Mahadev Bhajan बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

योगेश्वराय महादेवाय त्रयम्काय त्रिपुरान्तकाय लिरिक्स हिंदी (YOGESHWESHVARAYA MAHADEVAYA TRAYAMBAKAYA Lyrics in Hindi) - Smita Shiv Stotra

भगवान शिव की पावन स्तुति योगेश्वराय महादेवाय त्रयम्काय त्रिपुरान्तकाय के लिरिक्स हिंदी अर्थ और महत्व सहित पढ़ें। संदर्भ एवं व्याख्या सहित।

योगेश्वराय महादेवाय त्रयम्काय त्रिपुरान्तकाय लिरिक्स हिंदी - परिचय एवं आध्यात्मिक पृष्ठभूमि

भगवान शिव इस सृष्टि के आदि, मध्य और अंत के स्रोत हैं। उन्हें महाकाल, सदाशिव, योगेश्वर, त्रयम्बक और त्रिपुरांतक जैसे अनगिनत दिव्य नामों से पूजा जाता है। 'योगेश्वराय महादेवाय त्रयम्काय त्रिपुरान्तकाय' स्तुति एवं संकीर्तन भगवान शिव के उन महाप्राण रूपों का आह्वान है, जो साधक को भौतिक बंधनों से मुक्त कर परम चेतना और आत्मसाक्षात्कार की ओर ले जाते हैं। यह पवित्र स्तोत्र और संकीर्तन विशेष रूप से भगवान शिव की असीम कृपा, करुणा और उनके रुद्र स्वरूप के दर्शन कराता है। महाशिवरात्रि, सावन मास और प्रदोष व्रत के पवित्र अवसरों पर इस स्तोत्र का गान और स्मरण भक्तों के हृदय में भक्ति का दीप प्रज्वलित करता है। इस लेख में हम इस पावन स्तोत्र के सम्पूर्ण लिरिक्स, हिंदी अर्थ, उच्चारण विधि और इसके आध्यात्मिक महत्व का विस्तार से अध्ययन करेंगे।

सम्पूर्ण भजन एवं स्तोत्र लिरिक्स | Complete Bhajan & Stotram Lyrics

महादेवाय नमः महादेवाय नमः महादेवाय नमः महादेवाय नमः

योगेश्वराय महादेवाय त्रयम्बकाय त्रिपुरांतकाय
योगेश्वराय महादेवाय त्रयम्बकाय त्रिपुरांतकाय

त्रिकंगी कलाय कलंगी रुद्राय नीलकंठाय मृत्युंजय
त्रिकंगी कलाय कलंगी रुद्राय नीलकंठाय मृत्युंजय

सर्वेश्वराय सदाशिवाय
सर्वेश्वराय सदाशिवाय
सर्वेश्वराय सदाशिवाय
सर्वेश्वराय सदाशिवाय

योगेश्वराय महादेवाय त्रयम्बकाय त्रिपुरांतकाय
योगेश्वराय महादेवाय त्रयम्बकाय त्रिपुरांतकाय

त्रिकंगी कलाय कलंगी रुद्राय नीलकंठाय मृत्युंजय
त्रिकंगी कलाय कलंगी रुद्राय नीलकंठाय मृत्युंजय

सर्वेश्वराय सदाशिवाय
सर्वेश्वराय सदाशिवाय
सर्वेश्वराय सदाशिवाय
सर्वेश्वराय सदाशिवाय

महादेवाय नमः महादेवाय नमः महादेवाय नमः महादेवाय नमः

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Stotram Meaning & Bhavarth

यह स्तुति भगवान शिव के विभिन्न स्वरूपों और उनके गुणों का अद्भुत बखान करती है। प्रत्येक नाम भगवान की एक विशेष शक्ति और स्वभाव को दर्शाता है:

  • योगेश्वराय: हे योगियों केेश्वर, ध्यान और समाधि के सर्वोच्च अधिष्ठाता भगवान शिव को नमस्कार।
  • महादेवाय: सभी देवताओं में महान, देवों के देव महादेव को बारंबार प्रणाम।
  • त्रयम्बकाय: तीन नेत्रों वाले (सूर्य, अग्नि और चंद्रमा रूपी नेत्र), जो भूत, भविष्य और वर्तमान को देखने में समर्थ हैं।
  • त्रिपुरांतकाय: तीनों पुरों (माया, अहंकार और कर्म के बंधनों या त्रिपुरासुर) का नाश करने वाले।
  • त्रिकंगी कलाय कलंगी रुद्राय: कलाओं के स्वामी, संहारकर्ता रुद्र रूप में विराजमान प्रभु।
  • नीलकंठाय: समुद्र मंथन के समय विषपान कर सृष्टि की रक्षा करने वाले, जिनका कंठ नीला है।
  • मृत्युंजय: मृत्यु पर विजय प्राप्त करने वाले, साधकों को अमरत्व और मुक्ति प्रदान करने वाले।
  • सर्वेश्वराय सदाशिवाय: सम्पूर्ण ब्रह्मांड के स्वामी, जो हमेशा कल्याणकारी और मंगलमय स्वरूप में स्थित हैं।

इस स्तोत्र का आंतरिक भाव यह है कि जो भक्त भगवान शिव के इन नामों का निरंतर स्मरण करता है, उसके जीवन के सभी कष्ट, भय और अज्ञान का नाश हो जाता है। भगवान शिव अपने भक्तों को योग, ज्ञान और मोक्ष प्रदान करते हैं। ऐसे ही अन्य स्तोत्रों के अध्ययन के लिए आप शिव तांडव स्तोत्र और महामृत्युंजय मंत्र के बारे में भी पढ़ सकते हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

भगवान शिव की यह स्तुति केवल शब्दों का संकलन नहीं है, बल्कि यह ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ जुड़ने का एक आध्यात्मिक साधन है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • दिव्य नामों का महात्म्य: इसमें भगवान शिव के योगेश्वर, नीलकंठ और मृत्युंजय जैसे शक्तिशाली नामों का समावेश है।
  • मानसिक शांति: इसके निरंतर संकीर्तन से मन की चंचलता समाप्त होती है और एकाग्रता बढ़ती है।
  • भय मुक्ति: 'मृत्युंजय' और 'त्रिपुरांतकाय' शब्दों के उच्चारण से अकाल मृत्यु और अनिष्ट का भय दूर होता है।
  • भक्ति रस: यह संकीर्तन साधक को शिवमय बना देता है, जिससे उसके भीतर भक्ति और समर्पण की भावना जागृत होती है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस पावन स्तोत्र का पाठ किसी भी समय किया जा सकता है, परंतु कुछ विशेष अवसरों और समय पर इसका फल कई गुना बढ़ जाता है:

  • ब्रह्म मुहूर्त एवं प्रदोष काल: प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व या प्रदोष काल (संध्या के समय) में इसका पाठ अत्यंत फलदायी माना गया है।
  • सावन मास एवं महाशिवरात्रि: सावन के पवित्र महीने और महाशिवरात्रि के पर्व पर शिवालयों में इस स्तोत्र का गान विशेष रूप से किया जाता है।
  • सोमवार का व्रत: भगवान शिव को समर्पित सोमवार के दिन व्रत रखकर इस स्तोत्र का 108 बार जाप करना अत्यंत शुभ होता है।
  • पूजा विधि: स्नान कर पवित्र वस्त्र धारण करें, शिवलिंग पर जल, बेलपत्र, धतूरा और दुग्ध अर्पित करें और दीप प्रज्वलित कर भक्ति भाव से इस स्तोत्र का पाठ करें।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity & Saint

इस स्तुति के केंद्र में आराध्य देव भगवान शिव हैं, जिन्हें वेदों में रुद्र, महेश्वर और परम ब्रह्म कहा गया है। शिव परंपरा (शैव संप्रदाय) में आदिगुरु शंकराचार्य और महान संतों ने शिव महिमा का गान किया है। भगवान शिव आदि योगी हैं, जिन्होंने संसार को योग, तंत्र और संगीत की दीक्षा दी। उनके साथ माता पार्वती, भगवान गणेश और कार्तिकेय का भी स्मरण किया जाता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / पद सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
योगेश्वराय योगियों के ईश्वर ध्यान, योग और चेतना के सर्वोच्च स्वामी
महादेवाय देवों के देव महादेव समस्त देवताओं में श्रेष्ठ एवं पूजनीय
त्रयम्बकाय तीन नेत्रों वाले भूत, भविष्य, वर्तमान और त्रिमूर्तियों के ज्ञाता
त्रिपुरांतकाय त्रिपुर का नाश करने वाले माया, अहंकार और त्रिगुणों के बंधनों को तोड़ने वाले
नीलकंठाय नीले कंठ वाले विषपान कर संसार की रक्षा करने वाले दयालु
मृत्युंजय मृत्यु को जीतने वाले जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्त करने वाले
सदाशिवाय नित्य मंगलकारी जो हमेशा कल्याण करने वाले और शाश्वत हैं

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन / स्तोत्र का नाम योगेश्वराय महादेवाय त्रयम्काय त्रिपुरान्तकाय लिरिक्स (Yogeshweshvaraya Mahadevaya Trayambakaya)
आराध्य देव भगवान शिव (महादेव, रुद्र, सदाशिव)
भाषा संस्कृत / हिंदी संकीर्तन
भक्ति भाव समर्पण, शरणागति, स्तुति और मोक्ष प्राप्ति
उपयुक्त अवसर महाशिवरात्रि, सावन मास, प्रदोष व्रत, सोमवार पूजा
मुख्य लाभ मानसिक शांति, भय मुक्ति, आध्यात्मिक उन्नति और शिव कृपा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह पावन स्तोत्र देवों के देव भगवान शिव (महादेव, सदाशिव) को समर्पित है।

सोमवार के दिन, प्रदोष काल में, सावन मास में और महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर इस स्तोत्र का पाठ करना अत्यंत फलदायी माना गया है।

'त्रिपुरांतक' का अर्थ है तीनों पुरों या असुरों (त्रिपुर) का नाश करने वाला। आध्यात्मिक रूप से यह हमारे भीतर के त्रिगुणों (सत, रज, तम) और अहंकार के विनाश का प्रतीक है।

हाँ, गृहस्थ जीवन जीने वाले सभी भक्त अपने घर में नियमित रूप से इस स्तोत्र का पाठ कर सकते हैं। भगवान शिव अत्यंत भोले हैं और सच्चे भाव से की गई पूजा से शीघ्र प्रसन्न होते हैं।

इसके नियमित जाप से मानसिक तनाव दूर होता है, नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, अकाल मृत्यु का भय टलता है और साधक को आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है।

नियम केवल इतना है कि पाठ के दौरान मन में श्रद्धा, स्वच्छता और पवित्रता होनी चाहिए। शिवलिंग पर जल या बेलपत्र अर्पित करते हुए इसका गान करना और भी उत्तम माना जाता है।

मृत्युंजय का अर्थ है जो मृत्यु को भी जीत चुका हो। भगवान शिव अपने भक्तों को भौतिक और आध्यात्मिक दोनों प्रकार की मृत्युरूपी आपदाओं से बचाते हैं।

प्रतिदिन सुबह या संध्या के समय इस स्तोत्र को लयबद्ध तरीके से पढ़ने और सुनने से यह स्वतः ही स्मरण हो जाता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री। इस लेख में प्रस्तुत भगवान शिव के स्तोत्र और उनके अर्थ पारंपरिक शैव ग्रंथों, पुराणों और जन-कल्याणकारी संकीर्तन परंपराओं पर आधारित हैं। इसका उद्देश्य पाठकों को शुद्ध और प्रामाणिक भक्ति सामग्री उपलब्ध कराना है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • शिव पुराण एवं लिंग पुराण के अंतर्गत वर्णित रुद्र स्तुति परंपरा
  • पारंपरिक वैदिक एवं पौराणिक स्तोत्र संग्रह
  • भक्तियोग और शिव संकीर्तन परंपरा

संबंधित भजन एवं लेख

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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