भक्ति काव्य व भजन मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

तुम लौट के आओ ना गजानन भजन लिरिक्स (Tum Laut Ke Aao Na Gajanan Lyrics in Hindi) - Shri Ganesh Bhajan SHAHNAAZ AKHTAR

गणेश जी पर आधारित यह भजन उनकी कृपा की प्रार्थना करने का एक मधुर तरीका है, जो भक्ति और समर्पण का प्रतीक है।

प्रस्तावना एवं परिचय

गणेश के लिए प्रार्थना: वापसी की आह्वान

गजानन की कृपा के लिए दिल से गाए जाने वाला यह भजन, भक्ति और प्रेम का उत्कृष्ट समर्पण है।

तुम लौट के आओ ना गजानन, तुम लौट के आओ ना, तुम लौट के आओ ना गजानन, तुम लौट के आओ ना। सुख दायक हो मेरी दुनिया, तुम लौट के आओ ना। तेरे राहों में बिछा दूं, मैं ये फूलों का बिछौना। तुम लौट के आओ ना गजानन, तुम लौट के आओ ना। तू है सृष्टि का नायक, तू है जीवन का अंश। तेरे बिना अधूरी है हर एक ख़ुशी। तुम लौट के आओ ना गजानन, तुम लौट के आओ ना। तेरी कृपा से पाऊं मैं, सारा सुख और धन। तुम मेरा है साथी, तुम मेरा सब कुछ। तुम लौट के आओ ना गजानन, तुम लौट के आओ ना। तेरे द्वार पर खड़ा हूं मैं, तरसे तेरा करम। तुम लौट के आओ ना, तुम लौट के आओ ना।
साझा करें:

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का केंद्रीय विषय गणेश जी की कृपा और उनकी वापसी का प्रार्थना है। भक्त अपने देवता से अत्यधिक भाव से विनती करता है कि 'तुम लौट के आओ ना गजानन'। यह पंक्ति केवल एक सामूहिक पुकार नहीं, बल्कि यह भक्त के हृदय की गहराई में गूंजती एक आवश्यक आवश्यकता है। गणेश जी को 'सुख दायक' कहकर भक्त उनके महत्व को स्पष्ट करता है। इस भजन में विनम्रता और भक्ति का एक अनूठा मिश्रण है, जहां भक्त अपने जीवन में श्री गणेश की उपस्थिति की गहन आवश्यकता महसूस कर रहा है। भक्ति की इस भावना में भक्त खुद को उनकी राहों में बिछाने की आकांक्षा व्यक्त करता है, जो कि अपने जीवन में खुशी और समृद्धि की खोज कर रहा है।

भावार्थ की दृष्टि से, यह भजन मन की गहराइयों से निकल कर भक्त के भीतर की इच्छाओं को स्पष्ट करता है। 'तेरी कृपा से पाऊं मैं सारा सुख और धन' पंक्ति भक्त की वास्तविकता और उनकी आसक्ति को दर्शाती है। गणेश जी केवल धन और सफलता के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि वे जीवन के हर क्षेत्र में प्रगति के मार्गदर्शक भी हैं। जब भक्त भगवान से उनकी कृपा की प्रार्थना करता है, तो यह उनकी आंतरिक भावना का प्रकट होना है, जो दिखाता है कि वे बिना उनके समर्थन के अधूरे हैं। यहां भक्त की भावनाएं, उनकी लालसाएं और उनके सच्चे प्रेम का एक अनुपम चित्रण है।

इस भजन के theological दृष्टिकोण से देखा जाए तो, यह भक्ति मार्ग का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। भक्त गणेश जी को सृष्टि का नायक और जीवन का अंश मानता है। उनका श्रद्धा से गुणगान करना, उनके प्रति अति विश्वास की अभिव्यक्ति है। यह भजन उन मूल्यों का भी सम्मान करता है जो हमें जीवन में धैर्य, प्रेम और समर्पण की सीख देते हैं। भक्तों का यह संगीत गणेश चतुर्थी जैसे त्योहारों पर विशेष रूप से गाया जाता है, जो हमें गणेश जी के प्रति अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करने का एक सुनहरा अवसर प्रदान करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस प्रार्थना का महत्व हिन्दू पंथ में अत्यंत प्राचीन है, और इसे विभिन्न पुराणों में संदर्भित किया गया है। गणेश जी को विघ्नहर्ता और बुद्धि, समृद्धि और भाग्य के देवता के रूप में पूजा जाता है। उनका स्मरण करने से न केवल भौतिक संपत्ति की प्राप्ति होती है, बल्कि मानसिक शांति और आंतरिक संतोष भी प्राप्त होता है। उनकी उपासना से भक्तों के जीवन में आने वाली समस्याएं दूर होती हैं और उन्हें नयी ऊर्जा और प्रेरणा मिलती है। पुराणों में गणेश जी की उपासना के विविध विधियों का उल्लेख मिलता है, यह भजन उनकी कृपा का एक आदर्श अनुरोध है।

प्रथम पूज्य श्री गणेश जी के जन्म और उनकी कथाओं का संपूर्ण विवरण जानने के लिए ब्रह्म पुराण गणेश महिमा का पाठ करें। गणेश भजन 'तुम लौट के आओ ना गजानन' का जाप भक्तों को मानसिक शांति, आंतरिक शक्ति और समृद्धि की अनुभूति कराता है। इसे नियमित रूप से गाने से ध्यान केंद्रित करने में सहायता मिलती है, जिससे नकारात्मकताएं दूर होती हैं। यह भजन मानसिक तनाव को कम करने और आत्मिक उन्नति में सहायक सिद्ध होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह के समय, सूर्योदय से पूर्व या संध्या के समय किया जाना चाहिए। भक्त अपने सामने एक दीया जलाएं और कुछ फूलों की भेंट दें। स्वतंत्र, शांत मन से श्रद्धा पूर्वक इस भजन का गान करने से भक्त को गणेश जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। सही मुद्रा में बैठकर मन को शांत करना आवश्यक है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश गणेश जी की कृपा के लिए आग्रह और उनकी वापसी की प्रार्थना करना है, जो भक्तों के जीवन में सुख और समृद्धि लाता है।

क्या इस भजन का विशेष अवसर है?

यह भजन विशेष रूप से गणेश चतुर्थी जैसे त्योहारों पर गाया जाता है, जहां भक्त गणेश जी की महिमा का गुणगान करते हैं।

इसे गाने का क्या महत्व है?

इस भजन को गाने से भक्तों में मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और भक्ति का संचार होता है, जो व्यक्ति के जीवन को सकारात्मक दिशा में अग्रसर करता है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!