भक्ति काव्य व भजन मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

तेरी जय हो गणेश तेरी जय हो गणेश लिरिक्स (Teri Jai Ho Ganesh Teri Jai Ho Ganesh Lyrics in Hindi) - Ganesh BHajan

तेरी जय हो गणेश भजन के लिरिक्स हिंदी में पढ़ें। भगवान गणेश की महिमा और विघ्नहर्ता रूप की स्तुति करने वाले इस पावन भजन का आनंद लें।

भगवान श्री गणेश जी को हिंदू सनातन धर्म में 'प्रथम पूज्य' एवं 'विघ्नहर्ता' के रूप में सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। किसी भी मांगलिक कार्य, अनुष्ठान, यज्ञ, विवाह, गृहप्रवेश अथवा नए व्यवसाय के शुभारंभ से पूर्व विघ्नहर्ता गणेश जी का स्मरण और पूजन अनिवार्य माना गया है। प्रस्तुत पावन भजन "तेरी जय हो गणेश तेरी जय हो गणेश" (Teri Jai Ho Ganesh Teri Jai Ho Ganesh Lyrics) भगवान गणेश की महिमा, उनकी उत्पत्ति के दिव्य प्रसंग और उनके शरणागत भक्तों के समस्त विघ्नों के निवारण की स्तुति करता है। यह भक्ति गीत साधक के मन में अगाध श्रद्धा, समर्पण और आनंद का संचार करता है। इस लेख में हम इस सुंदर गणेश भजन के संपूर्ण बोल, विस्तृत भावार्थ, गायन की विधि, आध्यात्मिक महत्व और जीवनोपयोगी संदेशों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें:


प्रथमे गौरा जी को वंदना, द्वितीये आदि गणेश,
त्रितिये सुमीरु शारदा, मेरे कारज करो हमेश॥

तेरी जय हो गणेश तेरी जय हो गणेश,
तेरी जय हो गणेश तेरी जय हो गणेश॥

किस जननी ने तुझे जनम दियो है
किसने दिया उपदेश?
तेरी जय हो गणेश तेरी जय हो गणेश॥

माता गौरा ने तुझे जनम दियो है,
शिव ने दिया है उपदेश
तेरी जय हो गणेश तेरी जय हो गणेश॥

कारज पूरण तद ही होवे
गणपति पूजो जी हमेश
तेरी जय हो गणेश तेरी जय हो गणेश॥

सिमर चरण तेरा जो भी जस गावे
कृपा करो परमेश
तेरी जय हो गणेश तेरी जय हो गणेश॥

*** गायक / कलाकार: सलीम (Singer: SALEEM) ***

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

भगवान श्री गणेश की महिमा का गुणगान करते हुए इस भजन की पंक्तियाँ हमें भारतीय संस्कृति की उस सनातन परंपरा से जोड़ती हैं जहाँ प्रत्येक कार्य के आरंभ में ईश वंदना का विधान है। भजन की शुरुआत में वंदना के पारंपरिक क्रम को दर्शाया गया है—सर्वप्रथम माता गौरा (पार्वती) की वंदना, द्वितीय स्थान पर आदि गणेश का स्मरण, और तृतीय क्रम में विद्या की देवी माँ शारदा (सरस्वती) का ध्यान किया गया है। साधक कामना करता है कि इन तीनों शक्तियों के आशीर्वाद से उसके सभी कार्य हमेशा निर्विघ्न संपन्न हों।

भजन के अगले भाग में एक संवाद शैली का प्रयोग किया गया है जिसमें जिज्ञासु भक्त पूछता है कि हे गणेश! आपको जन्म देने वाली माता कौन हैं और आपको ऐसा दिव्य उपदेश किसने दिया है? इसका उत्तर स्वयं भजन में दिया गया है कि जगत जननी माता गौरा (पार्वती) ने आपको जन्म दिया है और देवाधिदेव महादेव शिव ने आपको परम ज्ञान एवं उपदेश प्रदान किया है। इस प्रकार भगवान गणेश शिव-शक्ति के संयुक्त तेज और ऊर्जा के प्रतीक हैं। भजन के अंत में यह संदेश दिया जाता है कि जो भी मनुष्य सच्चे मन से भगवान गणपति के चरणों का सिमरन करता है और उनका यश गाता है, उस पर परमेश्वर की असीम कृपा बरसती है और उसके जीवन के सभी कष्ट स्वतः समाप्त हो जाते हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह पारंपरिक गणेश भजन अपनी सहजता, सरलता और গভীর आध्यात्मिक गहराई के लिए जाना जाता है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • प्रथम पूज्यता का बोध: भजन में स्पष्ट किया गया है कि किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत गणेश वंदना से ही पूर्ण होती है।
  • शिव-शक्ति का स्वरूप: माता पार्वती द्वारा जन्म और भगवान शिव द्वारा उपदेश दिए जाने का प्रसंग गणेश जी के ब्रह्मांडीय स्वरूप को उजागर करता है।
  • विघ्ननाशक रूप: भगवान गणेश को विघ्नहर्ता माना गया है, जिनके स्मरण मात्र से मार्ग की सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं।
  • सुलभ लय एवं ताल: यह भजन बहुत ही सरल लयबद्धता में गाया जाता है जिसे आमजन और बच्चे भी आसानी से गा सकते हैं।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को किसी भी समय गाया जा सकता है, परंतु इसके पाठ और श्रवण के लिए कुछ विशेष अवसर अत्यंत फलदायी माने जाते हैं:

  • नित्य पूजा के समय: प्रतिदिन सुबह और शाम की आरती या पूजा के समय भगवान गणेश के समक्ष धूप-दीप प्रज्वलित करके इस भजन का गान करें।
  • संकष्टी चतुर्थी व्रत: प्रत्येक माह आने वाली संकष्टी चतुर्थी और गणेश चतुर्थी के पावन पर्व पर इस भजन का विशेष रूप से संकीर्तन किया जाता है।
  • नये कार्यों के आरंभ पर: गृहप्रवेश, नया वाहन क्रय करने, व्यापार आरंभ करने या किसी मांगलिक उत्सव के दौरान विघ્નहर्ता को प्रसन्न करने हेतु यह भजन अत्यंत उपयुक्त है।
  • सामूहिक सत्संग: मंदिरों में होने वाले आयोजनों, चौकियों और जागरण के दौरान इस भजन को गाकर भक्त आनंद विभोर होते हैं।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के केंद्र में प्रत्यक्ष रूप से विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश, उनके माता-पिता देवाधिदेव महादेव शिव और माता पार्वती (गौरा) हैं। इसके साथ ही विद्या की देवी माँ सरस्वती (शारदा) का स्मरण भी वंदना के क्रम में किया गया है। यह भजन लोक परंपरा और सूफी-भक्ति संगीत शैली के प्रसिद्ध गायक 'सलीम' द्वारा अपनी मधुर आवाज में गाया गया है, जिसने इसे जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऐसे लोकगीत और भजन भारतीय सांस्कृतिक धरोहर का अभिन्न अंग हैं जो पीढ़ियों से मौखिक और सांगीतिक परंपरा के माध्यम से चले आ रहे हैं।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

भजन की रचना लोक-साहित्य और पारंपरिक भक्ति धाराओं से प्रेरित है। भारत के ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में गणेश उत्सव और पारिवारिक अनुष्ठानों के दौरान इस प्रकार के वंदना गीत गाने की प्राचीन परंपरा रही है। इसमें शास्त्रीय जटिलताओं के स्थान पर भक्त की सरल पुकार और समर्पण को प्रमुखता दी गई है। यही कारण है कि यह भजन सदियों से लोगों की जुबान पर और हृदय में बसा हुआ है। इसे गणेश चतुर्थी व्रत कथा और उत्सवों के दौरान विशेष रूप से गाया जाता है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल हिंदी, ब्रज एवं अवधी लोकभाषा के मिश्रित रूपों से युक्त है जिसे 'संत भाषा' या 'लोक भाषा' कहा जा सकता है। इसमें शब्दों का चयन बहुत ही सहज है जैसे—'गौरा जी', 'सुमीरु', 'कारज', 'हमेश', 'तद ही' आदि। काव्य शैली की दृष्टि से इसमें प्रश्नोत्तर शैली (किस जननी ने तुझे जनम दियो है...) का सुंदर प्रयोग किया गया है जो श्रोता की जिज्ञासा को बढ़ाता है और अंत में स्वयं उत्तर देकर उसके समाधान को प्रस्तुत करता है। यह लोक काव्यों की एक अत्यंत प्रभावी और लोकप्रिय शैली है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन केवल एक स्तुति गीत नहीं है, बल्कि हमारे दैनिक जीवन के लिए भी गहरी सीख प्रदान करता है:

  • कार्यों का विधिवत आरंभ: जीवन में किसी भी बड़े लक्ष्य या कार्य को शुरू करने से पहले ईश्वर का स्मरण और बड़ों का आशीर्वाद आवश्यक है।
  • माता-पिता का सम्मान: भगवान गणेश जैसे सर्वज्ञ देवता भी माता गौरा और शिव के संस्कारों से युक्त बताए गए हैं, जो पारिवारिक मूल्यों को रेखांकित करता है।
  • शरणगति का भाव: भगवान के चरणों में पूर्ण समर्पण और सिमरन से मनुष्य के बड़े से बड़ा संकट टल जाता है।
  • सकारात्मकता: विघ्नहर्ता का स्मरण मनुष्य के मन से निराशा और भय को दूर कर सकारात्मक ऊर्जा भरता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / पदावली सरल हिंदी अर्थ संदರ್ಭ / प्रसंग
प्रथमे सबसे पहले / प्रथम स्थान पर कार्य के आरंभ में वंदना का क्रम
गौरा जी माता पार्वती (गौरी) भगवान गणेश की माता
सुमीरु स्मरण करना / ध्यान करना देवी-देवताओं का आह्वान करना
कारज कार्य / कामकाज मनुष्य के सभी शुभ कर्म
उपदेश शिक्षा / ज्ञान शिव द्वारा प्रदत्त दिव्य ज्ञान
परमेश परमेश्वर / भगवान समस्त ब्रह्मांड के स्वामी

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

पंक्ति: प्रथमे गौरा जी को वंदना, द्वितीये आदि गणेश, त्रितिये सुमीरु शारदा, मेरे कारज करो हमेश॥
भावार्थ: भक्त अपनी प्रार्थना की शुरुआत वंदना के पारंपरिक नियमों के अनुसार करता है। वह सबसे पहले माता पार्वती को प्रणाम करता है, दूसरे क्रम में आदि देव गणेश का स्मरण करता है और तीसरे स्थान पर विद्या की अधिष्ठात्री देवी शारदा का ध्यान करता है, ताकि उसके सभी कार्य हमेशा निर्विघ्न पूरे हों।

पंक्ति: किस जननी ने तुझे जनम दियो है किसने दिया उपदेश?
भावार्थ: भक्त के मन में जिज्ञासा उत्पन्न होती है कि हे गणेश! आपकी अलौकिक महिमा देखकर यह प्रश्न उठता है कि आपको जन्म देने वाली माता कौन हैं और आपको ऐसा श्रेष्ठ ज्ञान किसने दिया है?

पंक्ति: माता गौरा ने तुझे जनम दियो है, शिव ने दिया है उपदेश।
भावार्थ: भक्त स्वयं अपने प्रश्न का उत्तर देते हुए कहता है कि आपको माता पार्वती ने जन्म दिया है और देवाधिदेव भगवान शिव ने आपको ब्रह्मांडीय ज्ञान और उपदेश प्रदान किया है।

पंक्ति: कारज पूरण तद ही होवे गणपति पूजो जी हमेश।
भावार्थ: जीवन में पूर्ण सफलता और कार्य की सिद्धि तभी संभव है जब मनुष्य हमेशा विघ्नहर्ता गणपति की पूजा और आराधना करे।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

भगवान गणेश की आराधना से जुड़े कुछ अत्यंत लोकप्रिय एवं शक्तिशाली मंत्र निम्नलिखित हैं जिनका जाप इस भजन के साथ किया जा सकता है:

  • महामंत्र: ॐ गं गणपतये नमः
  • प्रार्थना श्लोक:
    वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
    निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
  • वैदिक स्तुति:
    गजाननं भूतगणदि सेवितं कपित्थजम्बूफलसारभक्षितम्।
    उमासुतं शोकविनाशकारणं नमामि विघ्नेश्वरपादपंकजम्॥

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

विवरण तथ्य
भजन का नाम तेरी जय हो गणेश तेरी जय हो गणेश (Teri Jai Ho Ganesh)
प्रमुख देवता भगवान श्री गणेश, माता पार्वती, भगवान शिव
गायक / कलाकार सलीम (Singer: SALEEM)
भाषा सरल हिंदी / लोक भाषा
भक्ति भाव विनय, समर्पण, वंदना एवं आनंद
उपयुक्त अवसर गणेश चतुर्थी, दैनिक पूजा, नया कार्य आरंभ, सत्संग
मुख्य मंच भक्तिकुल / भक्तिलोक पोर्टल

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस लोकप्रिय पारंपरिक भजन को प्रसिद्ध गायक सलीम (Saleem) द्वारा अपनी मधुर आवाज में गाया गया है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव द्वारा सभी देवी-देवताओं में परिक्रमा की प्रतियोगिता में गणेश जी ने अपने माता-पिता (शिव-पार्वती) की परिक्रमा कर उन्हें ही अपना संपूर्ण ब्रह्मांड मान लिया था। उनकी इस बुद्धि और माता-पिता भक्ति से प्रसन्न होकर शिव जी ने उन्हें सभी कार्यों में सर्वप्रथम पूजे जाने का वरदान दिया।

इस भजन में माता गौरा (पार्वती), आदि गणेश, माँ शारदा (सरस्वती) और देवाधिदेव भगवान शिव का स्मरण एवं वंदन किया गया है।

गणेश भजन का नियमित श्रवण और गान करने से मन को शांति मिलती है, जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और कार्यों में सफलता प्राप्त होती है।

बुधवार का दिन और प्रत्येक मास की चतुर्थी तिथि (विशेषकर संकष्टी चतुर्थी और गणेश चतुर्थी) भगवान गणेश की पूजा के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है।

हाँ, यह एक अत्यंत मांगलिक और सरल भजन है जिसे गृहप्रवेश, विवाह, सत्यनारायण कथा और किसी भी शुभ अवसर पर आसानी से गाया जा सकता है।

'तद ही होवे' का अर्थ है—'तभी ही पूर्ण होता है'। अर्थात भगवान गणेश की पूजा करने से ही सभी कार्य निर्विघ्न संपन्न होते हैं।

भक्तिलोक पोर्टल पर श्री गणेश चालीसा, गणेश जी की आरती और अनेक प्रसिद्ध देवी-देवताओं के भजन व स्तोत्र उपलब्ध हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

भक्तिकुल और भक्तिलोक के संपादकीय दल द्वारा इस सामग्री को उपयोगकर्ताओं की खोज प्राथमिकताओं, पारंपरिक प्रामाणिकता और शुद्धता को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। भजन के मूल शब्दों, व्याकरण और भक्ति भाव को पूर्णतः संरक्षित रखा गया है ताकि पाठकों और भक्तों को एक संपूर्ण और संतोषजनक आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त हो सके। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के अंतर्गत इस लेख को नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • पारंपरिक लोक संगीत एवं भजन संकलन परंपरा
  • सनातन पौराणिक ग्रंथ एवं गणेश पुराण संदर्भ
  • वैदिक एवं पौराणिक वंदना पद्धतियां
  • भक्तिलोक संगीत एवं साहित्य अभिलेखागार

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 12 Oct 2026

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