Durga Bhajan Lyrics बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

जय दुर्गे दुर्गति परिहारिणी लिरिक्स (jay durge sahanasheelata parihaarinee Lyrics in Hindi) - Durga Bhajan Pt Bhimsen Joshi

जय दुर्गे दुर्गति परिहारिणी भजन माँ दुर्गा की कृपा से संकटों का नाश करने वाली शक्तियों का वर्णन करता है।

प्रस्तावना एवं परिचय

जय दुर्गे: दुर्गति दुरकरण की करुणा

माँ दुर्गा की आराधना से सभी दुर्गतियों का नाश होता है, आपका हर संकट दूर होगा।

जय दुर्गे दुर्गति परिहारिणी लिरिक्स (jay durge sahanasheelata parihaarinee Lyrics in Hindi) - जय दुर्गे दुर्गति परिहारिणीजय दुर्गे दुर्गति परिहारिणीजय दुर्गे दुर्गति परिहारिणीशुंभ विदारिणी, माता भवानीजय दुर्गे दुर्गति परिहारिणी....||जय दुर्गे दुर्गति परिहारिणीजय दुर्गे दुर्गति परिहारिणीशुंभ विदारिणी, माता भवानीजय दुर्गे दुर्गति परिहारिणीजय दुर्गे दुर्गति परिहारिणी....||आदि शक्ति परब्रह्म स्वरूपिणीआदि शक्ति परब्रह्म स्वरूपिणीआदि शक्ति परब्रह्म स्वरूपिणीजग जननी चहूँ वेद बखानीजग जननी चहूँ वेद बखानीजय दुर्गे दुर्गति परिहारिणीजय दुर्गे दुर्गति परिहारिणीजय दुर्गे दुर्गति परिहारिणीशुंभ विदारिणी, माता भवानीजय दुर्गे दुर्गति परिहारिणीजय दुर्गे दुर्गति परिहारिणी....||ब्रह्मा शिव हरि अर्चन कीन्होब्रह्मा शिव हरि अर्चन कीन्होध्यान धरत सुर नर मुनि ज्ञानीध्यान धरत सुर नर मुनि ज्ञानीजय दुर्गे दुर्गति परिहारिणीजय दुर्गे दुर्गति परिहारिणीजय दुर्गे दुर्गति परिहारिणीशुंभ विदारिणी, माता भवानीजय दुर्गे दुर्गति परिहारिणीजय दुर्गे दुर्गति परिहारिणी....||अष्ट भुजा कर खड्ग बिराजेअष्ट भुजा कर खड्ग बिराजेअष्ट भुजा कर खड्ग बिराजेसिंह सवार सकल वरदानीसिंह सवार सकल वरदानीजय दुर्गे दुर्गति परिहारिणीजय दुर्गे दुर्गति परिहारिणीशुंभ विदारिणी, माता भवानीजय दुर्गे दुर्गति परिहारिणीजय दुर्गे दुर्गति परिहारिणी....||ब्रह्मानंद चरण मे आयोब्रह्मानंद चरण मे आयोओ ब्रह्मानंद...ब्रह्मानंद चरण मे आयोआयो ब्रह्मानंद, ब्रह्मानंदब्रह्मानंद, ब्रह्मानंद चरण मे आयोभव भय नाश करो महारानीभव भय नाश करो महारानीजय दुर्गे दुर्गति परिहारिणीजय दुर्गे दुर्गति परिहारिणीशुंभ विदारिणी, माता भवानीजय दुर्गे दुर्गति परिहारिणीजय दुर्गे दुर्गति परिहारिणी....||
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन 'जय दुर्गे दुर्गति परिहारिणी' में माँ दुर्गा की स्तुति की जा रही है, जो सभी कठिनाइयों को दूर करने वाली हैं। 'दुर्गति परिहारिणी' का अर्थ है, जो संकट और कठिनाईयों को दूर करती हैं। इस गीत में 'शुंभ विदारिणी, माता भवानी' कहकर माँ दुर्गा के उन शक्तियों का अभिवादन किया गया है जो बुराईयों और नकारात्मक शक्तियों का विनाश करती हैं। 'आदि शक्ति परब्रह्म स्वरूपिणी' का उद्धरण इस बात को स्पष्ट करता है कि माँ दुर्गा सर्वोच्च शक्ति का प्रतीक हैं। माँ दुर्गा की भक्ति से सच्चे मन से प्रार्थना करने वाले भक्त सभी वादियों एवं दोषों से मुक्त होकर सुख एवं शांति का अनुभव करते हैं। इस भजन के माध्यम से भक्त अपने हृदय में माँ दुर्गा की ममता और शक्ति का अनुभव करते हैं।

इस भजन में भक्तों की भावनाएँ गहराई से झलकती हैं। 'ब्रह्मा शिव हरि अर्चन कीन्हो' पंक्ति से हमें यह ज्ञात होता है कि संपूर्ण सृष्टि के निर्माता ब्रह्मा, संहारक शिव और पालनहार विष्णु भी माँ दुर्गा की आराधना करते हैं। इससे यह सिद्ध होता है कि माँ दुर्गा सर्वत्र व्यापक हैं। भजन के अन्य भागों में 'अष्ट भुजा कर खड्ग बिराजे' का उल्लेख भक्तों की साक्षात् अनुभव की स्थिति को दर्शाता है। अष्टभुजाओं के साथ खड्ग धारिणी माँ स्वयं सभी भक्तों की रक्षा करती हैं। इस भजन में भक्त अपने भय और कठिनाइयों से मुक्ति हेतु माँ दुर्गा से प्रार्थना करते हैं, जिससे उन्हें मानसिक एवं आध्यात्मिक शांति मिल सके।

भक्ति मार्ग की इस विशेष भक्ति में माँ दुर्गा के प्रति समर्पण और श्रद्धा शीर्ष पर है। 'सिंह सवार सकल वरदानी' बताता है कि माँ दुर्गा अपने भक्तों की सभी इच्छाओं को पूरा करती हैं। इस भक्ति में surrender का महत्व है, जो यह दर्शाता है कि हमें अपनी समस्त समस्याओं का समाधान माँ दुर्गा के चरणों में ढूंढना चाहिए। यह भजन आत्मिक उन्नति का माध्यम है, जहाँ भक्त अपनी हर एक पीड़ा और दुर्गति को माँ दुर्गा के सामने रखकर आंतरिक शक्ति और साहस प्राप्त करते हैं। इस प्रकार, भक्ति का यह मार्ग हमें निर्भीकता के साथ जीवन जीने की प्रेरणा देता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का और भी गहरा धार्मिक एवं पौराणिक संदर्भ है। माँ दुर्गा का आद्य शक्ति के रूप में वर्णन देवी महात्म्य में किया गया है जहां उन्होंने महिषासुर का वध किया। इस प्रकार, यह भजन 'दुर्गति परिहारिणी' के अर्थ को और अधिक महत्वपूर्ण बनाता है। मंथर पर्वत पर जब देवताओं ने माँ दुर्गा से रक्षा की प्रार्थना की, तब उन्होंने इस रूप में सभी संकटों को समाप्त किया। यह भजन भक्तों को राक्षसी प्रवृत्तियों और समस्याओं का उन्मूलन करने की प्रेरणा देता है। यह भक्ति केवल व्यक्तिगत स्तर पर नहीं, अपितु सामूहिक रूप में समाज के कल्याण हेतु भी महत्वपूर्ण है।

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। इस भजन के नियमित पाठ से अनेक मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक लाभ होते हैं। मानसिक शांति के लिए माँ दुर्गा की आराधना आवश्यक है, जो तनाव, चिंता और भय का नाश करती है। इस भजन को गाने से भक्त की आत्मा की शुद्धि होती है और जो भी बाधाएँ हैं, उनका निवारण होता है। अनुष्ठान के समय भक्तों का मन और दिल एकाग्र रहता है, जिससे उन्हें सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जप सुबह सूर्योदय के समय उचित रहता है। इस दौरान स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और एक दीपक जलाएं। अगर संभव हो, तो माँ दुर्गा का चित्र या मूर्ति रखें और पुष्प भी अर्पित करें। ध्यान करते समय शान्त मन से इस भजन का गान करें, जिससे आंतरिक भक्ति में इजाफा हो। इस समय मन की प्रेरणा और माँ दुर्गा के प्रति गहरी श्रद्धा होनी चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

जय दुर्गे दुर्गति परिहारिणी भजन का अर्थ क्या है?

यह भजन माँ दुर्गा की स्तुति में गाया जाता है, जो सभी दुर्गतियों और संकटों को दूर करने वाली हैं। यह भजन विशेष रूप से उनकी शक्तियों का बखान करता है।

इस भजन का पाठ किस समय करना चाहिए?

इस भजन का पाठ सुबह सूर्योदय के समय या नवरात्रि में देवी पूजन के अवसर पर करने से विशेष सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व होता है।

जय दुर्गे दुर्गति परिहारिणी भजन के लाभ क्या हैं?

इस भजन का लगातार पाठ मानसिक शांति, स्वास्थ्य में विकास, और आध्यात्मिक उन्नति में सहायक होता है, जो भक्ति के माध्यम से भक्त को सशक्त बनाता है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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