Parvati Stotram

ओम श्री गणेश काटो सकल कलेश (Om Shri Ganesh kato sakal kalesh Lyrics in Hindi)

101 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रस्तावना एवं परिचय

गणेश कृपा: संकटों का नाशक मंत्र

श्री गणेश की कृपा से सभी दुखों का नाश करें, संपूर्ण मन से इस भजन का जाप करें।

ओम श्री गणेश काटो सकल कलेश ओम श्री गणेश ओम श्री गणेश माँ गौरा के लाडले शिव शंकर के लाडले काटो सकल कलेश ओम श्री गणेश...... तेरा सिर ते हाथ जे होवे गणपति का साथ जे होवे माँ गौरा के लाडले शिव शंकर के लाडले मेरे कंठ करो परवेश ओम श्री गणेश..... रिद्धि सिद्धि के भाग्य विधाता मेरे तेरा तू मेरे दाता तू ही भक्षण हारी है तेरे खेल अनेक ओम श्री गणेश...... विघ्न हरदे मंगल करदे गणपति सब दी झोली भर देन मन नू गणपति देना ज्ञान विवेक ओम श्री गणेश..... विच सभा दे लाज बचावी मूर्ख नू वी ज्ञान सिखावी योगी निमाने दे गणपति रेहना साथ हमेश ओम श्री गणेश.... ओम श्री गणेश ओम श्री गणेश
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य विषय गणेश जी की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त करना है। पहले पद में वर्णित है कि 'ओम श्री गणेश काटो सकल कलेश' से साधक अपने सभी दुखों और कठिनाइयों का नाश करने का आह्वान कर रहा है। गणेश जी, जिन्हें माँ गौरा और शिव शंकर का लाडला कहा गया है, का गुणगान किया गया है। इससे स्पष्ट होता है कि वे हर बाधा और विघ्न को समाप्त करने वाले हैं। अगला पद 'तेरा सिर ते हाथ जे होवे, गणपति का साथ जे होवे' में भक्त भगवान गणेश की उपस्थिति की भावना को दर्शाता है। इसके माध्यम से भक्त परमेश्वर के सानिध्य को पाने के लिए प्रार्थना करता है। इस प्रकार, भक्त का यह निवेदन गणेश जी के प्रति अपनी भक्ति और उनकी सहायता की आकांक्षा को इंगित करता है।

भजन का भावार्थ केवल गणेश जी की महिमा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भक्त के मन में विश्वास और श्रद्धा को भी जगाता है। 'रिद्धि सिद्धि के भाग्य विधाता' पंक्ति में यह बताया गया है कि गणेश जी समृद्धि और सफलता के ऊर्जा स्रोत हैं। भक्त उनकी कृपा से अपने जीवन में सुख, समृद्धि और ज्ञान की प्राप्ति की कामना करता है। गणेश जी को 'विघ्न हरदे' और 'मंगल करदे' कहा गया है, जो दर्शाता है कि वे सभी विघ्नों को दूर करके मंगल की स्थितियों का निर्माण करते हैं। इसका अर्थ न केवल भौतिक दृष्टि से, बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से भी जीवन को सकारात्मक दिशा में ले जाने का है। अंत में, 'योगी निमाने दे गणपति' का उल्लेख भक्तों को प्रेरणा देता है कि वे सदा आनन्द और संतोष के साथ रह सकें।

इस भजन में धर्म और अध्यात्म का गहरा संबंध है, जहां भक्त भगवान गणेश को न सिर्फ एक देवता, बल्कि मार्गदर्शक और सुख-शांति की सृष्टि करता देखता है। गणेश जी का पूजन विधि-विधान से संपन्न किया जाता है, जहां भक्त उन्हें सिर से लेकर हाथों तक का आशीर्वाद प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। यह भजन भक्ति मार्ग (Bhakti Marg) का एक आह्वान है, जो सभी जनों के लिए है, विशेषकर उन लोगों के लिए जो जीवन में कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। भक्त इस भजन के माध्यम से यह सीखता है कि सच्ची भक्ति और श्रद्धा से हर संकट का समाधान संभव है। गणेश का नाम लेने से शक्ति और साहस मिलता है, जिससे भक्त अपने मन के भय और आशंका को दूर कर सके।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

भगवान गणेश का पूजन भारतीय संस्कृति में अति महत्वपूर्ण है, मुख्यतः उनकी विघ्ननाशक शक्तियों के लिए। पुराणों में वर्णित है कि जब भगवान शिव और माता पार्वती ने गणेश जी को प्रकट किया, तब उन्होंने सभी कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति प्राप्त की। गणेश जी की उपासना से न केवल भौतिक सुख-सुविधाएं प्राप्त होती हैं, बल्कि आंतरिक शांति और संतोष भी मिलता है। इसीलिए, इस भजन का महत्व बहुत अधिक है, क्योंकि यह भक्त को भगवती का निर्देश देता है और जीवन में आशीर्वाद प्राप्त करने का एक साधन बनता है। इस मंत्र का जाप करने से व्यक्ति का मन सन्मार्ग पर अग्रसर होता है और साधक को विश्वसनीयता, ज्ञान, और विवेक का अनुभव होता है।

प्रथम पूज्य श्री गणेश जी के जन्म और उनकी कथाओं का संपूर्ण विवरण जानने के लिए ब्रह्म पुराण गणेश महिमा का पाठ करें। इस भजन का नियमित जाप मानसिक तनाव को कम करने, आत्मविश्वास बढ़ाने और आंतरिक शांति की प्राप्ति में सहायक है। भक्त पूजा-पाठ में अपनी श्रृंगारिकता को दर्शाते हुए अपने जीवन में सकारात्मकता लाते हैं। इससे समस्याओं का समाधान तीव्रता से होता है तथा जीवन में खुशहाली आती है। गणेश जी की आराधना करने से भक्त को समृद्धि, बुद्धि, और सफलता की प्राप्ति होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का उच्चारण सुबह के समय करना श्रेष्ठ माना जाता है। भक्त को चाहिए कि वे एक स्वच्छ स्थान पर बैठें और अपने सामने दीया जलाएं। भजन की शुरुआत से पहले ध्यान का प्रयास करें और मन को शांति में लाने का प्रयास करें। निस्वार्थ भक्ति भाव से इस भजन का नियमित रूप से पाठ करना चाहिए। उचित परिधान में बैठकर, गणेश जी के चित्र के सामने ध्यान लगाएं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

गणेश जी की पूजा का महत्व क्या है?

गणेश जी की पूजा का महत्व अत्यधिक है, क्योंकि उन्हें विघ्नहर्ता और समृद्धि के दाता माना जाता है। वे सभी बाधाओं को दूर करके अपने भक्तों को सफलता के मार्ग पर अग्रसर करते हैं।

इस भजन का जाप कब करना चाहिए?

इस भजन का जाप सुबह या शाम के समय करना चाहिए, जब मन शांत हो, ताकि भक्ति भाव से भगवान गणेश का स्मरण किया जा सके।

कौन से मंत्र गणेश जी की कृपा पाने में सहायक होते हैं?

गणेश जी की कृपा पाने के लिए 'ओम श्री गणेशाय नम:' और 'गणेश सुत्र' जैसे मंत्रों का जाप भी अत्यधिक लाभदायक होता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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