भक्ति काव्य व भजन मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

आज है जगराता माई का माँ को मना लेना भजन इन हिंदी लिरिक्स

पढ़ें आज है जगराता माई का माँ को मना लेना भजन इन हिंदी लिरिक्स का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार्थ, पूजा विधि एवं आध्यात्मिक महत्व भक्तिलोक पर।

‘आज है जगराता माई का’ भजन माता दुर्गा, शेरावाली और मेहरावाली की पावन भक्ति, अगाध श्रद्धा और समर्पण का एक अत्यंत लोकप्रिय, कर्णप्रिय और आध्यात्मिक रूप से ऊर्जावान गीत है। नवरात्रि के पावन पर्व, माता की चौकी, कन्या पूजन और विशेष जागरण अनुष्ठानों के दौरान जब भक्तगण रात भर जागकर माँ की आराधना करते हैं, तब यह भजन वातावरण को पूरी तरह से भक्तिमय और चैतन्य बना देता है। ‘जगराता’ या ‘जागरण’ का शाब्दिक अर्थ केवल रात भर जागना नहीं है, बल्कि अपनी सोई हुई चेतना को जाग्रत कर परमात्मा के दिव्य स्वरूप से जुड़ना है। यह भजन साधकों को सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठकर माँ की शरण में आने, उनकी करुणा का गुणगान करने और अपने समस्त दुखों व संतापों से मुक्ति पाने की प्रेरणा देता है। इस भावपूर्ण रचना के माध्यम से भक्त माँ के चरणों में अपनी खाली झोली लेकर आते हैं और अहैतुकी कृपा का प्रसाद प्राप्त कर अपने जीवन को धन्य बनाते हैं। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस पावन भजन के सम्पूर्ण लिरिक्स, शब्दार्थ, भावार्थ, गायन की विधि और इसके आध्यात्मिक महत्व का सविस्तार अध्ययन करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

मुखड़ा

आज है जगराता माई का, माँ को मना लेना,
आज है जगराता माई का, माँ को मना लेना।
खाली झोली लेकर आए, भर के ले जाना,
आज है जगराता माई का, माँ को मना लेना॥

अंतरा 1

ज्योति जलाो माँ के नाम की, खुशियाँ मनाओ माँ के नाम की,
भक्ति में अपनी माँ को रिझाओ, महिमा गाओ माँ के नाम की।
सच्चे मन से माँ को पुकारो, दर्शन पा लेना,
आज है जगराता माई का, माँ को मना लेना॥

अंतरा 2

दुखड़े मिटाती है माँ शेरावाली, भरती है झोली माँ मेहरावाली,
जो भी आया है दर पे माँ के, खाली न लौटा है खाली।
चरणों में शीश झुका के, आशीर्वाद पा लेना,
आज है जगराता माई का, माँ को मना लेना॥

अंतरा 3

प्रेम की माला माँ को पहनाओ, भाव का अर्घ्य माँ को चढ़ाओ,
भटक रहे हो जो जीवन की राहों में, माँ की शरण में ठिकाना पा लेना।
रोम-रोम में मैया का सिमरन, तुम भी गा लेना,
आज है जगराता माई का, माँ को मना लेना॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

‘आज है जगराता माई का’ भजन का भावार्थ अत्यंत गहरा और साधक के हृदय को झकझोर देने वाला है। मुखड़े में कवि या रचनाकार ने उस परम अवसर का स्मरण कराया है जब भगवती जगदम्बा की आराधना के लिए जागरण का आयोजन किया जाता है। 'माँ को मना लेना' का अर्थ केवल बाह्य अनुष्ठान करना नहीं है, बल्कि अपने अहंकार, द्वंद्व और विकारों को त्यागकर माँ के प्रेम को अपने भीतर स्थापित करना है। भक्त जब जीवन की कठिनाइयों से थक-हारकर अपनी खाली झोली लेकर माँ के दरबार में पहुँचता है, तो उसे पूर्ण विश्वास होता है कि करुणा की सागर माँ उसकी झोली को अवश्य भर देंगी।

प्रथम अंतरे में 'ज्योति जलाओ माँ के नाम की' पंक्ति के माध्यम से आंतरिक चेतना और ज्ञान के प्रकाश को प्रज्वलित करने का संदेश दिया गया है। भौतिक दीपकों के साथ-साथ हृदय में भक्ति की ज्योति जलाना ही वास्तविक जागरण है। जब भक्त सच्चे मन से माँ का आह्वान करता है, तो उसे जगतजननी के अलौकिक दर्शन और सांत्वना की प्राप्ति होती है।

द्वितीय अंतरे में माँ के शेरावाली और मेहरावाली स्वरूप का गुणगान किया गया है। 'शेरावाली' सिंह पर सवार होकर दुष्टों का संहार करने वाली शक्ति का प्रतीक है, तो 'मेहरावाली' अपने भक्तों पर अहैतुकी कृपा और मेहर बरसाने वाली वात्सल्यमयी जननी है। यह अटूट विश्वास व्यक्त किया गया है कि आज तक माँ के दरबार से कोई भी निराश या खाली हाथ नहीं लौटा है। जो भी श्रद्धापूर्वक अपना शीश झुकाता है, उसे माँ का आशीर्वाद अवश्य मिलता है। इस प्रकार यह भजन साधक को निराशा से निकालकर आशा, भक्ति और परम शांति के मार्ग पर अग्रसर करता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन सनातन संस्कृति में देवी उपासना और रात्रि जागरण की परंपरा का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इसकी मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित बिंदु सम्मिलित हैं:

  • भक्ति रस प्रधान रचना: इस भजन में दास्य और सख्य भाव के साथ-साथ वात्सल्य और समर्पण की पराकाष्ठा देखने को मिलती है।
  • मानसिक शांति और संबल: मानसिक तनाव, अवसाद और जीवन की जटिल समस्याओं से जूझ रहे व्यक्तियों को यह भजन आंतरिक संबल प्रदान करता है।
  • सामूहिक ऊर्जा का संचार: रात्रि जागरण के दौरान जब सैकड़ों भक्त स्वर में स्वर मिलाकर इस भजन को गाते हैं, तो एक दिव्य सकारात्मक ऊर्जा का निर्माण होता है।
  • समर्पण का संदेश: यह भजन सिखाता है कि अहंकार का त्याग किए बिना ईश्वर की कृपा प्राप्त नहीं हो सकती। माँ के चरणों में पूर्ण समर्पण ही मोक्ष और शांति का मार्ग है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन का गायन और श्रवण विशेष अवसरों पर अत्यधिक फलदायी माना जाता है:

  • शारदीय और चैत्र नवरात्रि: नवरात्रि के नौ दिनों में विशेषकर अष्टमी और नवमी की रात्रि को आयोजित होने वाले जागरण में इस भजन का मुख्य स्थान है।
  • माता की चौकी या सत्संग: मंगलवार, शुक्रवार या पूर्णिमा की रात्रि को जब भी घर या मंदिर में माता की चौकी सजाई जाती है, तब इस भजन को गाकर माहौल को दिव्य बनाया जाता है।
  • नित्य साधना: ब्रह्म मुहूर्त या संध्या बेला में माँ के सम्मुख दीपक प्रज्वलित कर एकाग्रचित्त होकर इसे गुनगुनाने से मन को असीम शांति मिलती है।

गायन से पूर्व पवित्र आसन पर बैठकर, माँ दुर्गा के चित्र या विग्रह के समक्ष धूप-दीप जलाकर श्रद्धापूर्वक इस भजन का आरंभ करना चाहिए।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन की आराध्य देवी आदि शक्ति माँ दुर्गा, महालक्ष्मी, महाकाली और महासरस्वती का संयुक्त स्वरूप हैं। उन्हें 'शेरावाली' और 'मेहरावाली' के रूप में पूजा जाता है। देवी भागवत पुराण और मार्कण्डेय पुराण (दुर्गा सप्तशती) के अनुसार, जब-जब पृथ्वी पर असुरों का अत्याचार बढ़ा है, तब-तब आदिशक्ति ने विभिन्न रूपों में अवतार लेकर भक्तों की रक्षा की है। यह भजन लोक परंपरा के अज्ञात संतों और गीतकारों की उस धारा से जुड़ा है जिन्होंने जन-जन तक माता की महिमा को सरल हिंदी और लोकभाषा के माध्यम से पहुँचाया है। आप अधिक जानकारी के लिए दुर्गा सप्तशती पाठ विधि और माँ दुर्गा की आरती के पावन लेखों का भी अध्ययन कर सकते हैं।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

'आज है जगराता माई का' भजन की रचना लोक संगीत और आधुनिक भक्ति संगीत शैली के सुंदर समन्वय का परिणाम है। इसे पारंपरिक ढोलक, मंजीरे और चंग की थाप के साथ गाया जाता है। भारत के उत्तर भारतीय राज्यों जैसे पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में माता के जागरण की एक समृद्ध परंपरा रही है। इस परंपरा को जीवित रखने में लोक कलाकारों और भजन गायकों का विशेष योगदान रहा है। यह गीत किसी एक विशेष ग्रंथ से न होकर लोक-कंठ से उपजी वह अंजलि है जो सीधे माँ के श्रीचरणों में समर्पित होती है.

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा अत्यंत सरल, सहज और आम जनमानस की समझ में आने वाली हिंदी एवं बोलचाल की ब्रज-अवधि प्रभावित शब्दावली है। इसमें क्लिष्ट संस्कृत शब्दों के स्थान पर सीधे हृदय को छूने वाले शब्दों का प्रयोग किया गया है जैसे— 'जगराता', 'माई', 'खाली झोली', 'शेरावाली', 'मेहरावाली'। काव्य शैली की दृष्टि से इसमें अनुप्रास और यमक अलंकारों का सहज प्रयोग हुआ है जो इसके गायन को और अधिक संगीतमय और लयात्मक बनाता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन केवल एक मनोरंजक गीत नहीं है, बल्कि जीवन के गहरे सत्यों को उजागर करने वाला मार्गदर्शक है:

  • निष्ठा और विश्वास: जीवन में कितनी भी विपत्तियाँ क्यों न आएं, ईश्वर और अपनी माता पर अटूट विश्वास बनाए रखना चाहिए।
  • अहंकार का त्याग: 'खाली झोली लेकर आए' यह सिखाता है कि मनुष्य को अपनी उपलब्धियों का अहंकार छोड़कर दीन-भाव से परमात्मा के सम्मुख जाना चाहिए।
  • सकारात्मक दृष्टिकोण: निराशा के अंधकार में भी भक्ति रूपी ज्योति जलाकर जीवन को प्रकाशवान बनाने की प्रेरणा यह भजन देता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ संदर्भ / प्रसंग
जगराता रात्रि जागरण ईश्वर की स्तुति में पूरी रात जागकर भजन करना।
माई माता / जगतजननी माँ दुर्गा या आदिशक्ति के लिए प्रेमसूचक संबोधन।
शेरावाली शेर पर सवारी करने वाली माँ दुर्गा का सिंह वाहिनी स्वरूप।
मेहरावाली कृपा बरसाने वाली भक्तों पर अपनी अहैतुकी कृपा दृष्टि रखने वाली माँ।
ज्योति प्रकाश / दीपक ज्ञान और भक्ति का प्रतीक पावन दीया।
अघर््य समर्पण / भेंट अपने भावों और श्रद्धा को माँ के चरणों में अर्पित करना।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

पंक्ति: "आज है जगराता माई का, माँ को मना लेना..."
भावार्थ: आज का दिन और रात्रि अत्यंत सौभाग्यशाली है क्योंकि आज आदिशक्ति माँ का जागरण है। इस पावन अवसर पर अपने मन के सभी गिले-शिकवे भुलाकर और रुठी हुई मनोवृत्तियों को साधकर माँ को अपनी भक्ति से प्रसन्न कर लेना चाहिए।

पंक्ति: "खाली झोली लेकर आए, भर के ले जाना..."
भावार्थ: हम संसार के दुखों से संतापिक होकर अपनी खाली झोलियाँ (आशा और अपेक्षाएं) लेकर आपके दरबार में आए हैं। हे माता! हमारी इन झोलियों को अपनी कृपा, सुख, शांति और समृद्धि के खजाने से भरकर यहाँ से जाना (अर्थात हमें पूर्ण तृप्त करना)।

पंक्ति: "ज्योति जलाओ माँ के नाम की, खुशियाँ मनाओ माँ के नाम की..."
भावार्थ: अपने घरों और मंदिरों में माँ के नाम का दीपक प्रज्वलित करो और उनके पावन यश का गान करके अपने जीवन में उत्सव और आनंद का माहौल बनाओ।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के साथ निम्नलिखित पावन मंत्र का जप करना अत्यंत फलदायी होता है:

"सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यंबके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥"

यह मंत्र माँ दुर्गा की स्तुति का सबसे शक्तिशाली और लोकप्रिय श्लोक है, जो सभी प्रकार के अमंगल को दूर कर जीवन में सौभाग्य का संचार करता है। आप इस संदर्भ में नवदुर्गा मंत्र और उनके अर्थ का भी पाठ कर सकते हैं।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

विवरण तथ्य / जानकारी
भजन का नाम आज है जगराता माई का, माँ को मना लेना
आराध्य देवी माँ दुर्गा (शेरावाली / मेहरावाली)
रचना परंपरा लोक भजन एवं माता का जागरण परंपरा
भाषा सरल हिंदी / लोक भाषा
मुख्य भाव भक्ति, समर्पण, करुणा और कृपा प्राप्ति
उपयुक्त अवसर नवरात्रि, जागरण, माता की चौकी, मंगलवार/शुक्रवार पूजा
गायन शैली लयबद्ध लोक संगीत एवं कोरस गान

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

‘आज है जगराता माई का’ भजन मुख्य रूप से किस अवसर पर गाया जाता है?

यह भजन मुख्य रूप से शारदीय और चैत्र नवरात्रि, माता की चौकी, मंगलवार या शुक्रवार की जागरण रात्रियों और विशेष धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान गाया जाता है।

इस भजन का मूल आध्यात्मिक संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश अहंकार का त्याग कर सच्चे मन से माँ की शरण में जाना और अपनी आंतरिक चेतना को जागृत करना है।

क्या इस भजन को घर पर सामान्य पूजा के दौरान भी गाया जा सकता है?

हाँ, इसे संध्या वंदन, माता की आरती के पश्चात या किसी भी विशेष व्रत के दिन घर पर प्रेमपूर्वक गाया जा सकता है।

'शेरावाली' और 'मेहरावाली' शब्दों का क्या अर्थ है?

शेरावाली का अर्थ है सिंह पर सवारी करने वाली और मेहरावाली का अर्थ है अपने भक्तों पर असीम कृपा और मेहर बरसाने वाली माता।

जागरण का वास्तविक आध्यात्मिक अर्थ क्या है?

जागरण का अर्थ केवल रात भर जागना नहीं है, बल्कि अपनी सोई हुई आध्यात्मिक चेतना और भक्ति भाव को जागृत करना है।

इस भजन के गायन में किन वाद्यों का प्रयोग किया जाता है?

पारंपरिक रूप से ढोलक, मंजीरे, चंग और हारमोनियम का प्रयोग इस प्रकार के भजनों के गायन में किया जाता है।

क्या इस भजन को सुनने से मानसिक शांति मिलती है?

निसंदेह, भक्तिरस से परिपूर्ण इस भजन को सुनने और गाने से मन का तनाव दूर होता है और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।

माँ दुर्गा की कृपा प्राप्त करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात क्या है?

माँ दुर्गा की कृपा प्राप्त करने के लिए छल-कपट रहित शुद्ध हृदय, अटूट श्रद्धा और शरणागति की भावना सबसे आवश्यक है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह मार्गदर्शिका Bhaktilok.in के संपादकीय मंडल द्वारा सनातन परंपरा, लोक साहित्य और देवी भक्ति के सिद्धांतों के आधार पर तैयार की गई है। इसका उद्देश्य पाठकों को प्रामाणिक भजन लिरिक्स और उसका गहरा आध्यात्मिक अर्थ प्रदान करना है। यह सामग्री पूरी तरह से संदर्शनात्मक और भक्ति भाव को प्रेरित करने वाली है। (संपादकीय रूप से तैयार सामग्री)।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • देवी भागवत पुराण एवं मार्कण्डेय पुराण (दुर्गा सप्तशती)
  • उत्तर भारतीय लोक भजन एवं जागरण परंपरा के पारंपरिक संकलन
  • सनातन संस्कृति एवं व्रत-उपवास अनुष्ठान ग्रंथ

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 12 Oct 2026

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