भक्ति काव्य व भजन मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

चिमटे दी छनकार बाबा तेरे चिमटे दी लिरिक्स (Chimate Dee Chhanakaar Baaba Teree Chimate Dee)

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चिमटे दी छनकार बाबा तेरे चिमटे दी - सम्पूर्ण भजन परिचय एवं भक्ति भाव

सिद्ध शिरोमणि बाबा बालक नाथ जी की पावन महिमा का गुणगान करने वाला यह अत्यंत लोकप्रिय, ऊर्जावान और भावपूर्ण भजन "चिमटे दी छनकार बाबा तेरे चिमटे दी" उत्तर भारत के भक्ति संगीत, विशेषकर हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली के धार्मिक उत्सवों का एक अभिन्न और जीवंत अंग है। बाबा बालक नाथ, जिन्हें भगवान शिव का अंशावतार, दियोटसिद्ध के सिद्ध पुरुष और परम तपस्वी योगीराज माना जाता है, के दिव्य स्वरूप में 'चिमटा' उनकी योग साधना, वैराग्य, अलौकिक शक्तियों और अखाड़े की परंपरा का सबसे पवित्र प्रतीक है। जब भक्तजन शाहतलाई की पवित्र धरा और दियोटसिद्ध की गुफा का स्मरण करते हुए इस भजन को गाते हैं, तो पूरा वातावरण रूहानी ऊर्जा और भक्तिरस से सराबोर हो जाता है। यह भजन केवल शब्दों या धुनों का सामान्य संग्रह नहीं है, बल्कि यह श्रद्धालुओं के हृदय में उमड़ने वाले अगाध प्रेम, समर्पण, और बाबा के प्रति अनन्य आस्था का संगीतमय और जीवंत प्रकटीकरण है। इस लेख में हम इस भजन के सम्पूर्ण लिरिक्स, उनके गहरे आध्यात्मिक अर्थ, बाबा बालक नाथ की महिमा, और इस भजन के गायन से मिलने वाले मानसिक एवं आध्यात्मिक लाभों पर विस्तार से चर्चा करेंगे, जिससे साधक बाबा की कृपा का रसास्वादन कर सकें।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics


(मुखड़ा)

चिमटे दी छनकार बाबा तेरे चिमटे दी,
जेहड़ी पाउंदी फिरे धमाल, बाबा तेरे चिमटे दी।
चिमटे दी छनकार बाबा तेरे चिमटे दी,
जेहड़ी पाउंदी फिरे धमाल, बाबा तेरे चिमटे दी।

(अंतरा - 1)

शाहतलाई विच डेरा तेरा, दियोटसिद्ध गुफा नज़ारा,
तेरे दर ते आ के बाबा, मिल गया रूह नू सहारा।
भगत खड़ के जैकारे लाउंदे, देख के तेरी चाल,
चिमटे दी छनकार बाबा तेरे चिमटे दी,
जेहड़ी पाउंदी फिरे धमाल, बाबा तेरे चिमटे दी।

(अंतरा - 2)

रोट चढ़ांदे भगत प्यारे, दुध घीदा प्रसाद चढ़ाया,
बालक नाथ दयालु तेरा, महिमा जग विच छाया।
तेरी जोत जगा के दिल विच, नचदे ने लख लाल,
चिमटे दी छनकार बाबा तेरे चिमटे दी,
जेहड़ी पाउंदी फिरे धमाल, बाबा तेरे चिमटे दी।

(अंतरा - 3)

दुखिया दी तू पीर मिटावें, झोली सब दी भरदा,
तेरे दर तों खाली मुड़ के, कोई ना घर नू परदा।
तेरा नाम जपे जो कोई, हो जांदा मालामाल,
चिमटे दी छनकार बाबा तेरे चिमटे दी,
जेहड़ी पाउंदी फिरे धमाल, बाबा तेरे चिमटे दी।

(अंतरा - 4)

बच्चा-बच्चा बच्चा तेरा, महिमा गांदा गाए,
चरण कमल विच शीश झुका के, मुक्ति नू पा जाए।
'भक्त' वी गुणगान करे, हो के मस्त निहाल,
चिमटे दी छनकार बाबा तेरे चिमटे दी,
जेहड़ी पाउंदी फिरे धमाल, बाबा तेरे चिमटे दी।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस अद्भुत भजन की हर एक पंक्ति में बाबा बालक नाथ के प्रति अगाध प्रेम और उनकी अलौकिक शक्तियों का सजीव चित्रण मिलता है। मुखड़े में बाबा के हाथ के चिमटे की छनकार का वर्णन करते हुए गायक कहता है कि यह चिमटा जब बजता है, तो ब्रह्मांड में एक अद्भुत धमाल और सकारात्मक ऊर्जा की लहर दौड़ जाती है। यह चिमटा साधारण वाद्ययंत्र नहीं है, बल्कि यह बाबा की योग साधना का नाद है जो अज्ञान और अंधकार का नाश करता है।

पहले अंतरे में शाहतलाई और दियोटसिद्ध धाम का सुंदर उल्लेख है। शाहतलाई वह पवित्र स्थान है जहाँ बाबा ने तपस्या की थी और दियोटसिद्ध वह गुफा है जहाँ वे अंतर्ध्यान हुए। भक्त जब इन पावन धामों पर पहुंचते हैं, तो उनकी आत्मा को परमानंद और सहारा मिलता है। दूसरे अंतरे में बाबा को अर्पित किए जाने वाले रोट (पूड़े-मीठे पकवान) और दूध-घी के प्रसाद का वर्णन है, जो उनके प्रिय भक्तों द्वारा श्रद्धापूर्वक चढ़ाया जाता है। तीसरे अंतरे में बाबा की कृपालु प्रकृति को दर्शाया गया है कि वे सभी दुखियारे भक्तों के कष्टों को दूर करते हैं और उनके जीवन को खुशियों से भर देते हैं। अंतिम अंतरे में साधक अपने अहंकार को त्यागकर बाबा के चरणों में शीश झुकाता है और जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति पाता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन नाथ संप्रदाय और सिद्ध परंपरा के प्रमुख देवता बाबा बालक नाथ की महिमा को समर्पित है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • ऊर्जावान लय (Energetic Rhythm): इस भजन की ताल और धुन इतनी मनमोहक है कि सुनते ही श्रोता झूम उठते हैं और शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
  • धार्मिक स्थलों का स्मरण: शाहतलाई, दियोटसिद्ध और रोट प्रसाद जैसे प्रतीकों के माध्यम से यह भजन श्रोताओं को सीधे बाबा के पावन धाम से जोड़ देता है।
  • भक्ति और वैराग्य का समन्वय: चिमटा नाथ योगियों का प्रधान अंग है, जो सांसारिक मोह-माया से विरक्ति और ईश्वर के प्रति अनन्य अनुराग का संदेश देता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस ऊर्जावान भजन को गाने और सुनने के लिए कोई कठोर नियम नहीं है, फिर भी इसे पूरी पवित्रता और श्रद्धा के साथ निम्नलिखित अवसरों पर गाया जा सकता है:

  • दैनिक पूजा और संध्या आरती: सुबह स्नान के पश्चात या संध्याकाल में बाबा बालक नाथ की ज्योति प्रज्वलित करते समय इस भजन का गान अत्यंत फलदायी होता है।
  • चौकी और जागरण: हिमाचल प्रदेश, पंजाब और अन्य राज्यों में होने वाली बाबा बालक नाथ की चौकियों और सुंदर झांकियों में यह मुख्य भजन के रूप में गाया जाता है।
  • रविवार का विशेष व्रत: बाबा बालक नाथ को समर्पित रविवार के व्रत और पूजन के दौरान इस भजन का श्रवण भक्तों को मानसिक शांति प्रदान करता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के केंद्र बिंदु बाबा बालक नाथ जी हैं, जिन्हें भगवान शिव के अंशावतार, दियोटसिद्ध वाले बाबा और दूध-रोट के धनी के रूप में पूजा जाता है। नाथ परंपरा में चिमटा धारण करने वाले योगी सिद्ध पुरुष माने जाते हैं। बाबा बालक नाथ ने बाल ब्रह्मचारी के रूप में कठोर तपस्या की थी और आज भी वे अपने भक्तों की पुकार सुनकर उनकी रक्षा के लिए तुरंत प्रकट होते हैं। उनके साथ श्री हनुमान चालीसा और अन्य शिव स्तोत्रों की तरह ही वीर रस और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिलता है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

लोक संस्कृति और पारंपरिक भक्ति संगीत की गोद में पले-बढ़े इस भजन की रचना किसी एक विशिष्ट कवि द्वारा नहीं, बल्कि पीढ़ी-दर-पीढ़ी लोक कलाकारों और बाबा के अनन्य भक्तों द्वारा संजोई गई है। यह पहाड़ी और पंजाबी लोक संगीत की शैली में रचित है, जो सीधे जनमानस के दिलों को छू लेती है। जब ढोलक, मंजीरे और चिमटे की गूंज के साथ यह भजन गाया जाता है, तो संपूर्ण परिवेश आध्यात्मिक उत्सव में बदल जाता है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल, सहज और लोक-निकट है, जिसमें हिंदी, पंजाबी और पहाड़ी बोलियों (लोकल डायलेक्ट्स) का सुंदर मिश्रण है। काव्य शैली की दृष्टि से इसमें प्रवाह, तुकांत (Rhyme) और ओज गुण की प्रधानता है। 'छनकार', 'धमाल', 'शाहतलाई', 'दियोटसिद्ध' जैसे स्थानीय और सांस्कृतिक शब्दों के प्रयोग से इसकी प्रामाणिकता और मिठास कई गुना बढ़ जाती है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें सिखाता है कि जीवन में कितनी भी कठिनाइयां क्यों न आएं, यदि सच्चे मन से ईश्वर और गुरु का स्मरण किया जाए, तो सारे संकट दूर हो जाते हैं। चिमटे की गूंज यह संदेश देती है कि हमें अपने भीतर की सुसुप्त चेतना को जगाना चाहिए और सांसारिक विकारों का त्याग कर बाबा की शरण में जाना चाहिए। जिस प्रकार बाबा बालक नाथ ने तपस्या से सिद्धियां प्राप्त कीं, उसी प्रकार हमें भी अपने कर्म पथ पर निष्ठावान रहना चाहिए।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / पद सरल हिंदी अर्थ संदर्भ / प्रसंग
चिमटा योगी संन्यासियों का लोहे का वाद्ययंत्र बाबा बालक नाथ का पवित्र प्रतीक
छनकार चिमटे से निकलने वाली मधुर ध्वनि भक्ति और ऊर्जा का नाद
शाहतलाई हिमाचल प्रदेश का प्रसिद्ध धार्मिक स्थल बाबा बालक नाथ की तपस्थली
दियोटसिद्ध बाबा बालक नाथ की मुख्य गुफा मुख्य पावन धाम एवं दर्शन स्थल
रोट आटे और गुड़ से बना विशेष मीठा प्रसाद बाबा को अर्पित किया जाने वाला भोग
निहाल प्रसन्न, तृप्त और आनंदित भक्ति से मिलने वाली परम संतुष्टि

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

भजन की पहली पंक्ति "चिमटे दी छनकार बाबा तेरे चिमटे दी, जेहड़ी पाउंदी फिरे धमाल..." यह दर्शाती है कि बाबा के चिमटे की आवाज मात्र से नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है और भक्त झूम उठते हैं। "शाहतलाई विच डेरा तेरा, दियोटसिद्ध गुफा नजारा" पंक्ति साधक को बाबा के भौतिक और आध्यात्मिक धामों के दर्शन कराती है। इसी प्रकार "रोट चढ़ांदे भगत प्यारे..." पंक्ति में भक्तों के समर्पण और बाबा के प्रति उनकी अटूट निष्ठा का सजीव चित्रण किया गया है। अंत में "तेरा नाम जपे जो कोई, हो जांदा मालामाल" यह संदेश देता है कि बाबा की भक्ति ही सबसे बड़ा धन है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

बाबा बालक नाथ के स्मरण और इस भजन के पाठ के साथ निम्नलिखित मंत्र का जाप अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है:

"ॐ ह्रीं श्रीं बालकनाथाय नमः"

या पारंपरिक जयकारा: "चिमटे वाले बाबा की जय! दियोटसिद्ध वाले बाबा बालक नाथ की जय!"

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम चिमटे दी छनकार बाबा तेरे चिमटे दी (Chimate Dee Chhanakaar)
आराध्य देव सिद्ध शिरोमणि बाबा बालक नाथ जी
रचनाकार / परंपरा पारंपरिक लोक भजन (Traditional Folk Bhajan)
भाषा हिंदी, पंजाबी एवं पहाड़ी मिश्रित
मुख्य थीम भक्ति, वैराग्य, महिमा गान एवं उत्सव
भाव (Bhava) उत्साह, उल्लास, समर्पण और आनंद
उपयुक्त अवसर रविवार व्रत, जागरण, चौकी, दियोटसिद्ध यात्रा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह लोकप्रिय भजन सिद्ध शिरोमणि भगवान शिव के अंशावतार बाबा बालक नाथ जी को समर्पित है।

बाबा बालक नाथ जी का मुख्य धाम हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले में स्थित दियोटसिद्ध गुफा और शाहतलाई में है।

बाबा बालक नाथ को आटे और गुड़ से बना 'रोट' (प्रसाद) तथा दूध-घी का भोग अत्यंत प्रिय है।

इस भजन को बाबा बालक नाथ की चौकियों, मेलों, रविवार के व्रतों और जागरण के दौरान विशेष रूप से गाया जाता है।

चिमटा नाथ योगियों और तपस्वियों का प्रतीक है, जो वैराग्य, साधना और नकारात्मक ऊर्जा के नाश का संदेश देता है।

हाँ, इस भजन को घर पर पूजा के दौरान या मन ही मन स्मरण करते हुए अकेले या परिवार के साथ पूरी श्रद्धा से गाया जा सकता है।

रविवार का दिन बाबा बालक नाथ जी की पूजा और व्रत के लिए सबसे उत्तम और पवित्र माना जाता है।

इस भजन के गायन और श्रवण से मन को शांति मिलती है, सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और बाबा की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख Bhaktilok.in के उच्च संपादकीय मानकों के तहत तैयार किया गया है। इसमें बाबा बालक नाथ की परंपरा, लोक संगीत के स्वरूप और प्रामाणिक लिरिक्स को सहेजा गया है। यह सामग्री पाठकों की आध्यात्मिक जिज्ञासा को शांत करने और उन्हें भक्ति मार्ग पर अग्रसर करने के लिए संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • उत्तर भारतीय लोक भक्ति संगीत परंपरा एवं नाथ संप्रदाय के ग्रंथ
  • हिमाचल प्रदेश के धार्मिक एवं सांस्कृतिक उत्सवों के संकलन
  • दियोटसिद्ध और शाहतलाई क्षेत्र की पावन कथाएं एवं लोकगीत

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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