Baba Balak Nath Bhajan
बाबा बालक नाथ जी के चरणों में समर्पित यह अत्यंत ही पावन, मधुर और भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "निक्का जेहा जोगी मनमोहना बालका" उत्तर भारत, विशेषकर हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और जम्मू में अत्यंत लोकप्रिय है। शिवालिक पहाड़ियों की गोद में स्थित दियोटसिद्ध (शाहतलाई) के पावन धाम पर विराजे बालगोपाल रूपी सिद्ध बाबा बालक नाथ की महिमा का गुणगान करता यह भजन श्रद्धालुओं के हृदय में अगाध श्रद्धा और प्रेम का संचार करता है। इस भजन में बालक रूपी जोगी बाबा के अलौकिक सौंदर्य, उनके गले में चमकते सोने जैसे घुंघराले बाल, मस्तक पर सुशोभित तिलक, हाथ में चिमटा और छोटे-छोटे प्यारे पैरों की अद्भुत छटा का सजीव वर्णन किया गया है। मुकेश पट्टीवाला और रेखा रानी की मधुर आवाज़ में गाया जाने वाला यह संकीर्तन भक्तों को दियोटसिद्ध की यात्रा और बाबा के दर्शन का आत्मीय अनुभव कराता है। इस लेख में हम आपके लिए प्रस्तुत कर रहे हैं इस पवित्र भजन के संपूर्ण लिरिक्स, सरल हिंदी अर्थ, भावार्थ और बाबा बालक नाथ की महिमा से जुड़ी संपूर्ण जानकारी।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन - शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें:
गल्ल मैं सुनावा सब नू,
गल्ल मैं सुनावा सब नू,
सुनो इक गल्ल मैं सुनावा,
सब नू जय हो!
सुनो इक गल्ल, मैं सुनावा सब नू,
अखी तक लये, मैं अजब नज़ारे!
निक्का जेहा जोगी, मनमोहना बालका,
इकला गऊआं, बनखंडी विच चारे।
निक्का जेहा जोगी, मनमोहना बालका,
इकला गऊआं, बनखंडी विच चारे॥
सोने रंगे घुंगराले बाल, उसदे जय हो!
मथे ते तिलक सोहना, लाल उसदे,
हथ विच चिमटा कमाल, उसदे जय हो!
पऊए निक्के निक्के, पैरा विच प्यारे,
निक्का जेहा जोगी, मनमोहना बालका,
इकला गऊआं, बनखंडी विच चारे॥
बोहड़ा हेठा धुना लाया, जोगी ने जय हो!
कोल काले नागा नू, बिठाया जोगी ने,
मन शिव रंग च रंगाया, जोगी ने जय हो!
मुखो बम बम, भोले ओ उचारे,
निक्का जेहा जोगी, मनमोहना बालका,
इकला गऊआं, बनखंडी विच चारे॥
गुरिंदरा ओ नूरी, अवतार लगदा जय हो!
मुकेश उत्ते ओहदा, उपकार लगदा,
पला विच दूध दा, भंडार लगदा जय हो!
चोवे औसर गऊआं नू, थापी मारे,
निक्का जेहा जोगी, मनमोहना बालका,
इकला गऊआं, बनखंडी विच चारे॥
गायक कलाकार: मुकेश पट्टीवाला, रेखा रानी
परंपरा: नाथ संप्रदाय एवं बाबा बालक नाथ उपासना
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
यह भजन बाबा बालक नाथ जी के बाल रूप और उनकी अलौकिक लीलाओं का अत्यंत सुंदर काव्यात्मक चित्रण करता है। पंजाबी भाषा के सोंधेपन में रचे गए इस भजन का भावार्थ निम्नलिखित है:
मखुड़ा एवं प्रथम अंतरा
भक्त अपनी बात अत्यंत उल्लास के साथ शुरू करता है— "मैं सबको एक खास बात सुनाता हूँ, मैंने अपनी आँखों से एक अद्भुत और अलौकिक नज़ारा देखा है।" वह नज़ारा क्या है? एक बहुत ही छोटे कद का, मन को मोह लेने वाला बालक रूपी जोगी (बाबा बालक नाथ) है, जो अकेले ही जंगल (बनखंडी) में गायों को चरा रहा है। यह दृश्य भगवान शिव के उस परम भक्त और योगेश्वर के बाल स्वरूप का बोध कराता है जो प्रकृति के सान्निध्य में रमण करते हैं।
द्वितीय एवं तृतीय अंतरा
आगे भक्त बाबा के शारीरिक सौंदर्य का वर्णन करते हुए कहता है कि उनके बाल सोने जैसे सुनहरे और घुंघराले हैं। उनके मस्तक पर लाल रंग का बहुत ही प्यारा और तेजस्वी तिलक सुशोभित है। उनके हाथ में एक चमत्कारी चिमटा शोभायमान है और उनके पैरों में छोटे-छोटे प्यारे घुंघरुओं या पऊए (जूती/पादत्राण) हैं। बाबा ने बोहड़ (बरगद) के पेड़ के नीचे अपना धुना (धूनी) सजाया है और अपने पास एक काले नाग को भी बैठा रखा है। उनका मन पूरी तरह से भगवान शिव के रंग में रंगा हुआ है और उनके मुख से निरंतर "बम बम भोले" का उच्चारण होता रहता है।
अंतिम अंतरा एवं उपसंहार
भजन के रचनाकार और गायकों (गुरिंदर और मुकेश) का मानना है कि यह बालक कोई साधारण मनुष्य नहीं, बल्कि साक्षात कोई नूरी (दिव्य प्रकाशमय) अवतार है। उन पर बाबा का असीम उपकार और कृपा दृष्टि है। बाबा जब गायों के पास जाते हैं तो पल भर में दूध के भंडार भर जाते हैं और वे प्यार से गायों की पीठ पर थापी (थपकी) मारते हैं। यह प्रसंग बाबा की पशु-प्रेम, करुणा और सिद्ध शक्ति का प्रतीक है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
- बाल स्वरूप की उपासना: इसमें बाबा बालक नाथ के बाल रूप का मनोरम चित्रण किया गया है, जो भक्तों के अंतःकरण में वात्सल्य और भक्ति जगाता है।
- नाथ संप्रदाय की झलक: धुना, चिमटा, जटा और शिव भक्ति का उल्लेख नाथ परंपरा की प्राचीन संस्कृति को दर्शाता है।
- दियोटसिद्ध धाम की संस्कृति: यह भजन शाहतलाई और दियोटसिद्ध के प्राकृतिक परिवेश, बोहड़ के पेड़ और गौपालन की संस्कृति से सीधे जुड़ा हुआ है।
- भक्ति संगीत में लोकप्रियता: जागरण, चौकी और बाबा बालक नाथ के मेलों में यह भजन अत्यंत चाव से गाया और सुना जाता है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
बाबा बालक नाथ जी के भजनों का स्मरण किसी भी शुभ अवसर पर किया जा सकता है, विशेषकर:
- रविवार का दिन: बाबा बालक नाथ जी की उपासना के लिए रविवार का दिन अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस दिन प्रात:काल स्नान के पश्चात धूप-दीप जलाकर यह भजन सुनना चाहिए।
- दियोटसिद्ध यात्रा: हिमाचल प्रदेश स्थित बाबा बालक नाथ के दर्शन के लिए जाते समय मार्ग में बस या गाड़ियों में यह भजन यात्रा को आनंदमय बनाता है।
- चौकी एवं जागरण: बाबा की चौकी या वार्षिक मेलों के दौरान इस भजन को गाकर माहौल को पूरी तरह भक्तिमय बनाया जाता है।
- घर की पूजा: संध्या समय घर के मंदिर में दीपक प्रज्वलित कर इस भजन का पाठ करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा और शांति का वास होता है।
भजन से जुड़े देवता: बाबा बालक नाथ जी | Associated Deity
बाबा बालक नाथ, जिन्हें उत्तर भारत में 'बालक नाथ जी' या 'बवा जी' के रूप में पूजा जाता है, भगवान शिव और गुरु गोरखनाथ की परंपरा से जुड़े एक प्रमुख सिद्ध पुरुष माने जाते हैं। उनका मुख्य मंदिर हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले में शाहतलाई और दियोटसिद्ध की गुफा में स्थित है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, वे त्रेता युग या द्वापर युग के एक सिद्ध योगी थे जिन्होंने बाल ब्रह्मचारी के रूप में कठोर तपस्या की और अमरता का वरदान प्राप्त किया। उन्हें 'दूध-रोट' का प्रसाद अत्यंत प्रिय है। उनके भक्तों का मुख्य उद्घोष "जय बाबा बालक नाथ" या "चाहे बच्चा-बच्चा जानता है, बालक नाथ को मानता है" है।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
यह भजन लोक-भाषा (पंजाबी और हिंदी के मिश्रित पहाड़ी लहजे) में रचा गया है। इसकी शब्दावली बहुत ही सरल, सहज और हृदयस्पर्शी है। 'निक्का जेहा', 'बनखंडी', 'धुना', 'पऊए', 'थापी मारे' जैसे आंचलिक शब्दों का प्रयोग इसे जन-जन से जोड़ने का काम करता है। अनुप्रास और रूपक अलंकारों का सहज प्रयोग इस भजन की काव्य सौंदर्यता को और अधिक प्रगाढ़ बनाता है।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
- निष्कपट भाव और सरलता: ईश्वर को पाने के लिए किसी आडंबर की नहीं, बल्कि बच्चों जैसी निष्कपटता और पवित्रता की आवश्यकता होती है, जो बाबा के बाल रूप से सीखने को मिलती है।
- प्रकृति प्रेम: जंगल में गायों को चराना और पेड़ों की छांव में निवास करना हमें प्रकृति के करीब रहने और जीवों पर दया करने का संदेश देता है।
- निरंतर स्मरण: मुख से निरंतर "बम बम भोले" का जाप यह सिखाता है कि हर परिस्थिति में ईश्वर का नाम स्मरण करते रहना चाहिए।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / पद | सरल हिंदी अर्थ | संदर्भ / प्रसंग |
|---|---|---|
| निक्का जेहा | बहुत छोटा / नन्हा सा | बाबा के बाल रूप के लिए प्रयुक्त |
| बनखंडी | जंगल / वन प्रदेश | जहाँ बाबा गायें चराते हैं |
| धुना | धूनी / साधुओं की पवित्र अग्नि | बोहड़ के पेड़ के नीचे जलाई गई धूनी |
| पऊए | छोटे जूते / पादत्राण / घुंघरू | बाबा के पैरों में पहने जाने वाले |
| थापी मारे | थपकी देना / प्यार से सहलाना | गायों के प्रति बाबा का वात्सल्य |
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| भजन का नाम | निक्का जेहा जोगी मनमोहना बालका (Nika Jeha Jogi Manmohana Balak) |
|---|---|
| समर्पित देवता | सिद्ध श्री बाबा बालक नाथ जी (दियोटसिद्ध धाम) |
| गायक कलाकार | मुकेश पट्टीवाला, रेखा रानी |
| भाषा | पंजाबी मिश्रित हिंदी / लोक भाषा |
| मुख्य भाव | भक्ति, वात्सल्य, प्रकृति प्रेम एवं गुरु महिमा |
| उपयुक्त अवसर | रविवार पूजा, बाबा बालक नाथ जागरण, मेला और सत्संग |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह लेख पारंपरिक लोक साहित्य, क्षेत्रीय भक्ति संगीत और सनातन धर्म की नाथ परंपरा के आधार पर संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसका उद्देश्य पाठकों को बाबा बालक नाथ के इस लोकप्रिय भजन के सटीक लिरिक्स, शब्दार्थ और आध्यात्मिक भाव से अवगत कराना है। सभी तथ्यों को क्षेत्रीय मान्यताओं और भजन के मूल शब्दों के अनुरूप प्रस्तुत किया गया है।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- उत्तर भारतीय लोक भजन परंपरा एवं नाथ संप्रदाय के संकीर्तन ग्रंथ।
- हिमाचल प्रदेश के सिद्ध पीठ दियोटसिद्ध की ऐतिहासिक एवं धार्मिक मान्यताएं।
- लोक गायक मुकेश पट्टीवाला एवं रेखा रानी द्वारा प्रस्तुत ऑडियो-विजुअल भजन रचनाएं।
संबंधित भजन एवं लेख
श्री बाबा बालक नाथ जी की आरती
बाबा बालक नाथ जी की पावन आरती और उसके विधि-विधान की जानकारी।
दियोटसिद्ध यात्रा महिमा और इतिहास
शाहतलाई और दियोटसिद्ध धाम की पौराणिक कथा एवं यात्रा मार्ग का विवरण।
ॐ नमः शिवाय मंत्र जप महिमा
भगवान शिव के पंचाक्षर मंत्र का महत्व और जाप विधि।
पाठकों के विचार (0)
भक्ति रस चर्चा में भाग लें