भक्ति काव्य व भजन मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

संगतां बड़ीयां दर ते खड़ीयां

पढ़ें संगतां बड़ीयां दर ते खड़ीयां का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार्थ, पूजा विधि एवं आध्यात्मिक महत्व भक्तिलोक पर।

पावन भजन संकीर्तन

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स, अर्थ एवं आध्यात्मिक भावार्थ

दिनांक: मार्च 2024 | श्रेणी: भक्ति रस एवं सत्संग | लेखक: भक्तिलोक विद्वत मंडल

सनातन भक्ति परंपरा में संकीर्तन, नामस्मरण और दरबार में हाजिरी लगाने का अत्यंत विशिष्ट स्थान है। जब भक्त अपने आराध्य के पावन दरबार में नतमस्तक होने के लिए पहुंचते हैं, तो उनके अंतस का प्रेम और विरह छलक उठता है। यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "संगतां बड़ीयां दर ते खड़ीयां" ईश्वर और सतगुरु के प्रति अनन्य प्रेम, अटूट विश्वास और पूर्ण शरणागति का एक जीवंत और अद्भुत उदाहरण है। कलयुग के इस भौतिकतावादी युग में जहाँ मन नाना प्रकार की चिंताओं और विकारों से घिरा रहता है, ऐसे में भगवन्नाम और संतों के दरबार की शरण में जाना ही जीवात्मा के लिए एकमात्र शांति का मार्ग है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा या सतगुरु) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है। भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त सांसारिक कार्यों और दायित्वों को निभाते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह भवसागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है। आइए इस पावन भजन के संपूर्ण बोल, विस्तृत अर्थ, भावार्थ और इसकी आध्यात्मिक महत्ता को विस्तार से जानते हैं।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

संगतां बड़ीयां दर ते खड़ीयां,
अरज मंदिरां विच करदीयां...
दर्शन दे दो साहिब मेरे,
आस लगा के बैठीयां नीरीयां...

दूर-दूर तों चल के आयां,
मन विच प्रीति दा दीप जलायां,
चरणों विच आके शीश झुकाया,
झोली अडा के सब ने पाया।

दुनियादारी तों मन मोड़िया,
रिश्ता एह संसार नाल तोड़िया,
तेरा नाम ही बस चित्त जोड़िया,
दामन तेरे नाल दिल जोड़िया।

बख्श लो दाता भूले सारे,
चरण कमलन दे असीं भिकारी बयारे,
मेहर दी नजर इक पा दो प्यारे,
कट जाओ सारे बंधन हमारे।

संगतां बड़ीयां दर ते खड़ीयां,
अरज मंदिरां विच करदीयां,
जयकारा गूँजे दरबार दा,
आनंद आवे सच्चे प्यार दा!

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन साधक की परमेश्वर या सतगुरु के प्रति उस तीव्र उत्कंठा और प्रतीक्षा को दर्शाता है जब वह सब कुछ छोड़कर केवल प्रभु के दरबार में अपनी हाजिरी लगाने पहुंचता है। पंक्तियों के माध्यम से कवि वर्णन करता है कि किस प्रकार भक्तों का समूह (संगत) बड़े ही भाव और अनुशासन के साथ अपने इष्ट के द्वार पर हाथ जोड़े खड़ी है। उनके दिलों में केवल एक ही कामना है कि उन्हें अपने प्रियतम का एक झलक दर्शन प्राप्त हो जाए।

भजन के अंतरा में कहा गया है कि भक्तजन दूर-दूर के नगरों और गांवों से चलकर इस पावन दरबार में पहुंचे हैं। उनके मन में भक्ति का दीप जल रहा है। सांसारिक मोह-माया और दुखों से विरक्त होकर उन्होंने अपना मन केवल भगवान के चरणों में समर्पित कर दिया है। वे संसार के झूठे रिश्तों से नाता तोड़कर केवल उस शाश्वत परम सत्ता के साथ अपना आत्मीय संबंध जोड़ चुके हैं। साधक अपनी गलतियों और भूल-चूक के लिए क्षमा मांगते हुए दया की भीख मांगता है कि हे दाता! हमारे सभी कर्म बंधनों को काट दीजिए और अपनी कृपा का अमृत बरसा दीजिए। यह भावार्थ हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति वही है जिसमें अहंकार का पूर्ण त्याग और भगवान के प्रति पूर्ण समर्पण हो।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

सनातन संस्कृति में सत्संग और संकीर्तन को सबसे बड़ा अनुष्ठान माना गया है। श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।

  • शरणागति का संदेश: यह भजन जीव को भगवान के चरणों में पूरी तरह समर्पित होने की प्रेरणा देता है।
  • सामूहिक भक्ति की शक्ति: 'संगतां' शब्द इस बात का प्रतीक है कि अकेले जप करने की अपेक्षा सामूहिक रूप से (संगत में बैठकर) भगवान का गुणगान करना ऊर्जा को कई गुना बढ़ा देता है।
  • मोह-माया से मुक्ति: यह भजन संसार के पाशविक बंधनों को तोड़कर केवल दिव्यता से जुड़ने का मार्ग दिखाता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस पावन भजन को किसी भी पवित्र अवसर पर गाया जा सकता है। विशेष रूप से निम्नलिखित अवसरों पर इसका गायन और श्रवण अत्यंत फलदायी माना गया है:

  • प्रातःकालीन व सायंकालीन बेला: घर के पूजा स्थल पर दीपक प्रज्वलित करने के पश्चात शांत मन से इस भजन का स्मरण करना मानसिक शांति प्रदान करता है।
  • सत्संग और जागरण: धार्मिक मेलों, चौकियों, और साप्ताहिक सत्संग के दौरान इस भजन को समूह में गाने से पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है।
  • विशेष पर्व एवं व्रत: नवरात्रि, पूर्णिमा, एकादशी या किसी भी पावन धार्मिक उत्सव पर इस भजन का गान करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन किसी एक विशिष्ट रूप तक सीमित न होकर संपूर्ण सनातन चेतना, सतगुरु परंपरा और इष्ट देव (चाहे वह श्री कृष्ण हों, माता रानी हों, श्री राम हों या कोई पावन गुरु दरबार) के प्रति समर्पित है। भारतीय संत परंपरा में 'दरबार' शब्द का गहरा अर्थ है—वह पावन स्थान जहाँ हर दुखी, पीड़ित और जिज्ञासु जीव को आश्रय और शांति मिलती है। संतों और महात्माओं ने हमेशा यही उपदेश दिया है कि प्रभु का दरबार ही एकमात्र ऐसा स्थान है जहाँ जाति, पाँति, ऊंच-नीच के भेद से परे केवल प्रेम और भक्ति का सम्मान होता है। आप अधिक जानकारी के लिए हमारे श्री हनुमान चालीसा और शिव तांडव स्तोत्र के पावन ग्रंथों का भी अध्ययन कर सकते हैं।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
संगतां भक्तों का समूह / संगत सत्संग में एकत्रित साधकगण
दर ते द्वार पर / चौखट पर परमात्मा या गुरु का पवित्र दरबार
अरज प्रार्थना / निवेदन भगवान के समक्ष आत्मा की पुकार
दामन पल्ला / आंचल पूर्ण शरणागति का प्रतीक
बख्श लो क्षमा करना / कृपा करना अज्ञानता और पापों से मुक्ति

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"संगतां बड़ीयां दर ते खड़ीयां, अरज मंदिरां विच करदीयां..."
भावार्थ: भक्तों का विशाल समूह अपने आराध्य के दरबार के बाहर अत्यंत विनम्रता और श्रद्धा के साथ खड़ा है। उनके मन में केवल एक ही पुकार गूँज रही है कि हे प्रभु! हमारी विनती स्वीकार कीजिए।

"दुनियादारी तों मन मोड़िया, रिश्ता एह संसार नाल तोड़िया..."
भावार्थ: सच्ची भक्ति की पहली शर्त है कि मनुष्य का मोह सांसारिक प्रलोभनों से हटे। भक्तों ने संसार के नश्वर बंधनों से अपना मन हटाकर अपनी प्रीति केवल शाश्वत ईश्वर के साथ जोड़ ली है।

"बख्श लो दाता भूले सारे, चरण कमलन दे असीं भिकारी..."
भावार्थ: जीव अपनी कमियों और भूलों को स्वीकार करते हुए भगवान के चरण कमलों में भिक्षा मांग रहा है कि हे सर्वशक्तिमान! हमारी भूलों को क्षमा कर हमें अपनी भक्ति का दान दीजिए।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम संगतां बड़ीयां दर ते खड़ीयां (Sangtaan Badiyan Dar Te Khadiyaan)
समर्पित भाव शरणागति, विरह, प्रेम और प्रार्थना
भाषा पंजाबी मिश्रित हिंदी (सन्त भाषा)
मुख्य विषय सतगुरु/भगवान के दरबार में हाजिरी और कृपा प्राप्ति
उपयुक्त अवसर सत्संग, जागरण, प्रातःकालीन वंदना

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस भजन का मुख्य संदेश ईश्वर के चरणों में पूर्ण शरणागति, सांसारिक मोह-माया का त्याग और सच्चे मन से प्रभु के दरबार में हाजिरी लगाना है।

इस पावन भजन को सत्संग, साप्ताहिक जागरण, घर की पूजा, प्रातःकालीन प्रार्थना और किसी भी धार्मिक अनुष्ठान के दौरान अत्यंत श्रद्धा के साथ गाया जा सकता है।

'संगत' का तात्पर्य ईश्वर या गुरु के सत्संग में एकत्रित होने वाले उन भक्तों के समूह से है जो सामूहिक रूप से भगवान का गुणगान करते हैं।

दरबार वह पवित्र आध्यात्मिक केंद्र है जहाँ जीवात्मा को अपने दुखों से मुक्ति मिलती है और सतगुरु की अहैतुत कृपा प्राप्त होती है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री भक्तिलोक (Bhaktilok) के विद्वान संपादकों द्वारा सनातन धर्म की भजन परंपरा, लोकगीतों और संतों के उपदेशों के गहन अध्ययन के पश्चात तैयार की गई है। इस लेख का उद्देश्य पाठकों तक शुद्ध भक्ति साहित्य पहुँचाना है। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।

स्रोत एवं संदर्भ

1. श्रीमद्भगवद्गीता - भक्ति योग अध्याय
2. पारंपरिक संत वाणी एवं लोक संकीर्तन संग्रह
3. सनातन भक्ति एवं सत्संग ग्रंथमाला

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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