भक्ति काव्य व भजन मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

सानूं तेरे मिलन दा चा जोगी (Sanu Tere Milan Da Cha Jogi Lyrics in Hindi) - Sonu Saini Bhahan Jai Baba Balak Nath ji

बाबा बालक नाथ जी का प्रसिद्ध भजन 'सानूं तेरे मिलन दा चा जोगी' के सम्पूर्ण लिरिक्स हिंदी में पढ़ें। सोनू सैनी द्वारा गाए इस पावन भजन का भावार्थ सहित आनंद लें।

Sonu Saini

नाथ संप्रदाय और अष्टचिरंजीवी में सर्वोच्च स्थान रखने वाले बाबा बालक नाथ जी की असीम कृपा और महिमा का गान करता हुआ यह अत्यंत लोकप्रिय भजन "सानूं तेरे मिलन दा चा जोगी" (Sanu Tere Milan Da Cha Jogi) भक्त के हृदय की उस अगाध तड़प और परम समर्पण को अभिव्यક્ત करता है, जो एक सच्चे साधक को अपने इष्ट देव के चरणों में खींच लाती है। प्रसिद्ध भजन गायक सोनू सैनी द्वारा अपनी मधुर और भावपूर्ण वाणी में गाया गया यह संकीर्तन उत्तर भारत, विशेषकर पंजाब, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली के शिवाला परिसरों एवं दियोटसिद्ध (बाबा बालक नाथ मंदिर) की यात्रा के दौरान घर-घर में गूंजता है। बाबा बालक नाथ जी, जिन्हें 'बालक रूप' में भगवान शिव का ही अंश और शिव-गोरखनाथ परंपरा का सिद्ध योगी माना जाता है, के प्रति अटूट प्रेम और विरह भाव का यह अनूठा संगम है।

इस विस्तृत और प्रामाणिक लेख में हम आपके लिए लेकर आए हैं बाबा बालक नाथ जी के इस पावन भजन के संपूर्ण बोल (Lyrics), शुद्ध हिंदी अर्थ, भावार्थ, भजन की पृष्ठभूमि, गायन की विधि, तथा इससे जुड़े आध्यात्मिक और दार्शनिक पहलुओं का गहन विश्लेषण। यदि आप बाबा जी के अनन्य भक्त हैं और सत्संग या जागरण के दौरान इस भजन को पूरी ऊर्जा और भक्ति भाव के साथ गाना चाहते हैं, तो यह मार्गदर्शिका आपके लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी। साथ ही, बाबा बालक नाथ जी की कृपा प्राप्ति के मार्ग और उनके उपदेशों को भी इसमें विस्तार से समझाया गया है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

स्थाई (मखड़ा):

सानूं तेरे मिलन दा चा जोगी, हम आपसे मिलना चाहते हैं जोगी!
हमें तुमसे, मिलने को, चा जोगी, कभी नहीं, सपने, जय हो, में, आओ जोगी,
हम आपसे मिलना चाहते हैं, जय हो, जोगी ll

अंतररा 1:

फेरी, तेरी, खातिर बाबा, बाघ लवाया फूल, कलियों का, मैं सजा आसन,
हो काहे, शेर, जय हो ल, बहने आ जोगी,
हम आपसे मिलना चाहते हैं, जय हो।

अंतररा 2:

फेरी, तेरी, खातिर जोगी, कुआं बनाया, तन मेरा, लाज मन, डोल बनाया ll
हो काहे, पानी, जय हो, जोगी बहाने लेकर आओ,
हम आपसे मिलना चाहते हैं, जय हो।

अंतररा 3 (समापन चरण):

फेरी, तेरी, खातिर बाबा, चौकी लगवावै भगत तू बाबा, महिमा तेरी गान॥
हो काहे, दर्श, जय हो, आकर दे जोगी।
हम आपसे मिलना चाहते हैं, जय हो, सानूं तेरे मिलन दा चा जोगी ll

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

"सानूं तेरे मिलन दा चा जोगी" भजन केवल शब्दों का समूह नहीं है, बल्कि यह एक भक्त के अंतःकरण से उठने वाली वह पुकार है जो सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठकर अपने परम आराध्य बाबा बालक नाथ जी के दर्शन के लिए व्याकुल है। पंजाबी और हिंदी के सुंदर मिश्रण वाली इस रचना में सूफी और नाथ संप्रदाय दोनों की झलक मिलती है, जहाँ साधक स्वयं को एक प्रेमी के रूप में और बाबा को अपने प्रियतम (जोगी) के रूप में देखता है।

भजन की पहली पंक्ति "सानूं तेरे मिलन दा चा जोगी" में 'चा' शब्द तीव्र इच्छा या अभिलाषा को दर्शाता है। भक्त कहता है कि हे जोगी नाथ! मेरे मन में केवल एक ही तीव्र लालसा है कि मैं आपके अलौकिक दर्शन कर सकूं। वह प्रार्थना करता है कि आप केवल मेरी कल्पनाओं या सपनों में ही नहीं, अपितु प्रत्यक्ष रूप से आकर मुझे अपने पावन चरणों की शरण में लें। नाथ संप्रदाय में गुरु और इष्ट के प्रति ऐसा ही अनन्य भाव अपेक्षित होता है।

अगले चरणों में भक्त अपनी आंतरिक साधना और समर्पण का सुंदर रूपक प्रस्तुत करता है। वह कहता है कि हे बाबा! मैंने अपनी भक्ति रूपी फुलवारी में प्रेम के फूल और कलियों को सजाकर आपके बैठने के लिए आसन तैयार किया है। आप अपने वाहन 'सिंह' पर सवार होकर मेरे इस भाव-लोक में पधारिए। इसी प्रकार, शारीरिक और मानसिक साधना के प्रतीक के रूप में भक्त अपने शरीर रूपी कुएं और मन रूपी डोल से भक्ति का अमृत जल निकालने की बात करता है, जिससे वह अपने इष्ट को तृप्त कर सके और स्वयं भी इस भवसागर से तर जाए। यह भजन जीव और ब्रह्म के मिलन का एक अत्यंत मार्मिक और सुंदर काव्य है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • नाथ संप्रदाय की मिठास: यह भजन नाथ परंपरा के योग मार्ग और भक्ति मार्ग के अनूठे समन्वय को दर्शाता है।
  • विरह और मिलन का भाव: भक्त और भगवान के बीच की दूरी को मिटाने के लिए तीव्र विरह और समर्पण को मुख्य आधार बनाया गया है।
  • लोकप्रिय संकीर्तन शैली: सोनू सैनी की ओजस्वी और मधुर आवाज ने इस भजन को जागरण, चौकी और भंडारों की शान बना दिया है।
  • मानसिक शांति और सकारात्मकता: इसके श्रवण मात्र से मन में व्याप्त तनाव दूर होता है और बाबा बालक नाथ जी के प्रति अटूट विश्वास जागृत होता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

बाबा बालक नाथ जी के भजनों का गान करने के लिए किसी कठोर नियम की आवश्यकता नहीं होती, परंतु यदि इसे विधि-विधान के साथ गाया जाए तो इसका आध्यात्मिक प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है:

  1. उपयुक्त समय: ब्रह्म मुहूर्त में प्रातःकाल स्नान के पश्चात या संध्याकालीन बेला में (विशेषकर मंगलवार और रविवार को) इस भजन का श्रवण और गान अत्यंत फलदायी माना गया है।
  2. स्थान का चुनाव: घर के पूजा घर में, मंदिर में अथवा बाबा बालक नाथ जी की चौकी या जागरण के दौरान इसे पूरी श्रद्धा के साथ गाया जा सकता है।
  3. आरती और प्रसाद: भजन गायन से पूर्व बाबा जी के समक्ष धूप, दीप प्रज्वलित करें और रोट (गुड़-गेहूं के आटे का प्रसाद) का भोग लगाएं।

भजन से जुड़े देवता: बाबा बालक नाथ जी | Associated Deity

बाबा बालक नाथ जी को सतयुग के सिद्ध पुरुष और भगवान शिव के परम भक्त 'बालक रूप' में पूजा जाता है। इनका मुख्य पवित्र धाम हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले में शिवालिक पहाड़ियों की गुफाओं में स्थित है, जिसे दियोटसिद्ध के नाम से जाना जाता है। इन्हें 'दूध-रोट' का प्रसाद अति प्रिय है। बाबा बालक नाथ जी अपने भक्तों के सभी संकटों को दूर करने वाले, अष्टचिरंजीवी संतों में गिने जाने वाले और दीन-दुखियों के सहायक माने जाते हैं। उनके दरबार में जात-पात का कोई भेद नहीं होता, जो भी सच्चे मन से श्री हनुमान चालीसा या बाबा बालक नाथ जी का स्मरण करता है, उसे असीम शांति की प्राप्ति होती है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

भजन सम्राट सोनू सैनी द्वारा गाए गए इस गीत को समकालीन devotional music industry में एक मील का पत्थर माना जाता है। पारंपरिक लोक धुनों और आधुनिक संगीत उपकरणों का बेहतरीन मिश्रण इस भजन को युवा और वृद्ध दोनों पीढ़ियों के बीच लोकप्रिय बनाता है। इस रचना की पृष्ठभूमि हिमाचल प्रदेश और पंजाब के लोक संगीत पर आधारित है, जहाँ बाबा जी के प्रति प्रेम को 'जोगी' और 'हीर-रांझा' जैसी लोक गाथाओं के पवित्र प्रेम के समकक्ष मानकर गाया जाता है। यह रचना सीधे आत्मा को झकझोर देती है और श्रोता को भक्ति के महासागर में डुबो देती है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा पंजाबी मिश्रित सरल हिंदी (खड़ी बोली) है, जिसे आम जनमानस आसानी से समझ सकता है। इसमें रूपक अलंकार का सुंदर प्रयोग किया गया है—जैसे शरीर को कुआं बताना, मन को डोल कहना और भक्ति भाव को फूलों की फुलवारी बताना। यह काव्य शैली उत्तर भारतीय लोक संस्कृति की गहरी छाप छोड़ती है, जिससे सुनने वाला तुरंत भजन के भाव के साथ तल्लीन हो जाता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

  • अटूट विश्वास: भगवान और भक्त के बीच केवल प्रेम और विश्वास का बंधन होना चाहिए।
  • अहंकार का त्याग: अपने तन और मन को ईश्वर के चरणों में समर्पित करना ही सच्ची साधना है।
  • निरंतर स्मरण: सांसारिक भागदौड़ के बीच भी ईश्वर के मिलन की तड़प को जीवित रखना चाहिए।
  • सेवा भाव: समाज और गुरु के प्रति सेवा का भाव मनुष्य के जीवन को सार्थक बनाता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ संदर्भ / भाव
चा इच्छा, तीव्र लालसा या चाहत भगवान से मिलने की अकुलाहट
जोगी योगी, तपस्वी (बाबा बालक नाथ) परमेश्वर का संन्यासी रूप
बाघ शेर / सिंह बाबा बालक नाथ जी की सवारी
डोल कुएं से पानी निकालने का साधन मन रूपी यंत्र जिससे भक्ति निकाली जाती है
चौकी जागरण या संकीर्तन का आयोजन भक्तों द्वारा बाबा का गुणगान

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"सानूं तेरे मिलन दा चा जोगी..."
भक्त अपने आराध्य से कहता है कि हे नाथ! मेरे दिल में आपसे मिलने की तीव्र व्याकुलता है। संसार के तमाम सुख एक तरफ और आपके दीदार की इच्छा एक तरफ।

"फेरी, तेरी, खातिर बाबा, बाघ लवाया फूल..."
मैंने अपनी साधना रूपी फुलवारी में आपके स्वागत के लिए सुंदर फूल और कलियां सजाई हैं, हे सिंह सवार जोगी! आप मेरी इस भक्ति की फुलवारी में पधारिए।

"फेरी, तेरी, खातिर जोगी, कुआं बनाया तन मेरा..."
इस नश्वर शरीर को मैंने भक्ति का कुआं और अपने चंचल मन को उसका डोल बना लिया है, अब आप इस जीवन रूपी कुएं से अपनी कृपा का जल ग्रहण करने आइए।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

बाबा बालक नाथ जी के स्मरण और ध्यान के समय निम्नलिखित मंत्र का जाप अत्यंत कल्याणकारी माना गया है:

ॐ श्री बाबा बालक नाथाय नमः l

अथवा पारंपरिक जयकारा: "जय बाबा बालक नाथ जी की! जय दियोटसिद्ध वाले की!"

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम सानूं तेरे मिलन दा चा जोगी (Sanu Tere Milan Da Cha Jogi)
समर्पित देवता सिद्ध बाबा बालक नाथ जी
गायक / कलाकार सोनू सैनी (Sonu Saini)
भाषा हिंदी एवं पंजाबी मिश्रित लोक शैली
मुख्य थीम / भाव भक्ति, विरह, प्रेम और समर्पण
उपयुक्त अवसर जागरण, चौकी, भंडारा, साप्ताहिक मंगलवार पूजा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1: "सानूं तेरे मिलन दा चा जोगी" भजन किस देवता को समर्पित है?

यह भजन नाथ संप्रदाय के प्रमुख सिद्ध पुरुष और भगवान शिव के अंश श्री बाबा बालक नाथ जी को समर्पित है।

Q2: इस भजन को किसने गाया है?

इस प्रसिद्ध भजन को लोकप्रिय गायक सोनू सैनी (Sonu Saini) ने अपनी मधुर वाणी में गाया है।

Q3: बाबा बालक नाथ जी का मुख्य मंदिर कहाँ स्थित है?

बाबा बालक नाथ जी का मुख्य और ऐतिहासिक मंदिर हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले की शिवालिक पहाड़ियों में दियोटसिद्ध गुफा में स्थित है।

Q4: बाबा बालक नाथ जी को किस प्रसाद का भोग लगाया जाता है?

बाबा जी को मुख्य रूप से 'रोट' (गेहूं के आटे और गुड़ से बना प्रसाद) तथा दूध का भोग लगाया जाता है।

Q5: इस भजन को कब गाना चाहिए?

इस भजन को जागरण, चौकी, सत्संग, मंगलवार या रविवार की पूजा के दौरान तथा प्रातःकाल स्मरण के समय गाया जा सकता है।

Q6: 'चा' शब्द का इस भजन में क्या अर्थ है?

यहाँ 'चा' का अर्थ तीव्र इच्छा, अभिलाषा या मिलने की गहरी तड़प से है।

Q7: क्या इस भजन को घर पर अकेले गाया जा सकता है?

हाँ, इसे पूरी श्रद्धा के साथ घर पर अकेले या परिवार के साथ संकीर्तन में भी गाया जा सकता है।

Q8: बाबा बालक नाथ जी की पूजा का विशेष दिन कौन सा माना जाता है?

रविवार और मंगलवार का दिन बाबा बालक नाथ जी की पूजा और आराधना के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख भक्तिलोक (Bhaktilok.in) के संपादकीय मंडल द्वारा सनातन परंपरा, नाथ संप्रदाय के लोकगीतों और प्रामाणिक भक्ति साहित्य के अध्ययन के आधार पर संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसका उद्देश्य पाठकों को सटीक गीत, सरल अर्थ और आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान करना है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • उत्तर भारतीय लोकगीत एवं नाथ संप्रदाय की मौखिक व लिखित परंपराएं
  • हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध सिद्ध पीठों के इतिहास एवं संकीर्तन संग्रह
  • भक्ति संगीत एल्बम एवं पारंपरिक भजन संकलन

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 12 Oct 2026

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