Durga Bhajan Lyrics बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

लाया थारी चुनरी करियो माँ स्वीकार लिरिक्स (Laya thari chunari kariyo maa swikar Lyrics in Hindi) - Durga maa bhajan

भजन 'लाया थारी चुनरी करियो माँ स्वीकार' माता दुर्गा की कृपा, भक्ति, और शक्ति के लिए प्रिय प्रार्थना है। इसके माध्यम से भक्तों को प्रेरणा प्राप्त होती है।

प्रस्तावना एवं परिचय

माँ दुर्गा की असीम कृपा का मार्ग

इस भजन में माता दुर्गा के प्रति भक्ति और प्रेम व्यक्त किया गया है। इसे गाकर भक्त अपनी समर्पण भावना प्रकट करते हैं।

लाया थारी चुनरी करियो माँ स्वीकारइमें साँचा साँचा हीरा और मोतियों की भरमार !!चुनरी को रंग लाल चटक है तारा भी चिपकाया माँ बढियाँ पोत मंगायो जामे गोटो भी लगवाया माँ थे तो ओढ दिखाओ मैयाथारो मानंगा उपकार !!लाया थारी चुनरी...बस इतनी सी कृपा कर दे सेवा में लग-जावाँ माँ म्हने तू इ लायक करदे चुनरी रोज चदावा माँ बस टाबरिया पर बरसे  माँ हरदम थारो प्यार !!लाया थारी चुनरी...एक हाथ स भक्ति दीजे  एक हाथ स शक्ति माँ एक हाथ स धन दौलत और एक हाथ स मुक्ति माँतू तो हर हाथां स दीजे  माँ थारा हाथ हज़ार !!लाया थारी चुनरी...गर तू थारो बेटो समझे सेवा बताती रह्ज्ये माँ'बनवारी' क्यां लायक समझो  काम उडाती रह्य्जे माँम्हे तो रात-दिना बेठ्या हाँ  थारी सेवा में तैयार !!लाया थारी चुनरी...
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

भजन "लाया थारी चुनरी करियो माँ स्वीकार" में माता दुर्गा की महिमा और कृपा का वर्णन है। पहले पंक्ति में "लाया थारी चुनरी" कहकर भक्त माँ से विनम्रतापूर्वक यह प्रार्थना कर रहे हैं कि वह उनकी भक्ति और समर्पण को स्वीकार करें। इसमें "साँचा साँचा हीरा और मोतियों की भरमार" बोलकर भक्तिता का स्वागत कर रहे हैं, जिससे प्रकट होता है कि भक्त अपनी माँ के प्रति कैसी अपार श्रद्धा और प्रेम अनुभव कर रहे हैं। लाल चुनरी माता दुर्गा के प्रति श्रद्धा का प्रतीक है, जिसे भक्त ने चढ़ाया है। गीत में कहा गया है कि "बस इतनी सी कृपा कर दे सेवा में लग-जावाँ माँ" इसका अर्थ है कि भक्त माँ से केवल सेवा करने का अवसर चाहते हैं, यह प्रवृत्ति विनम्रता और भक्ति का प्रतिक है।

इस भजन में भावार्थ यह है कि भक्त केवल भक्ति ही नहीं, बल्की शक्ति, धन और मोक्ष की भी कामना कर रहे हैं। जब वह माँ से कहते हैं, "एक हाथ स भक्ति दीजे, एक हाथ स शक्ति माँ" तो इसका अर्थ यह है कि वे माँ से जीवन में सामर्थ्य और शक्ति की प्रार्थना कर रहे हैं। यह भक्त का अनुरोध है कि वह केवल भक्ति के लिए नहीं, बल्कि पारिवारिक और वित्तीय समृद्धि के लिए भी माँ का आशीर्वाद चाहते हैं। "गर तू थारो बेटा समझे" पंक्ति इस बात को दर्शाती है कि वे अपनी संतान के माध्यम से भी सेवा का संकल्प व्यक्त कर रहे हैं।

भक्ति मार्ग का यह श्रेष्ठ उदाहरण है, जहाँ भक्त भावना, भक्ति और विशुद्ध प्रेम से माँ की आराधना कर रहे हैं। भक्ति केवल मौखिक प्रार्थना नहीं है, बल्कि इसे अपने कार्यों में व्‍यक्त करना आवश्यक है। "म्हे तो रात-दिना बेठ्या हाँ थारी सेवा में तैयार" इस पंक्ति से ज्ञात होता है कि भक्त केवल अनुरोध नहीं कर रहे, बल्कि सच्चे मन से सेवा को अपनाने का वचन दे रहे हैं। यह सभी तत्व भक्त की निष्ठा और आत्मीयता का प्रमाण हैं, जो उन्हें देवी से जोड़ते हैं।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन हिन्दू धर्म में माता दुर्गा की आराधना के क्रम में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। माता दुर्गा को शक्ति, संकल्प और साहस की देवी माना जाता है। देवी पुराण, दुर्गा सप्तशती और अन्य पुराणों में माता के सरल और सरल अपील के माध्यम से भक्तों को मातृत्व, शक्ति और परProtection की भावना का अनुभव होता है। जब भक्त माता से असीम कृपा की प्रार्थना करते हैं, तब वह उनकी कठिनाइयों को दूर करने के लिए सदा तत्पर रहती हैं। यह भजन भक्तों को सामाजिक, आर्थिक और आध्यात्मिक संबल प्रदान करता है।

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। इस भजन का गायन मानसिक शांति, आंतरिक शक्तियों का जागरण और भक्तिभाव में वृद्धि करता है। नियमित रूप से इसे गाने से भक्त की आध्यात्मिक पथ में सच्ची प्रेरणा और सांत्वना मिलती है। यह उपचारात्मक प्रभाव भी पैदा करता है, जिससे मन की स्थिरता और शांति प्राप्त होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पूर्ण लाभ हेतु सुबह के समय, विशेषकर दुर्गा पूजा के दौरान या विशेष तिथि पर गाया जा सकता है। दीप जलाना, फूल या मीठा भोग अर्पित करना तथा सच्चे मन से माँ की आराधना करना आवश्यक है। भजन का गायन करते समय ध्यान केंद्रित रखें और मन को शुद्ध रखें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का गान क्यों करें?

इस भजन का गान माता दुर्गा से कृपा एवं शक्ति की प्राप्ति के लिए किया जाता है। यह भक्त की भक्ति और समर्पण का अभिव्यक्ति है।

किस समय इस भजन का ज़्यादा लाभ मिलता है?

सुबह के समय या दुर्गा पूजा के अवसर पर इस भजन का गान विशेष लाभकारी है, जब भक्त मन को शुद्ध और एकाग्र कर देवी की कृपा प्राप्त करते हैं।

क्या इस भजन के विशेष भावार्थ हैं?

हाँ, इस भजन में भक्त अपनी भक्ति, शक्ति, धन और मोक्ष की प्रार्थना माँ से करते हैं, जो न केवल धार्मिक, बल्कि मानसिक एवं भौतिक जीवन के लिए भी प्रेरणादायक है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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