Evening Bhajan गुरुवार विशेष (भगवान श्री हरि विष्णु व गुरुदेव)

मां कात्यायनी आरती लिरिक्स (Katyayani Mata Aarti Lyrics in Hindi) - नवरात्रि छठे दिन की आरती Maa Katyayani Aarti

नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की आरती का पाठ करें। यहाँ पाएं मां कात्यायनी आरती लिरिक्स, हिंदी अर्थ और पूजा विधि। भक्तिपूर्ण अनुभव के लिए पढ़ें।

हिंदू धर्म में नवरात्रि के पावन पर्व का विशेष महत्व है, जिसमें नौ दिनों तक आदिशक्ति मां दुर्गा के नौ विभिन्न स्वरूपों की श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना की जाती है। नवरात्रि के छठे दिन देवी के अत्यंत तेजस्वी और ममतामयी स्वरूप मां कात्यायनी की आराधना की जाती है। महर्षि कात्यायन की घोर तपस्या से प्रसन्न होकर देवी ने उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लिया था, जिसके कारण उनका नाम 'कात्यायनी' पड़ा। मां कात्यायनी अमोघ फलदायिनी हैं और उनकी पावन आरती का गान करने से साधक के जीवन के सभी कष्ट, रोग, शोक और संताप क्षण भर में दूर हो जाते हैं। यह आरती साधक के अंतर्मन में अदम्य साहस, तेज और अनन्य भक्ति का संचार करती है। इस विस्तृत एवं प्रामाणिक लेख में हम मां कात्यायनी की संपूर्ण आरती, उसका सरल हिंदी भावार्थ, कठिन शब्दों के अर्थ, पूजन विधि, आध्यात्मिक महत्व और इससे जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंगों को विस्तार से जानेंगे ताकि आपकी साधना पूर्ण और फलदायी हो सके।

सम्पूर्ण आरती पाठ | Complete Aarti Lyrics

जय जय अम्बे जय कात्यायनी।
जय जगमाता जग की महारानी॥

बैजनाथ स्थान तुम्हारा।
वहां वरदाता नाम पुकारा॥

कनखल के मार्ग तुम रहती।
अमर कल्याणी नाम से बहती॥

दशम विद्या तुम ही माता।
तुम ही सब सुख की हो दाता॥

सिंहासन पर तुम विराजती।
सिंह की सवारी तुमको साजती॥

हाथों में खड्ग और ढाल सुहाए।
भक्तों के सब कष्ट मिटाए॥

नवरात्रि के छठे दिन तुम पूजी जाती।
मनवांछित फल देने वाली कहलाती॥

आरती तुम्हारी जो कोई गावे।
सुख संपत्ति और मोक्ष पावे॥

आरती का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Meaning & Bhavarth

मां कात्यायनी की यह पावन आरती देवी के स्वरूप, उनके निवास स्थान और उनकी असीम कृपा को दर्शाती है। इसका पंक्ति-दर-पंक्ति विस्तृत भावार्थ नीचे दिया गया है:

  • जय जय अम्बे जय कात्यायनी। जय जगमाता जग की महारानी॥
    हे मां अम्बे! हे मां कात्यायनी! आपकी सदा ही जय हो। आप इस संपूर्ण ब्रह्मांड की माता हैं और इस सृष्टि की परम महारानी हैं। आपकी शरण में आने वाले प्रत्येक जीव का कल्याण निश्चित है।
  • बैजनाथ स्थान तुम्हारा। वहां वरदाता नाम पुकारा॥
    हे माता! बैजनाथ धाम में आपका अत्यंत पवित्र और जाग्रत स्थान है। वहाँ आपको भक्तों को मनवांछित वरदान देने वाली 'वरदाता' के रूप में पुकारा और पूजा जाता है।
  • कनखल के मार्ग तुम रहती। अमर कल्याणी नाम से बहती॥
    हे देवी! आप कनखल के पावन मार्ग पर निवास करती हैं और वहाँ बहने वाली पवित्र गंगा की तरह 'अमर कल्याणी' बनकर सभी जीवों के पापों का नाश करती हैं और उनका मंगल करती हैं।
  • दशम विद्या तुम ही माता। तुम ही सब सुख की हो दाता॥
    हे जगदम्बे! आप ही दस महाविद्याओं का साक्षात स्वरूप हैं। इस संसार के समस्त भौतिक और आध्यात्मिक सुखों को प्रदान करने वाली आप ही परम दात्री हैं।
  • सिंहासन पर तुम विराजती। सिंह की सवारी तुमको साजती॥
    हे माता! आप दिव्य और भव्य सिंहासन पर सुशोभित हैं। सिंह (शेर) की सवारी आपके इस तेजस्वी स्वरूप पर अत्यंत सुंदर और भव्य लगती है, जो आपके शौर्य और निर्भयता का प्रतीक है।
  • हाथों में खड्ग और ढाल सुहाए। भक्तों के सब कष्ट मिटाए॥
    आपके दिव्य हाथों में खड्ग (तलवार) और ढाल सुशोभित हैं, जो दुष्टों का संहार करने और अपने अनन्य भक्तों की रक्षा करने के प्रतीक हैं। आप अपने भक्तों के जीवन के सभी विघ्न-बाधाओं और कष्टों को पल भर में हर लेती हैं।
  • नवरात्रि के छठे दिन तुम पूजी जाती। मनवांछित फल देने वाली कहलाती॥
    नवरात्रि के पावन उत्सव के छठे दिन (षष्ठी तिथि) को आपकी विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। जो भी भक्त इस दिन आपकी आराधना करता है, आप उसे मनवांछित फल प्रदान करती हैं।
  • आरती तुम्हारी जो कोई गावे। सुख संपत्ति और मोक्ष पावे॥
    जो भी श्रद्धालु सच्चे मन और पूर्ण श्रद्धा के साथ आपकी इस पावन आरती का गान करता है, उसे इस लोक में सुख, समृद्धि, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है और अंत में वह मोक्ष को प्राप्त करता है।

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Words

शब्द (Word) सरल अर्थ (Simple Meaning) संदर्भ और महत्व (Context & Significance)
कात्यायनी महर्षि कात्यायन की पुत्री देवी दुर्गा का छठा स्वरूप, जो महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रकट हुईं।
वरदाता वरदान देने वाली भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करने वाली कृपालु शक्ति।
अमर कल्याणी सदा कल्याण करने वाली जो कभी नष्ट न होने वाला परम मंगल और मोक्ष प्रदान करे।
दशम विद्या दस महाविद्याएं तंत्र साधना की दस सर्वोच्च देवियां (काली, तारा, षोडशी, भुवनेश्वरी आदि)।
खड्ग तलवार / अस्त्र अज्ञान और अंधकार को काटने वाली ज्ञान रूपी तलवार।

आरती में वर्णित देवता की महिमा | Glory of the Deity

मां कात्यायनी को संघर्ष और विजय की देवी माना जाता है। श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार, गोपियों ने भगवान श्री कृष्ण को पति रूप में प्राप्त करने के लिए यमुना तट पर मां कात्यायनी की ही पूजा की थी। देवी का यह स्वरूप अत्यंत भव्य और दिव्य है। इनकी चार भुजाएं हैं, जिनमें एक हाथ में खड्ग, दूसरे में कमल का पुष्प और शेष दो हाथ अभय और वरद मुद्रा में रहते हैं। मां कात्यायनी की महिमा अपरंपार है; वे अपने भक्तों के आंतरिक और बाह्य शत्रुओं का नाश कर उन्हें धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति कराती हैं।

आरती का धार्मिक महत्व एवं फल | Religious Significance & Traditional Benefits

नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की आरती करने से साधक को निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं:

  • विवाह बाधाओं का निवारण: जिन कन्याओं के विवाह में विलंब हो रहा हो या बाधाएं आ रही हों, उनके लिए मां कात्यायनी की पूजा और आरती अचूक मानी जाती है।
  • आज्ञा चक्र की जागृति: योग साधना में रुचि रखने वाले साधकों का मन इस दिन 'आज्ञा चक्र' में स्थित होता है, जिससे उन्हें अद्भुत मानसिक शक्ति और एकाग्रता प्राप्त होती है।
  • भय और शत्रुओं का नाश: मां कात्यायनी की आरती के नियमित गान से साधक के मन से हर प्रकार का भय दूर हो जाता है और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है।
  • शहद का विशेष भोग: मां कात्यायनी को शहद अत्यंत प्रिय है। आरती के पश्चात उन्हें शहद का भोग लगाने से साधक के जीवन में मधुरता और समृद्धि का वास होता है।

आरती करने की सही विधि एवं थाली सज्जा | Aarti Vidhi & Thali Preparation

मां कात्यायनी की आरती करने से पूर्व आरती की थाली को सुंदर और पवित्र तरीके से सजाना चाहिए। थाली सज्जा और पूजन की विधि इस प्रकार है:

  1. थाली की तैयारी: पीतल या तांबे की थाली में कुमकुम से स्वास्तिक का चिह्न बनाएं।
  2. दीपक और कपूर: थाली के केंद्र में गाय के शुद्ध घी का दीपक या भीमसेनी कपूर रखें।
  3. पुष्प और अक्षत: मां कात्यायनी को लाल रंग के पुष्प (विशेषकर गुड़हल या गुलाब) अत्यंत प्रिय हैं। थाली में पुष्प और अक्षत (साबुत चावल) रखें।
  4. धूप और नैवेद्य: सुंगधित धूपबत्ती जलाएं और भोग के लिए शहद या शहद से बनी मिठाई रखें।
  5. कलश जल: आरती की थाली के पास एक छोटे पात्र में शुद्ध जल रखें, जिससे आरती के बाद आचमन किया जा सके।

आरती करने का सही समय, दिशा एवं दीप घुमाने की विधि | Best Time & Movement

शास्त्रों के अनुसार, आरती करने की एक निश्चित वैज्ञानिक और आध्यात्मिक विधि होती है:

  • सही समय: मां कात्यायनी की आरती संध्या काल (सूर्यास्त के समय) करना सबसे उत्तम माना जाता है।
  • दिशा: आरती करते समय साधक का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए।
  • दीप घुमाने की विधि: दीपक को देवी की प्रतिमा के समक्ष इस प्रकार घुमाएं कि उससे 'ॐ' की आकृति बने। सबसे पहले माता के चरणों की ओर चार बार, नाभि की ओर दो बार, मुखमंडल की ओर एक बार और अंत में संपूर्ण स्वरूप की ओर सात बार गोलाकार घुमाएं।

आरती के दौरान घंटी, शंख एवं दीप का महत्व | Bell, Conch & Lamp Symbolism

आरती के समय बजने वाली घंटी और शंख केवल ध्वनि उत्पन्न नहीं करते, बल्कि इनका गहरा आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व है:

  • घंटी (Bell): घंटी की ध्वनि से निकलने वाली तरंगें वातावरण से नकारात्मक ऊर्जा को दूर करती हैं और मन को एकाग्र करती हैं।
  • शंख (Conch): शंख की ध्वनि को विजय और शुभता का प्रतीक माना जाता है। इससे घर के कीटाणु और नकारात्मक शक्तियां नष्ट होती हैं।
  • दीप (Lamp): जलता हुआ दीपक अज्ञानता के अंधकार को मिटाकर ज्ञान के प्रकाश के आगमन का प्रतीक है।

घर में आरती कैसे करें एवं सावधानियां | Home Aarti & Rules

घर पर मां कात्यायनी की आरती करते समय कुछ विशेष सावधानियों का ध्यान रखना आवश्यक है:

  • आरती करने से पूर्व स्वयं को स्वच्छ करें और साफ वस्त्र धारण करें।
  • आरती के समय मन में किसी भी प्रकार के बुरे विचार, क्रोध या ईर्ष्या को न आने दें।
  • दीपक की लौ स्थिर होनी चाहिए और आरती के बीच में दीपक बुझना नहीं चाहिए।
  • आरती समाप्त होने के बाद सभी उपस्थित सदस्यों पर आरती की गर्मी (लौ के ऊपर हाथ फेरकर माथे पर लगाना) और जल का छिड़काव करें।

आरती का आध्यात्मिक संदेश एवं दैनिक जीवन सीख | Spiritual Message & Daily Life

मां कात्यायनी की आरती हमें सिखाती है कि जीवन में कितनी भी कठिन परिस्थितियां क्यों न आएं, हमें अपने धर्म और सत्य के मार्ग से विचलित नहीं होना चाहिए। देवी का खड्ग और ढाल हमें आंतरिक बुराइयों जैसे क्रोध, लोभ, और अहंकार से लड़ने की प्रेरणा देते हैं। दैनिक जीवन में यह आरती हमें निडर बनने, समाज की रक्षा करने और नारी शक्ति का सम्मान करने का संदेश देती है।

एक नजर में आरती की जानकारी | Quick Information Table

विवरण (Topic) महत्वपूर्ण जानकारी (Details)
आरती का नाम मां कात्यायनी आरती (Maa Katyayani Aarti)
पूज्य देवी मां कात्यायनी (दुर्गा जी का छठा स्वरूप)
विशेष अवसर नवरात्रि का छठा दिन (षष्ठी तिथि)
प्रिय भोग शहद (Honey)
मुख्य लाभ शीघ्र विवाह, शत्रुओं पर विजय, भय से मुक्ति
संबंधित व्रत नवरात्रि व्रत कथा

मुख्य आध्यात्मिक सीख | Key Takeaways

  • मां कात्यायनी की आराधना से साधक के जीवन के सभी मांगलिक कार्य बिना किसी बाधा के संपन्न होते हैं।
  • देवी का यह स्वरूप साहस और ममता का अनूठा संगम है, जो हमें जीवन में संतुलित रहने की सीख देता है।
  • आरती के समय पूर्ण समर्पण और श्रद्धा भाव होना आवश्यक है, तभी मंत्र और ध्वनि का पूर्ण प्रभाव मिलता है।
  • नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी के साथ-साथ श्री दुर्गा चालीसा का पाठ करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

मां कात्यायनी की पूजा नवरात्रि के छठे दिन (षष्ठी तिथि) को की जाती है। इस दिन साधक का मन आज्ञा चक्र में स्थित होता है।

मां कात्यायनी को शहद (Honey) अत्यंत प्रिय है। नवरात्रि के छठे दिन उन्हें शहद या शहद से बने प्रसाद का भोग लगाने से जीवन में सुख और समृद्धि आती है।

हां, पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मां कात्यायनी की पूजा और आरती करने से विवाह में आ रही सभी बाधाएं दूर होती हैं और सुयोग्य जीवनसाथी की प्राप्ति होती है।

मां कात्यायनी का वाहन सिंह (शेर) है। सिंह की सवारी उनके अदम्य साहस, शौर्य और शक्ति को प्रदर्शित करती है।

मां कात्यायनी की आरती सुबह की पूजा के बाद और विशेष रूप से संध्या काल (सूर्यास्त के समय) करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख सनातन धर्म के प्रामाणिक ग्रंथों जैसे देवी भागवत पुराण, दुर्गा सप्तशती और पारंपरिक आरती संग्रहों के आधार पर तैयार किया गया है। हमारी संपादकीय टीम ने यह सुनिश्चित किया है कि आरती के शब्द और उनके भावार्थ पूरी तरह से शुद्ध और त्रुटिहीन हों। यह "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" पाठकों को मां कात्यायनी की साधना में सही मार्गदर्शन प्रदान करने के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्देवीभागवत महापुराण - स्कंध ९
  • श्री दुर्गा सप्तशती - महर्षि वेदव्यास
  • पारंपरिक हिंदू आरती एवं भजन संग्रह

संबंधित भजन एवं लेख

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 02 Nov 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!