भक्ति काव्य व भजन मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

मैं जहाँ भी रहूँ बरसाना मिले (Mai Jaha Bhi Rahu Barsana Mile Lyrics in Hindi)

श्री राधा रानी के इस सुंदर भजन 'मैं जहाँ भी रहूँ बरसाना मिले' के बोल हिंदी में पढ़ें। भक्तिपूर्ण भावार्थ और अर्थ के साथ आनंद लें। Bhaktilok पर देखें।

प्रस्तावना एवं परिचय

मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

प्रस्तावना एवं परिचय

तेरे रंग में रंगा हर ज़माना मिले

तेरे रंग में रंगा हर ज़माना मिले

हाय तेरे रंग में रंगा ज़माना मिले

तेरे रंग में रंगा ज़माना मिले

मैं जहाँ भी मैं जहाँ भी

मैं जहाँ भी रहूँ बरसाना मिले

मैं जहाँ भी रहूँ बरसाना मिले

हाँ मैं जहाँ भी रहू बरसाना मिले

मैं जहाँ भी रहू बरसाना मिले....

सारे जग में तेरा ही तो एक नूर है

सारे जग में तेरा ही तो एक नूर है

हाँ मेरा कान्हा भी तुझसे ही मशहूर है

मेरा कान्हा भी तुझसे ही मशहूर है

बदकिस्मत है वो जो तुझसे दूर है

बदकिस्मत है वो जो तुझसे दूर है

हाँ तुझसे दूर है तुझसे दूर है

जो तुझसे दूर है तुझसे दूर है

बदकिस्मत है वो जो तुझसे दूर है

बदकिस्मत है वो जो तुझसे दूर है

तेरे नाम का हर मस्ताना मिले

तेरे नाम का हर मस्ताना मिले

मैं जहाँ भी मैं जहाँ भी

मैं जहाँ भी रहूँ बरसाना मिले

मैं जहाँ भी रहू बरसाना मिले

हाँ मैं जहाँ भी रहू बरसाना मिले

मैं जहाँ भी रहू बरसाना मिले....

तेरी रहमत के गीत गाने आया हूँ मैं

कई गुनाहो की सौगात लाया हूँ मैं

कर दो करुणा जगत का सताया हूँ मैं 

हाँ दर पे आया हूँ मैं दर पे आया हूँ मैं

हाँ आज आया हूँ मैं आज आया हूँ मैं

कर दो करुणा जगत का सताया हूँ मैं

कर दो करुणा जगत का सताया हूँ मैं

रहमत का इशारा नजराना मिले

रहमत का इशारा नजराना मिले

मैं जहाँ भी मैं जहाँ भी

मैं जहाँ भी रहूँ बरसाना मिले

मैं जहाँ भी रहू बरसाना मिले

हाँ मैं जहाँ भी रहू बरसाना मिले

मैं जहाँ भी रहू बरसाना मिले.....

तेरी पायल बंसी उनकी बजती रहे

जोड़ी प्रीतम प्यारे की सजती रहे

तेरे रसिकों पे छायी ये मस्ती रहे 

हाय तेरी मस्ती रहे तेरी मस्ती रहे

हां तेरी मस्ती रहे तेरी मस्ती रहे

तेरे रसिकों पे छायी ये मस्ती रहे

तेरे रसिकों पे छायी ये मस्ती रहे

तेरे चरणों की रज में ठिकाना मिले

तेरे चरणों की रज में ठिकाना मिले

मैं जहाँ भी मैं जहाँ भी

मैं जहाँ भी रहूँ बरसाना मिले

मैं जहाँ भी रहू बरसाना मिले

हाँ मैं जहाँ भी रहू बरसाना मिले

मैं जहाँ भी रहू बरसाना मिले....

तेरा बरसाना राधे मेरी जान है

मेरे अरमानो की आन है शान है

तेरी गलियों पे चाकर ये कुर्बान है 

हाँ ये मेरी जान है ये मेरी जान है

हाँ ये मेरी जान है ये मेरी जान है

तेरी गलियों पे चाकर ये कुर्बान है

तेरी गलियों पे चाकर ये कुर्बान है

गाऊं जब भी तेरा अफसाना मिले

गाऊं जब भी तेरा अफसाना मिले

मैं जहाँ भी मैं जहाँ भी

मैं जहाँ भी रहूँ बरसाना मिले

मैं जहाँ भी रहू बरसाना मिले

हाय मैं जहाँ भी रहू बरसाना मिले

मैं जहाँ भी रहू बरसाना मिले.....

खुश रहे तू सदा ये दुआ है मेरी

बरसाना फले ये सदा है मेरी

तेरे चरणों में रहना सजा है मेरी 

ये सजा है मेरी ये सजा है मेरी

हाँ ये सजा है मेरी ये सजा है मेरी

तेरे चरणों में रहना सजा है मेरी

तेरे चरणों में रहना सजा है मेरी

रवि रस का सदा ही दीवाना मिले

रवि रस का सदा ही दीवाना मिले

मैं जहाँ भी मैं जहाँ भी

मैं जहाँ भी रहूँ बरसाना मिले

मैं जहाँ भी रहूँ बरसाना मिले

हाँ मैं जहाँ भी रहू बरसाना मिले

मैं जहाँ भी रहू बरसाना मिले....

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "मैं जहाँ भी रहूँ बरसाना मिले (Mai Jaha Bhi Rahu Barsana Mile Lyrics in Hindi) - Bhaktilok" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।

भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।

भजनों को गाने की सही विधि क्या है?

भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।

क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?

हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 12 Oct 2026

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