भगवान श्री गणेश जी की भक्ति में लीन होकर गाए जाने वाला यह भजन "तेरी जय हो गौरी लाल" भक्तों के हृदय में अपार श्रद्धा और आनंद का संचार करता है। गौरी पुत्र गणेश, जिन्हें प्रथम पूज्य और विघ्नहर्ता के रूप में जाना जाता है, इस भजन के माध्यम से अपनी कृपा दृष्टि अपने भक्तों पर बनाए रखने का आश्वासन देते हैं। यह भजन न केवल गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर, बल्कि किसी भी शुभ कार्य के प्रारंभ में, सत्संग में या दैनिक पूजा के दौरान गाया जा सकता है। इसमें गणेश जी के प्रति समर्पण, उनकी महिमा का गुणगान और उनसे अपने कष्टों को दूर करने की विनम्र प्रार्थना निहित है। इस भजन का भाव 'शरणागति' का है, जहाँ भक्त अपने आराध्य के चरणों में स्वयं को समर्पित कर देता है।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
तेरी जय हो जय हो, जय गोरी लाल
पूजू तेरा नाम, करो सबको निहाल
तेरी जय हो, जय हो, जय गोरी लाल।।
पान फूल चढ़े, चढ़ता है मेवा
सारा जगत तेरी करता है सेवा
भोग लगाऊं, लेकर लड्डुओं का थाल
तेरी जय हो, जय हो, जय गोरी लाल।।
गणपत मेरे काज सवारो
भरी सभा में आन पधारो
भक्तों को कर देता तू मालामाल
तेरी जय हो, जय हो, जय गोरी लाल।।
‘राजू’ भी हरिपुरिया आए
‘शुभम तिलकधारी’ गुण गाए
सारे ही देता है संकट तू टाल
तेरी जय हो, जय हो, जय गोरी लाल।।
तेरी जय हो, जय हो, जय गोरी लाल
पूजू तेरा नाम, करो सबको निहाल
तेरी जय हो, जय हो, जय गोरी लाल।।
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
इस भजन में भक्त अपने आराध्य गणेश जी की स्तुति करते हुए कहता है कि "हे गौरी के लाल! आपकी जय हो।" भक्त गणेश जी के नाम का स्मरण कर रहा है और उनसे प्रार्थना कर रहा है कि वे सभी भक्तों पर अपनी कृपा बरसाएं। भजन में आगे कहा गया है कि गणेश जी को पान, फूल और मेवा अर्पित किए जाते हैं और पूरा संसार उनकी सेवा में तत्पर रहता है। भक्त उन्हें लड्डुओं का भोग लगाकर प्रसन्न करने का प्रयास करता है।
भजन का मुख्य भाव 'विघ्नहर्ता' के प्रति विश्वास है। भक्त कहता है कि हे गणेश जी, आप मेरे बिगड़े हुए कार्यों को संवारें और मेरी पुकार सुनकर मेरे पास आएं। आप अपने भक्तों को सुख-समृद्धि से मालामाल कर देते हैं। अंत में, रचनाकार अपने और अपने साथियों के माध्यम से यह संदेश देते हैं कि गणेश जी भक्तों के सभी संकटों को हरने वाले हैं। यह भजन हमें सिखाता है कि यदि हम सच्चे मन से गणेश जी की शरण में जाएं, तो वे हमारे जीवन के सभी कष्टों को दूर कर देते हैं।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
- विघ्नहर्ता का स्मरण: यह भजन गणेश जी को विघ्नहर्ता के रूप में स्थापित करता है।
- समर्पण का भाव: इसमें भक्त की गणेश जी के प्रति अटूट आस्था और समर्पण झलकता है।
- सांस्कृतिक महत्व: यह भजन भारतीय लोक-भक्ति परंपरा का एक सुंदर उदाहरण है, जो सरल भाषा में ईश्वर की महिमा का वर्णन करता है।
- सकारात्मक ऊर्जा: इस भजन के श्रवण से मन में शांति और सकारात्मकता का संचार होता है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
इस भजन को गणेश चतुर्थी, बुधवार के दिन, या किसी भी शुभ कार्य (जैसे गृह प्रवेश, विवाह, या नया व्यवसाय) के आरंभ में गाया जा सकता है। इसे सुबह की पूजा या शाम की आरती के समय गाना अत्यंत फलदायी माना जाता है। इसे गाते समय मन में गणेश जी की प्रतिमा का ध्यान करना चाहिए और श्रद्धापूर्वक लड्डुओं का भोग अर्पित करना चाहिए।
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| भजन का नाम | तेरी जय हो गौरी लाल |
| आराध्य देव | भगवान श्री गणेश |
| गायक | तरुण सागर, कमलेश कपूर |
| भाषा | हिंदी |
| भाव | भक्ति, समर्पण, विनय |
| उपयुक्त अवसर | गणेश चतुर्थी, बुधवार पूजा, सत्संग |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: "तेरी जय हो गौरी लाल" भजन के गायक कौन हैं?
प्रश्न 2: गणेश जी को 'गौरी लाल' क्यों कहा जाता है?
प्रश्न 3: इस भजन को कब गाना चाहिए?
प्रश्न 4: क्या इस भजन के साथ भोग लगाना आवश्यक है?
प्रश्न 5: गणेश जी की पूजा से क्या लाभ होता है?
संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।
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