भक्ति काव्य व भजन मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

मंगल की सेवा सुन मेरी देवा भजन(Mangal Ki Seva Sun Meri Deva Lyrics in Hindi) - Narendra Chanchal

भक्ति भजन "मंगल की सेवा सुन मेरी देवा भजन(Mangal Ki Seva Sun Meri Deva Lyrics in Hindi) - Narendra Chanchal" के हिन्दी लिरिक्स, भावार्थ, माहात्म्य और अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)। सनातन भक्ति परंपरा के अनुसार संकीर्तन के लाभ और विधि पढ़ें।

प्रस्तावना एवं परिचय

मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

Narendra Chanchal - 

मंगल की सेवा सुन मेरी देवा

हाथ जोड़ तेरे द्वार खड़े

पान सुपारी ध्वजा नारियल

ले ज्वाला तेरी भेंट धरे ।

सुन जगदम्बे कर ना विलम्बे

संतन के भडांर भरे

संतन प्रतिपाली सदा खुशहाली

जय काली कल्याण करे ।

बुद्धि विधाता तू जग माता

मेरा कारज सिद्ध करे

चरण कमल का लिया सहारा

शरण तुम्हारी आन पड़े ।

जब जब भीड़ पड़ी भक्तन पर

तब तब आय सहाय करे

संतन प्रतिपाली सदा खुशहाली

जय काली कल्याण करे ।

मंगल की सेवा सुन मेरी देवा

हाथ जोड़ तेरे द्वार खड़े ।

गुरु के वार सकल जग मोहयो

तरूणी रूप अनूप धरे

माता होकर होकर पुत्र खिलावे

कही भार्या भोग करे ।

शुक्र सुखदाई सदा सहाई

संत खड़े जयकार करे

संतन प्रतिपाली सदा खुशहाली

जय काली कल्याण करे ।

ब्रह्मा विष्णु महेश फल लिये

भेट देन तेरे द्वार खड़े

अटल सिहांसन बैठी मेरी माता

सिर सोने का छत्र फिरे ।

वार शनिचर कुमकुम बरणी

जब लुकड़ पर हुकुम करे

संतन प्रतिपाली सदा खुशहाली

जय काली कल्याण करे ।

खड्ग खप्पर त्रिशुल हाथ लिये

रक्त बीज को भस्म करे

शुम्भ निशुम्भ को क्षण में मारे

महिषासुर को पकड दले ।

आदित वारी आदि भवानी

जन अपने को कष्ट हरे

संतन प्रतिपाली सदा खुशहाली

जय काली कल्याण करे ।

मंगल की सेवा सुन मेरी देवा

हाथ जोड़ तेरे द्वार खड़े ।

कुपित होयकर दानव मारे

चण्डमुण्ड सब चूर करे

जब तुम देखी दया रूप हो

पल में सकंट दूर करे ।

सौम्य स्वभाव धरयो मेरी माता

जन की अर्ज कबूल करे

संतन प्रतिपाली सदा खुशहाली

जय काली कल्याण करे ।

सात बार की महिमा बरनी

सब गुण कौन बखान करे

सिंह पीठ पर चढ़ी भवानी

अटल भवन में राज करे ।

दर्शन पावे मंगल गावे

सिद्ध साधक तेरी भेंट धरे

संतन प्रतिपाली सदा खुशहाली

जय काली कल्याण करे ।

ब्रह्मा वेद पढ़े तेरे द्वारे

शिव शंकर हरी ध्यान धरे

इन्द्र कृष्ण तेरी करे आरती

चंवर कुबेर डुलाय रहे ।

जय जननी जय मात भवानी

अटल भवन में राज करे

संतन प्रतिपाली सदा खुशहाली

जय काली कल्याण करे ।

मंगल की सेवा सुन मेरी देवा

हाथ जोड़ तेरे द्वार खड़े ।

मंगल की सेवा सुन मेरी देवा

हाथ जोड़ तेरे द्वार खड़े

पान सुपारी ध्वजा नारियल

ले ज्वाला तेरी भेंट धरे ।

सुन जगदम्बे कर ना विलम्बे

संतन के भडांर भरे

संतन प्रतिपाली सदा खुशहाली

जय काली कल्याण करे ।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "मंगल की सेवा सुन मेरी देवा भजन(Mangal Ki Seva Sun Meri Deva Lyrics in Hindi) - Narendra Chanchal - Bhaktilok" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।

भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।

भजनों को गाने की सही विधि क्या है?

भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।

क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?

हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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