भक्ति काव्य व भजन मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

हर जनम में बाबा तेरा साथ चाहिए लिरिक्स (Har Janam Me Baba Tera Sath Chahiye Lyrics in Hindi) - Shiv Bhajan

हर जनम में बाबा तेरा साथ चाहिए शिव भजन के संपूर्ण लिरिक्स, हिंदी भावार्थ और आध्यात्मिक महत्व पढ़ें। सावन और सोमवार विशेष।

हर जनम में बाबा तेरा साथ चाहिए (Har Janam Me Baba Tera Sath Chahiye Lyrics)

भगवान भोलेनाथ (महाकाल) और शिव भक्तों की अनन्य भक्ति को समर्पित यह अत्यंत लोकप्रिय शिव भजन "हर जनम में बाबा तेरा साथ चाहिए" शिव साधना और आत्मीय समर्पण का एक अद्भुत प्रतीक है। सावन मास, महाशिवरात्रि, प्रदोष व्रत और सोमवार के पावन दिनों में शिव मंदिरों और सत्संग मंचों पर गूंजने वाला यह भजन साधक के हृदय की उस पुकार को व्यक्त करता है, जिसमें वह भौतिक सुख-सुविधाओं की अपेक्षा केवल देवाधिदेव महादेव के शाश्वत सानिध्य, उनके आशीर्वाद और उनकी कृपा की अमर वर्षा की कामना करता है। इस लेख में हम इस दिव्य भजन के संपूर्ण लिरिक्स, भावार्थ, और इसके आध्यात्मिक महत्व का विस्तार से अध्ययन करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

हर जनम में बाबा तेरा साथ चाहिए
सिर पे मेरे बाबा तेरा हाथ चाहिए
सिलसिला ये टूटना नहीं चाहिए
मुझको मेरी भक्ति का इनाम चाहिए
हर जन्म में बाबा तेरा साथ चाहिए।।

मेरी आंखों में तुम समाए हो
सारी दुनिया में सबसे प्यारे हो
मुझको तेरे प्यार की बरसात चाहिए
मुझको बस इतनी सी सौगात चाहिए
हर जन्म में बाबा तेरा साथ चाहिए
सिर पे मेरे बाबा तेरा हाथ चाहिए।।

मेरी दुनिया को तुम बसाए हो
मेरे जीवन को तुम सजाए हो
नाम तेरा होंठो पे दिन रात चाहिए
जिक्र हो तेरा ही ऐसी बात चाहिए
हर जन्म में बाबा तेरा साथ चाहिए
सिर पे मेरे बाबा तेरा हाथ चाहिए।।

मुझपे तेरी कृपा यूँ कम ना है
फिर भी इक छोटी सी तमन्ना है
जीते जी एक तुमसे मुलाकात चाहिए
हर कदम पे बाबा तेरा प्यार चाहिए
हर जन्म में बाबा तेरा साथ चाहिए
सिर पे मेरे बाबा तेरा हाथ चाहिए।।

हर जनम में बाबा तेरा साथ चाहिए
सिर पे मेरे बाबा तेरा हाथ चाहिए
सिलसिला ये टूटना नहीं चाहिए
मुझको मेरी भक्ति का इनाम चाहिए
हर जन्म में बाबा तेरा साथ चाहिए।।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन एक सच्चे शिव भक्त की उस आंतरिक भावना को प्रकट करता है जहाँ वह संसार की किसी भी वस्तु या वैभव की कामना न करके केवल अपने इष्ट देव महादेव का निरंतर सानिध्य मांगता है।

प्रथम पद (मुखड़ा): भक्त भगवान शिव से प्रार्थना करता है कि हे बाबा! मुझे केवल जन्म-जन्म तक आपका साथ और आपके आशीर्वाद रूपी हाथ मेरे सिर पर चाहिए। भक्त की दृष्टि में उसकी सच्ची भक्ति का सबसे बड़ा पुरस्कार यही है कि प्रभु के साथ उसका यह प्रेम संबंध कभी भी खंडित न हो।

द्वितीय पद: भक्त अपने आराध्य की महिमा का बखान करते हुए कहता है कि मेरी आंखों में केवल आपकी ही छवि बसी हुई है और आप इस संपूर्ण ब्रह्मांड में सबसे प्रिय हैं। मुझे आपकी करुणा और प्रेम की वर्षा चाहिए, मेरे जीवन की बस यही एकमात्र सौगात (उपहार) है।

तृतीय पद: भक्त स्वीकार करता है कि उसकी दुनिया और उसका सजा-संवरा जीवन भगवान की ही कृपा का परिणाम है। वह भगवान से वरदान मांगता है कि उसके होंठों पर निरंतर शिव नाम का जाप रहे और उसकी हर बातचीत में केवल प्रभु का ही जिक्र हो।

चतुर्थ पद: भक्त कहता है कि यद्यपि मुझ पर आपकी कृपा की कोई कमी नहीं है, फिर भी मेरे मन में एक अति सुंदर अभिलाषा है—वह यह कि इस जीवनकाल में ही मुझे आपसे आत्मीय साक्षात्कार (मुलाकात) हो जाए और जीवन के हर मोड़ पर आपका स्नेह मिलता रहे।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

शिव साधना में भक्ति गीतों और संकीर्तन का विशेष स्थान होता है। यह भजन साधक के भीतर वैराग्य, समर्पण और अनन्य प्रेम का भाव जगाता है।

  • अनन्य समर्पण: यह भजन साधक के अहंकार को समाप्त कर भगवान के चरणों में पूर्ण समर्पण सिखाता है।
  • जन्म-जन्मांतर का बंधन: शिव और जीव के शाश्वत संबंध को रेखांकित करता है जो केवल एक जीवन तक सीमित नहीं है।
  • नाम स्मरण की महिमा: भगवान के नाम को निरंतर होंठों पर रखने की प्रेरणा देता है।
  • मानसिक शांति: इस भजन के श्रवण से मन को असीम शांति, सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक संबल प्राप्त होता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस पावन शिव भजन को किसी भी समय गाया जा सकता है, किंतु इसके गायन के लिए कुछ विशेष अवसर और समय अति उत्तम माने जाते हैं:

  • सोमवार का दिन: भगवान शिव को समर्पित सोमवार के व्रत और पूजन के दौरान।
  • प्रदोष काल एवं महाशिवरात्रि: संध्या के समय प्रदोष काल में शिव मंदिर में दीप प्रज्वलित करते समय।
  • सावन मास: पवित्र श्रावण मास में जब चारों ओर शिवमय वातावरण होता है।
  • दैनिक पूजा एवं सत्संग: घर की नियमित पूजा, रुद्राभिषेक या शिव भजन संध्या के आरंभ में।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity

इस भजन के केंद्र में देवाधिदेव महादेव, भोलेनाथ, शिव, और महाकाल हैं। सनातन धर्म में भगवान शिव को संहारक के साथ-साथ अत्यंत दयालु, आशुतोष (शीघ्र प्रसन्न होने वाले) और भक्तों के रक्षक के रूप में पूजा जाता है। शिव परंपरा (शैव मत) में गुरु और इष्ट दोनों रूप में शिव की आराधना की जाती है। शिव भक्तों (शिव भक्तों/बम भोले के भक्तों) के बीच यह भजन अत्यधिक लोकप्रिय है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

यह भजन सरल, सुबोध और लोक-सुलभ हिंदी/खड़ी बोली में रचा गया है। इसकी शब्दावली इतनी मधुर और लयबद्ध है कि इसे बिना किसी कठिन संगीत प्रयास के आसानी से गाया जा सकता है। काव्य की दृष्टि से इसमें 'अनुप्रास' और 'पुनरुक्ति' अलंकारों का सुंदर प्रयोग हुआ है जो इसकी गीतात्मकता को और अधिक प्रगाढ़ बनाता है। सरल भाव और गेयता ही इस भजन की सबसे बड़ी शक्ति है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

  • भौतिकता से ऊपर उठना: सांसारिक वस्तुओं के पीछे भागने के बजाय ईश्वर की कृपा को सर्वोच्च प्राथमिकता देना।
  • निरंतरता का भाव: भक्ति का यह सिलसिला जीवन के हर उतार-चढ़ाव में निरंतर बना रहना चाहिए।
  • अखंड विश्वास: यह विश्वास रखना कि बाबा का हाथ हमेशा हमारे सिर पर है, जिससे किसी भी भय या संकट से पार पाया जा सकता है।
  • नम्रता और प्रेम: भगवान के प्रति अहंकारहीन होकर केवल उनके स्नेह की भीख मांगना सच्ची विनम्रता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ संदर्भ / भाव
बाबा भगवान शिव / महादेव भक्त द्वारा प्रेम और आदर से पुकारा गया संबोधन
सिर पे हाथ आशीर्वाद और संरक्षण सुरक्षा और कृपा का निरंतर भाव
सिलसिला क्रम / निरंतरता भक्ति और कृपा का क्रम कभी न टूटने की प्रार्थना
सौगात उपहार / भेंट भगवान का प्रेम और साथ पाने की लालसा
तमन्ना इच्छा / अभिलाषा मन की पवित्र और सात्विक कामना

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के गायन के पश्चात भगवान शिव के इन पावन मंत्रों का स्मरण करना अत्यंत फलदायी माना जाता है:

ॐ नमः शिवाय् ॥
मृत्युंजय महेश्वराय देवाय नमः ॥

इसके साथ ही आप श्री शिव तांडव स्तोत्र या श्री रुद्राष्टकम का पाठ करके अपनी शिव साधना को और अधिक पूर्ण कर सकते हैं।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम हर जनम में बाबा तेरा साथ चाहिए (Har Janam Me Baba Tera Sath Chahiye)
इष्ट देव भगवान शिव / महादेव / भोलेनाथ
संगीत शैली भक्ति संगीत / लोक भजन
भाषा सरल हिंदी / ब्रज-प्रभावित खड़ी बोली
मुख्य थीम शिव भक्ति, शरणागति, आत्मसमर्पण और प्रेम
उपयुक्त अवसर सोमवार व्रत, महाशिवरात्रि, सावन मास एवं सत्संग

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1: 'हर जनम में बाबा तेरा साथ चाहिए' भजन किस देवता को समर्पित है?

यह भजन देवाधिदेव भगवान शिव (महादेव, भोलेनाथ) को समर्पित है।

Q2: इस भजन को गाने का सबसे अच्छा समय कौन सा है?

इस भजन को सोमवार के दिन, सावन मास में, प्रदोष काल में या किसी भी समय अपनी दैनिक पूजा के दौरान गाया जा सकता है।

Q3: इस भजन का मुख्य आध्यात्मिक संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश भगवान शिव के प्रति अनन्य प्रेम, निरंतर स्मरण और जन्म-जन्मांतर तक उनकी कृपा पाने की प्रार्थना करना है।

Q4: क्या यह भजन घर पर आसानी से गाया जा सकता है?

हाँ, इसकी भाषा अत्यंत सरल और गेय है, जिसे हर उम्र के भक्त आसानी से गुनगुना सकते हैं।

Q5: शिव भक्ति के लिए कौन-से व्रत प्रमुख माने जाते हैं?

सोमवार व्रत, सोलह सोमवार व्रत और प्रदोष व्रत शिव भक्ति के लिए अत्यंत प्रमुख माने जाते हैं।

Q6: क्या इस भजन के साथ संगीत वाद्ययंत्रों का प्रयोग किया जा सकता है?

हाँ, ढोलक, मंजीरा, हारमोनियम या गिटार के साथ इस भजन को बहुत ही मधुरता से गाया जा सकता है।

Q7: भक्त भगवान से इस भजन में क्या मांग रहा है?

भक्त धन-वैभव के बजाय केवल बाबा का साथ, उनका आशीर्वाद और उनके नाम का निरंतर स्मरण मांग रहा है।

Q8: शिव आराधना से जीवन में क्या लाभ मिलता है?

शिव आराधना से मानसिक शांति, भय से मुक्ति और जीवन के हर संकट से लड़ने की आन्तरिक शक्ति प्राप्त होती है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख शिव भक्तों की सुविधा और प्रामाणिक भक्ति साहित्य उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें प्रयुक्त सभी पंक्तियाँ और भावार्थ पारंपरिक संकीर्तन परंपरा पर आधारित हैं।

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • पारंपरिक शिव संकीर्तन एवं लोक भजन परंपरा
  • शिव पुराण एवं शैव दर्शन ग्रंथ
  • भक्तलोम संपादन कक्ष द्वारा संकलित सामग्री

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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