भक्ति काव्य व भजन मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

आलो शरण तुला भगवंता लिरिक्स (Aalo Sharan Tula Bhagwanta Lyrics in Hindi) - by suresh vadakar Marathi Bhajan

आलो शरण तुला भगवंता भजन में भगवान विठोबा के प्रति समर्पण और उनकी कृपा का वर्णन किया गया है।

प्रस्तावना एवं परिचय

भगवंत की शरण में आत्मसमर्पण का भजन

भगवंत की कृपा से आत्मा को शांति और संजीवनी प्राप्त करने के लिए इस भजन का गान करें।

आलो शरण तुला भगवंता पेटून उठला वनवा सारा तिन्ही जगाला लागली आग नसे आसरा नाहीं निवारा जाऊ कुठे मी सांग विट्ठलाजाऊ कुठे मी सांग आलो शरण तुला भगवंता घेई कुशीत तुझ्या भगवंतापूण्य झाले स्वस्थ जगी त्याला नाहीं भाव पुण्यवान होई रंक पापी झाला राम नाही थारा इथ गुणवंताच्या आलो शरण तुला भगवंता सत्यवान सावित्री चा संपला जमाना वैश्या करी चारित्रयाचा खोट च बहाना झाली दिन वाणी पतिव्रता आलो शरण तुला भगवंता कुम्पंच खाई शेत त्याला नाहीं लाज घरचा च रखवाला वैरी झाला आज देई आसरा दिन वन्ता
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में भक्त अपनी व्यथा और दुःख के समय में भगवान की शरण में जाने की बात कर रहा है। पहले चरण में वह कहता है कि चारों ओर संकट है और मनुष्य को कहीं भी स्थायी आश्रय नहीं मिलता। "जाऊ कुठे मी सांग विट्ठला" यह दर्शाता है कि भक्त स्वयं को भगवान के प्रति समर्पित कर देता है, जो समस्त जीवों का संरक्षक है। 'आलो शरण तुला भगवंता' का आशय है कि भक्त ने भगवान में शरण ली है और उनके पास जाकर शांति की खोज कर रहा है। इसमें यह भी विस्तारित किया गया है कि भक्त के जीवन में चाहे कितनी भी कठिनाइयाँ आ जाएँ, वह विश्वास रखता है कि भगवान की शरण लेने से उसे सभी दुःख-दर्द दूर होंगे।

भजन के अगले हिस्से में सत्यवान और सावित्री के संबंध की चर्चा की जाती है, जिसमें पतिव्रता के चारित्र्य का उल्लेख है। 'संपला जमाना वैश्या करी चारित्रयाचा' वाक्य में यह विचार दिया गया है कि चारित्र्य के महत्व को समझते हुए, भगवान की शरण लेने से एक पापी भी शुद्ध हो सकता है। इसके माध्यम से भगवान की कृपा और उसके प्रति भक्ति की महानता का संदेश दिया गया है। भक्ति की मानसिकता में सच्चाई, समर्पण और सम्मान के भाव निहित होते हैं, जो कि श्रद्घा के साथ ही संभव हैं। इस प्रकार यह भजन भक्त को यह सिखाता है कि चाहे उनकी स्थिति कितनी भी दयनीय हो, भगवान की शरण में जाने से सब कुछ सम्भव है।

भजन का अंतिम भाग बताता है कि भगवान की शरण में जाने से विश्वास, आत्मा की शांति मिलती है और व्यक्ति अपने जीवन में संतोष महसूस करता है। 'घरचा च रखवाला वैश्या झाला आझ' इस पंक्ति से यह संकेत मिलता है कि जीवन के साधारण बिंदुओं में भी सत्ता का ध्यान रखने का संदर्भ है। यह भक्ति मार्ग का उपदेश देता है कि जो भक्त सच्चे हृदय से अपने ईश्वर में समर्पण करता है, उसे भले ही कितनी गंदी परिस्थितियों का सामना करना पड़े, भगवान हमें उनके माध्यम से सच्चाई का ज्ञान देते हैं। यहाँ पर भगवान की विभिन्न रूपों में उपयोगिता को समझाने के लिए ऐसे भाव से लिखा गया है कि वो हर समय हर जगह उपस्थित हैं।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन में भगवान विठोबा की महिमा का वर्णन है, जो भारतीय संस्कृति के प्रमुख देवताओं में से एक हैं। विठोबा, विशेषकर महाराष्ट्र में, भक्तों का प्रिय देवता माने जाते हैं। भक्तों के दैनिक जीवन में भगवान की कृपा के बारे में और उनके जीवन में आस्था का प्रकाश फैलाने के लिए यह भजन अनिवार्य है। इससे यह जानकारी मिलती है कि भगवान की शरण में जाने वाले व्यक्ति के पाप और दोष मिट जाते हैं। पौराणिक कथाओं में, ऐसे उदाहरण हैं जहाँ भक्तों ने कठिनाईयों का सामना किया और भगवान की कृपा से उद्धार पाए। इस प्रकार, यह भजन हमारे धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन को गाने से मानसिक शांति, सांत्वना और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। यह विषाद और चिंता को दूर करके मन को संतुलित करता है। नियमित रूप से इसका जाप करने से भक्त की आत्मा की शुद्धि होती है और भक्ति की भावना में इजाफा होता है। यह मानसिक तनाव को कम करता है और भगवान में विश्वास को सुदृढ़ बनाता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पाठ सुबह या शाम को किया जा सकता है, जब मन शांत और एकाग्र हो। भजन गाते समय एक दीप जलाना और स्नान करके स्वच्छ मन से बैठना उचित है। मन को भगवान की भक्ति में रमता हुआ रखना चाहिए। साथ ही, ईश्वर की उपासना में श्रद्धा, भक्ति और समर्पण की भावना रखनी चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

आलो शरण तुला भगवंता भजन का मूल उद्देश्य क्या है?

इस भजन का मूल उद्देश्य भक्त की भगवान में पूर्ण विश्वास और आत्मसमर्पण को दर्शाना है। यह बताता है कि भगवान की शरण लेने से सभी दुख समाप्त होते हैं।

भजन की किस पंक्ति से भक्त की व्यथा प्रकट होती है?

भजन की पंक्ति 'नसे आसरा नाहीं निवारा जाऊ कुठे मी सांग विट्ठलाजाऊ कुठे मी सांग' से भक्त की व्यथा और संकट की स्थिति प्रकट होती है। यह उसकी व्यथा को प्रकट करता है।

इस भजन के माध्यम से भक्ति का क्या संदेश मिलता है?

भजन के माध्यम से यह संदेश मिलता है कि भक्ति में सच्चाई, समर्पण और श्रद्धा का होना अत्यंत आवश्यक है। भगवान की कृपा से सभी परेशानी दूर होती हैं।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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