भक्ति काव्य व भजन मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

लगन तुमसे लगा बैठे (Lagan Tumse Laga Baithe Lyrics in Hindi)

लगन तुमसे लगा बैठे भजन के बोल हिंदी में पढ़ें। संदर्भ एवं व्याख्या सहित भक्तिरस से परिपूर्ण इस दिव्य भजन का आनंद लें।

प्रस्तावना एवं परिचय

भक्ति की अनंत लगन: एक दिव्य संकल्प

इस भजन के माध्यम से भगवान के प्रति अटूट प्रेम और समर्पण का अनुभव करें।

लगन तुमसे लगा बैठे, जो होगा देखा जाएगा। तुमसे अपने बना बैठे, जो होगा देखा जाएगा॥ कभी दुनिया से डरते थे, के छुप छुप याद करते थे। लो अब परदा उठा बैठे, जो होगा देखा जाएगा॥॥ लगन तुमसे लगा बैठे...॥ कभी यह ख्याल था दुनिया, हमें बदनाम कर देगी। शर्म अब बेच खा बैठे, जो होगा देखा जाएगा॥॥ लगन तुमसे लगा बैठे...॥ दीवाने बन गए तेरे, तो फिर दुनिया से क्या मतलब। तेरी चरणों में आ बैठे, जो होगा देखा जाएगा॥॥ लगन तुमसे लगा बैठे...॥ ऐसा बोल कर ही घर से निकले, क्यूँकि आप भले ही। लाखों की घड़ी हाथ में क्यूँ ना पहने हो॥ लगन तुमसे लगा बैठे, जो होगा देखा जाएगा। तुमसे अपने बना बैठे, जो होगा देखा जाएगा।
साझा करें:

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मूल संदेश है भगवान के प्रति समर्पण और भक्ति की गहराई। 'लगन तुमसे लगा बैठे, जो होगा देखा जाएगा' यह श्लोक दर्शाता है कि जब भक्त ईश्वर से पूरी लगन से जुड़ता है, तब उसकी हर चिंता और डर समाप्त हो जाते हैं। भक्त ने पहले दुनिया की आलोचना और डर का सामना किया था, लेकिन अब उन्होंने अपने मन की हर घड़ी को ईश्वर के चरणों में समर्पित करने का निर्णय लिया है। यहाँ दर्शाया गया है कि यदि व्यक्ति अपने मन को ईश्वर में लगाता है, तो दूसरे हर डर का सामना करना सरल हो जाता है। यह भजन हमें यह भी सिखाता है कि भक्ति में डूबकर, हम हर सांसारिक चिंता को छोड़कर, अपने ईश्वर के निकट पहुंच सकते हैं।

भजन में एक गहरा भावार्थ छिपा हुआ है, जो भक्त के हृदय की गहराइयों से प्रवाहित होता है। 'दीवाने बन गए तेरे, तो फिर दुनिया से क्या मतलब' इस पंक्ति से यह अभिव्यक्त होता है कि जब व्यक्ति ईश्वर का दीवाना हो जाता है, तब उसे संसारिक सुख-दुख की परवाह नहीं रहती। यहाँ पर एक आत्मीय संबंध की बात की जा रही है, जहाँ भक्त अपने आप को पूर्ण रूप से ईश्वर के प्रेम में खो देना चाहता है। इसका अर्थ यह भी है कि भक्ति के मार्ग पर चलकर, जीवन की सभी भौतिक वस्तुएँ मायने नहीं रखतीं। यह आस्था और समर्पण हमें आत्मिक शांति और संतोष की ओर ले जाती है।

इस भजन का निहितार्थ भक्ति मार्ग का अनुसरण करना है। इसकी पंक्तियाँ यह दिखाती हैं कि किस प्रकार ईश्वर की भक्ति व्यक्ति को जीवन की कठिनाइयों से उबार सकती है। 'कभी यह ख्याल था दुनिया, हमें बदनाम कर देगी' यह हमारे समाज में भक्ति और धार्मिक आस्था के प्रति पूर्वाग्रह की ओर इंगीत करता है। लेकिन जब भक्ति की लौ जलती है, तब भक्त अपने ईश्वर से एक सुरक्षित संबंध स्थापित करता है। यह शास्त्रों में भी वर्णित है कि वास्तविक भक्ति स्वयं को भगवान में खोने में है। यह भजन वह शक्ति प्रदान करता है, जिससे भक्त हर प्रकार की मानसिक और आध्यात्मिक बाधाओं को पार कर सकता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन भक्तिमार्ग की थाती है, जिसमें कहा गया है कि भक्ति से जीवन की सभी कठिनाइयां सरल हो जाती हैं। पुराणों और उपनिषदों में भक्ति का बहुत महत्व है, जहां बताया गया है कि निस्वार्थ प्रेम और लगन से ही भगवान के प्रति समर्पण बढ़ता है। श्रीराम और श्रीकृष्ण के जीवन में भी भक्ति का यही महत्व है, जहाँ शिष्य और भक्त ने समर्पण के माध्यम से देवताओं के निकट पहुँचने में सफलता पाई। यह भजन उस महान आस्था को पुनर्स्थापित करता है और भक्तों को प्रेरित करता है कि वे संसार की चिंता किए बिना अपने ईश्वर की ओर सच्चे मन से बढ़ें।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का नियमित जाप करने से मानसिक शांति, आंतरिक आनंद और आध्यात्मिक उन्नति में भी वृद्धि होती है। भक्ति के साथ इसे गाने से मनोबल बढ़ता है और भक्त को सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। यह भजन मानसिक तनाव को कम कर आध्यात्मिक जागृति में सहायक होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह या शाम के समय करना उत्तम मना जाता है। इनमें एक साधक अपनी श्रद्धा के साथ दीया जलाकर एवं पुष्प अर्पित करके गाने से सकारात्मकता भरता है। भजन गाते समय आरामदायक मुद्रा में बैठकर, मन को शांत करते हुए भावपूर्वक गाएँ। सही मानसिकता और पूर्ण समर्पण से भजन का जप करने से आध्यात्मिक उन्नति होती है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

यह भजन किस देवी-देवता को समर्पित है?

यह भजन सामान्यतः ईश्वर के प्रति समर्पित है, किसी विशेष देवी-देवता के लिए नहीं। यह ईश्वर के प्रति व्यक्तिगत प्रेम और लगन को दर्शाता है।

इस भजन का गाना कितनी बार करें?

इस भजन का जप प्रतिदिन सुबह या शाम 11 बार या अधिक बार करना शुभ माना जाता है। ऐसा करने से भक्ति का संचार होता है।

क्या इस भजन का श्रवण भी लाभदायक है?

हां, इस भजन का श्रवण भी लाभदायक है। इसे सुनने से भक्ति की भावना जागृत होती है और मानसिक शांति मिलती है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!