भक्ति काव्य व भजन मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

जगराता तेरा गाँउ मैया रोज मुझे वो रेन मिले (Jagarata tera gaau maiya roj mujhe wo rain mile Lyrics in Hindi) - mata Bhajan

मैया के पावन भजन 'जगराता तेरा गाँउ मैया रोज मुझे वो रेन मिले' के भावपूर्ण लिरिक्स हिंदी में पढ़ें। माता रानी की भक्ति और महिमा का सुंदर संकीर्तन।

प्रस्तावना एवं परिचय

मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

 

जब चोट कभी 

मेरे लग जाती थी

तो आँख तेरी भी 

तो भर आती थी

माँ… ओ… माँ…


जब चोट कभी 

मेरे लग जाती थी

तो आँख तेरी भी 

तो भर आती थी

एक छोटी सी 

फूँक से तेरी

सभी दर्द मेरे 

होते थे गुम


आज भी कोई 

चोट लगे तो

याद आती हो

याद आती हो तुम

आज भी मेरी 

आँख भरे तो

याद आती हो

याद आती हो तुम

माँ… मेरी माँ… 

मेरी माँ…


ओ माँ… मेरी माँ

मेरी माँ…  माँ


तेरी बातों में अपनी

हर एक मैं उलझन का

हल पा लेता था

तेरे हाथों कि रोटी अक्सर ही

भूख से ज्यदा खा लेता था


तेरी बातों में अपनी

हर एक मैं उलझन का

हल पा लेता था

तेरे हाथों कि रोटी अक्सर ही

भूख से ज्यदा खा लेता था

तेरा हिस्सा मैं

तेरा क़िस्सा मैं

जो सबको सुनाती हो तुम


आज भी मेरी बात चले तो

याद आती हो

याद आती हो तुम

आज भी मेरी

आँख भरे तो

याद आती हो

याद आती हो तुम

माँ… मेरी माँ… मेरी माँ…

माँ… मेरी माँ… मेरी माँ…


कोने को थामे तेरे आँचल के

बेफिक्र मैं सो जाता था

मेरे दिल में क्या

है तेरे बिना माँ

कोई समझा ही ना पता था

जो हो संग तू ना

तो हो जग सुना

प्यार इतना जताती हो तुम


आज भी कोई…

लगे तो

याद आती हो

याद आती हो तुम

आज भी मेरी

आँख भरे तो

याद आती हो

याद आती हो तुम

ओ मेरी माँ… मेरी माँ…

मेरी माँ… मेरी माँ…

माँ…

*** Singer - Jubin Nautiyal | Payal Dev, Manoj Muntashir ***

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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "जगराता तेरा गाँउ मैया रोज मुझे वो रेन मिले (Jagarata tera gaau maiya roj mujhe wo rain mile Lyrics in Hindi) - mata Bhajan - Bhaktilok" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।

भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।

भजनों को गाने की सही विधि क्या है?

भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।

क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?

हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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