Punjabi Devi Bhajan बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

मेरे घर आओ मैया नवरात्रो में(Mere Ghar Aao Maiya Navratro Me Lyrics in Hindi)

नवरात्रों के पावन अवसर पर गाए जाने वाले प्रसिद्ध भजन 'मेरे घर आओ मैया' के संपूर्ण बोल और भावार्थ यहाँ पढ़ें। माँ दुर्गा की भक्ति में डूबें।

मेरे घर आओ मैया नवरात्रो में - सम्पूर्ण परिचय एवं भाव

शारदीय और वासुंतिक (चैत्र) नवरात्रों के पवित्र अवसर पर माता रानी के चरणों में समर्पित यह पावन भजन 'मेरे घर आओ मैया नवरात्रो में' संपूर्ण भक्त समाज में अत्यंत श्रद्धा और उल्लास के साथ गाया जाता है। यह भजन केवल एक संगीत रचना नहीं है, अपितु एक आर्त भक्त की अपनी आराध्य जगदम्बा माँ शेरोवाली के प्रति परम समर्पण, विरह और आमंत्रण की वह सुंदर अभिव्यक्ति है, जो हर श्रद्धालु के हृदय को स्पंदित कर देती है। जब भक्त माता के दरबार में अपनी अर्जी लगाता है और उन्हें अपने घर पधारने के लिए आमंत्रित करता है, तो वातावरण पूरी तरह से चैतन्य और भक्तिमय हो जाता है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस लोकप्रिय देवी भजन के संपूर्ण बोल (Lyrics), उसका गहरा आध्यात्मिक अर्थ, रचना की पृष्ठभूमि, गायन विधि और जीवन पर इसके प्रभाव का संपूर्ण विवेचन प्रस्तुत कर रहे हैं, जिससे साधक माँ भगवती की कृपा सरलता से प्राप्त कर सकें।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन - शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें:

मैं तो तुझको मनाऊँ बातों-बातों में,
मेरे घर आओ मैया नवरात्रो में!
मेरे घर आओ मैया नवरात्रो में!..

स्वर्ग सा लागे मोहे द्वार तुम्हारा,
ममता सी मूरत रूप है प्यारा!
स्वर्ग सा लागे तेरा द्वार,
ममता की मूरत रूप है प्यारा!
गूँज रहा सारे जग में जयकारा,
बड़ा ही सुंदर लागे नजारा हूँ!..
मेरी डोर तो मैया तेरे हाथों में,
मेरे घर आओ मैया नवरात्रो में!..

ऊंचा है पर्वत लंबा है रास्ता,
आया शरण जो भी, वो गया हसंता!
ऊंचा है पर्वत लंबा है रास्ता,
आया शरण जो भी, वो गया हसंता!
करती है कृपा मां शेरोवाली,
बिछड़ा भी तेरे द्वार पे मिलता हूँ!..
मेरी मां मुझे रखे सर आंखों में,
मेरे घर आओ मैया नवरात्रो में!
मेरे घर आओ मैया नवरात्रो में!..

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस सुंदर देवी गीत के माध्यम से भक्त अपनी इष्ट देवी माँ दुर्गा से अत्यंत प्रेम और बालसुलभ जिद के साथ विनती करता है कि हे मैया! जिस प्रकार एक संतान अपने माता-पिता को अपने घर आने के लिए विभिन्न प्रकार की बातें करके मनाती है, उसी प्रकार मैं भी आपको अपनी प्रेम भरी बातों और पुकारों से अपने घर आमंत्रित कर रहा हूँ। नवरात्रों के इन पावन नौ दिनों में आप मेरे घर पधारें और अपने चरणों की धूल से मेरे जीवन को पवित्र करें।

भक्त आगे वर्णन करता है कि माँ का दरबार या माँ का सान्निध्य इस संसार में किसी भी स्वर्ग से बढ़कर है। जगदम्बा की ममतामयी मूर्ति और उनका करुणामयी रूप भक्तों के सभी संतापों को हर लेता है। संपूर्ण ब्रह्मांड में माता का जयकारा गूँज रहा है और इस अलौकिक दृश्य की छटा देखते ही बनती है। भक्त का जीवन पूरी तरह माँ के भरोसे है, उसकी आस्था की डोर सीधे माँ के हाथों में है, इसलिए उसे किसी प्रकार का भय नहीं है।

अंतिम चरणों में भक्त माता के त्रिकोणीय धाम की महिमा का गुणगान करता है कि भले ही माँ का वास ऊंचे पर्वत पर है और वहाँ तक पहुँचने का रास्ता लंबा और दुर्गम है, परंतु जो भी सच्चे मन से उनकी शरण में आ जाता है, वह जीवन में हमेशा के लिए प्रसन्न और आनंदित हो जाता है। माँ शेरोवाली अपने हर भक्त पर अहैतुकी कृपा बरसाती है। जो अपने मूल स्रोत से बिछड़ गए हैं, वे भी माँ के दरबार में आकर पुनः अपने परम धाम को प्राप्त कर लेते हैं। भक्त की बस यही एक अभिलाषा है कि माँ उसे हमेशा अपनी पलकों पर, अपनी आँखों में स्थान दें।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन आधुनिक और पारंपरिक शैली का एक ऐसा अनूठा संगम है जो श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देता है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • पारिवारिक और सामूहिक गायन: इस भजन की लय इतनी सरल और मधुर है कि इसे नवरात्रों के दौरान घरों में होने वाली चौकी, जागरण और कन्या पूजन के समय आसानी से गाया जा सकता है।
  • वात्सल्य और समर्पण भाव: इस रचना में केवल स्तुति नहीं है, बल्कि माँ और संतान के बीच के उस अटूट रिश्ते को दर्शाया गया है जहाँ भक्त माँ को अपने घर का आतिथ्य स्वीकार करने का आग्रह करता है।
  • सकारात्मक ऊर्जा का संचार: नवरात्र के नौ दिनों में जब इस भजन का गान किया जाता है, तो घर का वातावरण पूरी तरह से शुद्ध, सकारात्मक और दिव्य ऊर्जा से भर जाता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

माता रानी के इस पावन भजन को कब और कैसे गाना चाहिए, इसके कुछ पारंपरिक नियम और पद्धतियाँ हैं:

  • ब्रह्म मुहूर्त एवं संध्याकाल: नवरात्रों के दिनों में प्रातःकाल स्नान-ध्यान के पश्चात माता की चौकी के समक्ष और सायंकाल की आरती के समय इस भजन का गान अत्यंत फलदायी माना गया है।
  • घटस्थापना एवं कन्या पूजन: नवरात्र के पहले दिन घटस्थापना के समय तथा अष्टमी-नवमी के दिन कन्या पूजन और हवन के अवसर पर इस भजन का संकीर्तन विशेष उत्साह पैदा करता है।
  • मानसिक स्मरण: यदि आप सार्वजनिक रूप से गाने में असमर्थ हैं, तो मन ही मन इस भजन की पंक्तियों का स्मरण करने से मानसिक शांति और आध्यात्मिक बल की प्राप्ति होती है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन की केंद्र बिंदु हैं जगत जननी माँ दुर्गा, जिन्हें विभिन्न स्वरूपों जैसे माँ शेरोवाली, माता वैष्णो देवी और अंबा भवानी के रूप में पूजा जाता है। सनातन धर्म में शक्ति की उपासना का विशेष स्थान है। देवी पुराण और मारकंडेय पुराण (दुर्गा सप्तशती) के अनुसार, आदिशक्ति महामाया ही इस संपूर्ण ब्रह्मांड की सृजनकर्ता, पालनकर्ता और संहारकर्ता हैं। इस भजन के माध्यम से उन्हीं परम शक्ति को गृहस्थ जीवन में आमंत्रित करने का भाव प्रकट किया गया है। सनातन परंपरा के बारे में अधिक जानने के लिए आप दिव्य देवी स्तोत्र का अध्ययन कर सकते हैं।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

यह लोकप्रिय भजन आधुनिक संगीत और पारंपरिक लोकधुनों का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इसे संगीत प्रेमियों और माता के भक्तों द्वारा विशेष रूप से उत्तराखंड और उत्तर भारत के विभिन्न क्षेत्रों में आयोजित होने वाले देवी जागरणों में बहुत चाव से गाया जाता है। कलाकारों ने इसमें पहाड़ी संगीत और लोक शैली का ऐसा संपुट दिया है जो सीधे हृदय को छू लेता है। इस प्रकार की रचनाएँ हमारी लोक संस्कृति और धार्मिक आस्था का जीवित दस्तावेज हैं।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा बहुत ही सहज, सरल और आम बोलचाल की हिंदी (खड़ी बोली) है, जिसमें पंजाबी और पहाड़ी लोकभाषा के कुछ सुंदर शब्दों का मिश्रण भी दिखाई देता है। इसकी काव्य शैली गेय (Singable) है, जिसका तुकबंदी पैटर्न (Rhyme Scheme) श्रोता को तुरंत आकर्षित करता है। रूपक अलंकारों और उपमाओं जैसे "स्वर्ग सा लागे मोहे द्वार तुम्हारा" और "ममता की मूरत रूप है प्यारा" के प्रयोग से इसकी साहित्यिक सुंदरता कई गुना बढ़ जाती है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

हर श्रेष्ठ भजन हमें भगवान की स्तुति के साथ-साथ जीवन के कुछ महत्वपूर्ण पाठ भी सिखाता है:

  • अटूट विश्वास: "मेरी डोर तो मैया तेरे हाथों में" यह पंक्ति सिखाती है कि मनुष्य को अपने जीवन की डोर पूरी तरह से ईश्वर को सौंपकर निश्चिंत हो जाना चाहिए।
  • कठिनाइयों से न घबराना: "ऊंचा है पर्वत लंबा है रास्ता" यह संदेश देता है कि आध्यात्मिक उन्नति और सफलता का मार्ग कठिन अवश्य होता है, लेकिन दृढ़ संकल्प से कठिनाइयाँ पार हो जाती हैं।
  • शरणागत वत्सला माँ: माँ के दरबार में जाति, वर्ण या धन का भेद नहीं होता, जो भी सच्चे मन से शरण में आता है, उसका कल्याण निश्चित है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / पदावली सरल हिंदी अर्थ संदर्भ / प्रसंग
मनाऊँ बातों-बातों में प्रेम से फुसलाना या प्यार से आग्रह करना भक्त का माँ के प्रति बालसुलभ प्रेम
ममता की मूरत असीम प्रेम और करुणा का साकार रूप माता दुर्गा का वात्सल्य स्वभाव
शेरोवाली सिंह पर सवारी करने वाली माता माँ दुर्गा का प्रसिद्ध पौराणिक स्वरूप
शरणागत जो शरण में आ गया हो माता के दरबार में आने वाला भक्त

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

पंक्ति: मैं तो तुझको मनाऊँ बातों-बातों में, मेरे घर आओ मैया नवरात्रो में!
भावार्थ: भक्त कहता है कि हे माता! मैं अपनी छोटी-छोटी बातों और प्रेम भरी पुकारों से आपको इस नवरात्र अपने घर आने के लिए मना रहा हूँ। आप मेरे इस छोटे से आमंत्रण को स्वीकार कीजिए।

पंक्ति: स्वर्ग सा लागे मोहे द्वार तुम्हारा, ममता सी मूरत रूप है प्यारा!
भावार्थ: आपका पावन मंदिर या आपका सानिध्य मुझे इस संसार के किसी भी स्वर्ग से अधिक सुंदर और पवित्र प्रतीत होता है, क्योंकि आपका रूप प्रेम और ममता से परिपूर्ण है।

पंक्ति: मेरी डोर तो मैया तेरे हाथों में, मेरे घर आओ मैया नवरात्रो में!
भावार्थ: हे माँ! मेरे जीवन की संपूर्ण बागडोर आपके ही हाथों में है। आप जैसा चाहें मेरा संचालन करें, बस मेरे इस निमंत्रण को स्वीकार कर मेरे घर पधारें।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

माता रानी की आराधना करते समय इस भजन के साथ-साथ निम्नलिखित पावन मंत्र का जप करने से साधना का पूर्ण फल प्राप्त होता है:

"या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै నమో नमः॥"

इस श्लोक का अर्थ है कि जो देवी सभी प्राणियों में शक्ति के रूप में विराजमान हैं, मैं उनको बार-बार प्रणाम करता हूँ। इसी प्रकार भगवती की कृपा प्राप्ति के लिए आप श्री दुर्गा चालीसा का नियमित पाठ भी कर सकते हैं।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

विवरण तथ्य / जानकारी
भजन का नाम मेरे घर आओ मैया नवरात्रो में (Mere Ghar Aao Maiya Navratro Me)
ाराध्य देवी माँ दुर्गा / शेरोवाली माता
संगीत शैली देवी भजन / लोक संगीत
भाषा हिंदी / लोक भाषा
मुख्य प्रसंग नवरात्र उत्सव एवं माँ का गृह आगमन आमंत्रण
उपयुक्त अवसर शारदीय और चैत्र नवरात्र, जागरण, माता की चौकी

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह भजन जगत जननी आदिशक्ति माँ दुर्गा, जिन्हें शेरोवाली और अंबा माता भी कहा जाता है, को समर्पित है।

इस भजन को शारदीय और चैत्र नवरात्र के नौ दिनों में प्रातःकालीन पूजा, संध्या आरती तथा माता की चौकी या जागरण के समय गाना सबसे उत्तम माना जाता है।

हाँ, आप इसे घर पर अकेले या अपने परिवार के साथ पूरी भक्ति और शुद्ध उच्चारण के साथ गा सकते हैं। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

माता को घर आमंत्रित करने का अर्थ है अपने मन और गृह को विकारों से मुक्त कर दिव्यता, प्रेम और पवित्रता से भरना, ताकि आंतरिक ऊर्जा जागृत हो सके।

इसके बोल भक्त और भगवान के बीच के अनन्य प्रेम, वात्सल्य, समर्पण और माता के प्रति अटूट विश्वास के भाव को दर्शाते हैं।

अवश्य, यद्यपि इसमें नवरात्रों का विशेष उल्लेख है, परंतु माता की महिमा शाश्वत है, इसलिए इसे किसी भी मंगलवार, शुक्रवार या देवी जागरण में गाया जा सकता है।

भक्ति संगीत और ईश्वर के गुणों का संकीर्तन मन के विकारों, तनाव और चिंताओं को दूर करता है, जिससे चित्त शांत और एकाग्र होता है।

इसके साथ आप "भोर भई दिन चढ़ गया मेरी मैया", "चचरी देवी भजन", और "मैया का नवरात्रों में विशेष श्रृंगार" जैसे भजनों का भी आनंद ले सकते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

भक्तिलोक (Bhaktilok.in) पर प्रस्तुत यह आलेख सनातन संस्कृति, लोक परंपराओं और देवी उपासना के ग्रंथों के आधार पर तैयार किया गया है। हमारी संपादकीय टीम यह सुनिश्चित करती है कि सभी भजन के बोल और उनके अर्थ पाठकों तक उनकी मूल शुद्धता और प्रामाणिकता के साथ पहुँचे। यह सामग्री पूरी तरह से संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है, जिसका उद्देश्य पाठकों को आध्यात्मिक संतुष्टि और सटीक जानकारी प्रदान करना है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्देवीभागवत पुराण - व्यास जी द्वारा रचित आदिशक्ति चरित्र
  • दुर्गा सप्तशती (मार्केण्डेय पुराण) - महर्षि मार्कण्डेय कृत
  • पारंपरिक भारतीय लोक संगीत एवं देवी भजन संकलन
  • वैदिक एवं पौराणिक सनातन आचार संहिता

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संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 12 Oct 2026

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