल रही हैं। सोने के कटोरे में मेवा और मिष्ठान परोसे गए हैं, जो इस बात का प्रतीक है कि देवी की आराधना करने से घर में सुख, समृद्धि और वैभव का कभी अभाव नहीं होता। कदंब की डाल पर पड़े झूले और मैया का झूलना प्रकृति और परमात्मा के सुंदर समन्वय को दर्शाता है।

क्रमशः प्रत्येक बहिनिया या देवी के स्वरूप का वर्णन करते हुए भजन हमें शक्ति के विभिन्न रूपों से अवगत कराता है। महाकाली, महालक्ष्मी, महासरस्वती, शीतला माता, मनसा देवी, नैना देवी और दुर्गा जी—ये सभी शक्तियाँ जगत के पालन, संहार और कल्याण में अपनी भूमिका निभाती हैं। जब साधक इन सातों शक्तियों का स्मरण एक साथ करता है, तो उसके भीतर का भय समाप्त हो जाता है और आत्मबल की प्राप्ति होती है। भजन का मुख्य संदेश यही है कि जो मनुष्य सच्चे भाव से इन देवियों की स्तुति करता है, उसके जीवन की समस्त बाधाएं दूर हो जाती हैं और अंत में परम गति की प्राप्ति होती है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • लोक संस्कृति का संगम: यह भजन शास्त्रीय संगीत और लोक परंपराओं का एक सुंदर मिश्रण है, जिसे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में बड़े प्रेम से गाया जाता है।
  • सामूहिक शक्ति का प्रतीक: सातो बहनों (मातृकाओं) की यह परिकल्पना भारतीय संस्कृति की उस भावना को उजागर करती है जहाँ नारी शक्ति को संपूर्ण ब्रह्मांड का संचालक माना गया है।
  • पर्व और उत्सव का उल्लास: सावन मास, हरियाली तीज, नवरात्रि और विभिन्न देवी जागरणों के अवसर पर इस भजन का गायन विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।
  • मानसिक शांति और सकारात्मकता: इसके श्रवण मात्र से मन के संताप दूर होते हैं और एक असीम सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस पवित्र भजन को गाने या सुनने के लिए किसी कठोर नियम की आवश्यकता नहीं होती, परंतु यदि इसे पूरी श्रद्धा और पवित्रता के साथ गाया जाए तो इसका फल कई गुना बढ़ जाता है। प्रातः काल स्नान के पश्चात देवी के मंदिर या घर के पूजा स्थल पर दीप प्रज्वलित करके इस भजन का स्मरण करना अत्यंत शुभ होता है। इसके अतिरिक्त, संध्याकाल में जब घर में धूप-दीपक किया जाता है, तब महिलाओं द्वारा सामूहिक रूप से ताली बजाकर इस भजन को गाने से घर का वातावरण पवित्र और ऊर्जावान बनता है। नवरात्रि के दिनों में माता को झूला झुलाने की रस्म के समय यह भजन मुख्य आकर्षण होता है।

अधिक जानकारी और अन्य लोकप्रिय भजनों के लिए आप श्री आरती संग्रह और नित्य पाठ के स्त्रोत पढ़ सकते हैं जो आपके आध्यात्मिक सफर को और अधिक समृद्ध करेंगे।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन मूल रूप से आदिशक्ति जगदंबा के विभिन्न स्वरूपों को समर्पित है। सनातन धर्म में 'सप्तमातृका' या सात बहनों की पूजा की परंपरा बहुत प्राचीन है। इन्हें ग्राम देवता, कुल देवी और चेतना की जागृत शक्तियों के रूप में पूजा जाता है। इस भजन की रचना किसी एक विशिष्ट कवि तक सीमित न रहकर लोक-कंठों से पीढ़ियों से आगे बढ़ती चली आ रही है, जो लोक-साहित्य की अमरता का प्रमाण है। संत और भक्तगण इन लोकगीतों के माध्यम से जन-जन तक भक्ति रस का प्रसार करते आए हैं।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा बहुत ही सरल, सहज और आम जनमानस की समझ में आने वाली लोक-भाषा (अवधी, भोजपुरी और ब्रज का सुंदर मिश्रण) है। इसमें रूपक अलंकार और संगीतात्मकता का अद्भुत प्रयोग किया गया है। 'झुला झूले', 'भवनवा सोने के', और 'मैया झूले रे' जैसे पदावलियाँ श्रोताओं के मन में एक लयबद्ध ताल उत्पन्न करती हैं, जिससे बच्चे से लेकर वृद्ध तक सभी इसे आसानी से गुनगुना सकते हैं। लोकगीतों की यह शैली संस्कृति को जीवित रखने में सबसे बड़ा योगदान देती है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

  • शरणागति का भाव: कठिनाइयों के समय जब मनुष्य अपनी माता (शक्ति) की शरण में जाता है, तो उसे सभी संकटों से मुक्ति मिल जाती है।
  • पारिवारिक और सामाजिक समरसता: सातों बहनों का एक साथ झूला झूलना समाज में एकता, भाईचारा और पारिवारिक प्रेम का संदेश देता है।
  • आनंद और उत्सव का जीवन: धर्म केवल त्याग का मार्ग नहीं है, बल्कि यह ईश्वर के प्रति आनंद और उत्सव मनाने का भी नाम है।
  • नारी शक्ति का सम्मान: यह भजन समाज में नारी के मातृ रूप, रक्षक रूप और देवी स्वरूप को सर्वोच्च स्थान प्रदान करता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / पदावली सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
सातो बेह्नियाँ सात देवियां / मातृकाएं ब्रह्मांड की सात प्रमुख ऊर्जाएं या शक्तियां
भवनवा दिव्य महल / मंदिर परमात्मा का परम धाम या हृदय मंदिर
कदंब की डार कदंब वृक्ष की डाली भगवान कृष्ण और देवियों के क्रीड़ा स्थल का प्रतीक
मुण्डमाल खोपड़ियों की माला अहंकार और अज्ञान का नाश करने वाला प्रतीक
नसाई नष्ट करना / दूर भगाना दुखों और रोगों का अंत होना

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"झुला झूले सातो बेह्नियाँ, भवनवा सोने के..."
इस प्रथम पंक्ति का भाव यह है कि चेतना के स्वर्ण महल में सातों दिव्य शक्तियाँ आनंदित हो रही हैं। सोना यहाँ शुद्धता और दिव्यता का द्योतक है।

"सोने के कटोरवा में मेवा परोसे के..."
इसका अर्थ है कि मैया को सात्विक और उत्तम प्रेम का भोग अर्पित किया जा रहा है, बदले में मैया अपने भक्तों को असीम आशीर्वाद देती हैं।

"सबसे बड़ी जो बहिनिया कहलाई, हाथ में त्रिशूल मैया सोभा अधिकाई..."
यहाँ प्रथम शक्ति माँ महाकाली या दुर्गा की महिमा का वर्णन है जो त्रिशूल धारण कर सभी असुरों और नकारात्मक वृत्तियों का नाश करती हैं।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

देवी आराधना के समय इस पावन श्लोक का स्मरण अवश्य करना चाहिए:

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

हे नारायणि! तुम सब प्रकार का मंगल करने वाली हो, कल्याणमयी हो, सब प्रकार के पुरुषों को सिद्ध करने वाली हो। तुम ही शरण देने योग्य हो और तीन नेत्रों वाली गौरी हो। तुम्हें हमारा बार-बार नमस्कार है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम झुला झूले सातो बेह्नियाँ (Jhoola Jhoole Saato Bahaniyaan)
समर्पित देवता आदिशक्ति माता दुर्गा एवं सप्तमातृका देवियां
रचना शैली पारंपरिक लोक भजन / गीत
भाषा लोक हिंदी / अवधी / भोजपुरी
मुख्य भाव भक्ति, उल्लास, मातृ प्रेम और उत्सव
उपयुक्त अवसर सावन मास, तीज, नवरात्रि, देवी जागरण
प्लेटफार्म Bhaktilok.in

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह भजन आदिशक्ति माता दुर्गा और उनकी विभिन्न सात बहनों (मातृकाओं जैसे महाकाली, शारदा, शीतला, मनसा, नैना देवी आदि) को समर्पित है।

यह भजन विशेष रूप से सावन मास, हरियाली तीज, चैत्र एवं शारदीय नवरात्रि, और माता के जागरण के समय बहुत चाव से गाया जाता है।

हाँ, इसकी भाषा अत्यंत सरल और लोक-संगीत पर आधारित है, जिसे महिलाएं और परिवार के सभी सदस्य मिलकर आसानी से गा सकते हैं।

इसके गायन और श्रवण से मन को शांति मिलती है, घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और माता रानी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

लोक परंपरा में सात बहनों को सात प्रमुख देवियों या मातृकाओं का रूप माना गया है जो संपूर्ण सृष्टि की रक्षा करती हैं।

हाँ, Bhaktilok.in पर यह भजन देवनागरी लिपि में पूर्ण अर्थ और व्याख्या के साथ उपलब्ध है।

इसके साथ आप दुर्गा चालीसा, महिषासुरमर्दिनि स्तोत्र या अन्य देवी मंत्रों का पाठ कर सकते हैं।

ईश्वर के प्रति प्रेम, उत्सवधर्मिता, और माता शक्ति की शरण में जाने से सभी दुखों का नाश होना ही इस भजन का मुख्य संदेश है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री। यह आलेख सनातन लोक-संस्कृति, देवी उपासना परंपरा और पारंपरिक संगीत के आधार पर पूरी प्रमाणिकीयता के साथ संकलित किया गया है। इसका उद्देश्य पाठकों को शुद्ध और आनंदमयी भक्ति सामग्री प्रदान करना है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • सनातन लोकगीत एवं पारंपरिक भजन संग्रह
  • श्रीमद्देवीभागवत पुराण एवं मार्कण्डेय पुराण (दुर्गा सप्तशती संदर्भ)
  • क्षेत्रीय लोक-साहित्य एवं मौखिक परंपराएं

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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