भक्ति काव्य व भजन मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

चलो जी वोट पौंण चलिये (chalo ji vote paun chaliye in Hindi)

चलो जी वोट पौंण चलिये गीत के माध्यम से लोकतंत्र में मतदान के महत्व को समझें। राष्ट्र-धर्म और नागरिक कर्तव्य को समर्पित यह प्रेरणादायक रचना पढ़ें।

"चलो जी वोट पौंण चलिये" एक अत्यंत प्रेरणादायक, ऊर्जावान और सामाजिक चेतना से ओत-प्रोत रचना है, जो लोकतंत्र के महापर्व में प्रत्येक नागरिक की भागीदारी को एक पावन कर्तव्य और धर्म के रूप में प्रस्तुत करती है। सनातन भारतीय संस्कृति में 'कर्म' को ही सर्वोच्च 'पूजा' माना गया है, और एक जागरूक तथा उत्तरदायी नागरिक के रूप में अपने मताधिकार का पूरी निष्ठा के साथ प्रयोग करना राष्ट्र-धर्म का प्रत्यक्ष निर्वहन करना है। यह लोक-गीतनुमा भजन न केवल मतदान के व्यावहारिक और नैतिक महत्व को अत्यंत सरल शब्दों में रेखांकित करता है, बल्कि यह भी प्रेरणा देता है कि स्वतंत्र भारत के निर्माण में समाज के हर वर्ग, हर भाई और हर बहन का योगदान अनिवार्य है। भक्ति, राष्ट्रप्रेम और नागरिक कर्तव्य के इस अनूठे संगम को गाकर और सुनकर हम अपने आसपास के वातावरण में सकारात्मक जागरूकता का संचार कर सकते हैं। यह मार्गदर्शिका इस प्रेरणास्पद रचना के संपूर्ण स्वरूप, उसके अंतर्निहित संदेश, सामाजिक उपयोगिता और लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ उसके आध्यात्मिक संबंध का विस्तार से विश्लेषण करती है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

धुनः चली मैं वृंदावन को चल


रुत वोट पौंण दी है आई,
वोट पावांगे सब भैण भाई,
चलो जी वोट पौंण चलिये-2
बड़ा कीमती इह साडा वोट अधिकार ए।
ऐसे वोट नाल साडी बनदी सरकार ए ॥
गल सारी समझ सानूं आई - चलो जी वोट पौंण चलिये...

वोट न कोई बोझ, वोट नां ही मजबूरी ए।
पर वोट पौंणां साडे सब लई जरुरी ए ॥
वोट विच बड़ी ताकत है भाई- चलो जी वोट पौंण चलिये...

नेता जो मेहनती ईमानदार होवेगा।
ओहो साडी वोट दा हक्कदार होवेगा ॥
जेहड़ा करेगा साडी राहनुमाई- चलो जी वोट पौंण चलिये...

किसे चासे विच नां 'मधुप' असां औंणा ए।
समझ-बूझ कर नेता चुण के पौंणा ए ॥
सच्ची नियत है जदि अपनाई- चलो जी वोट पौंण चलिये...

गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth

इस प्रेरणादायक रचना के माध्यम से रचनाकार ने आम जनमानस को मतदान के अधिकार की महत्ता और उसकी शक्ति से बहुत ही सरल एवं प्रभावी ढंग से परिचित कराया है। प्रस्तुत पंक्तियों का विस्तृत हिंदी भावार्थ निम्नलिखित है:

प्रथम चरण: रचनाकार आह्वान करता है कि अब लोकतंत्र के महापर्व यानी मतदान की ऋतु आ गई है। समाज के सभी भाई-बहन मिलकर अपने मत का प्रयोग करने चलें। यह समझाया गया है कि हमारा प्रत्येक वोट अत्यंत मूल्यवान अधिकार है, क्योंकि इसी लोकतांत्रिक अधिकार के माध्यम से देश और प्रदेश की सरकार का गठन होता है। इस सत्य को भली-भांति समझकर हमें मतदान केंद्र की ओर प्रस्थान करना चाहिए।

द्वितीय चरण: यहाँ इस बात पर विशेष बल दिया गया है कि मतदान को कभी भी किसी प्रकार का मानसिक बोझ या मजबूरी नहीं समझना चाहिए। यह हर जागरूक नागरिक का परम कर्तव्य और अति आवश्यक कार्य है। वोट के माध्यम से जनता के हाथों में जो शक्ति निहित होती है, वह किसी अन्य साधन से प्राप्त नहीं हो सकती। इसलिए पूरे उत्साह के साथ मतदान में भाग लेना चाहिए।

तृतीय चरण: रचनाकार स्पष्ट करता है कि केवल उसी राजनेता या प्रत्याशी को हमारा वोट मिलना चाहिए जो वास्तव में मेहनती, कर्मठ और पूर्णतः ईमानदार हो। जो व्यक्ति समाज और राष्ट्र की सही राहपरस्ती (राहनुमाई) करे तथा जनहित के कार्यों को प्राथमिकता दे, वही हमारे अमूल्य मत का सच्चा अधिकारी है।

अंतिम चरण: रचनाकार 'मधुप' जी चेतावनी देते हुए कहते हैं कि किसी के बहकावे, प्रलोभन या झांसे में बिल्कुल नहीं आना चाहिए। अपने विवेक का पूरी तरह इस्तेमाल करते हुए, सोच-समझकर सही नेता का चुनाव करके ही वोट डालना चाहिए। जब समाज में सच्ची नियत और ईमानदारी की नीति अपनाई जाती है, तभी सच्चे लोकतंत्र की स्थापना होती है।

गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message

इस रचना की केंद्रीय भावना राष्ट्रप्रेम, नागरिक उत्तरदायित्व और सामाजिक सहभागिता है। यह गीत हमें यह सिखाता है कि प्रजातंत्र में जनता ही सर्वसत्तासंपन्न होती है, और उसका यह अधिकार केवल एक औपचारिकता नहीं बल्कि राष्ट्र के भविष्य की दिशा तय करने वाला पावन यंत्र है। इसमें बिना किसी जाति, धर्म या वर्ग भेद के निष्पक्ष और विवेकपूर्ण मतदान करने का जोरदार संदेश दिया गया है। ऐसे प्रेरक गीतों के माध्यम से हम अपने लोकतांत्रिक पर्वों को एक उत्सव के रूप में मना सकते हैं और समाज में मतदान के प्रति फैली उदासीनता को दूर कर सकते हैं। राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना को मजबूत करने के लिए भक्तिलोक के विशेष राष्ट्रीय व सांस्कृतिक लेख भी अवश्य पढ़ें।

गीत की जानकारी | Song Information

विवरण (Parameter) तथ्य (Detail)
गीत का नाम (Song Name) चलो जी वोट पौंण चलिये (Chalo Ji Vote Paun Chaliye)
रचनाकार / गीतकार (Lyricist) मधुप जी (Madhup Ji)
मुख्य विषय (Theme) मतदान जागरूकता, राष्ट्र-धर्म, लोकतंत्र का महत्व
भाषा (Language) पंजाबी मिश्रित हिंदी (लोकभाषा)
भाव (Emotion) प्रेरणा, उत्साह, कर्तव्यबोध और राष्ट्रभक्ति
संगीत धुन (Tune Reference) चली मैं वृंदावन को चल

गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators

इस सुप्रसिद्ध सामाजिक चेतना गीत के रचयिता 'मधुप' जी हैं, जिन्होंने अपनी कविताओं और भजनों के माध्यम से समाज सुधार और राष्ट्रीय कर्तव्यों को हमेशा प्रमुखता दी है। उनकी लेखन शैली आम जनता के बहुत निकट है, जिससे वे जटिल से जटिल संदेश को भी लोक-बोली की मिठास के साथ श्रोताओं के हृदय तक पहुँचाने में पूर्णतः सफल रहे हैं। ऐसे रचनाकार राष्ट्र की वैचारिक और नैतिक नींव को मजबूत करने में बहुमूल्य योगदान देते हैं।

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings

शब्द (Word) सरल अर्थ (Simple Meaning) संदर्भ (Context)
रुत ऋतु, समय या अवसर मतदान के महापर्व का उचित समय
पौंण डालने या प्रदान करने जाना वोट डालने जाना
हक्कदार अधिकारी, योग्य व्यक्ति जो वोट पाने का सही पात्र हो
राहनुमाई मार्गदर्शन, अगुवाई करना जनता को सही राह दिखाना
चासा प्रलोभन, बहकावा या छलावा गलत प्रलोभनों से बचना

गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance

भारतीय सनातन संस्कृति में समाज कल्याण और देश की सेवा को सबसे बड़ा धर्म माना गया है। गीता में भी निष्काम कर्म का उपदेश दिया गया है। जब एक नागरिक अपने मताधिकार का प्रयोग पूरी ईमानदारी और विवेक से करता है, तो वह वास्तव में राष्ट्र रूपी मंदिर की सेवा कर रहा होता है। सांस्कृतिक दृष्टि से, चुनाव या मतदान के दिनों को भारत में 'लोकतंत्र के महापर्व' के रूप में देखा जाता है। इस प्रकार के गीत नागरिकों के मन में यह भाव जगाते हैं कि कर्मठ नेतृत्व का चुनाव करना हर देशभक्त का नैतिक और आध्यत्मिक उत्तरदायित्व है।

गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons

  • अधिकार और कर्तव्य का संतुलन: हमें अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने के साथ-साथ अपने कर्तव्यों का भी पूरी निष्ठा से पालन करना चाहिए।
  • विवेकपूर्ण निर्णय: जीवन या राजनीति में कभी भी किसी के बहकावे में न आकर अपनी बुद्धि और विवेक से सही निर्णय लेना चाहिए।
  • ईमानदारी का सम्मान: समाज में हमेशा मेहनती, ईमानदार और जनहितैषी नेतृत्व का समर्थन करना चाहिए।
  • सामूहिक सहभागिता: राष्ट्र निर्माण केवल सरकार का नहीं, बल्कि देश के प्रत्येक नागरिक का सामूहिक उत्तरदायित्व है।
  • उदासीनता का त्याग: अपने महत्वपूर्ण अधिकारों के प्रति कभी भी आलस्य या उदासीनता नहीं दिखानी चाहिए।

गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing

इस प्रेरणादायक गीत को मुख्य रूप से लोकसभा या विधानसभा चुनावों के समय, मतदान जागरूकता अभियानों में, विद्यालयों तथा सामाजिक संगठनों द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में, नुक्कड़ नाटक के दौरान और प्रभात फेरियों में गाया जाता है। यह गीत लोगों को अपने घरों से निकलकर मतदान केंद्रों तक पहुँचने के लिए प्रेरित करने का एक सशक्त माध्यम है।

एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance

विशेषता विवरण
शीर्षक चलो जी वोट पौंण चलिये
प्रकार प्रेरणादायक सामाजिक गीत / भजन
उद्देश्य मतदान के प्रति जन-जागृत करना
मुख्य संदेश ईमानदार नेता का चुनाव और शत-प्रतिशत मतदान
उपयुक्त अवसर चुनाव के दिन, राष्ट्रीय पर्व, सामाजिक बैठकें

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. "चलो जी वोट पौंण चलिये" गीत मुख्य रूप से किस विषय पर आधारित है?

यह गीत लोकतंत्र के महापर्व यानी मतदान के महत्व, नागरिक कर्तव्यों और एक ईमानदार नेता के चुनाव की आवश्यकता पर आधारित है।

Q2. इस गीत के रचयिता कौन हैं?

इस प्रेरणादायक रचना के रचयिता प्रसिद्ध गीतकार 'मधुप' जी हैं।

Q3. मतदान को एक राष्ट्रीय धर्म क्यों माना गया है?

क्योंकि हमारे एक वोट से देश और समाज की दिशा तय करने वाली सरकार का गठन होता है, जिससे राष्ट्र का भविष्य सुरक्षित होता है।

Q4. गीत में किस प्रकार के नेता को वोट देने की बात कही गई है?

गीत के अनुसार, जो राजनेता पूरी तरह मेहनती, ईमानदार और जनहित में सही मार्ग दिखाने वाला हो, उसे ही वोट देना चाहिए।

Q5. क्या इस गीत को चुनाव प्रचार के दौरान गाया जा सकता है?

हाँ, यह गीत बिना किसी राजनीतिक पक्षपात के केवल सामान्य नागरिक जागरूकता और शत-प्रतिशत मतदान बढ़ाने के लिए अत्यंत उपयुक्त है.

Q6. इस गीत की धुन किस प्रसिद्ध तर्ज पर आधारित है?

यह गीत "चली मैं वृंदावन को चल" की प्रसिद्ध और लोकप्रिय धुन पर गाया जाता है।

Q7. मतदान के प्रति लोगों में उदासीनता क्यों नहीं होनी चाहिए?

उदासीनता से गलत नेतृत्व के चुने जाने का खतरा रहता है, जो राष्ट्र के विकास में बाधा बन सकता है। इसलिए प्रत्येक नागरिक की सहभागिता अनिवार्य है।

Q8. इस रचना से हमें क्या मुख्य संदेश मिलता है?

यही कि हमें बिना किसी प्रलोभन या दबाव के, समझ-बूझकर अपने मताधिकार का प्रयोग करना चाहिए और राष्ट्र निर्माण में योगदान देना चाहिए।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

भक्तिलोक (Bhaktilok) पर प्रकाशित यह सामग्री पाठकों में सामाजिक उत्तरदायित्व, राष्ट्रप्रेम और नैतिक मूल्यों का संचार करने के उद्देश्य से तैयार की गई है। इस लेख में दी गई पंक्तियाँ और भावार्थ पारंपरिक लोक-साहित्य और सामाजिक चेतना के परिप्रेक्ष्य में सत्यापित हैं। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के अंतर्गत यह सुनिश्चित किया गया है कि किसी भी प्रकार की भ्रामक या पक्षपातपूर्ण जानकारी का समावेश न हो।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • पारंपरिक सामाजिक चेतना एवं लोकगीत संग्रह।
  • भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) के मतदाता जागरूकता अभियान निर्देशिका से प्रेरित वैचारिक संदर्भ।
  • भक्तिलोक सांस्कृतिक और राष्ट्रीय गीत अभिलेखागार।

संबंधित भजन एवं लेख

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 12 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!