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सारी दुनियां नू बाबा जी ने तारिया लिरिक्स (Sari duniya nu baba ji ne tareya Lyrics in Hindi) - Baba Balak Nath Bhajan

बाबा बालक नाथ जी के प्रसिद्ध भजन 'सारी दुनियां नू बाबा जी ने तारिया' के लिरिक्स हिंदी में पढ़ें। बाबा जी की महिमा और भक्ति से ओतप्रोत यह भजन यहाँ उपलब्ध है।

सिद्ध शिरोमणि बाबा बालक नाथ जी महाराज के पावन चरणों में समर्पित यह भजन "सारी दुनियां नू बाबा जी ने तारिया" (Sari duniya nu baba ji ne tareya Lyrics) उत्तर भारत, विशेषकर हिमाचल प्रदेश और पंजाब के भक्ति संगीत में एक अत्यंत लोकप्रिय और भावपूर्ण संकीर्तन है। इस भजन में बाबा बालक नाथ जी की असीम कृपा, उनके दिव्य स्वरूप, और उनके द्वारा भक्तों के कल्याण की गाथा का अत्यंत मधुर वर्णन किया गया है। यह भजन 'विनय' और 'समर्पण' के भाव से ओतप्रोत है, जिसे गाकर श्रद्धालु अपने आराध्य के प्रति अनन्य प्रेम प्रकट करते हैं। बाबा जी को भगवान शिव के परम भक्त और कार्तिकेय जी का अवतार माना जाता है। इस भजन का गायन विशेष रूप से बाबा जी के वार्षिक मेलों, चैत्र मास के उत्सवों, रविवार के व्रत और पारिवारिक सत्संगों में अत्यंत श्रद्धा के साथ किया जाता है। इसके मधुर बोल और दिव्य संगीत श्रोताओं को एक अलौकिक शांति और आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति कराते हैं।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

सारी दुनियां नू बाबा जी ने तारिया

सारी दुनियां नू बाबा जी ने तारिया,
मीठे मीठे बोल बोलके।
वीर बैना नू मावा नू दित्ते लाल आ,
मीठे मीठे बोल बोलके।
सारी दुनियां नू.....

हथ विच चिमटा पऊए पैरी,
सीस ते चमकन जटा सुनहरी।
जोगिया वाली रमज है गहरी,
थर थर दुरो कंबन वैरी।
सारे भगता दा कारज सवारिया,
मीठे मीठे बोल बोलके।
सारी दुनियां नू.....

छोटी उम्र दा बालक सोहना,
बालक सोहना है मनमोहना।
उसदे वरगा इस दुनिया ते,
ना कोई हैगा ना कोई होना।
आपने बच्चियां नू देंदा ओ प्यार आ,
मीठे मीठे बोल बोलके।
सारी दुनियां नू.....

भरथरी उसनु लबन आये,
बाबा जी ने कोल बिठाये।
इकठिया ने सी नाम ध्याये,
सोहनी पट्टी वाला गाये।
जोगी उसदा भी जीवन सुधारिया,
मीठे मीठे बोल बोलके।
सारी दुनियां नू.....

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस पावन भजन का मुख्य भाव यह है कि बाबा बालक नाथ जी ने अपनी मधुर वाणी और असीम अनुकंपा से संपूर्ण जगत का कल्याण किया है। भजन की शुरुआत इस उद्घोष से होती है कि बाबा जी ने संसार के सभी दुखी और पीड़ित लोगों को तार दिया है यानी उनका उद्धार किया है। वे अपने भक्तों से अत्यंत मीठे और करुणामयी वचनों में बात करते हैं, जिससे भक्तों के सारे कष्ट क्षण भर में दूर हो जाते हैं। बाबा जी की कृपा से सूनी गोद भर जाती है, माताओं को पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है और भाई-बहनों के जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।

भजन के अगले भाग में बाबा जी के अलौकिक और सन्यासी रूप का सुंदर चित्रण है। उनके हाथों में चिमटा है, पैरों में खड़ाऊं (पऊए) हैं, और उनके सिर पर सुनहरी जटाएं सुशोभित हो रही हैं। उनका यह रूप जितना सौम्य भक्तों के लिए है, उतना ही भयभीत करने वाला दुष्ट शक्तियों के लिए है। बाबा जी की योग साधना अत्यंत गहरी है, जिसे समझ पाना सामान्य मनुष्यों के वश में नहीं है। वे अपने भक्तों के बिगड़े हुए कार्यों को चुटकियों में संवार देते हैं।

बाबा जी का बाल स्वरूप अत्यंत मनमोहक है। इतनी छोटी आयु में भी उनके चेहरे पर जो तेज और दिव्यता है, वह अद्वितीय है। इस संपूर्ण सृष्टि में उनके जैसा दयालु और कृपालु कोई दूसरा नहीं है। वे अपने भक्तों को अपनी संतान की तरह स्नेह देते हैं। भजन के अंतिम पद में राजा भरथरी और बाबा जी के पावन मिलन का प्रसंग है, जहां दोनों महान योगियों ने एक साथ बैठकर प्रभु नाम का सिमरन किया। बाबा जी ने राजा भरथरी के जीवन का भी कल्याण किया और उन्हें मोक्ष का मार्ग दिखाया।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन केवल एक संगीतमय प्रस्तुति नहीं है, बल्कि यह बाबा बालक नाथ जी के प्रति अटूट श्रद्धा का प्रतीक है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • वात्सल्य और करुणा का भाव: भजन में बाबा जी को एक ऐसे दयालु बालक के रूप में दर्शाया गया है जो अपने भक्तों को अपनी संतान की तरह प्रेम करते हैं।
  • ऐतिहासिक और पौराणिक संदर्भ: इसमें राजा भरथरी और बाबा जी के मिलन का ऐतिहासिक प्रसंग शामिल है, जो नाथ संप्रदाय की समृद्ध परंपरा को दर्शाता है।
  • सरल और सुगम भाषा: पंजाबी और हिंदी के सुंदर मिश्रण से सजे इस भजन के बोल इतने सरल हैं कि कोई भी भक्त इसे आसानी से गा सकता है और इसके भाव से जुड़ सकता है।
  • कल्याणकारी संदेश: यह भजन हमें सिखाता है कि ईश्वर की शरण में आने वाले हर जीव का उद्धार निश्चित है, चाहे उसकी परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

यद्यपि ईश्वर की आराधना किसी भी समय की जा सकती है, परंतु इस भजन के गायन और श्रवण के लिए कुछ विशेष अवसर अत्यंत फलदायी माने गए हैं:

  • रविवार का दिन: बाबा बालक नाथ जी की पूजा के लिए रविवार का दिन विशेष रूप से समर्पित है। इस दिन सुबह या शाम के समय इस भजन का गायन करने से मानसिक शांति मिलती है।
  • चैत्र मास के मेले: हिमाचल प्रदेश के दियोटसिद्ध मंदिर में चैत्र मास में विशाल मेले लगते हैं। इस अवधि के दौरान इस भजन का श्रवण अत्यंत शुभ माना जाता है।
  • पारिवारिक चौकी या जागरण: बाबा जी की चौकी या बबला (जागरण) के समय इस भजन को गाकर भक्त झूम उठते हैं।
  • गायन विधि: इस भजन को गाते समय हाथ में चिमटा या मंजीरा लेकर, शुद्ध मन और पूर्ण समर्पण के साथ बाबा जी की प्रतिमा के समक्ष बैठना चाहिए।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन मुख्य रूप से सिद्ध बाबा बालक नाथ जी को समर्पित है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, बाबा बालक नाथ जी को भगवान शिव का अंशावतार और माता पार्वती के पुत्र भगवान कार्तिकेय का रूप माना जाता है। उन्हें अमरत्व का वरदान प्राप्त है, जिसके कारण वे सदा बाल स्वरूप में ही रहते हैं।

इस भजन में राजा भरथरी का भी उल्लेख है। राजा भरथरी उज्जैन के प्रतापी राजा थे, जिन्होंने बाद में वैराग्य धारण कर लिया और गुरु गोरखनाथ के शिष्य बनकर महान योगी कहलाए। बाबा बालक नाथ और राजा भरथरी का मिलन दो महान आध्यात्मिक शक्तियों के मिलन का प्रतीक है, जिसने इस धरा पर भक्ति और योग का नया मार्ग प्रशस्त किया।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

इस भजन की रचना उत्तर भारत की लोक भक्ति परंपरा के अंतर्गत हुई है। हिमाचल प्रदेश और पंजाब की सीमावर्ती संस्कृतियों में बाबा बालक नाथ जी के प्रति अगाध श्रद्धा है। इस भजन के रचयिता ने लोक भाषा का उपयोग करते हुए बाबा जी के चमत्कारों और उनकी दयालुता को शब्दों में पिरोया है। "सोहनी पट्टी वाला" शब्द इस बात का संकेत है कि इस भजन के लेखक या गायक का संबंध पंजाब के पट्टी क्षेत्र से हो सकता है, जिन्होंने बाबा जी की महिमा का गुणगान अत्यंत श्रद्धापूर्वक किया है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा पंजाबी मिश्रित हिंदी (डोगरी/पहाड़ी प्रभाव युक्त) है। यह शैली उत्तर भारतीय लोक भजनों की विशेषता है, जो सीधे हृदय को छूती है। इसमें प्रयुक्त अलंकार और रूपक अत्यंत सजीव हैं। जैसे "सीस ते चमकन जटा सुनहरी" में बाबा जी के दिव्य स्वरूप का सुंदर दृश्य बिंब प्रस्तुत किया गया है। भजन की लयबद्धता और अंतरा-मुखड़ा की संरचना इसे सामूहिक संकीर्तन के लिए अत्यंत उपयुक्त बनाती है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें कई महत्वपूर्ण आध्यात्मिक और व्यावहारिक सीख देता है:

  • मधुर वाणी का महत्व: "मीठे मीठे बोल बोलके" पंक्ति हमें सिखाती है कि हमारी वाणी में मिठास होनी चाहिए। मधुर वाणी से हम दूसरों के दुखों को हर सकते हैं और समाज में प्रेम फैला सकते हैं।
  • समर्पण और विश्वास: बाबा जी अपने भक्तों का कार्य तभी संवारते हैं जब भक्त पूर्ण रूप से उनके प्रति समर्पित हो जाता है।
  • समानता का भाव: बाबा जी की शरण में अमीर-गरीब, राजा-रंक सभी समान हैं। उन्होंने राजा भरथरी को भी अपने पास बिठाया और सामान्य भक्तों को भी उतना ही प्यार दिया।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
तारिया (Tareya) उद्धार करना / पार लगाना संसार रूपी भवसागर से मुक्ति दिलाना।
पऊए (Paue) लकड़ी की खड़ाऊं सन्यासी और योगी के सादगीपूर्ण जीवन का प्रतीक।
रमज (Ramaj) रहस्य / गुप्त ज्ञान बाबा जी की अलौकिक लीलाएं और योग साधना।
कारज (Karaj) कार्य / बिगड़े काम भक्तों की सांसारिक और आध्यात्मिक समस्याएं।
लबन (Laban) खोजने / ढूंढने सत्य और गुरु की खोज में राजा भरथरी की यात्रा।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

1. "सारी दुनियां नू बाबा जी ने तारिया, मीठे मीठे बोल बोलके।"
अर्थ: बाबा बालक नाथ जी ने अपनी अत्यंत मधुर और करुणामयी वाणी से संपूर्ण संसार के जीवों का कल्याण और उद्धार किया है।

2. "वीर बैना नू मावा नू दित्ते लाल आ, मीठे मीठे बोल बोलके।"
अर्थ: बाबा जी की असीम कृपा से सूनी गोद भरने वाले माताओं को पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है और भाई-बहनों के जीवन में खुशियां आती हैं।

3. "हथ विच चिमटा पऊए पैरी, सीस ते चमकन जटा सुनहरी।"
अर्थ: बाबा जी के एक हाथ में चिमटा सुशोभित है, पैरों में खड़ाऊं हैं और उनके सिर पर सुंदर सुनहरी जटाएं चमक रही हैं।

4. "जोगिया वाली रमज है गहरी, थर थर दुरो कंबन वैरी।"
अर्थ: इस महान योगी की साधना और रहस्य अत्यंत गहरे हैं। उनके तेज को देखकर बुरी शक्तियां और शत्रु दूर से ही थर-थर कांपने लगते हैं।

5. "छोटी उम्र दा बालक सोहना, बालक सोहना है मनमोहना।"
अर्थ: बाबा जी का बाल स्वरूप अत्यंत सुंदर और मन को मोह लेने वाला है। वे सदा बालक के रूप में ही विराजमान रहते हैं।

6. "भरथरी उसनु लबन आये, बाबा जी ने कोल बिठाये।"
अर्थ: जब महान योगी राजा भरथरी बाबा जी की खोज में आए, तो बाबा जी ने उन्हें आदरपूर्वक अपने पास बिठाया और दोनों ने मिलकर ईश्वर का ध्यान किया।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

बाबा बालक नाथ जी की पूजा के समय निम्नलिखित मंत्र का जाप करना अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है:

॥ ॐ रुद्राय नमः ॥

॥ ॐ सिद्ध बाबा बालक नाथाय नमः ॥

यह मंत्र बाबा जी के शिव स्वरूप को नमन करता है और साधक के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का संचार करता है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

विवरण जानकारी
भजन का नाम सारी दुनियां नू बाबा जी ने तारिया
आराध्य देव सिद्ध बाबा बालक नाथ जी महाराज
मुख्य विषय बाबा जी की महिमा, करुणा और उद्धार की गाथा
भाषा पंजाबी मिश्रित हिंदी (लोक भाषा)
भक्ति का भाव समर्पण, विनय और वात्सल्य भाव
उपयुक्त अवसर रविवार पूजा, चैत्र मेला, बाबा जी की चौकी, पारिवारिक सत्संग

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बाबा बालक नाथ जी भगवान शिव के परम भक्त और भगवान कार्तिकेय के अवतार माने जाते हैं। वे सदा बाल स्वरूप में रहते हैं और उन्हें अमरत्व का वरदान प्राप्त है।

इस भजन का मुख्य संदेश यह है कि बाबा जी अत्यंत दयालु हैं और जो भी भक्त सच्चे मन से उनकी शरण में आता है, वे अपनी मधुर वाणी और कृपा से उसका उद्धार कर देते हैं।

बाबा बालक नाथ जी का मुख्य और ऐतिहासिक गुफा मंदिर हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले के "दियोटसिद्ध" नामक स्थान पर स्थित है।

राजा भरथरी एक महान योगी थे जो बाबा बालक नाथ जी के समकालीन थे। भजन में उनके उल्लेख से दोनों महान संतों के बीच के आध्यात्मिक संबंध और आपसी आदर को दर्शाया गया है।

बाबा बालक नाथ जी की पूजा और व्रत के लिए रविवार का दिन सर्वोत्तम माना जाता है। इस दिन भक्त बाबा जी को रोट (मीठा प्रसाद) अर्पित करते हैं।

बाबा जी के भजनों में चिमटा, ढोलक और मंजीरा का प्रयोग विशेष रूप से किया जाता है, जो नाथ संप्रदाय के पारंपरिक संगीत का हिस्सा हैं।

हाँ, महिलाएँ बाबा जी की पूजा और दर्शन कर सकती हैं। हालांकि, पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, महिलाएँ बाबा जी की मुख्य गुफा के अंदर प्रवेश नहीं करती हैं, बल्कि कुछ दूरी पर बने चबूतरे से उनके दर्शन करती हैं।

बाबा बालक नाथ जी को मुख्य रूप से आटे, गुड़ और घी से बने "रोट" (Rot) का भोग लगाया जाता है। इसके अलावा उन्हें मिश्री और मक्के का प्रसाद भी चढ़ाया जाता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" के अंतर्गत आता है। इस भजन के पाठ और भावार्थ को प्रामाणिक लोक परंपराओं, दियोटसिद्ध मंदिर के इतिहास और नाथ संप्रदाय के ग्रंथों के संदर्भ में तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य पाठकों तक बाबा बालक नाथ जी की महिमा को शुद्ध और स्पष्ट रूप से पहुंचाना है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • नाथ संप्रदाय और सिद्ध परंपरा का इतिहास।
  • हिमाचल प्रदेश लोक संस्कृति एवं देव गाथाएं।
  • दियोटसिद्ध बाबा बालक नाथ मंदिर न्यास की आधिकारिक परंपराएं।

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 12 Oct 2026

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