भक्ति काव्य व भजन मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

मैया मोरे अंगना आई लिरिक्स (Maiya More Angala Aai Lyrics in Hindi ) - by Sanjo Baghel

भजन "मैया मोरे अंगना आई लिरिक्स (Maiya More Angala Aai Lyrics in Hindi ) - by Sanjo Baghel" के हिन्दी लिरिक्स, विस्तृत अर्थ, और पौराणिक महत्त्व। इस भजन में भक्त माता के आंगन में आने का आह्वान कर रहे हैं। शब्द 'मैया मोरे अंगना आई' से भक

प्रस्तावना एवं परिचय

माँ की कृपा का मधुर आमंत्रण

यह भजन माँ की भक्तिभावना को प्रकट करता है और अद्भुत आनंद की अनुभूति कराता है।
मैया मोरे अंगना आईनिहुरके पैयां लागूंमैया मोरे अंगना आईनिहुरके पैयां लागूंमैया मोरे अंगना आई।काहू देख मैयाअंगना आईकाहू देख मैयाअंगना आईकाहो देख मुस्कानीमैया मोरे अंगना आईनिहुरके पैयां लागूंमैया मोरे अंगना आईनिहुरके पैयां लागूंमैया मोरे अंगना आई।भक्ति देख मैया अंगना आईभक्ति देख मैया अंगना आईपूजा देख मुस्कानीनिहुरके पैयां लागूंमैया मोरे अंगना आईनिहुरके पैयां लागूंमैया मोरे अंगना आई।छम छम छनन बाजे पैजाइयाँछम छम छनन बाजे पैजाइयाँचुड़िया शोर मचाईनिहुरके पैयां लागूंमैया मोरे अंगना आईनिहुरके पैयां लागूंमैया मोरे अंगना आई।माथे सिंदुरवा लगाओ सखी प्यारीमाथे सिंदुरवा लगाओ सखी प्यारीमैया मन मुस्काईनिहुरके पैयां लागूंमैया मोरे अंगना आईनिहुरके पैयां लागूंमैया मोरे अंगना आई।मैया मोरे अंगना आईनिहुरके पैयां लागूंमैया मोरे अंगना आईनिहुरके पैयां लागूंमैया मोरे अंगना आई।
साझा करें:
🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ इस भजन में भक्त माता के आंगन में आने का आह्वान कर रहे हैं। शब्द 'मैया मोरे अंगना आई' से भक्त की उस आकांक्षा की झलक मिलती है कि माता स्वयं उनके नज़दीक आकर उन्हें आशीर्वाद दें। 'निहुरके पैयां लागूँ' का उपयोग यह दर्शाता है कि भक्त माता के पैरों में लिपटकर अपनी भक्ति और समर्पण की भावना व्यक्त कर रहा है। भक्ति में यह एक गहरा संदेश है कि जब भक्त सच्चे भाव से देवता को पुकारता है, तब भगवान अवश्य अपने भक्त की पुकार सुनते हैं। यह भजन इस बात का प्रतीक है कि माता कितनी कृपालु और स्नेहिल होती हैं।

इस भजन की भावार्थ में भक्त की प्रेम और भक्ति का अनूठा चित्रण किया गया है। यहाँ 'काहू देख माय' जैसे वाक्यांश दिखाते हैं कि भक्त चाह रहा है कि सभी लोग इस दिव्य प्रेम को देखें और महसूस करें। भक्त की ममता और मातृ प्रेम का यह अद्भुत संबोध हो रहा है। 'छम छम छनन बाजे पैजाइयाँ' का जिक्र ख़ुशियों के उत्सव का बोध देता है, यहाँ पर यह दर्शाया गया है कि माँ के आगमन से वातावरण में उल्लास फैल जाता है। माता का आगमन जैसे मानव जीवन में सुख, समृद्धि और प्रेम का प्रतीक है।
इस भजन के धार्मिक और दार्शनिक पहलुओं में भक्ति मार्ग का महत्व उजागर होता है। भक्त का यह आह्वान हमें सिखाता है कि ईश्वर की भक्ति केवल एक विधि नहीं, बल्कि जीवन का उद्देश्य होना चाहिए। जब भक्त माता के चरणों में अपने हृदय का संश्रय करता है, तब वह अनुभव करता है कि परमात्मा हमेशा उसके साथ है। यह भजन भक्त और दिव्य के संबंध को न केवल सम्मानित करता है, बल्कि उसे एक नई दिशा भी प्रदान करता है।
🔍 विशेष महत्त्व और लाभ इस भजन का संस्कृतिका महत्व भी है, जहाँ माता के प्रति असीम श्रद्धा और भक्ति प्रकट होती है। भारतीय पौराणिक कथाओं में मातृशक्ति को सर्वोच्च महत्व दिया गया है। जैसे माँ दुर्गा का पूजा, जिनका स्वरूप शक्ति, करुणा और भक्ति का प्रदर्शक है। 'माँ की कृपा' का आदान-प्रदान हमें इस भजन के माध्यम से प्रतीत होता है और यह प्रतीक है माँ के प्रति हमारी असीम प्रेम का। पवित्र ग्रंथों में भी माताओं का स्थान अति विशेष है।
सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा शुभ मुहूर्त">दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। यह भजन गहन मानसिक शांति और आध्यात्मिक संतोष प्रदान करता है। इसके श्रवण और उच्चारण से भक्त के मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह न केवल आध्यात्मिक अनुभूति को बढ़ाता है, बल्कि व्यक्ति के दैनिक जीवन में خوشियाँ और सौहार्द लाता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि इस भजन का श्रवण सुबह के समय करना अत्यंत फलदायी होता है। पूजा करते समय दीप जलाना, फल-फूल अर्पित करना और स्वच्छ मन से भजन गाना चाहिए। ध्यान मुद्रा में बैठकर इस भजन को गाने से आंतरिक शांति का अनुभव होता है।
�� अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ) इस भजन का उद्देश्य क्या है?यह भजन माता के प्रति प्रेम और श्रद्धा व्यक्त करता है, जिससे भक्त को आंतरिक शांति और संतोष मिलता है।
किस समय इस भजन का जाप करना चाहिए?सुबह के समय इस भजन का जाप करना सबसे शुभ माना जाता है, क्योंकि यह दिन की सकारात्मक शुरुआत में सहायक होता है।
क्या इस भजन का कोई विशेष टोटका है?इस भजन का जाप करते समय यदि संभव हो तो गोबर से बनी दीपक जलाना और माताजी को प्रिय वस्त्र अर्पित करना चाहिए।

meta_description""यह मधुर भजन माता की भक्ति और स्नेह का प्रतीक है, जो भक्त के जीवन में सुख और शांति लाता है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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