भक्ति काव्य व भजन मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

इतनी किरपा मैया जी बनाये रखना (Itni Kirpa Maiya Ji Banaye Rakhna Lyrics in Hindi) - Sukh Sagar mata Bhajan

सुख सागर द्वारा रचित 'इतनी किरपा मैया जी बनाये रखना' भजन के संपूर्ण बोल और हिंदी अर्थ पढ़ें। माँ दुर्गा की भक्ति और कृपा पाने हेतु यह भजन अत्यंत पावन है।

देवी भगवती आदिशक्ति जगदंबा की असीम करुणा, वात्सल्य और कृपा प्राप्त करने के लिए समर्पित यह अत्यंत भावपूर्ण भजन 'इतनी किरपा मैया जी बनाये रखना' (Itni Kirpa Maiya Ji Banaye Rakhna Lyrics in Hindi) माता के भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है। सुख सागर जी द्वारा स्वरबद्ध और प्रस्तुत यह भजन एक सच्चे साधক और भक्त की उस अनन्य पुकार को व्यक्त करता है जहाँ वह सांसारिक प्रलोभनों से परे केवल माँ के चरणों की शरण और उनकी निरंतर सेवा की कामना करता है। सनातन धर्म में माता रानी की कृपा के बिना जीवन की नैया को पार लगाना असंभव माना गया है। नवरात्रि, जागरण, माता की चौकी या किसी भी विशेष अनुष्ठान के अवसर पर इस भजन का गायन भक्तों के हृदय में भक्ति रस की त्रिवेणी प्रवाहित कर देता है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस पावन भजन के संपूर्ण बोल, सरल हिंदी अर्थ, आध्यात्मिक महत्व, भावार्थ और दैनिक जीवन में इसकी प्रासंगिकता पर विस्तार से चर्चा करेंगे ताकि साधक इसे पूर्ण भक्ति भाव के साथ अपने जीवन में उतार सकें।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन — शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें:


इतनी किरपा मैया जी बनाये रखना,
मरते दम तक सेवा में लगाए रखना!
इतनी किरपा मैया जी ...........

मैं तेरा तू मेरी मैया तू राज़ी मैं राज़ी मैया,
तू राज़ी मैं राज़ी........
तेरे हवाले कर दी मैंने इस जीवन की बाज़ी मैया,
इस जीवन की बाज़ी.....
लाज तेरे हाथ है बचाये रखना,
मरते दम तक सेवा में लगाए रखना!
इतनी किरपा मैया जी ...........

तेरे प्रेमियों में मन लगता और कहीं ना लागे मैया,
और कहीं ना लागे.........
तेरे द्वार पे आके मैया सब फीका सा लागे मैया,
सब फीका सा लागे ............
भजनो की इस भूख को जगाये रखना,
मरते दम तक सेवा में लगाए रखना!
इतनी किरपा मैया जी ...........

हाथ जोड़ कर करूँ प्रार्थना मुझको भूल न जाना मैया,
मुझको भूल न जाना..........
तेरे दर पे लगा रहे बस मेरा आना जाना मैया,
मेरा आना जाना..........
दिन पे दिन ये सिलसिला चलाये रखना,
मरते दम तक सेवा में लगाए रखना!
इतनी किरपा मैया जी ...........

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन केवल शब्दों का समूह नहीं, बल्कि एक भक्त की अपनी आराध्य देवी के प्रति पूर्ण आत्मसमर्पण (Complete Surrender) की जीवंत अभिव्यक्ति है। भजन के मुखड़े में भक्त प्रार्थना करता है कि हे मैया जी! मुझ पर अपनी ऐसी ही अहैतुकी कृपा हमेशा बनाए रखना कि मेरा शरीर और प्राण जब तक इस संसार में रहें, मैं निरंतर आपकी सेवा और स्मरण में हीलीन रहूँ। 'मरते दम तक सेवा में लगाए रखना' पंक्ति साधक की इस निष्काम भावना को दर्शाती है कि उसे मोक्ष या किसी अन्य भौतिक सुख की लालसा नहीं है, बल्कि वह केवल जीवन के अंतिम श्वास तक माँ के चरणों की धूल और सेवा चाहता है।

दूसरे चरण में भक्त कहता है— 'मैं तेरा तू मेरी मैया तू राज़ी मैं राज़ी'। यह अद्वैत भाव और वात्सल्य संबंध का प्रतीक है जहाँ भक्त और भगवान के बीच कोई दूरी नहीं रह जाती। जब माँ राजी है तो भक्त भी राजी है और उसने अपने संपूर्ण जीवन की बाजी माता के चरणों में समर्पित कर दी है। इसके आगे भक्त कहता है कि इस संसार में संतों और भक्तों के सत्संग में ही उसका मन रमता है, और माँ के पावन दरबार (जैसे माता वैष्णो देवी मंदिर या अन्य शक्तिपीठों) में आकर उसे दुनिया के सारे सुख फीके और नश्वर प्रतीत होते हैं। वह प्रार्थना करता है कि उसके भीतर भगवत नाम और भजनों की यह भूक सदैव जागृत रहे, ताकि वह कभी भी माया के जाल में न भटके।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

इस भजन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सरलता, सहजता और गहन भावनात्मक गहराई है। इसे किसी भी आयु वर्ग के भक्त द्वारा आसानी से गाया जा सकता है। शक्ति उपासना में समर्पण का बहुत बड़ा स्थान है। मार्कंडेय पुराण और दुर्गा सप्तशती में भी शरणागत दीनार्त परित्राण परायणे देवी की महिमा का गुणगान किया गया है। यह भजन भक्त को अहंकार से मुक्त कर दीनता और विनय का पाठ पढ़ाता है, जो भगवत्प्राप्ति की प्रथम सीढ़ी है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

भजन को प्रातःकाल ब्रह्म बेला में, संध्या वंदन के समय, अथवा किसी भी विशेष पर्व जैसे शारदीय नवरात्रि, चैत्र नवरात्रि, माता की चौकी, जागरण या मंगलवार व शुक्रवार के विशेष पूजन सत्र में गाया जा सकता है। इसे शुद्ध आसन पर बैठकर, माता की ज्योति प्रज्वलित करके, पुष्प और धूप अर्पित करने के पश्चात भावपूर्ण स्वर में गाना अत्यंत फलदायी माना गया है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन जगत जननी आदिशक्ति, महामाया, दुर्गा, भवानी, शेरावाली माँ को समर्पित है। इस भजन को लोकप्रिय बनाने वाले गायक सुख सागर जी ने अपनी मधुर वाणी से इसमें भक्ति के ऐसे प्राण फूंके हैं कि यह हर माता के भक्त की जुबान पर चढ़ गया है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

लोक संगीत और पारंपरिक भक्ति परंपराओं से उपजा यह भजन समकालीन माता के भजनों में एक मील का पत्थर है। इसकी रचना इस प्रकार की गई है कि आम से लेकर खास तक हर भक्त इसमें अपनी भावनाओं को प्रवाहित महसूस करता है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल खड़ी बोली हिंदी और ब्रज-अवधि के मधुर सम्मिश्रण जैसी है, जो सीधे हृदय को स्पर्श करती है। इसमें अनुप्रास और उपमा अलंकारों का सहज प्रयोग हुआ है जैसे 'तू राज़ी मैं राज़ी' और 'सब फीका सा लागे'।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

  • पूर्ण शरणागति (Surrender): जीवन की हर परिस्थिति में माता पर अटूट विश्वास रखना।
  • सत्संग की महत्ता: सांसारिक मोह-माया से दूर भक्तों की संगति में मन लगाना।
  • निरंतरता (Consistency): माँ के दरबार से नाता कभी न टूटने देना और निरंतर स्मरण बनाए रखना।
  • विनम्रता (Humility): हाथ जोड़कर अपनी अल्पता स्वीकार करना और माँ को ही सर्वस्व मानना।
  • सेवा भाव: जीवन के अंतिम क्षण तक सकाम से निष्काम सेवा की ओर अग्रसर होना।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
किरपा कृपा, अनुकंपा माँ की अहैतुकी दया जो बिना मांगे मिलती है
मरते दम तक जीवन के अंतिम क्षण तक साधना में निरंतरता और दृढ़ता
जीवन की बाज़ी संपूर्ण जीवन और कर्म ईश्वर को अपना सर्वस्व सौंपना
फीका सा लागे बेरंग या महत्वहीन लगना भगवत प्रेम के आगे भौतिक सुखों का तुच्छ होना
सिलसिला क्रम, निरंतरता पूजा-पाठ और दर्शन का प्रवाह

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"इतनी किरपा मैया जी बनाये रखना, मरते दम तक सेवा में लगाए रखना"
भक्त माँ से प्रार्थना करता है कि हे जगदंबे! मुझ पर अपनी ऐसी कृपा बनाए रखना कि मेरे प्राण छूटने तक मैं आपकी सेवा से विमुख न होऊँ।

"मैं तेरा तू मेरी मैया तू राज़ी मैं राज़ी, तेरे हवाले कर दी मैंने इस जीवन की बाज़ी"
यहाँ भक्त और भगवान का अटूट रिश्ता स्थापित होता है। भक्त कहता है कि मैंने अपनी गृहस्थी और जीवन की हर चुनौती माँ के सुपुर्द कर दी है, अब मेरा भाग्य माँ के हाथ में है।

"तेरे प्रेमियों में मन लगता और कहीं ना लागे, तेरे द्वार पे आके मैया सब फीका सा लागे"
सांसारिक भोग-विलास और प्रपंच में अब उसका मन नहीं रमता, केवल संतों और माता के भक्तों का संग ही उसे आकर्षित करता है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे

या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम इतनी किरपा मैया जी बनाये रखना (Itni Kirpa Maiya Ji)
समर्पित देवी माता दुर्गा / आदिशक्ति / शेरावाली माँ
गायक / कलाकार सुख सागर (Sukh Sagar)
भाषा सरल हिंदी / बोलचाल की भाषा
मुख्य भाव भक्ति, शरणागति, वात्सल्य और विनय
उपयुक्त अवसर नवरात्रि, माता की चौकी, जागरण, संध्या आरती

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस लोकप्रिय माता के भजन को गायक सुख सागर जी ने अपनी मधुर आवाज में गाया है।

यह भजन जगत जननी माँ दुर्गा, आदिशक्ति भवानी और माता शेरावाली को समर्पित है।

इस भजन को शारदीय व चैत्र नवरात्रि, माता के जागरण, कन्या पूजन, साप्ताहिक सत्संग और नियमित संध्या वंदन के समय गाया जा सकता है।

इस भजन को गाने से मन को शांति मिलती है, अहंकार दूर होता है और माता रानी के चरणों में अटूट विश्वास एवं भक्ति की भावना जागृत होती है।

हाँ, आप इसे अपने पूजा घर में दीप प्रज्वलित करके अकेले या अपने परिवार के साथ पूरी श्रद्धा से गा सकते हैं।

इस भजन का मुख्य केंद्रीय भाव पूर्ण आत्मसमर्पण (Surrender) और माँ की निरंतर सेवा की अदम्य इच्छा है।

जी हाँ, इस लेख में संपूर्ण भजन के बोल शुद्ध देवनागरी लिपि में अर्थ सहित उपलब्ध कराए गए हैं।

माता की कृपा के लिए आप श्री दुर्गा चालीसा और दुर्गा सप्तशती के पावन पाठ का नियमित रूप से स्मरण कर सकते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह मार्गदर्शिका और भजन पाठ संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है, जिसे पारंपरिक भक्ति साहित्य, लोक गायन परंपराओं और प्रामाणिक स्रोतों के आधार पर सत्यापित करके पाठकों के लिए प्रस्तुत किया गया है। हमारा उद्देश्य सनातन संस्कृति और देवी भक्ति के संदेश को घर-घर तक पहुँचाना है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • पारंपरिक लोक भजन संग्रह एवं ऑडियो आर्काइव
  • सनातन शक्ति उपासना पद्धति एवं दुर्गा सप्तशती ग्रंथ
  • भक्ति साहित्य एवं संगीत परंपरा के शोध संदर्भ

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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