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चिट्टियाँ पूणियां जय हो तंद लैन हुलारे लिरिक्स (Chittiyan pooniyan jay Ho Tand Lain Hulare Lyrics in Hindi) - Baba Balak Nath Bhajan

बाबा बालक नाथ जी का प्रसिद्ध भजन 'चिट्टियाँ पूणियां जय हो तंद लैन हुलारे लिरिक्स' यहाँ पढ़ें। सोहन लाल सैनी जी की मधुर आवाज में गाए इस भजन का आनंद लें।

Baba Balak Nath Bhajan

अमरनाथ, वैष्णो देवी और उत्तर भारत के अन्य प्रसिद्ध तीर्थों की तरह ही हिमाचल प्रदेश के दियोटसिद्ध में स्थित बाबा बालक नाथ जी का दरबार अपनी अलौकिक आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए पूरे विश्व में विख्यात है। बाबा बालक नाथ जी को भगवान शिव के अवतार और दत्तोपेत स्वरूप के रूप में पूजा जाता है। चैत्र मास के मेलों के दौरान और प्रत्येक रविवार को उनके दरबार में लाखों भक्त अपनी झोलियां भरने पहुँचते हैं। "चिट्टियाँ पूणियां जय हो तंद लैन हुलारे लिरिक्स" सोहन लाल सैनी जी की मधुर वाणी में गाया गया एक अत्यंत लोकप्रिय और हृदयस्पर्शी बाबा बालक नाथ भजन है। यह भजन केवल एक गीत नहीं, बल्कि बाबा के प्रति अनन्य प्रेम, पूर्ण शरणागति और उनकी गुफा तक पहुँचने की व्याकुलता का जीवंत प्रतीक है। इस विस्तृत लेख में हम इस पवित्र भजन के संपूर्ण बोल, इसका सरल हिंदी अर्थ, भावार्थ, गायन शैली और बाबा बालक नाथ की महिमा पर विस्तार से प्रकाश डालेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics


मखड़ा (Refrain):

चिट्टियाँ पूणियां जय हो तंद लैन हुलारे
बाबा बालक नाथ ने लखा ही तारे
मैं भी ता जाना जय हो जे मैनु भी तारे
मैं भी ता जाना जय हो जे मैनु भी तारे
चिट्टियाँ पूणियां जय हो तंद लैन

प्रथम अंतरा (Stanza 1):

कत कत पूणिया मैं खेस बनाउँदी आ
निक्के जेहे बालक दे मैं हेठ बिछाउंदी आ
चिट्टियाँ पूणियां जय हो तंद लैन
माई रत्नोँ वांगु सानू भी तार दे
रोट चढ़ावा जोगिया तेरे द्वार ते
चिट्टियाँ पूणियां जय हो तंद लैन

द्वितीय अंतरा (Stanza 2):

चिट्टियाँ पूणियां तंद रंग बिरंगे ने
ओह्देया रंगा दे विच लखा ही रंगे ने
चिट्टियाँ पूणियां जय हो तंद लैन

अंतिम अंतरा (Stanza 3):

चेत महीने झंडे लै के आवांगे
"सोहनी" कहंदा गुफा ते लंगर लावांगे
चिट्टियाँ पूणियां जय हो तंद लैन

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth


यह पावन भजन बाबा बालक नाथ के भक्तों की आंतरिक भावनाओं और उनकी निष्काम सेवा को बहुत ही सुंदर शब्दों में व्यक्त करता है। 'चिट्टियाँ पूणियां' यानी सफेद सूती पूनियों का कातना और उनसे रोट या वस्त्र तैयार करना, ग्रामीण और पारंपरिक भक्ति का एक अनूठा रूप है। भक्तजन अपने आराध्य के प्रति अपनी ममता और दुलार को एक बच्चे के रूप में देखते हैं।

भजन के मखड़े में भक्त कहता है कि सफेद पूनियां हवा में लहरा रही हैं और तंद ले रही हैं। बाबा बालक नाथ ने अब तक लाखों दुखी और अनाथ जीवों को तारा है, उनकी पुकार सुनी है। भक्त की दिली इच्छा है कि वह भी बाबा के दरबार में पहुँचे, बशर्ते बाबा स्वयं अपनी कृपा का हाथ बढ़ाकर उसे पार लगा दें। बिना बाबा की मर्जी और कृपा के कोई भी उनके दरबार तक नहीं पहुँच सकता।

पहले अंतरे में भक्त अपनी साधना और ममता का वर्णन करते हुए कहता है कि वह बड़े प्रेम से रुई को कत-कत कर पूनियां बनाती है और उनसे सुंदर खेस या वस्त्र तैयार करती है। उस नटखट और प्यारे बालक रूपी बाबा के बैठने या सोने के लिए वह उन्हें प्रेम से बिछाती है। भक्त माई रत्नों का स्मरण करता है—जो बाबा बालक नाथ की अनन्य और परम भक्त थीं—और विनती करता है कि हे जोगिया! जैसे तूने माई रत्नों को तारा था, वैसे ही मुझ दीन को भी तार दे और मैं तेरे पवित्र द्वार पर आकर रोट (चावल, गुड़ और घी का प्रसाद) चढ़ाऊँ।

अगले चरण में कहा गया है कि वे पूनियां और उनके धागे केवल सफेद नहीं हैं, बल्कि रंग-बिरंगे हैं। इन विविध रंगों में लाखों-करोड़ों लोग रंगे हुए हैं, जिसका अर्थ है कि बाबा की इस माया और भक्ति में संसार के हर वर्ग और स्वभाव के लोग प्रेम से सराबोर हैं। अंत में रचनाकार सोहन लाल सैनी (सोहनी) कहते हैं कि चैत्र मास के पावन मेलों में हम बड़े उत्साह के साथ हाथ में झंडे लेकर बाबा की गुफा की ओर चलेंगे और वहाँ भंडारा लगाकर सभी भक्तों की सेवा करेंगे।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance


  • अनोखी लोक शैली: यह भजन पारंपरिक पहाड़ी और पंजाबी लोक संगीत की शैली में रचा गया है, जो सीधे दिल को छूता है।
  • माई रत्नो का प्रसंग: भजन में माई रत्नों का उल्लेख है, जो बाबा बालक नाथ की परम भक्त थीं। उनके चरित्र का स्मरण करना भक्तों को सच्ची भक्ति की प्रेरणा देता है।
  • चैत्र मेलों का उल्लेख: हिमाचल प्रदेश के दियोटसिद्ध में चैत्र मास के मेले का विशेष महत्व है, जिसका सुंदर चित्रण इस भजन में मिलता है।
  • समर्पण का भाव: भजन में रोट चढ़ाने और लंगर लगाने जैसी लोक परंपराओं का सजीव वर्णन है।

आप बाबा की महिमा से जुड़े अन्य पावन ग्रंथों और स्तोत्रों के बारे में भी पढ़ सकते हैं, जैसे श्री हनुमान चालीसा, जो हर संकट को दूर करने वाली है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing


इस भजन को विशेष रूप से निम्नलिखित अवसरों पर गाना और सुनना अत्यंत फलदायी माना जाता है:

  • रविवार के दिन: बाबा बालक नाथ जी का वार रविवार माना जाता है। इस दिन विशेष पूजा और जागरण में यह भजन अवश्य गाया जाता है।
  • चैत्र नवरात्रि और मेले: चैत्र मास के मेलों के दौरान दियोटसिद्ध जाते समय या घर पर जोत जलाते समय यह भजन गूंजता है।
  • चौकी या जागरण में: बाबा बालक नाथ की चौकी के अवसर पर शुरुआत या मुख्य बेला में यह भजन माहौल को पूरी तरह भक्तिमय बना देता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint


बाबा बालक नाथ: बाबा बालक नाथ जी को भगवान शिव के अंश और सतयुग के सिद्ध पुरुष के रूप में जाना जाता है। उनका मुख्य मंदिर हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले के दियोटसिद्ध में स्थित है, जहाँ वे एक प्राकृतिक गुफा (बाणगंगा के पास) में विराजमान हैं। उन्हें 'दूध-रोट' का भोग अत्यंत प्रिय है।

माई रत्नो: माई रत्नो बाबा बालक नाथ की परम भक्त थीं, जो उनकी गाय चराती थीं और बाबा की बाल लीलाओं की साक्षी बनी थीं। बाबा ने उन्हें अमरता और मोक्ष का वरदान दिया था।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background


इस सुंदर भजन को प्रसिद्ध लोक गायक सोहन लाल सैनी (Sohan Lal Saini) द्वारा स्वरबद्ध किया गया है। उनके गानों में पहाड़ी संस्कृति, लोक कथाओं और बाबा बालक नाथ के प्रति अगाध श्रद्धा की झलक मिलती है। 'सोहनी' नाम से भजन में रचनाकार की अपनी छाप मिलती है, जो बाबा के दरबार में अपनी हाजिरी लगाने की तड़प को दर्शाती है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style


यह भजन सरल हिंदी, पंजाबी और पहाड़ी लोक बोलियों के मिश्रण से तैयार किया गया है। इसमें ग्रामीण परिवेश के प्रतीकों जैसे 'पूनियां कातना', 'खेस बनाना', 'रंग-बिरंगे तंद' और 'झंडे लेकर चलना' का बहुत ही सुंदर प्रयोग किया गया है। यह शैली आम जनमानस के दिलों में आसानी से उतर जाती है और उन्हें झूमने पर मजबूर कर देती है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons


  • पूर्ण शरणागति: भक्त का यह विश्वास कि "मैं भी ता जाना जय हो जे मैनु भी तारे", यह सिखाता है कि आध्यात्मिक मार्ग पर गुरु या ईश्वर की कृपा के बिना आगे नहीं बढ़ा जा सकता।
  • निसस्वार्थ सेवा: लंगर लगाना और बाबा को रोट चढ़ाना समाज सेवा और आतिथ्य का संदेश देता है।
  • स्मरण की निरंतरता: जैसे रुई को लगातार कत कर धागा बनाया जाता है, वैसे ही भगवद नाम का स्मरण निरंतर होना चाहिए।

जैसे साधक भगवान की कृपा पाने के लिए निरंतर साधना करते हैं, वैसे ही जीवन में शांति के लिए शिव तांडव स्तोत्र का पाठ भी अत्यंत लाभकारी होता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings


शब्द / वाक्यांश सरल अर्थ संदर्भ / भाव
चिट्टियाँ पूणियां सफेद सूती पूनियां भक्ति की पवित्रता और निर्मल मन का प्रतीक
तंद लैन धागा बनना / हवा में लहराना ईश्वर के प्रेम में तल्लीन होना
खेस सूती चादर या ओढ़ने का वस्त्र बाबा के प्रति आत्मीय प्रेम और सेवा
माई रत्नो बाबा बालक नाथ की परम भक्त सच्ची भक्ति और कृपा का ऐतिहासिक संदर्भ
रोट मीठी रोटी / विशेष प्रसाद बाबा बालक नाथ को अर्पित किया जाने वाला मुख्य भोग
चेत महीना चैत्र मास (मार्च-अप्रैल) दियोटसिद्ध के मुख्य मेले का समय

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation


पंक्ति: चिट्टियाँ पूणियां जय हो तंद लैन हुलारे
भावार्थ: निर्मल और पवित्र भावनाओं रूपी सफेद पूनियां बाबा के दरबार की हवा में झूम रही हैं और प्रेम के धागे पिरो रही हैं।

पंक्ति: बाबा बालक नाथ ने लखा ही तारे
भावार्थ: बाबा की महिमामयी कृपा ऐसी है कि उन्होंने अब तक लाखों भक्तों को भवसागर से पार लगाया है।

पंक्ति: माई रत्नोँ वांगु सानू भी तार दे, रोट चढ़ावा जोगिया तेरे द्वार ते
भावार्थ: भक्त प्रार्थना करता है कि हे योगेश्वर बालक नाथ! जिस प्रकार आपने अपनी प्रिय भक्त माई रत्नों पर कृपा की थी, वैसे ही मुझ पर भी कृपा करें और मुझे अपने द्वार पर रोट चढ़ाने का सौभाग्य दें।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok


"ॐ अद्याय श्री बाबा बालक नाथ नमः"

बाबा बालक नाथ के स्मरण मात्र से समस्त कष्टों का निवारण होता है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information


भजन का नाम चिट्टियाँ पूणियां जय हो तंद लैन हुलारे
आराध्य देव बाबा बालक नाथ (सिद्ध बाबा)
गायक / कलाकार सोहन लाल सैनी (Sohan Lal Saini)
भाषा हिंदी, पंजाबी एवं पहाड़ी लोक भाषा
मुख्य विषय भक्ति, शरणागति और दियोटसिद्ध यात्रा
भक्ति भाव वात्सल्य, प्रेम और विनय
उपयुक्त अवसर रविवार पूजा, जागरण और चैत्र मेला

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)


इस प्रसिद्ध भजन को लोकप्रिय लोक गायक सोहन लाल सैनी जी ने अपनी मधुर आवाज में गाया है।

बाबा बालक नाथ जी का मुख्य पवित्र दरबार हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले के दियोटसिद्ध (शाहतलाई के पास) में एक गुफा के रूप में स्थित है।

बाबा बालक नाथ को 'रोट' (जो कि चावल, गुड़ और घी को मिलाकर बनाया जाता है) का प्रसाद सबसे अधिक प्रिय है। भक्त इसे उनके दरबार में जाकर चढ़ाते हैं।

माई रत्नों बाबा बालक नाथ की परम भक्त थीं। उनकी कथा बाबा के इतिहास से जुड़ी है, और भक्त बाबा से प्रार्थना करते हैं कि जैसे उन्होंने माई रत्नों को तारा, वैसे ही उन्हें भी तार दें।

पूरे वर्ष यहाँ भक्त आते हैं, परंतु चैत्र मास (मार्च-अप्रैल) के मेले और प्रत्येक रविवार को यहाँ विशेष दर्शन व मेलों का आयोजन होता है, जो अत्यंत शुभ माने जाते हैं।

यह भजन हिंदी, पंजाबी और उत्तर भारत की स्थानीय लोक बोलियों के सुंदर समन्वय में लिखा गया है।

बाबा बालक नाथ जी को भगवान शिव के अंशाअवतार, बाल योगी और सिद्ध पुरुष के रूप में पूजा जाता है।

इस भजन को सुनने से मन को शांति मिलती है, बाबा बालक नाथ के प्रति श्रद्धा बढ़ती है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ


संपादकीय रूप से तैयार सामग्री। इस लेख में प्रस्तुत भजन के बोल, अर्थ और सांस्कृतिक संदर्भ पारंपरिक लोक मान्यताओं और उपलब्ध ऑडियो स्रोतों के आधार पर पाठकों की सुविधा के लिए संकलित किए गए हैं। हमारा उद्देश्य सनातन संस्कृति और लोक भजनों के अमूल्य धरोहर को सुरक्षित रखना और उसे सही स्वरूप में आप तक पहुँचाना है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References


  • पारंपरिक उत्तर भारतीय लोक भजन एवं संकीर्तन परंपरा
  • हिमाचल प्रदेश के सिद्ध पीठ दियोटसिद्ध की लोक गाथाएं
  • सोहन लाल सैनी द्वारा प्रस्तुत बाबा बालक नाथ भजन संग्रह

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 09 Oct 2026

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