भक्ति काव्य व भजन मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

मैं आया हूँ शरण तेरी मुझे अब तुम संभालोगे (main aaya hun sharan teri mujhe ab tum sambhaloge Lyrics in Hindi)

मैं आया हूँ शरण तेरी मुझे अब तुम संभालोगे भजन के लिरिक्स, हिंदी अर्थ और भावार्थ पढ़ें। जानिए इस पावन समर्पण गीत का आध्यात्मिक महत्व।

सनातन संस्कृति और भक्ति रस से ओत-प्रोत भजन 'मैं आया हूँ शरण तेरी मुझे अब तुम संभालोगे' जीवात्मा की उस अनन्य पुकार का जीवंत प्रतीक है, जो संसार के असार प्रपंचों से विरक्त होकर अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) की शरण में पूर्ण समर्पण चाहती है। कलयुग के इस महान भौतिक युग में जब मनुष्य चारों तरफ से दुखों, चिंताओं, और सांसारिक बंधनों से घिर जाता है, तब भगवान की शरणागति ही एकमात्र ऐसा साधन बचती है जो भय और संताप का नाश करती है। इस भजन का प्रत्येक शब्द साधक की दीनता, करुणा, और प्रभु के प्रति अगाध प्रेम को प्रकट करता है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस पावन भजन के सम्पूर्ण लिरिक्स, सरल हिंदी अर्थ, भावार्थ, आध्यात्मिक महत्व, गायन की विधि और जीवन दर्शन का गहन अध्ययन करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

भक्ति भाव और शुद्ध उच्चारण के साथ संकीर्तन करें:


मैं आया हूँ शरण तेरी, मुझे अब तुम संभालोगे ।

न दुनिया जीने देती है, मुझे अब तुम संभालोगे ॥


न शक्ति है मेरे तन में, न भक्ति है मेरे मन में ।

ओ बाबा भक्ति की ज्योति, बताओ कब जगाओगे ॥

[मैं आया हूँ शरण तेरी...]


मेरे न भाई-बंधू हैं, न मेरा कोई हितकारी ।

प्रभु तर दास जायेगा, गले से जब लगाओगे ॥

[मैं आया हूँ शरण तेरी...]


तू मेरा है - हूँ मैं तेरा, मुझे अपना बना लो तुम ।

जपे तेरा नाम ये ‘गौरी’, प्रभु तुम कब बुलाओगे ॥

[मैं आया हूँ शरण तेरी...]

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन केवल शब्दों का समूह नहीं, बल्कि एक साधक और उसके आराध्य के बीच का हृदयस्पर्शी संवाद है। पहले मुखड़े में भक्त कहता है कि हे प्रभु! मैं सब तरफ से थक-हार कर आपकी शरण में आया हूँ। यह भौतिक संसार मुझे चैन से जीने नहीं देता, इसकी विसंगतियाँ और मोह-माया मुझे पग-पग पर प्रताड़ित करती हैं, इसलिए अब केवल आप ही मेरी रक्षा कर सकते हैं और मुझे संभाल सकते हैं।

दूसरे अंतरे में साधक अपनी कमजोरी और असमर्थता को स्वीकार करता है। वह कहता है कि न तो मेरे शरीर में सांसारिक या आध्यात्मिक संघर्ष करने की शक्ति बची है और न ही मेरे मन में सच्ची भक्ति का संबल है। हे बाबा! मेरे भीतर अज्ञान का अंधकार छाया है, आप अपनी कृपा की ज्योति जलाकर मेरे मन को कब प्रकाशित करोगे?

तीसरे चरण में भक्त की परम विरक्ति और अनन्य शरणागति दिखाई देती है। वह संसार के स्वार्थी संबंधों से मोहभंग होने के बाद भगवान को ही अपना एकमात्र सगा मानता है। वह भावुक होकर निवेदन करता है कि इस भवसागर से पार उतरने का मार्ग केवल आपकी कृपा है। जब आप मुझे अपनी भुजाओं से गले लगा लेंगे, तभी मेरा उद्धार संभव है।

अंतिम चरणों में रचयिता ‘गौरी’ जी ने जीव और ब्रह्म के अद्वैत संबंध को रेखांकित किया है— "तू मेरा है - हूँ मैं तेरा"। यह आत्मसमर्पण की पराकाष्ठा है। भक्त निरंतर प्रभु का नाम जपते हुए उस परम मिलन की प्रतीक्षा कर रहा है कि हे प्रभु! आप मुझे अपनी दिव्य धाम में कब बुलाएंगे।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

सनातन परंपरा में शरणागति (Surrender) को भक्ति का सबसे ऊंचा चरण माना गया है। श्रीमद्भागवत गीता में भी भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को यही उपदेश दिया है कि सभी धर्मों को छोड़कर केवल मेरी शरण में आ जाओ, मैं तुम्हारे सभी पापों से मुक्त कर दूंगा। यह भजन ठीक उसी दार्शनिक सिद्धांत पर आधारित है। इसे गाने और सुनने से मन का अहंकार गलता है, मानसिक अशांति दूर होती है और भगवान के प्रति अगाध विश्वास पैदा होता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को आप निम्नलिखित अवसरों और समय पर गा सकते हैं:

  • प्रातःकाल और संध्याकालीन दैनिक पूजा के समय।
  • घर में होने वाले साप्ताहिक सत्संग या संकीर्तन के दौरान।
  • एकांत साधना, ध्यान या मानसिक शांति के क्षणों में।
  • एकादशी, पूर्णिमा या किसी भी पावन व्रत के अवसर पर।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन किसी एक विशिष्ट रूप तक सीमित न होकर आराध्य देव (विशेषकर भगवान श्री कृष्ण, खाटू श्याम बाबा, भोलेनाथ या संकटमोचन हनुमान जी) के प्रति समर्पित किया जा सकता है। इसे प्रायः संकीर्तन मंडलियों में 'बाबा' कहकर अपने इष्टदेव को संबोधित करते हुए गाया जाता है। इसकी रचना 'गौरी' नामक भक्त द्वारा की गई है, जिन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से लोक-मानस को भक्ति से जोड़ने का महान कार्य किया है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

भजन की रचना लोक-भक्ति परंपरा की शैली में हुई है। संत और भक्त कवियों ने हमेशा से ही सरल हिंदी और ब्रधी-अवधी मिश्रित बोलचाल की भाषा का प्रयोग किया है ताकि आम जनमानस भगवान के साथ सीधे भावनात्मक जुड़ाव महसूस कर सके। यह भजन करुणा, विनय और विरह के भाव से ओत-प्रोत है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन में शुद्ध और सुबोध हिंदी भाषा का प्रयोग किया गया है। इसमें अनुप्रास और उपमा अलंकारों का सहज प्रयोग हुआ है। पद-विन्यास ऐसा है कि संगीत के पारंपरिक वाद्यों (ढोलक, हारमोनियम और मंजीरा) के साथ गाते ही श्रोता मंत्रमुग्ध हो जाते हैं।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

इस भजन से हमें निम्नलिखित जीवनोपयोगी शिक्षाएं मिलती हैं:

  1. अहंकार का त्याग: जब तक मनुष्य खुद को सर्वसर्वा समझता है, तब तक उसे दुख मिलते हैं। अहंकार के मिटने पर ही ईश्वर की कृपा शुरू होती है।
  2. पूर्ण शरणागति: संकट के समय दुनिया से आस छोड़कर केवल परमेश्वर पर भरोसा रखना चाहिए।
  3. नाम स्मरण: निरंतर ईश्वर का नाम जपना ही इस कलयुग में भवसागर पार करने की नौका है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
शरण तेरी आपकी शरण में भगवान के चरणों में पूर्ण समर्पण
हितकारी हित चाहने वाला / शुभचिंतक संसार में ईश्वर ही एकमात्र सच्चा हितकारी है
भक्ति की ज्योति ज्ञान और प्रेम का प्रकाश हृदय में परमात्मा के प्रति प्रेम जागृत होना
भवसागर दुखों से भरा संसार जन्म-ममृत्यु का चक्र

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"न शक्ति है मेरे तन में, न भक्ति है मेरे मन में..." — इस पंक्ति में साधक अपनी पूर्ण लाचारी व्यक्त करता है। वह कहता है कि मेरे पास भौतिक बल या हठयोग की सामर्थ्य नहीं है और न ही मेरा मन एकाग्र होकर भजन में लगता है। हे प्रभु! मेरी इस कमजोरी को दूर करने का सामर्थ्य केवल आप में है। जब आप अपनी कृपा दृष्टि डालेंगे, तभी मेरे भीतर भक्ति का प्रकाश होगा।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के भाव को पुष्ट करने वाला अत्यंत प्रसिद्ध श्लोक:

"कार्दोषस्वभावः प्रपन्नोऽस्मीति तव शरणं गतः।"

अर्थात्: हे प्रभु! मैं आपके स्वभाव को जानता हूँ, मैं पूरी तरह से शरणागत होकर आपकी शरण में आया हूँ, अब मेरी रक्षा करना आपका दायित्व है।

आप इस प्रसंग के साथ श्री हनुमान चालीसा और शिव तांडव स्तोत्र का भी पाठ कर सकते हैं जो मन को असीम शक्ति प्रदान करते हैं।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

विशेषता विवरण
भजन का नाम मैं आया हूँ शरण तेरी मुझे अब तुम संभालोगे
विषय / थीम पूर्ण शरणागति, विनय और भक्ति
प्रमुख भाव करुणा, विरह, और समर्पण (Surrender)
भाषा सरल हिंदी (Devanagari)
रचयिता भक्त ‘गौरी’ जी
उपयुक्त अवसर सत्संग, संकीर्तन, दैनिक पूजा और ध्यान

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

"मैं आया हूँ शरण तेरी" भजन का मुख्य भाव क्या है?

इस भजन का मुख्य भाव ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम, दीनता और पूर्ण शरणागति (Surrender) है।

इस भजन को कब और कैसे गाया जाना चाहिए?

इसे प्रातःकालीन वंदना, संध्या आरती या सत्संग के दौरान हारमोनियम और ढोलक के साथ प्रेमपूर्वक गाया जा सकता है।

क्या इस भजन को किसी विशेष देवता के लिए गाया जा सकता है?

हाँ, इसे भगवान श्री कृष्ण, खाटू श्याम बाबा, शिवजी या अपने इष्टदेव को समर्पित करते हुए गाया जा सकता है।

भजन में 'गौरी' शब्द का क्या तात्पर्य है?

यह इस भजन के रचयिता की मुहर (छाप) है, जो पारंपरिक संतों और भक्त कवियों द्वारा रचना के अंत में उपयोग की जाती है।

शरणागति भक्ति का क्या महत्व है?

शरणागति का अर्थ है अपने अहंकार का त्याग कर भगवान को ही सब कुछ मान लेना, जिससे सारे मानसिक कष्ट दूर हो जाते हैं।

क्या यह भजन शुरुआती संगीत प्रेमियों के लिए आसान है?

हाँ, इसकी धुन बहुत सरल और तालबद्ध है, जिसे कोई भी आसानी से सीख सकता है।

इस भजन को गाने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है?

इसे गाने से मन शांत होता है, भगवान के प्रति विश्वास बढ़ता है और जीवन की कठिनाइयों से लड़ने की आंतरिक शक्ति मिलती है।

क्या ऐसे अन्य भजन भी भक्तिलok पर उपलब्ध हैं?

हाँ, हमारी वेबसाइट पर आपको दर्जनों प्रसिद्ध भजन, चालीसा और स्तोत्र मिल जाएंगे।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख हमारे विद्वान आचार्यों और सांस्कृतिक शोधकर्ताओं द्वारा सनातन भक्ति परंपरा के ग्रंथों और लोक-साहित्य के अध्ययन के आधार पर संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसका उद्देश्य पाठकों को शुद्ध पाठ, सही भावार्थ और आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान करना है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • सनातन भक्ति साहित्य एवं पारंपरिक संकीर्तन संग्रह।
  • श्रीमद्भागवत गीता – शरणागति योग अध्याय।
  • लोक-साहित्य और संत वाणी संकलन।

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 12 Oct 2026

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