भक्ति काव्य व भजन बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

ऐसा देश है मेरा लिरिक्स (Aisa Desh Hai Mera Lyrics in Hindi) - Veer-Zaara Shah Rukh Khan Preity Zinta Lata Mangeshkar Udit Narayan

वीर-ज़ारा फिल्म के सदाबहार गीत 'ऐसा देश है मेरा' के हिंदी लिरिक्स और भावार्थ पढ़ें। देशभक्ति से ओत-प्रोत इस सुंदर गीत का आनंद लें केवल Bhaktilok पर।

प्रस्तावना एवं परिचय

मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

 

ओ अंबर हेठाँ धरती वसदी

एथे हर रुत हँसदी हो

किन्ना सोणा देस है मेरा

देस है मेरा देस है मेरा

किन्ना सोणा देस है मेरा

देस है मेरा देस है मेरा

देस है मेरा

धरती सुनहरी अंबर नीला हो

धरती सुनहरी अंबर नीला

हर मौसम रंगीला

ऐसा देस है मेरा

हो ऐसा देस है मेरा

ऐसा देस है मेरा

हाँ ऐसा देस है मेरा

बोले पपीहा कोयल गाये

बोले पपीहा कोयल गाये

सावन घिर के आये

ऐसा देस है मेरा

हो ऐसा देस है मेरा

ऐसा देस है मेरा

हाँ ऐसा देस है मेरा

कोठे ते का बोले ओये

चिट्ठी मेरे माहिए दी

विच आने दा वि ना बोले ओये

चिट्ठी मेरे माहिए दी

गेंहू के खेतों में कंघी जो करे हवाएं

रंग बिरंगी कितनी चुनरियाँ उड़ उड़ जाएं

पनघट पर पनहारन जब गगरी भरने आये

मधुर मधुर तानों में कहीं बंसी कोई बजाए लो सुन लो

क़दम क़दम पे है मिल जानी

क़दम क़दम पे है मिल जानी कोई प्रेम कहानी

ऐसा देस है मेरा

हो ऐसा देस है मेरा

ऐसा देस है मेरा

हाँ ऐसा देस है मेरा

ओ हाय हाय हाय

ओ मेरी जुगनी दे धागे बांधे

जुगनी ओस दे मूंह तो फब्बेय

जीनु साड इश्क दी लग्गे

ओये साई मरेया जुगनी होये

वीर मेरेया जुगनी कहंदी है

ओ नाम साई द लेंदी है हाय हाय हाय

ओ दिल कड़ लिता ई जींद मेरिये

बाप के कंधे चढ़ के जहाँ बच्चे देखे मेले

मेलों में नट के तमाशे कुल्फ़ी के चाट के ठेले

कहीं मिलती मीठी गोली कहीं चूरन की है पुड़िया

भोले भोले बच्चे हैं जैसे गुड्डे और गुड़िया

और इनको रोज़ सुनाये दादी नानी हो

रोज़ सुनाये दादी नानी

इक परियों की कहानी

ऐसा देस है मेरा

हो ऐसा देस है मेरा

ऐसा देस है मेरा

हाँ ऐसा देस है मेरा

सदके सदके जांदी है मुटियारे नि

कंदा चुभा फिर पैर बांकी नारे नि

ओये नि अडिये कंदा चुभा फिर पैर बांकी नारे नि

कौन कड़े तेरा कन्दरा मुटियारे नि

कौन सहे तेरी पीड बांकिये नारे नि

ओये नि अडिये कौन सहे तेरी पीड बांकिये नारे नि

हो हो हो

मेरे देस में मेहमानों को भगवान कहा जाता है

वो यहीं का हो जाता है जो कहीं से भी आता है

हाँ हाँ हाँ

तेरे देस को मैंने देखा तेरे देस को मैंने जाना

आ तेरे देस को मैंने देखा तेरे देस को मैंने जाना

जाने क्यूँ ये लगता है मुझको जाना पहचाना

यहाँ भी वही शाम है वही सवेरा ओ

वही शाम है वही सवेरा

ऐसा ही देस है मेरा जैसा देस है तेरा

वैसा देस है तेरा हाँ जैसा देस है तेरा

ऐसा देस है मेरा हो

जैसा देस है तेरा

ऐसा देस है मेरा

हाँ.. जैसा देस है तेरा

ऐसा देस है मेरा हाँ

जैसा देस है मेरा

* Singers: Lata Mangeshkar, Udit Narayan, Gurdas Mann, Pritha Majumder *


शाबाशियां लिरिक्स (Shaabaashiyaan Lyrics in Hindi) - Mission Mangal Akshay Kumar Desh Bhakti Song - Bhaktilok


सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "ऐसा देश है मेरा लिरिक्स (Aisa Desh Hai Mera Lyrics in Hindi) - Veer-Zaara Shah Rukh Khan Preity Zinta Lata Mangeshkar Udit Narayan - Bhaktilok" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।

भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।

भजनों को गाने की सही विधि क्या है?

भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।

क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?

हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 14 Oct 2026

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