भक्ति काव्य व भजन मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

बिगड़ी मेरी बना दे ए शेरोंवाली मैया लिरिक्स (Bigdii Meri Bana De ye Sherowali Maiya Lyrics in Hindi) - Sherawali Bhajan Lakhbir Singh Lakkha

भजन "बिगड़ी मेरी बना दे ए शेरोंवाली मैया लिरिक्स (Bigdii Meri Bana De ye Sherowali Maiya Lyrics in Hindi) - Sherawali Bhajan Lakhbir Singh Lakkha" के हिन्दी लिरिक्स, विस्तृत अर्थ, और पौराणिक महत्त्व। इस भजन के माध्यम से भक्त ने माँ शेरावाली से अपनी बिगड़ी हुई स्थिति को सुधारने की प्रार्थना

प्रस्तावना एवं परिचय

शेरोंवाली मैया की कृपा: संकटों का नाश

प्रभु की कृपा से अपने बिगड़े कार्यों को संभालें, इस भजन का गहरा अर्थ समझें।

बिगड़ी मेरी बना दे ए शेरोंवाली मैया लिरिक्स (Bigdii Meri Bana De ye Sherowali Maiya Lyrics in Hindi) - दोहा: सदा पापी से पापी को भी तुम माँ भव सिंधु तारी हो | फसी मझधार में नैया को भी पल में उबारी हो || ना जाने कौन ऐसी भूल मुझ से हो गयी मैया | तुम अपने इस बालक को माँ मन से बिसारी हो || बिगड़ी मेरी बनादे मैैयाजी मेरी मैया... बिगड़ी मेरी बनादे ए शेरोंवाली मैया ए शेरों वाली मैयाए वासा वाली मैया अपना मुझे बनाले ए मेहरों वाली मैया || दर्शन को मेरी अखियाँ कब से तरस रहीं हैं सावन के जैसे झर झर अखियाँ बरस रहीं हैं दर पे मुझे बुला लेए शेरों वाली मैया || आते हैं तेरे दर पे दुनिया के नर और नारी सुनती हो सब की विनती मेरी मैया शेरों वाली मुझ को दर्श दिखा दे ए मेहरों वाली मैया ||
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन के माध्यम से भक्त ने माँ शेरावाली से अपनी बिगड़ी हुई स्थिति को सुधारने की प्रार्थना की है। ऐसे समय में जब भक्त अपनी भूलों को बताता है और यह महसूस करता है कि उसने किसी कारण से माँ को भुला दिया है, वह माँ की अनुकंपा की कामना करता है। 'सदा पापी से पापी को भी तुम माँ भव सिंधु तारी हो' इस पंक्ति द्वारा यह दर्शाया गया है कि माँ की कृपा से पापी भी पार हो सकते हैं। भक्त ने अपने आप को माँ का अंश मानते हुए कहा है, 'तुम अपने इस बालक को माँ मन से बिसारी हो', जो यह दर्शाता है कि भक्त अपने को माँ का समर्पित सेवक मानता है और अज्ञानता के कारण अपने पापों का ज्ञान नहीं रखता। इस प्रकार यह भजन भक्त और ईश्वर के बीच के सच्चे प्रेम तथा समर्पण का प्रतीक है।

इसी भजन में भक्त की भावनाएँ गहराई से व्यक्त की गई हैं। 'दर्शन को मेरी अखियाँ कब से तरस रहीं हैं' पंक्ति में भक्त की आँखों की प्यास स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। भक्त का हृदय मां के दर्शन की लालसा में भरा हुआ है। जैसे सावन में बारिश होती है, वैसे ही भक्त के आँसूं उनकी माँ की याद और उससे मिलने की आकांक्षा का प्रतीक हैं। दुनिया के नर और नारी जो माँ के दर पर आते हैं, उनके लिए यह भजन उनके संकटों के समाधान की एक आशा भी प्रदान करता है। माँ के दर पर विनती करते हुए 'मेरे मैया शेरों वाली' का उच्चारण सूरते पहलु की ओर संकेत करता है, जो सभी भक्तों के लिए स्वर्णिम मार्ग खोलने वाला है।

इस भजन के माध्यम से भक्त की परिकल्पना है कि भक्ति के मार्ग पर चलकर वे अपनी समस्याओं से मुक्त हो सकते हैं। यह भक्ति की प्रक्रिया को प्रदर्शित करता है, जिसमें भक्त ने अपने दिल को माँ के प्रति समर्पित कर दिया है। यह दर्शाता है कि भक्ति का मार्ग न केवल प्रार्थना है, बल्कि एक आस्था एवं भरोसे का भी माध्यम है। 'आते हैं तेरे दर पे दुनिया के नर और नारी' यह पंक्ति दर्शाती है कि माँ की शक्तियां और माया केवल भक्तों के लिए नहीं, बल्कि सभी के लिए हैं। अत: यह भजन जीवन में शांति और मोक्ष की प्राप्ति का एक महत्वपूर्ण साधन है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन न केवल किचड़ से निकले हुए भक्त के मन की भावनाओं को प्रकट करता है, बल्कि माँ दुर्गा की महिमा की भी पुष्टि करता है। पुराणों में देवी का साधक पर आशीर्वाद देने और उसे कष्टों से मुक्त करने की कथा अनेक बार आयी है। जैसे कि दुर्गा सप्तशती में माँ दुर्गा द्वारा मदालसा दिव्य पुनर्जन्म की घटना का जिक्र आता है, जहाँ उन्होंने हर एक भक्त को उनकी समस्याओं से मुक्त कर दिया। हर भक्त का अनुभव है कि दुर्गा का आशीर्वाद उनके जीवन के हर कठिन क्षण में उनके साथ होता है, और इस भजन के माध्यम से भक्त उनकी कृपा की कामना कर रहा है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का जाप मानसिक शांति, आंतरिक शक्ति, और भक्ति का अनुभव कराता है। जब हम इसे नियमित रूप से गाते हैं, तो यह हमारे जीवन में सकारात्मकता लाता है और तनाव को कम करता है। भक्तों का यह अनुभव होता है कि माँ की कृपा से उनके जीवन के कठिनाईयों का समाधान माँ स्वयं करती हैं।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह की आरंभ में या संध्या समय किया जाना चाहिए, ताकि मन की एकाग्रता क्षीण न हो। पूजा स्थल पर दीप जलाने, माँ के चरणामृत के लिए फूल चढ़ाने तथा शुद्ध मानसिकता से अपना हृदय खोलकर भजन गाने से भक्त की पूजा और भी समर्पित होती है। यह ध्यान में रखना चाहिए कि भक्त गहन भावना के साथ भजन गाए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

यह भजन कौन सी देवी को समर्पित है?

यह भजन माँ दुर्गा, विशेषकर शेरावाली रूप में उन्हें समर्पित है, जो भक्तों की सभी समस्याओं का समाधान करती हैं।

इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश माँ की कृपा से जीवन की कठिनाइयाँ और विफलताएँ मिटाना है, और भक्त की अनन्य भावनाओं को माँ की ओर व्यक्त करना है।

इस भजन का जाप कब करना चाहिए?

इस भजन का जाप सुबह या शाम के समय करना शुभ माना जाता है, जिससे भक्त मानसिक शांति और एकाग्रता प्राप्त कर सके।

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 12 Oct 2026

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