भक्ति काव्य व भजन मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

नाम तुझे घेता देवा होई समाधान लिरिक्स (Naam Tujhe Gheta Dewa Hoyi Samadhan Lyrics in Hindi) - Marathi Bhajan

नाम तुझे घेता देवा होई समाधान मराठी भजन के संपूर्ण लिरिक्स, हिंदी अर्थ और भावार्थ पढ़ें। इस भक्ति गीत के माध्यम से ईश्वर के नाम-स्मरण का आनंद लें।

लेख विवरण एवं SEO मेटा डेटा (Article Metadata)

  • SEO Title: नाम तुझे घेता देवा होई समाधान लिरिक्स | Naam Tujhe Gheta Dewa Hoyi Samadhan Lyrics in Hindi
  • Meta Title: Naam Tujhe Gheta Dewa Hoyi Samadhan Lyrics - Marathi Bhajan | Bhaktilok
  • Meta Description: 'नाम तुझे घेता देवा होई समाधान' (Naam Tujhe Gheta Dewa Hoyi Samadhan) मराठी भजन के संपूर्ण लिरिक्स, हिंदी अर्थ, भावार्थ और आध्यात्मिक महत्व पढ़ें।
  • URL Slug: 2023/09/naam-tujhe-gheta-dewa-hoyi-samadhan.html
  • Primary Keyword: Naam Tujhe Gheta Dewa Hoyi Samadhan Lyrics in Hindi
  • Content Type: TYPE 1: BHAJAN (भजन / पद / भक्ति गीत)

भारतीय भक्ति परंपरा और विशेषकर महाराष्ट्र की महान संत परंपरा में ईश्वर के नाम-स्मरण (नाम संकीर्तन) को भवसागर से तरने का सबसे सुगम और अचूक साधन माना गया है। प्रस्तुत पावन भजन "नाम तुझे घेता देवा होई समाधान" (Naam Tujhe Gheta Dewa Hoyi Samadhan) इसी अगाध भक्ति रस, समर्पण और आंतरिक शांति का जीवंत प्रतीक है। जब एक साधक या जीवात्मा इस संसार के तमाम प्रपंचों, दुखों और चिंताओं से विचलित होकर अपने आराध्य के चरणों में शरण लेती है, तब केवल प्रभु का नाम ही उसके अंतर्मन को शीतलता और पूर्ण संतोष प्रदान करता है। इस भजन का प्रत्येक शब्द मनुष्य को बाहरी माया-मोह से हटाकर भीतर की ओर मुड़ने और निरंतर भगवान का स्मरण करने की प्रेरणा देता है। भगवद नाम की महिमा का गान करते हुए यह मराठी भजन प्रातःकालीन प्रार्थना, संध्या वंदन, साप्ताहिक सत्संग और एकादशी जैसे पावन अवसरों पर अत्यंत श्रद्धा के साथ गाया जाता है। श्री हनुमान चालीसा और शिव तांडव स्तोत्र की तरह ही यह भजन भी साधक की चेतना को उन्नत करने में सहायक है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

नाम तुझे घेता देवा, होई समाधान,
तुझे चरण हेचि माझे, वैकुंठ धाम ॥ ध्रुति ॥

संसार तापानें तापले हे मन,
तुझ्या कृपेविना नाही, दुजा कोणा शरण।
अंधार या जगाचा, तूचि दीप्तिमान,
नाम तुझे घेता देवा, होई समाधान ॥ १ ॥

सुख दुःखाच्या या लाटा, उसळती संसारी,
हातात धरूनी हात, तूच नेई पार करी।
विश्वास हाचि माझा, तूच प्राण-प्राण,
नाम तुझे घेता देवा, होई समाधान ॥ २ ॥

अहंकार माझा सारा, चरणी अर्पिला,
तुझ्या प्रेमाचा झरा, अंतरी व्यापिला।
धन्य झाले जीवन, गाऊनि गुणगान,
नाम तुझे घेता देवा, होई समाधान ॥ ३ ॥

विठ्ठल विठ्ठल घोषात, तल्लीन झाली काया,
विसरूनी गेली अवघी, मायेची ती छाया।
तुझ्या भेटीची आस, हेच माझे वरदान,
नाम तुझे घेता देवा, होई समाधान ॥ ४ ॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन केवल शब्दों का संग्रह नहीं है, बल्कि एक आर्त भक्त की करुण पुकार और उसके प्रगाढ़ संतोष की अनुभूति है। भजन के मुखड़े में भक्त कहता है कि हे प्रभु! आपका पावन नाम लेते ही मेरे हृदय को असीम समाधान (शांति और संतोष) प्राप्त हो जाता है। मेरे लिए आपके ये चरण ही समस्त सुखों से परिपूर्ण साक्षात वैकुंठ धाम हैं।

प्रथम अंतरे में साधक अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहता है कि यह भौतिक संसार विविध प्रकार के तापों (क्लेश, चिंता और दुखों) से तप रहा है। इस स्थिति में आपकी असीम कृपा के बिना मेरा अन्य कोई आश्रय नहीं है। आप ही इस अज्ञान रूपी अंधकार से भरे संसार में प्रकाश दिखाने वाले सूर्य के समान हैं।

द्वितीय एवं तृतीय अंतरे में जीवन के उतार-चढ़ाव, सुख-दुःख की लहरों का सुंदर रूपक प्रस्तुत किया गया है। भक्त का विश्वास है कि भंवर रूपी संसार में प्रभु ही उसका हाथ पकड़कर पार लगाते हैं। जब मनुष्य अपने भीतर के अहंकार को भगवान के चरणों में समर्पित कर देता है, तब उसके अंतःकरण में भगवान के प्रेम का अमर स्रोत फूट पड़ता है। अंततः संत परंपरा के अनुसार विठ्ठल नाम के संकीर्तन में तल्लीन होकर साधक माया-मोह के बंधनों से मुक्त हो जाता है और केवल प्रभु मिलन की आर्त अभिलाषा ही शेष रह जाती है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

महाराष्ट्र की वारकरी संप्रदाय और संत परंपरा में नाम-स्मरण को ही मोक्ष का मार्ग बताया गया है। इस भजन की मुख्य विशेषता इसकी सरलता, मार्मिकता और उच्च दार्शनिक गहराई है। यह भजन हर आयु वर्ग के लोगों द्वारा आसानी से गाया जा सकता है। इसके श्रवण मात्र से मानसिक तनाव दूर होता है, एकाग्रता बढ़ती है और हृदय में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। संत संत ज्ञानेश्वर और संत तुकाराम के विचारों की महक इस भजन में स्पष्ट रूप से अनुभव की जा सकती है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस दिव्य भजन को गाने और सुनने का कोई निश्चित समय नहीं है, क्योंकि ईश्वर स्मरण हर पल पवित्र है। तथापि, निम्नलिखित अवसरों पर इसका विशेष महत्व है:

  • प्रातःकालीन वंदना: दिन की शुरुआत सकारात्मकता और मानसिक शांति के साथ करने के लिए सुबह स्नान के पश्चात।
  • संध्याकालीन आरती: घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करने के बाद ध्यान की स्थिति में।
  • सत्संग और भजन संध्या: साप्ताहिक या मासिक सामूहिक धार्मिक आयोजनों और एकादशी व्रत के दौरान।
  • असंतोष या तनाव के समय: जब भी मन अशांत हो, तब एकांत में बैठकर इस भजन का स्मरण करने से अद्भुत मानसिक शांति मिलती है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन मुख्य रूप से जगत के पालनहार भगवान श्री विष्णु, उनके अवतार भगवान श्री कृष्ण तथा महाराष्ट्र के आराध्य भगवान विट्ठल (पांडुरंग) को समर्पित है। वारकरी संप्रदाय के संतों ने पाण्डुरंग के नाम को ही अपनासर्वस्व माना है। संत परंपरा की इस पावन धारा में भगवान का नाम ही जप, तप और योग है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

यह पारंपरिक मराठी भजन पीढ़ियों से संतों, कीर्तनकारों और भक्तों के मुख से प्रसारित होता आ रहा है। इसकी रचना लोक-भक्ति की उस धारा से हुई है जहाँ शास्त्रीय जटिलताओं से परे केवल भाव और समर्पण को प्रधानता दी जाती है। वारकरी संतों की मंडली जब पाण्डुरंग की वारी (यात्रा) पर निकलती है, तब ऐसे भावपूर्ण भजनों से पूरा मार्ग गूंज उठता है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

यह भजन सुमधुर मराठी भाषा में रचित है, जिसमें ब्रज और हिंदी के कुछ तद्भव शब्दों का सहज मिश्रण इसे और भी अधिक ग्राह्य बनाता है। इसकी काव्य शैली लयात्मक और गेय है। अनुप्रास और उपमा अलंकारों का सहज प्रयोग इसके सौंदर्य को और अधिक द्विगुणित कर देता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

इस भजन से हमें यह महत्वपूर्ण आध्यात्मिक शिक्षा मिलती है कि बाहरी सुख-सुविधाएं और धन-दौलत कभी भी मन को वास्तविक शांति नहीं दे सकते। वास्तविक समाधान केवल ईश्वर के चरणों में शरण लेने और उनके नाम के निरंतर स्मरण से ही संभव है। जीवन के संघर्षों में कभी भी घबराना नहीं चाहिए, बल्कि अटूट विश्वास के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / पदावली सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
घेता लेने पर / स्मरण करने पर प्रभु का नाम जपना या स्मरण करना
समाधान शांति, संतोष, तृप्ति मन की समस्त चिंताओं का अंत
वैकुंठ धाम विष्णु लोक / परम धाम ईश्वर के चरणों में मिलने वाला परमानंद
संसार तापाने संसार के दुखों और क्लेशों से भवसागर की भौतिक पीड़ाएं
दीप्तिमान प्रकाशवान, तेजोमय ज्ञान का प्रकाश देने वाला

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"नाम तुझे घेता देवा, होई समाधान" - हे देव! आपके पावन नाम का उच्चारण मात्र करने से मेरा अशांत मन शांत और तृप्त हो जाता है।
"तुझे चरण हेचि माझे, वैकुंठ धाम" - मेरे लिए आपके ये चरणकमल ही साक्षात बैकुंठ लोक के समान सुखदायी हैं।
"संसार तापानें तापले हे मन" - यह मेरा मन भौतिक संसार की विविध चिंताओं और तापों से जल रहा है, इसे आपकी शीतलता चाहिए।
"तुझ्या भेटीची आस, हेच माझे वरदान" - हे प्रभु! आपके दर्शन की लालसा ही मेरे जीवन का सबसे बड़ा और एकमात्र वरदान है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे।
हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे॥

कलयुग में नाम संकीर्तन के महामंत्र के रूप में यह महामंत्र सर्वसम्मत है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम नाम तुझे घेता देवा होई समाधान (Naam Tujhe Gheta Dewa Hoyi Samadhan)
आराध्य देव भगवान विट्ठल / श्री हरि विष्णु / श्रीकृष्ण
भाषा मराठी / हिंदी मिश्रित पारंपरिक
भक्ति भाव शरणागति, शांति, भक्ति और प्रेम
संगीत परंपरा वारकरी भजन परंपरा
उपयुक्त अवसर दैनिक पूजा, सत्संग, एकादशी, संध्या वंदन

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह पारंपरिक भजन अत्यंत मधुर मराठी भाषा में रचित है, जिसे महाराष्ट्र के वारकरी संप्रदाय और संतों द्वारा बहुत चाव से गाया जाता है।

इस भजन के प्रमुख आराध्य भगवान विट्ठल (पांडुरंग) तथा जगत के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु हैं।

इस भजन को प्रातःकालीन पूजा, संध्या आरती, एकादशी व्रत या जब भी मन अशांत हो, तब एकांत में श्रवण या गायन किया जा सकता है।

भजन का मुख्य संदेश यह है कि संसार के तमाम दुखों और प्रपंचों के बीच केवल ईश्वर का नाम-स्मरण ही मनुष्य को वास्तविक मानसिक शांति और समाधान दे सकता है।

हाँ, इसकी धुन बहुत सरल और तालबद्ध है, जिससे इसे हारमोनियम और ढोलक के साथ शुरुआती लोग भी आसानी से गा सकते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह आलेख भजनों के पारंपरिक स्रोतों, वारकरी साहित्य और सांस्कृतिक धरोहर के अध्ययन पर आधारित है। इसे पाठकों की आध्यात्मिक रुचि को ध्यान में रखते हुए संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के रूप में प्रस्तुत किया गया है। सामग्री की शुद्धता और प्रामाणिकता का पूरा ध्यान रखा गया है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • महाराष्ट्र की संत गाथा और वारकरी संप्रदाय के भजन संग्रह।
  • पारंपरिक लोकगीत और संकीर्तन ग्रंथ।
  • सनातन धर्म के नाम-स्मरण महिमा पर आधारित धार्मिक ग्रंथ एवं पुराण।

संबंधित भजन एवं लेख

श्री हनुमान चालीसा पाठ एवं अर्थ

संकट मोचन हनुमान जी की पावन चालीसा और उसका विस्तृत हिंदी भावार्थ।

शिव तांडव स्तोत्रम् लिरिक्स

लंकापति रावण द्वारा रचित भगवान शिव का अति ओजस्वी और शक्तिशाली स्तोत्र।

संत तुकाराम महाराज के प्रसिद्ध अभंग

वारकरी संत तुकाराम जी के आध्यात्मिक अभंग और उनका जीवन दर्शन।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!