भक्ति काव्य व भजन मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

तुम से लागी लगन पारस प्यारा लिरिक्स(Tumse Lagi Lagan Le Lo Apni Sharan Paras Pyara Lyrics in Hindi)

विवरण में 'तुम से लागी लगन पारस प्यारा' भजन का अर्थ, महत्व और भक्तिपूर्ण भावनाओं का अनावरण।

प्रस्तावना एवं परिचय

पारस प्यारे की भक्ति स्तुति

आपकी आस्था को नई ऊँचाई देने वाला यह भजन पारस प्यारे की शरण में संपूर्ण सुख और शांति की प्रेरणा देता है।

तुम से लागी लगन ले लो अपनी शरण पारस प्यारा। मेटो मेटो जी संकट हमारा। निशदिन तुमको जपूँ पर से नेह तजूँ जीवन सारा। तेरे चरणों में बीत हमारा ॥ टेक॥ अश्वसेन के राजदुलारेवामा देवी के सुत प्राण प्यारे। सबसे नेह तोड़ाजग से मुँह को मोड़ासंयम धारा ॥ मेटो मेटो जी संकट हमारा ॥ इंद्र और धरणेन्द्र भी आएदेवी पद्मावती मंगल गाए। आशा पूरो सदादुःख नहीं पावे कदासेवक थारा ॥ मेटो मेटो जी संकट हमारा ॥ जग के दुःख की तो परवाह नहीं हैस्वर्ग सुख की भी चाह नहीं है। मेटो जामन मरण होवे ऐसा यतन पारस प्यारा ॥ मेटो मेटो जी संकट हमारा ॥ लाखों बार तुम्हें शीश नवाऊँजग के नाथ तुम्हें कैसे पाऊँ। ‘पंकज’ व्याकुल भयादर्शन बिन ये जिया लागे खारा ॥ मेटो मेटो जी संकट हमारा ॥ तुम से लागी लगन ले लो अपनी शरण पारस प्यारा। मेटो मेटो जी संकट हमारा।
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

उक्त भजन में भक्त की भगवान के प्रति गहरी भक्ति और श्रद्धा को स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है। इसमें 'तुम से लागी लगन' वाक्यांश से भक्त अपने हृदय की गहराइयों में निहित अपने ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम का उल्लेख करता है। भक्त यह प्रार्थना करते हुए कहता है कि पारस प्यारे (भगवान) उनकी शरण ले लें, क्योंकि संकट और दुखों की घड़ी में यही एकमात्र सहारा है। हर श्लोक में भक्त का विश्वास और ईश्वर में भरोसा प्रकट होता है, जैसे 'मेटो मेटो जी संकट हमारा'। यहाँ भक्त इस बात को स्पष्ट करता है कि भले ही वह भौतिक सुखों की कामना न करे, परंतु उसे अपनी ईश्वर की शरण में सुरक्षा की आवश्यकता है।

इसके अगले भाग में भक्त अपने भावों के माध्यम से यह बताता है कि इंद्र और धरणेन्द्र भी देवी पद्मावती का गुणगान करते हैं। यहाँ पर भक्त की दीनता और निर्भरता प्रकट होती है। 'जग के दुःख की तो परवाह नहीं है', इस वाक्य से यह स्पष्ट होता है कि भक्त केवल अपने ईश्वर की कृपा के प्रति आकृष्ट है और उसकी आदर्श स्थिति की कामना करता है। यह आत्मिक संताप और आंतरिक जिज्ञासा का प्रतीक है, क्योंकि भक्त जाने-अनजाने में लगातार अपने दुखों का सामना कर रहा है। इस दृष्टिकोण से, यह भजन भक्त के हृदय की गहराई को छूता है और उसकी भावनाओं को जगाता है।

ईश्वर के प्रति यह भक्ति मार्ग की पवित्रता को दर्शाता है, जहाँ भक्त अपने जीवन के सभी संकटों को हटाने के लिए ईश्वर की शरण में आता है। यहाँ 'पारस प्यारा' से तात्पर्य उस दिव्य ऊर्जा से है, जो भक्त के व्यक्तित्व को आलोकित करती है। दार्शनिक दृष्टिकोण से, यह भजन भक्त और भगवान के बीच की अनन्य भक्ति और प्रेम को उजागर करता है। यह भावार्थ हमें यह सिखाता है कि भक्ति मार्ग में ईश्वर से जुड़ने के लिए, भक्त को अपनी आत्मा की गहराईयों में झांकना आवश्यक है, ताकि वह अपने सर्वश्रेष्ठ स्वरूप को पहचान सके।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह भक्तों को ईश्वर की अनुकंपा की ओर आकर्षित करता है। इसका संदर्भ विभिन्न पौराणिक ग्रंथों में मिलता है, जैसे भागवत पुराण और रामायण में, जहाँ भक्त की भक्ति और ईश्वर की कृपा का प्रवाह दर्शाया गया है। देवी पद्मावती के संदर्भ में, यह भजन न केवल उसकी पूजा का एक हिस्सा है, बल्कि यह भक्ति के लिए एक मार्गदर्शक भी है। यह दर्शाता है कि कैसे एक भक्त ईश्वर के प्रति अपनी समर्पण भावना के माध्यम से जीवन के दुखों से उबर सकता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन के जप का नियमित अभ्यास मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से कई लाभ प्रदान करता है। यह तनाव को कम करके मन को शांति प्रदान करता है, साथ ही भक्ति भाव को बढ़ाता है। मेडिटेशन के रूप में यह ध्यान की गहराई को उत्तेजित करता है, जिससे व्यक्ति की आत्मा को दिव्य ऊर्जाओं के साथ जोड़ता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का सस्वर जप सुबह या शाम के समय करना उत्तम रहता है, जब मन शांत और एकाग्र होता है। जप के दौरान एक शुद्ध स्थान पर बैठना चाहिए, जहाँ दीप जलाकर और पुष्प अर्पित करके ईश्वर की कृपा प्राप्त की जा सके। सही मानसिकता में रहकर, भक्त को पूर्ण समर्पण भाव के साथ स्वरूप का ध्यान करना चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

भजन का मुख्य संदेश है कि भक्त भगवान से संकटों से मुक्ति की प्रार्थना करता है और उसकी शरण में आकर संपूर्ण जीवन बिताने की इच्छा व्यक्त करता है।

भजन में 'पारस प्यारा' का क्या अर्थ है?

'पारस प्यारा' का अर्थ है वह भगवान या दिव्य शक्ति जो भक्त के जीवन को सुखमय और संकटमुक्त बनाने में मदद करती है। यह एक प्रेमपूर्ण संबोधन है।

इस भजन का जप करने का सही तरीका क्या है?

भजन का जप ध्यानपूर्वक और श्रद्धा भाव से करना चाहिए, ideally सुबह या शाम को, दीप जलाकर और पुष्प अर्पित करके।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 11 Oct 2026

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