भजन 'शेरांवली दियां पाके वांगन' माता दुर्गा की असीम कृपा, करुणा और उनके चरणों में एक सच्चे भक्त के अनन्य समर्पण का अत्यंत मनमोहक, भावपूर्ण और मधुर पंजाबी देवी भजन है। प्रसिद्ध गायक संजीव भारद्वाज द्वारा अपनी सुरीली आवाज में स्वरबद्ध यह रचना न केवल कानों को तृप्त करती है, बल्कि साधक के अंतःकरण में माँ शेरांवली के प्रति अगाध भक्ति और प्रेम का संचार कर देती है। सनातन धर्म में 'शेरांवली' शब्द माँ दुर्गा के उस महाशक्तिशाली और करुणामय स्वरूप का प्रतीक है, जो सिंह पर विराजमान होकर दुष्टों का संहार करती हैं और अपने शरणागत भक्तों की हर परिस्थिति में रक्षा करती हैं। इस भजन में प्रयुक्त 'पाके वांगन' (हाथों में चूड़ियाँ पहनकर) का रूपक माता के प्रति उस परम विश्वास और सुहागिन रूपी अनन्य समर्पण को दर्शाता है, जहाँ भक्त अपनी समस्त चिंताओं, दुखों और अहं को माँ के चरणों में अर्पित कर देता है। यह पवित्र भजन विशेष रूप से शारदीय एवं चैत्र नवरात्रों, माता के जागरण, चौकी, कन्या पूजन और सत्संग कार्यक्रमों के दौरान अत्यंत श्रद्धा, उल्लास और भक्तिभाव के साथ गाया व सुना जाता है।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
यहाँ संजीव भारद्वाज द्वारा स्वरबद्ध पावन पंजाबी देवी भजन 'शेरांवली दियां पाके वांगन' के सम्पूर्ण और मूल बोल (Lyrics) प्रस्तुत हैं:
शेरां वाली दियां पाके वांगन, माहीं गूंजे गा दिल दी आवाज़,
कुमकुम आंगन च लागे, हर हर हर, शेरां वाली दियां...
शेरां वाली दियां पाके वांगन, माहीं गूंजे गा दिल दी आवाज़,
कुमकुम आंगन च लागे, हर हर हर, शेरां वाली दियां...
हर हर हर, मां के दर्शन कराऊँ,
दु:ख दूर करो, कृपा करो, मैं दर पे आऊँ,
ओ, शेरांवली, शेरां वाली, मेरे संग हर पल,
तेरी ज्योत जगे, मिटे अंधेरा, तू ही है हल।
शेरां वाली दियां पाके वांगन, माहीं गूंजे गा दिल दी आवाज़...
चरणों में तेरे झुकता जहां है,
तू ही मेरी शक्ति, तू ही मेरी मां है,
लाल चुनरिया तेरी शान निराली,
भक्तों के संकट हरती महाकाली।
झूम रहे भक्त सारे मइया के द्वार पे,
खुशियों की बरसात हो इस पावन दरबार पे।
शेरां वाली दियां पाके वांगन, माहीं गूंजे गा दिल दी आवाज़,
कुमकुम आंगन च लागे, हर हर हर, शेरां वाली दियां...
शेरां वाली दियां पाके वांगन, माहीं गूंजे गा दिल दी आवाज़,
कुमकुम आंगन च लागे, हर हर हर, शेरां वाली दियां...
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
संजीव भारद्वाज द्वारा गाये गए इस लोकप्रिय पंजाबी भजन 'शेरांवली दियां पाके वांगन' का आंतरिक अर्थ अत्यंत गहरा और आध्यात्मिक है। पंजाबी संस्कृति और भक्ति परंपरा में 'वांगन' (चूड़ियाँ) सुहाग, पूर्ण समर्पण और आत्मीयता का प्रतीक मानी जाती हैं। जब भक्त माता के नाम की चूड़ियाँ पहनकर उनकी आराधना करता है, तो इसका अर्थ यह होता है कि उसने अपना संपूर्ण जीवन, अपना मान-सम्मान और अपनी समस्त सांसारिक चिंताएं माँ शेरांवली को सौंप दी हैं। भजन की पंक्तियों में दिल की आवाज और कुमकुम से सजे आंगन का वर्णन यह दर्शाता है कि जिस हृदय में माँ के प्रति सच्चा प्रेम जागृत हो जाता है, वहाँ का प्रत्येक कोना दिव्यता और सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है।
भजन के माध्यम से गायक यह संदेश देना चाहते हैं कि जीवन के अंधकार और दुखों को मिटाने का एकमात्र उपाय माँ की अखंड ज्योत के दर्शन करना और उनके चरणों की शरण में जाना है। 'हर हर हर' का उद्घोष और माँ के दरबार में हाजिरी लगाना भक्त की उस आतुरता को प्रकट करता है जो अपनी माता से मिलने के लिए हर पल उत्सुक रहता है। यह भजन साधक को सिखाता है कि जब मनुष्य अपने अहंकार का त्याग करके माँ को ही अपना सब कुछ मान लेता है, तो माता उसके जीवन के सभी कष्टों को हर लेती हैं और उसके घर में सुख-समृद्धि का वास होता है.
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
इस भजन की कई ऐसी विशेषताएं हैं जो इसे अन्य देवी भजनों से अलग और विशिष्ट बनाती हैं:
- भक्ति रस और पंजाबी लोक संस्कृति का संगम: भजन में पारंपरिक पंजाबी लोक शैली और उच्च कोटि के भक्ति भाव का अनूठा समन्वय देखने को मिलता है।
- समर्पण का प्रतीक: 'पाके वांगन' का रूपक जीवात्मा और परमात्मा (माँ) के अटूट संबंध को बहुत ही सहजता से स्पष्ट करता है।
- मानसिक शांति और ऊर्जा का संचार: इस भजन को सुनने मात्र से मन के भय, चिंताएं और नकारात्मक विचार दूर हो जाते हैं और एक सकारात्मक ऊर्जा का अहसास होता है।
- सार्वजनिक उत्सवों की शान: नवरात्रों, जागरण और माता की चौकी के आयोजनों में इस भजन को सुनकर भक्त झूम उठते हैं और वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो जाता है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
किसी भी देवी भजन या स्तुति का पूर्ण आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करने के लिए उसे उचित समय और विधि से सुनना या गाना चाहिए:
- सर्वोत्तम समय: प्रातःकाल ब्रह्म बेला में स्नान के पश्चात अथवा संध्याकाल में दीपक प्रज्वलित करने के बाद इस भजन का श्रवण करना अत्यंत फलदायी होता है।
- विशेष अवसर: शारदीय नवरात्र, चैत्र नवरात्र, मंगलवार या शुक्रवार के दिन, और विशेषकर माता की चौकी या जागरण के पावन अवसरों पर इसका गायन करना श्रेष्ठ माना गया है।
- मानसिक स्थिति: भजन सुनते समय मन को शांत रखें, नेत्र बंद करके माँ शेरांवली के सिंहारूढ़ स्वरूप का मानसिक ध्यान करें।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
यह भजन आदिशक्ति, महामाया, जगतजननी माँ दुर्गा के 'शेरांवली' (सिंह वाहिनी) स्वरूप को समर्पित है। सनातन परंपरा में माँ दुर्गा को समस्त ब्रह्मांड की जननी, आदि शक्ति और त्रिगुणात्मका कहा गया है। सिंह पर सवार माँ दुर्गा भक्तों के सभी प्रकार के भौतिक और आध्यात्मिक संकटों का नाश करती हैं। इस भजन को स्वरबद्ध करने वाले प्रसिद्ध गायक संजीव भारद्वाज हैं, जिन्होंने अपनी मधुर एवं ओजस्वी आवाज से इस रचना को अमर बना दिया है। उनके गाए अन्य प्रसिद्ध भजन जैसे माता शेरांवली के अन्य लोकप्रिय भजन भी भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय हैं।
भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background
'शेरांवली दियां पाके वांगन' भजन की रचना आधुनिक पंजाबी भक्ति संगीत परंपरा के अंतर्गत की गई है। पंजाबी लोक संगीत में माँ दुर्गा की महिमा का गुणगान करने की एक प्राचीन और समृद्ध परंपरा रही है, जहाँ माता को घर की बेटी, बहन या कुल की संरक्षिका के रूप में संबोधित किया जाता है। संजीव भारद्वाज ने अपनी विशिष्ट गायन शैली और भावपूर्ण प्रस्तुति के माध्यम से इस लोक परंपरा को आधुनिक संगीत प्रेमियों तक पहुँचाया है। यह भजन उन भक्तों के लिए विशेष रूप से रचा गया है जो संगीत के माध्यम से माँ के प्रति अपने अगाध प्रेम को प्रकट करना चाहते हैं।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
इस भजन की भाषा ठेठ पंजाबी मिश्रित हिंदी और लोकभाषा है, जो आम जनमानस के हृदय को तुरंत छू लेती है। इसमें 'वांगन' (चूड़ियाँ), 'माहीं गूंजे गा' (मन में गूंजना), 'आंगन च लागे' जैसे लोक प्रचलित शब्दों का बहुत ही सुंदर प्रयोग किया गया है। काव्य शैली की दृष्टि से यह एक गेय पद (Song Lyrics) है, जिसे लयबद्ध तरीके से गाया जा सकता है। रूपक अलंकार और सात्विक भावों का यह संयोजन इस रचना को उच्चकोटि का साहित्यिक और आध्यात्मिक भजन बनाता है।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
यह भजन केवल मनोरंजन या संगीत का साधन नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन के लिए कई गहरे आध्यात्मिक संदेश देता है:
- पूर्ण शरणागति: जिस प्रकार चूड़ियाँ पहनकर कोई स्त्री अपने सुहाग को समर्पित होती है, उसी प्रकार भक्त को भी अपना सब कुछ माँ के चरणों में समर्पित कर देना चाहिए।
- संकटों से मुक्ति का विश्वास: माँ शेरांवली अपने हर उस बच्चे की रक्षा करती है जो सच्चे दिल से उन्हें पुकारता है।
- अहंकार का त्याग: जीवन के मार्ग पर चलते हुए अपने भीतर के अहंकार और दुर्गुणों को मिटाकर दिव्यता को अपनाना ही सच्ची भक्ति है।
- आप माता की आराधना के साथ-साथ अन्य स्तोत्रों जैसे दुर्गा सप्तशती पाठ का भी नियमित अध्ययन कर सकते हैं।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / पद | सरल हिंदी अर्थ | आध्यात्मिक संदर्भ |
|---|---|---|
| शेरांवली | सिंह पर सवार रहने वाली माँ दुर्गा | समस्त ब्रह्मांड की साहसी और रक्षक शक्ति |
| पाके वांगन | हाथों में चूड़ियाँ पहनकर | सुहाग, पूर्ण समर्पण और आत्मीयता का प्रतीक |
| दिल दी आवाज़ | हृदय की पुकार | भीतर से आने वाली निष्कपट प्रार्थना |
| कुमकुम आंगन | रोली-सिंदूर से सजा हुआ पवित्र आंगन | पवित्रता, उल्लास और माँ के आगमन का स्थल |
| ज्योति | अखंड दीप या प्रकाश | ज्ञान और चेतना का प्रतीक |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
पंक्ति: शेरां वाली दियां पाके वांगन, माहीं गूंजे गा दिल दी आवाज़...
भावार्थ: हे माँ शेरांवली! तेरे नाम की चूड़ियाँ पहनकर और तुझमें पूरी तरह रमकर, अब मेरे हृदय के भीतर केवल तेरी ही याद और तेरी ही गूंज सुनाई देती है।
पंक्ति: हर हर हर, मां के दर्शन कराऊँ, दु:ख दूर करो, कृपा करो, मैं दर पे आऊँ...
भावार्थ: हे माँ! मैं तेरे दर्शन पाने के लिए और तेरे दरबार में हाजिरी लगाने के लिए व्याकुल होकर आ रहा हूँ। मेरे सभी दुखों को दूर कर अपनी असीम कृपा मुझ पर बरसा।
पंक्ति: तेरी ज्योत जगे, मिटे अंधेरा, तू ही है हल।
भावार्थ: हे माता! तुम्हारे दरबार की पावन ज्योति जलते ही जीवन के सभी प्रकार के अज्ञान और अंधेरे मिट जाते हैं, और जीवन की हर समस्या का समाधान केवल तुम ही हो।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
माता दुर्गा के इस भजन के साथ निम्नलिखित पावन मंत्र का स्मरण करना अत्यंत फलदायी होता है:
ॐ सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यंबके గౌरी नारायणी नमोऽस्तु ते॥
अर्थात: हे नारायणी! तुम सब प्रकार का मंगल करने वाली मंगलमयी हो, कल्याणकारी शिवे हो, सब पुरूषार्थों को साधने वाली हो, शरणागत की रक्षा करने वाली और तीन नेत्रों वाली गौरी हो। तुम्हें हमारा नमस्कार है। आप माता की आराधना के लिए नवदुर्गा स्तोत्र का भी पाठ कर सकते हैं।
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| भजन का नाम | शेरांवली दियां पाके वांगन (Sheranwali Diyan Pake Wangan) |
| गायक / स्वर | संजीव भारद्वाज (Sanjeev Bhardwaj) |
| समर्पित देवी | माँ दुर्गा / शेरांवली |
| भाषा | पंजाबी एवं हिंदी मिश्रित |
| संगीत शैली | पंजाबी देवी भजन / लोक शैली |
| मुख्य भाव | अनन्य समर्पण, प्रेम और विश्वास |
| उपयुक्त अवसर | नवरात्र, माता की चौकी, जागरण, मंगलवार/शुक्रवार पूजा |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
भक्तलोक (Bhaktilok.in) पर प्रकाशित यह लेख पारंपरिक सांस्कृतिक धरोहर, लोक संगीत और आध्यात्मिक दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। इस सामग्री का उद्देश्य पाठकों को प्रामाणिक जानकारी और भक्ति रस से परिपूर्ण सामग्री प्रदान करना है। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के अंतर्गत सभी भजनों के बोल और उनके भावार्थ को गहनता से परखा गया है ताकि पाठकों को श्रेष्ठ आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त हो सके।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- पारंपरिक पंजाबी देवी भजन एवं लोक संगीत परंपरा
- सनातन धर्म ग्रंथ एवं दुर्गा सप्तशती के विभिन्न पावन प्रसंग
- भक्तलोक संगीत आर्काइव एवं देवी आराधना पद्धतियां
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