भक्ति काव्य व भजन मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

तेरा सजा दिया दरबार मैया आ जाओ भजन लिरिक्स (Tera Saja Diya Darbar Maiya Aa Jaao Bhajan Lyrics ) - Sherawali Mata Bhajan

माँ दुर्गा को समर्पित यह भजन श्रद्धा और भक्ति का इजहार करता है। इसका जाप भक्तों को आंतरिक शांति और ऊर्जा प्रदान करता है।

प्रस्तावना एवं परिचय

माँ शेरावाली का प्रेरक भजन

माँ दुर्गा के दरबार में लीन होकर इस भजन के माध्यम से श्रद्धा और भक्ति प्रकट करें।

तेरा सजा दिया दरबार मैया आ जाओ तेरा लगा दिया दरबार मैया आ जाओ मैया आ जाओ मैया आ जाओ माँ आ जाओ माँ आ जाओ तेरे दरपर अखबर आया था सोने का छत्र चढ़ाया था तूने नही किया स्वीकार मैया आ जाओ तेरा सजा दिया दरबार मैया आ जाओ तेरे दर पर ध्यानु आया था उसे काट के शीश चढ़ाया था तूने कर दिया बेडा पार मैया आ जाओ तेरा सजा दिया दरबार मैया आ जाओ तेरे दर पर हम भी आये हैं दर्शन की आशा लाये हैं हो मैया दे दो दर्शन आज मैया आ जाओ तेरा सजा दिया दरबार मैया आ जाओ ओ देखो मैया आने लगी भक्तों को दर्शन देने नहीं तेरी हो रही जय जयकार मैया आ जाओ तेरा सजा दिया दरबार मैया आ जाओ तेरा सजा दिया दरबार मैया आ जाओ तेरा लगा दिया दरबार मैया आ जाओ मैया आ जाओ मैया आ जाओ माँ आ जाओ माँ आ जाओ
साझा करें:

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य विषय माँ दुर्गा के प्रति श्रद्धा और भक्ति का प्रकटीकरण है। झुकते हुए हृदय से, भक्त माँ से निवेदन कर रहा है कि 'तेरा सजा दिया दरबार मैया आ जाओ', जैसे भक्त माँ के दरबार को सजाने में लगे हैं। यह एक भक्ति भाव का संकेत है कि यदि भक्त मन से माँ की आराधना करें, तो माँ स्वयं भक्त के पास आ जाएगी। इससे यह संदेश मिलता है कि सच्चे हृदय की प्रार्थना और भक्ति का उत्तर अवश्य मिलता है। भजन में माँ द्वारा भक्तों के लिए आवाहन का उद्घाटन भी है, जिसके तहत भक्त दरबार में माँ की उपस्थिति के लिए पुनः पुकारते हैं।

भावार्थ के अनुरूप, इस भजन में भक्त की उम्मीद और विश्वास का दृश्य उभरता है। 'तेरे दर पर हम भी आये हैं' वाक्य से यह जाहिर होता है कि भक्त केवल दर्शन के लिए नहीं, बल्कि अपने कष्टों और समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए माँ के पास आ रहे हैं। यहाँ पर ध्यान दें कि ये भक्त केवल व्यक्तिगत लाभ की चाह नहीं रखते, बल्कि माँ के प्रति अपनी कृतज्ञता और भक्ति को प्रकट करने का भी एक साधन है। 'तूने कर दिया बेड़ा पार मैया आ जाओ' इस पंक्ति में माँ की अद्भुत शक्ति और कृपा का जिक्र है, जो भक्तों को कठिनाइयों से पार ले जाने वाली है।

भक्ति मार्ग का यह एक अद्भुत उदाहरण है जहाँ भक्त की मानसिकता सिर्फ भौतिक चीजों तक सीमित नहीं है। यहाँ माँ की उपासना केवल भक्ति की एक विधि नहीं, बल्कि एक गहरे आध्यात्मिक अनुभव का हिस्सा है। भक्त का समर्पण, प्रेम एवं श्रद्धा माँ के प्रति स्थायी रूप से विद्यमान है। यह धार्मिकता को स्वरूप प्रदान करता है और भक्ति का अर्थ गहराई में दर्शाता है। भजन की रचना ने भक्तों को एकत्र करके एकता एवं प्रेम का संदेश दिया है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का महत्व न केवल धार्मिकता में है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति में नारी शक्ति की उपासना का भी प्रतीक है। माँ दुर्गा, जो कि शक्ति, साहस और विश्वास की देवी हैं, को मानने वाले भक्त हर परिस्थिति में माँ की कृपा की कामना करते हैं। पुराणों में माँ दुर्गा की महानता का उल्लेख मिलता है, जहाँ उन्होंने दानवों का संहार कर संसार को पवित्र किया। इस भजन के द्वारा भक्तों का यह विश्वास जगाया जाता है कि जब माँ का स्मरण और आराधना होती है, तब सभी संकट दूर हो सकते हैं। उनकी उपासना से व्यक्ति में आत्मविश्वास का संचार होता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का नियमित अभ्यास श्रवण, मानसिक शांति, और आत्मिक शक्ति का संचार करता है। यह भक्तो में भक्ति भाव को प्रगाढ़ करता है, जिससे वे अपने जीवन में सकारात्मकता और उत्साह अनुभव करते हैं। मानसिक एवं आध्यात्मिक लाभ के अतिरिक्त, यह भजन विधि के अनुसार वातावरण को भी भक्तिमय बना देता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप भोर में या संध्या के समय करना सबसे शुभ माना जाता है। यहाँ परदीप जलाना, फूलों की माला चढ़ाना और मीठी वस्तुएं अर्पित करना अनिवार्य है। भक्त को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे ध्यान की मुद्रा में बैठें और मन एकाग्र रखें। मन में माँ का चित्र या स्वरूप बनाकर भजन का उच्चारण किया जाना चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

क्या यह भजन माँ दुर्गा की सभी नवरात्रों में गाया जा सकता है?

हाँ, यह भजन नवरात्रों के दौरान और अन्य किसी खास अवसर पर माँ दुर्गा को समर्पित किया जा सकता है। इसकी भक्ति शक्ति भक्तों को उत्कृष्ट अनुभव देती है।

इस भजन को किस प्रकार के अनुष्ठान में शामिल किया जा सकता है?

इस भजन को पूजा या हवन के दौरान शामिल किया जा सकता है, जैसे माँ का आह्वान करते समय। यह भक्तों का मनोबल बढ़ाने एवं आस्था को सशक्त बनाने में सहायक है।

क्या यह भजन कोई विशेष सिद्धि दिला सकता है?

इस भजन का नियमित जाप मानसिक शांति और संतोष दे सकता है, जिसके सक्षम होने पर भक्ति मार्ग में धन्यता प्राप्त की जा सकती है। यह व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन भी लाता है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!