भक्ति काव्य व भजन मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

वैष्णव जन तो लिरिक्स (Vaishnav Jan To Lyrics In Hindi)

वैष्णव जन तो भजन मानवता की सेवा और दया का संदेश देता है, सच्चे वैष्णव के गुणों की महत्ता को उजागर करता है।

प्रस्तावना एवं परिचय

वैष्णव जन की महानता: भक्ति का स्वरुप

यह भजन वैष्णवों के गुणों का वर्णन करता है, जो दूसरों की पीड़ा समझते हैं और हमेशा दया और सेवा के भाव रखते हैं।

वैष्णव जन तो लिरिक्स (Vaishnav Jan To Lyrics In Hindi) वैष्णव जन तो तेने कहियेजे पीड परायी जाणे रे ।पर दुःखे उपकार करे तो येमन अभिमान न आणे रे ॥ वैष्णव जन तो तेने कहिये ।जे पीड परायी जाणे रे॥ सकल लोकमां सहुने वंदेनिंदा न करे केनी रे ।वाच काछ मन निश्चळ राखेधन धन जननी तेनी रे ॥ वैष्णव जन तो तेने कहिये ।जे पीड परायी जाणे रे॥ समदृष्टि ने तृष्णा त्यागीपरस्त्री जेने मात रे ।जिह्वा थकी असत्य न बोलेपरधन नव झाले हाथ रे ॥ वैष्णव जन तो तेने कहिये ।जे पीड परायी जाणे रे॥ मोह माया व्यापे नहि जेनेदृढ़ वैराग्य जेना मनमां रे ।रामनाम शुं ताली रे लागीसकल तीरथ तेना तनमां रे ॥ वैष्णव जन तो तेने कहिये ।जे पीड परायी जाणे रे॥ वणलोभी ने कपटरहित छेकाम क्रोध निवार्या रे ।भणे नरसैयॊ तेनुं दरसन करतांकुल एकोतेर तार्या रे ॥ वैष्णव जन तो तेने कहिये ।जे पीड परायी जाणे रे॥ वैष्णव जन तो तेने कहियेजे पीड परायी जाणे रे ।पर दुःखे उपकार करे तो येमन अभिमान न आणे रे ॥
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

भजन 'वैष्णव जन तो' एक ऐसा भक्ति गीत है जो वैष्णव जन के व्यक्तित्व और उनके गुणों का समर्पण करता है। इस भजन में कहा गया है कि वैष्णव व्यक्ति वह है जो दूसरों की पीड़ा को समझता है और उनके दुःख में उनकी सहायता करता है। यह भजन सीधे तौर पर समाज के प्रति दया, सहानुभूति और सेवा का संदेश देता है। इस गीत की शुरुआती पंक्तियाँ 'तेने कहिये जे पीड परायी जाणे रे' यह स्पष्ट करती हैं कि एक सच्चा वैष्णव वह है जो परायों के दुःख को अपना दुःख मानता है, और जब वह किसी की सहायता करता है, तो उसमें कोई अभिमान नहीं होता। यह एक गहन मूल्य है, जो मानवता की सेवा के लिए हमें प्रेरित करता है।

भजन में यह भी बताया गया है कि सच्चा वैष्णव निंदा नहीं करता और सभी लोगों का सम्मान करता है। 'सकल लोकमां सहुने वंदेनिंदा न करे केनी रे' इस पंक्ति के माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि जो व्यक्ति निंदा से दूर रहता है, उसे सभी जगह सम्मान मिलता है। वैष्णव का व्यक्तित्व ऐसा होता है कि उनके मन, वाच, और क्रिया में एकता होती है। वे केवल अपने ही फायदों के लिए काम नहीं करते, बल्कि सबके कल्याण के लिए उनका जीवन समर्पित होता है। इसमें समदृष्टि की भी बात की गई है, जो न केवल भौतिक दृष्टि से बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से भी वैष्णव के विवेक को प्रकट करती है।

यह भजन वैष्णव धर्म की एक गहरी समझ को भी दर्शाता है, जिसमें परस्त्री के प्रति अति सम्मान, मोह-माया से दूर रहने, और सच्चाई के प्रति प्रतिबद्धता का आचार विचार शामिल है। भक्ति मार्ग का यह अहसास हमें वैराग्य की ओर ले जाता है, जिसमें राम नाम का जाप और तीरथ का दर्शन एक integral हिस्सा बन जाते हैं। वैष्णव की पहचान भक्ति में ही छिपी है, जो जीवन को सरलता और शुद्धता से भर देती है। यहाँ जिह्वा से असत्य न बोलने, और परधन के लिए चोरी न करने की भी बात की गई है, जो वैष्णवों की नैतिकता को और मजबूत बनाता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन भारतीय संस्कृति में विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यह हमारी आचार-व्यवहार और मानसिकता को सुधारने के लिए प्रेरित करता है। भारतीय पौराणिक कथाएँ जैसे महाभारत और रामायण में महान भक्तों का उद्देश्य दूसरों की सेवा और दया को दर्शाया गया है। 'वैष्णव जन तो' भजन में यही आध्यात्मिकता निहित है। यह भजन संत नरसिंह मेहता द्वारा रचा गया था, जिन्होंने भगवान के प्रति भक्ति और मानवता की सेवा को सर्वोच्च माना। यह भजन आज भी समाज में नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देने का काम कर रहा है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का नियमित जाप मानसिक शांति और स्थिरता प्रदान करता है। यह आत्मा को सच्चाई और दया के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करता है। साथ ही, यह भजन भारतीय संस्कृति की गहरी समझ को बढ़ाता है और भक्ति के प्रति प्रेम को जागृत करता है। इससे शांति और सुकून की अनुभूति होती है, जो व्यक्ति को मानसिक तनाव से मुक्ति दिलाती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह की आरती या संध्या बेला में करना विशेष फलदायी होता है। धूप-दीप जलाते समय एक शांत वातावरण में बैठकर इस भजन का पाठ करें। मन में शुद्धता और भक्ति का भाव रखें। सही मुद्रा में बैठें और ध्यान लगाते हुए भजन का सही अर्थ समझने का प्रयास करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

यह भजन किसकी भक्ति में गाया जाता है?

यह भजन भगवां श्री कृष्ण और उनके अनुगामियों की भक्ति में गाया जाता है, जो मानवता की सेवा और दया का संदेश देते हैं।

इस भजन के गाने से क्या लाभ होता है?

इस भजन के गाने से मानसिक शांति, आत्मिक संतोष और दिव्य प्रेम की अनुभूति होती है, जो जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में मदद करती है।

कौन से समय पर इस भजन का पाठ करना चाहिए?

इस भजन का पाठ सुबह और शाम के समय करना सर्वोत्तम माना जाता है, जब मन शांत और ध्यान की स्थिति में होता है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 05 Oct 2026

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