भक्ति काव्य व भजन मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

तेरा सजा दिया दरबार मैया आ जाओ भजन इन हिंदी लिरिक्स

तेरा सजा दिया दरबार मैया आ जाओ भजन लिरिक्स पढ़ें। संदर्भ एवं व्याख्या सहित माँ दुर्गा का यह लोकप्रिय भजन भक्तों के लिए प्रस्तुत है।

अपडेटेड: 2026 श्रेणी: देवी भजन / माता रानी संकीर्तन पढ़ने का समय: 8 मिनट

भारतीय सनातन भक्ति परंपरा में आदिशक्ति माँ जगदम्बा, माता दुर्गा और शेरावाली मैया की वंदना का अत्यंत विशिष्ट स्थान है। नवरात्रि के पावन पर्वों, माता के जागरण, चौकी और संकीर्तन के अवसरों पर गाए जाने वाले भजन भक्तों के हृदय में असीम ऊर्जा, उत्साह और भक्ति रस का संचार करते हैं। ऐसा ही एक अत्यंत लोकप्रिय, भावपूर्ण और कर्णप्रिय भजन है — "तेरा सजा दिया दरबार मैया आ जाओ"। यह भजन माँ दुर्गा के प्रति अनन्य समर्पण, निष्काम प्रेम और पुकार का अद्भुत प्रतीक है। इस विस्तृत लेख में हम इस पावन भजन के सम्पूर्ण लिरिक्स, शब्दशः भावार्थ, गायन की विधि, ऐतिहासिक एवं पौराणिक संदर्भ तथा माता रानी की भक्ति से जुड़े विभिन्न आध्यात्मिक पहलुओं पर विस्तार से चर्चा करेंगे। यदि आप श्री दुर्गा चालीसा या अन्य देवी स्तुतियों का पाठ करते हैं, तो यह भजन आपकी साधना को और अधिक जीवंत बना देगा।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

॥ मूकं करोति वाचालं पंगुं लंघयते गिरिम् ॥

(स्थायी / मुखड़ा)

तेरा सजा दिया दरबार मैया आ जाओ,

तेरा लगा दिया दरबार मैया आ जाओ।

मैया आ जाओ, मैया आ जाओ,

माँ आ जाओ, माँ आ जाओ...

(प्रथम अंतरा)

तेरे दर पर अखबार आया था,

सोने का छत्र चढ़ाया था।

तूने नहीं किया स्वीकार मैया आ जाओ...

तेरा सजा दिया दरबार मैया आ जाओ,

तेरा लगा दिया दरबार मैया आ जाओ।

(द्वितीय अंतरा)

तेरे दर पर ध्यानु आया था,

उसने काट के शीश चढ़ाया था।

तूने कर दिया बेड़ा पार मैया आ जाओ...

तेरा सजा दिया दरबार मैया आ जाओ,

तेरा लगा दिया दरबार मैया आ जाओ।

(तृतीय अंतरा)

तेरे दर पर हम भी आये हैं,

दर्शन की आशा लाये हैं।

हो मैया दे दो दर्शन आज मैया आ जाओ...

तेरा सजा दिया दरबार मैया आ जाओ,

तेरा लगा दिया दरबार मैया आ जाओ।

(चतुर्थ अंतरा)

ओ देखो मैया आने लगी,

भक्तों को दर्शन देने लगी।

तेरी हो रही जय जयकार मैया आ जाओ...

तेरा सजा दिया दरबार मैया आ जाओ,

तेरा लगा दिया दरबार मैया आ जाओ।

मैया आ जाओ, मैया आ जाओ,

माँ आ जाओ, माँ आ जाओ... ||

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन केवल कुछ पंक्तियों का संकलन नहीं है, बल्कि यह एक भक्त के अंतःकरण की वह पुकार है जो अपनी आराध्य जगदम्बा को अपने समक्ष देखने के लिए व्याकुल है। इस भजन का प्रत्येक शब्द माता और भक्त के मधुर वात्सल्य संबंध को दर्शाता है।

मुखड़े का भाव:

भक्त अपने प्रेम और श्रद्धा से माँ के लिए एक दिव्य दरबार सजाता है। वह फूलों, दीपों और प्रकाश से सजे इस प्रांगण में माँ का आह्वान करते हुए कहता है—हे मैया! मैंने आपके निमित्त यह सुन्दर दरबार सजा दिया है, अब आप कृपा करके यहाँ पधारिए और मेरे इस छोटे से प्रयास को स्वीकार कीजिए।

ऐतिहासिक एवं पौराणिक संदर्भ (अकबर और ध्यानु भक्त):

भजन में ऐतिहासिक और पौराणिक कथाओं का बहुत ही सुंदर समन्वय मिलता है। 'अकबर और सोने का छत्र' की कथा इस बात का प्रतीक है कि माँ को किसी राजा के अहंकार या केवल भौतिक धन-दौलत से सजे छतर की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि उन्हें सच्चे प्रेम और निष्कलंक भाव की भूख होती है। जब सम्राट अकबर ने सोने का छत्र चढ़ाया और माता ने उसे अपनी लीला से टेढ़ा कर दिया, तो यह सिद्ध हुआ कि दिखावे की भक्ति से अधिक आंतरिक समर्पण महत्वपूर्ण है।

इसके विपरीत, भक्त ध्यानु जी की कथा का स्मरण करते हुए कहता है कि जब ध्यानु भक्त ने अपने आराध्य के प्रति अटूट निष्ठा दिखाते हुए अपनी परीक्षा दी और माता ने उसे पुनर्जीवित कर उसका बेड़ा पार लगाया, तो माँ अपने सच्चे भक्तों के लिए दौड़ी चली आती हैं। यही भाव इस भजन के अंतिम अंतरे में भी झलकता है जहाँ भक्त कहता है कि हम भी अपनी समस्त आशाएँ लेकर आपके दरबार में आए हैं, हे मैया! आज हमें अपने अलौकिक दर्शन से कृतार्थ कीजिए।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

माता रानी के इस लोकप्रिय भजन का धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में विशेष महत्व है। इसकी कुछ प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • भक्ति रस से ओत-प्रोत: यह भजन श्रोताओं के मन में देवी के प्रति अगाध श्रद्धा और विश्वास जगाता है।
  • पौराणिक कथाओं का समावेश: इसमें भक्त ध्यानु और सम्राट अकबर की कथा के माध्यम से अहंकार और सच्ची भक्ति का अंतर समझाया गया है।
  • सामूहिक गायन में सुगम: इसकी लेयकारी और सरल शब्द रचना इसे माता के जागरण, चौकी और नवरात्र संकीर्तन के समय गाने के लिए अत्यंत उपयुक्त बनाती है।
  • सकारात्मक ऊर्जा का संचार: इस भजन के नियमित श्रवण या गायन से मन का संताप दूर होता है और आंतरिक शांति की प्राप्ति होती है।

यदि आप माँ दुर्गा की अन्य स्तुतियों के बारे में जानना चाहते हैं, तो श्री दुर्गा सप्तशती पाठ विधि का अध्ययन भी कर सकते हैं।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

माता के भजनों को गाने और सुनने के लिए किसी कठोर नियम की आवश्यकता नहीं होती, अपितु भाव की शुद्धता सर्वोपरि है। तथापि, कुछ विशेष अवसरों पर इसका गायन विशेष रूप से फलदायी माना गया है:

  1. शारदीय एवं चैत्र नवरात्रि: नवरात्रि के नौ दिनों में सुबह और संध्या काल की आरती के पश्चात इस भजन का संकीर्तन अत्यंत शुभ होता है।
  2. माता की चौकी या जागरण: रात्रि जागरण के दौरान जब माहौल को भक्तिमय बनाना हो, तब इस भजन को गाने से पूरी सभा में ऊर्जा का संचार हो जाता है।
  3. दैनिक पूजा के समय: प्रतिदिन प्रातःकाल या संध्या वंदन के समय धूप-दीप प्रज्वलित करके इसे मन ही मन गुनगुनाया जा सकता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ संदर्भ / भाव
दरबार माता का दरबार / पावन प्रांगण जहाँ भक्त अपनी अर्जी लेकर उपस्थित होते हैं।
छत्र मुकुटनुमा छत्र / स्वर्ण छत्र राजा अकबर द्वारा चढ़ाया गया स्वर्ण निर्मित छत्र।
ध्यानु भक्त ध्यानु जी माता के परम भक्त जिन्होंने अपनी निष्ठा का परिचय दिया था।
बेड़ा पार संकटों से मुक्ति / उद्धार जीवन नैया को भवसागर से पार लगाना।
जय जयकार जयघोष / महिमा का गान माता की प्रसिद्धि और विजय का उल्लास।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम तेरा सजा दिया दरबार मैया आ जाओ
आराध्य देवी माँ दुर्गा / शेरावाली मैया / जगदम्बा
भाषा सरल हिंदी / ब्रज-अवधी मिश्रित लोक शैली
मुख्य थीम भक्ति, समर्पण, आर्त पुकार और भगवती दर्शन
मुख्य भाव प्रेम और विनय (Vainya & Prem Bhava)
उपयुक्त अवसर नवरात्रि, माता का जागरण, चौकी और संकीर्तन

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: "तेरा सजा दिया दरबार मैया आ जाओ" भजन किस देवी को समर्पित है?

यह भजन आदिशक्ति माँ दुर्गा, शेरावाली मैया और वैष्णो देवी के रूपों को समर्पित है।

प्रश्न 2: इस भजन में किस भक्त का उल्लेख किया गया है?

इस भजन में माता के परम भक्त 'ध्यानु जी' और सम्राट अकबर का उल्लेख पौराणिक कथाओं के संदर्भ में किया गया है।

प्रश्न 3: क्या इस भजन को नवरात्रि में गाया जा सकता है?

हाँ, यह भजन नवरात्रि, माता की चौकी, और जागरण के अवसरों पर गाने के लिए अत्यंत प्रसिद्ध और उपयुक्त है।

प्रश्न 4: इस भजन को गाने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है?

इसके गायन और श्रवण से मन को शांति मिलती है, माता के प्रति प्रेम बढ़ता है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।

प्रश्न 5: क्या इस भजन को घर पर अकेले भी गाया जा सकता है?

अवश्य, आप अपनी दैनिक पूजा के समय या संध्या वंदन के बाद इसे अकेले या परिवार के साथ गा सकते हैं।

प्रश्न 6: माता रानी की कृपा पाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण क्या है?

माता रानी को दिखावे की वस्तुएं नहीं बल्कि भक्त का सच्चा प्रेम, निष्कलंक हृदय और समर्पण भाव ही प्रिय है।

प्रश्न 7: क्या इस भजन के साथ वाद्य यंत्रों का प्रयोग किया जा सकता है?

हाँ, ढोलक, मंजीरा, और चिमटा जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ इस भजन का आनंद और अधिक बढ़ जाता है।

प्रश्न 8: इस भजन के बोल किस भाषा में हैं?

इस भजन के बोल बहुत ही सरल और सहज हिंदी में हैं, जिन्हें आसानी से याद किया जा सकता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री Bhaktilok.in के उच्च संपादकीय मानकों के तहत तैयार की गई है। इसमें प्रयुक्त भजन के बोल, पौराणिक संदर्भ और भावार्थ को प्रामाणिक धार्मिक परंपराओं को ध्यान में रखकर संकलित किया गया है। हमारा उद्देश्य पाठकों को शुद्ध, सटीक और प्रेरणादायक सामग्री प्रदान करना है।

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री

स्रोत एवं संदर्भ

  • सनातन लोक कथाएं एवं माता वैष्णो देवी प्रसंग।
  • पारंपरिक देवी भजन संकलन एवं लोक संगीत परंपरा।
  • श्रीमद्देवीभागवत पुराण एवं अन्य प्रासंगिक देवी स्तुति ग्रंथ।

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संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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