भक्ति काव्य व भजन मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

मेरे पौणाहारिया (Baba Balak Nath Birthday ) - Vishu Vishal तेरे दर पे मैं आवां हर साल जोगिया

पढ़ें मेरे पौणाहारिया (Baba Balak Nath Birthday ) - Vishu Vishal तेरे दर पे मैं आवां हर साल जोगिया - BhaktiLok का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार्थ

"मेरे पौणाहारिया" भजन बाबा बालक नाथ जी की महिमा का एक अत्यंत पावन और हृदयस्पर्शी गुणगान है। पौणाहारी बाबा बालक नाथ, जो भगवान शिव के ही अंश और सिद्ध योगियों में अग्रणी माने जाते हैं, हिमाचल प्रदेश के दियोटसिद्ध में अपनी दिव्य उपस्थिति के लिए विख्यात हैं। यह भजन न केवल एक भक्ति गीत है, बल्कि यह उस अटूट विश्वास का प्रतीक है जो एक भक्त अपने 'जोगिया' (बाबा बालक नाथ) के प्रति रखता है। 'तेरे दर पे मैं आवां हर साल जोगिया' की पंक्तियाँ भक्त की उस व्याकुलता और प्रेम को दर्शाती हैं, जो उसे बार-बार बाबा के चरणों में खींच लाती है। यह भजन विशेष रूप से बाबा बालक नाथ जी के जन्मोत्सव और उनके वार्षिक मेलों के अवसर पर भक्तों द्वारा अत्यंत श्रद्धा के साथ गाया जाता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

मुखड़ा:

मेरे पौणाहारिया, मेरे पौणाहारिया,
तेरे दर पे मैं आवां हर साल जोगिया,
मेरे पौणाहारिया, मेरे पौणाहारिया।

अंतरा 1:

सिर पे तेरे जटा सोहे, गले में रुद्राक्ष माला,
तेरी मूरत देख के बाबा, मन मेरा हो गया मतवाला।
तेरी ज्योत जगावां हर साल जोगिया,
मेरे पौणाहारिया, मेरे पौणाहारिया।

अंतरा 2:

दियोटसिद्ध की चढ़ाई बाबा, बड़ी ही कठिन है भाई,
जो भी तेरे दर पे आया, उसने खुशियाँ ही पाई।
तेरी महिमा गावां हर साल जोगिया,
मेरे पौणाहारिया, मेरे पौणाहारिया।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का भावार्थ पूर्ण शरणागति है। भक्त बाबा को 'पौणाहारी' कहकर संबोधित करता है, जिसका अर्थ है 'पवन का आहार करने वाले'। यह बाबा की योग शक्ति और उनकी तपस्या की पराकाष्ठा को दर्शाता है। भक्त कहता है कि हे बाबा! मैं हर वर्ष आपके दरबार में आने का संकल्प लेता हूँ, क्योंकि आपके दर्शन मात्र से ही मेरे समस्त सांसारिक कष्ट मिट जाते हैं। भजन की पंक्तियाँ यह संदेश देती हैं कि ईश्वर की भक्ति में ही जीवन की सार्थकता है। जब भक्त कहता है कि 'तेरी मूरत देख के मन मतवाला हो गया', तो यह उस आत्मिक आनंद की स्थिति है जहाँ भक्त को संसार की सुध-बुध नहीं रहती। यह भजन साधक को यह सिखाता है कि कठिन चढ़ाई (जीवन की चुनौतियाँ) को पार करके ही प्रभु के दर्शन (मोक्ष/शांति) प्राप्त होते हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • देवता: यह भजन सिद्ध बाबा बालक नाथ जी को समर्पित है।
  • भक्ति भाव: इसमें प्रेम, समर्पण और विरह का अद्भुत संगम है।
  • सांस्कृतिक महत्व: यह भजन हिमाचल प्रदेश की लोक-भक्ति परंपरा का अभिन्न हिस्सा है।
  • आध्यात्मिक लाभ: इस भजन का श्रवण करने से मन की एकाग्रता बढ़ती है और नकारात्मक विचारों का नाश होता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को बाबा बालक नाथ जी के जन्मोत्सव (होली के अवसर पर), रविवार के दिन, या किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत में गाया जा सकता है। इसे गाते समय मन में बाबा के दियोटसिद्ध धाम का ध्यान करना चाहिए। धूप-दीप जलाकर और बाबा की प्रतिमा के समक्ष बैठकर इसे गाने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द सरल अर्थ संदर्भ
पौणाहारी पवन का आहार करने वाले बाबा बालक नाथ जी का विशेषण
जोगिया योगी या तपस्वी बाबा के लिए प्रेमपूर्ण संबोधन
दियोटसिद्ध बाबा का मुख्य धाम हिमाचल स्थित पवित्र गुफा
ज्योत अखंड दीपक ईश्वरीय प्रकाश का प्रतीक

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम मेरे पौणाहारिया
समर्पित देवता बाबा बालक नाथ जी
भाषा हिंदी/पंजाबी मिश्रित
भाव अनन्य भक्ति एवं समर्पण
उपयुक्त अवसर बाबा बालक नाथ जन्मोत्सव, रविवार पूजा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

बाबा बालक नाथ जी कौन हैं?

बाबा बालक नाथ जी को भगवान शिव का अवतार और सिद्ध योगियों में प्रमुख माना जाता है। वे बाल ब्रह्मचारी हैं और उनकी पूजा विशेष रूप से हिमाचल प्रदेश और पंजाब में की जाती है।

'पौणाहारी' नाम का क्या अर्थ है?

पौणाहारी का अर्थ है 'पवन (हवा) का आहार करने वाले'। यह बाबा की कठोर तपस्या और योग शक्ति को दर्शाता है।

इस भजन को कब सुनना चाहिए?

इस भजन को आप किसी भी समय सुन सकते हैं, लेकिन बाबा बालक नाथ जी के वार (रविवार) को सुनना अत्यंत शुभ माना जाता है।

क्या यह भजन घर पर गाया जा सकता है?

जी हाँ, आप इसे अपने घर के मंदिर में बाबा की तस्वीर या मूर्ति के सामने श्रद्धापूर्वक गा सकते हैं।

बाबा बालक नाथ जी का मुख्य मंदिर कहाँ है?

बाबा बालक नाथ जी का मुख्य मंदिर हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले के दियोटसिद्ध में स्थित है।

बाबा बालक नाथ जी के भक्त उन्हें क्या कहकर बुलाते हैं?

भक्त उन्हें 'जोगिया', 'पौणाहारी', 'सिद्ध बाबा' और 'बालक नाथ' कहकर संबोधित करते हैं।

क्या इस भजन के गायन से कोई विशेष लाभ होता है?

भक्ति भाव से भजन गाने से मन को शांति मिलती है और बाबा की कृपा से जीवन के कष्ट दूर होते हैं।

क्या बाबा बालक नाथ जी की पूजा में कोई विशेष नियम हैं?

बाबा बालक नाथ जी की पूजा सात्विक भाव से की जाती है। स्वच्छता और पवित्रता का ध्यान रखना आवश्यक है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख बाबा बालक नाथ जी की भक्ति परंपरा को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। भजन के बोल और भावार्थ को लोक-मान्यताओं के आधार पर संकलित किया गया है। यह सामग्री भक्तों के लिए एक मार्गदर्शिका के रूप में कार्य करती है। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 12 Oct 2026

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