भक्ति काव्य व भजन मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

आनंद लुट रहा है मोहन तेरी गली मे (Anand lut raha hai mohan teri gali me lyrics in hindi)

मोहन की गली में आनंद की लहरें। यह भजन भक्ति, समर्पण और मोक्ष की ओर मार्ग प्रशस्त करता है।

प्रस्तावना एवं परिचय

मोहन की गली में आनंद की धारा

इस भजन में मोहन की लीलाओं का वर्णन है, जो भक्तों को आनंदित करती हैं।

आनंद लुट रहा है मोहन तेरी गली मे भगतो का जमघट है, मोहन तेरी गली मे.. देवो का सर झुका है, मोहन तेरी गली मे.. और क्या बताऊ क्या है , मोहन तेरी गली मे.. बैकुंठ बस रहा है मोहन तेरी गली मे.. आनंद.... द्विज,सुदामा जैसे, कंगाल हो चुके थे.. अन्न-धन और वस्त्र के, उपवास हो चुके थे.. तेरी शरण लिए से, धनवान हो चुके थे होकर प्रसन मन मे, आपने यु कह रहे थे दौलत का दर खुला है, मोहन तेरी गली मे.. आनंद... वैश्या का शब्द सुनके, पंडित ने घर को छोड़ा.. आँखों को दोष पाया, उनसे भी नाता तोडा.. दो लेके गर्म सुए, आँखों को अपने फोड़ा.. बन सूरदास बोले, क्या खूब रिश्ता जोड़ा.. अँधा भी आ गया , मोहन तेरी गली मे... आनंद.. गज ग्राह जल के अंदर , लड़ने लगे लड़ाई.. गज हार गया बाजी, जान पे बन आई. मोहन को दी दुहाई, आकर हुई सहाई.. बहार निकल कर बोले, धन्य है तेरी प्रभुताई. क्या तार लग रहा है , मोहन तेरी गली मे... आनंद..
साझा करें:

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

भजन का मुख्य विषय प्रेम और भक्ति है जो श्रद्धालुओं को मोहन के प्रति उनके गली में होकर आनंदित करता है। 'भगतो का जमघट' बताता है कि जब भक्ति का भाव होता है, तब सभी भक्त एकत्र होते हैं, जिससे divine spirit की उपस्थिति का अनुभव होता है। कई पौराणिक कथाएँ हैं, जैसे द्विज और सुदामा, जो अपनी दरिद्रता के बावजूद मोहन की चरणों में आए और उनके आशीर्वाद से समृद्धि प्राप्त की। यह भक्ति का संदेश है कि मोहन की शरण में जाने से जीवन में सुझाग आता है और भक्तों की सभी इच्छाएँ पूर्ण होती हैं। प्रत्येक वस्तु जो भक्त की भक्ति को जोड़ती है, वह मोहन की लीला के अनुरूप होती है।

यहां भावार्थ का तात्पर्य यह है कि भक्ति के माध्यम से भक्त अंतर्मुखी हो जाता है और मोहन में रति और संतोष प्राप्त करता है। 'वैश्या का शब्द सुनके' पंडित का घर छोड़ देना और अपने भीतर देखने की प्रवृत्ति हमें यह सिखाती है कि भक्ति में सामाजिक मान्यताओं को छोड़कर व्यक्तिगत संबंध की ओर बढ़ना महत्वपूर्ण है। भक्त सूरदास का दृष्टि खो देना और मोहन में इस गहन साधना का अनुभव करना सिखाता है कि आत्मसंघर्ष और समर्पण का मार्ग कितना उदात्त होता है। यह दिखाता है कि भक्ति के बिना कोई भी ज्ञान या विद्या अधूरा है।

इस भजन का गहरा आध्यात्मिक भावार्थ है जो हमें भक्ति मार्ग के प्रति प्रेरित करता है। 'धन्य है तेरी प्रभुताई' का अर्थ यह है कि जब संदेश और कृपा का अनुभव होता है, तब भक्त प्रकट रूप से आनंदित हो उठता है। यह भक्ति का मार्ग उस समय प्रकट होता है जब भक्त अपने मन को मोहन के प्रति समर्पित करता है। शक्ति, शांति और आंतरिक आनंद की अनुभूति का अनुभव होता है। भक्ति साधक को बाहरी सुखों से मुक्त करने का माध्यम बनता है और अंततः मोक्ष की ओर ले जाता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का विचार प्राचीन भारतीय ग्रंथों, जैसे कि भागवत पुराण, से जुड़ा हुआ है। भागवत में भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन किया गया है, जिनमें द्विज, सुदामा और सूरदास जैसे विभिन्न पात्रों के माध्यम से भक्ति और कृपा की गहराई दिखाई गई है। 'मोहन तेरी गली में' कहने का अर्थ केवल भक्ति का स्थान नहीं है, बल्कि उसके प्रति अनुग्रह का भी संकेत है। भक्त जब कृष्ण की महिमा का गान करते हैं, तो वे अपने जीवन की समस्याओं को भुला कर केवल आनंद प्राप्त करते हैं।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का पाठ करने से भक्त मानसिक शांति प्राप्त कर सकता है तथा आध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर होता है। यह भक्तों को सकारात्मकता, सस्ती भक्ति और आनंद की दिशा में प्रेरित करता है। नियमित रूप से इस भजन का उच्चारण तनाव को कम करता है तथा मन को एकाग्र करने में सहायता करता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का गायन सुबह के समय करना विशेष लाभकारी होता है। साधक को सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान कर स्वच्छता बनाए रखनी चाहिए। एक दीया जलाकर या फूलों की माला अर्पित कर ध्यान लगाना चाहिए। सही मुद्रा में बैठकर 'मोहन तेरी गली में' का पाठ करने से मन में स्थिरता आती है और भक्ति भाव को प्रबल करता है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश है कि मोहन की शरण में आने से भक्त की सभी समस्याएँ हल हो जाती हैं और आंतरिक आनंद की प्राप्ति होती है।

क्या इस भजन का कोई विशेष समय है गायन के लिए?

विशेष रूप से सुबह का समय सर्वश्रेष्ठ होता है। इस समय ध्यान और मंत्रों की शक्ति प्रभावशाली होती है।

इस भजन का आनंद किस प्रकार प्राप्त किया जा सकता है?

इस भजन का पाठ करने से मानसिक शांति, भक्ति में वृद्धि और चिंता से मुक्ति मिलती है, जिससे भक्त का मन स्थिर रहता है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!