पकड़ लो हाथ बनवारी नहीं तो डूब जाएंगे भजन लिरिक्स (Pakad Lo Hath Banwari Lyrics) - परिचय एवं आध्यात्मिक महत्व
श्री बांके बिहारी, खाटू श्याम और गोवर्धन धारी भगवान कृष्ण की शरण में जाने का जो आनंद और संतोष है, वह इस संसार के किसी अन्य सुख में नहीं है। 'पकड़ लो हाथ बनवारी नहीं तो डूब जाएंगे' अत्यंत भावुक, करुणा से भरा और आत्म-समर्पण से परिपूर्ण एक प्रसिद्ध भक्ति भजन है। इस भजन का मुख्य भाव (Bhava) शरणागति (Surrender), विरह, विनय और अगाध विश्वास का है। जब भक्त अपने जीवन की सभी बाधाओं, दुखों और पापों के भार से थक जाता है, तब वह दीनबंधु बांके बिहारी के चरणों में गिरकर यह गुहार लगाता है कि हे प्रभु! अब तो केवल आपका ही सहारा है, यदि आपने मेरा हाथ नहीं पकड़ा, तो मैं इस भवसागर रूपी संसार में निश्चित रूप से डूब जाऊंगा। यह भजन न केवल भक्तों को भाव-विभोर कर देता है, बल्कि उनके भीतर भगवान के प्रति अटूट प्रेम और विश्वास को भी प्रगाढ़ करता है। कीर्तन मंडलियों, सत्संगों और श्री कृष्ण जन्मोत्माष्टमी जैसे पावन पर्वों पर इस भजन का गान अत्यंत श्रद्धा के साथ किया जाता है।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
पकड़ लो हाथ बनवारी, नहीं तो डूब जाएंगे।
हमारा कुछ न बिगड़ेगा, तुम्हारी लाज जाएगी॥
पकड़ लो हाथ बनवारी, नहीं तो डूब जाएंगे।
धरी है पाप की गठरी, हमारे सर पे ये भारी।
वजन पापों का है भारी, इसे कैसे उठाएंगे॥
पकड़ लो हाथ बनवारी, नहीं तो डूब जाएंगे।
तुम्हारे ही भरोसे पर, जमाना छोड़ बैठे हैं।
जमाने की तरफ देखें, इसे कैसे निभाएंगे॥
पकड़ लो हाथ बनवारी, नहीं तो डूब जाएंगे।
भंवर में नाव फंसी है और दूर है किनारा।
बिना तेरे सांवरे अब कौन बने सहारा॥
पकड़ लो हाथ बनवारी, नहीं तो डूब जाएंगे।
लगा दो पार नैया को, दया के तुम हो सागर।
तुम्हारे द्वार आए हैं, पुकारें हाथ जोड़कर॥
पकड़ लो हाथ बनवारी, नहीं तो डूब जाएंगे।
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
यह भजन भक्त और भगवान के बीच के अनन्य संबंध की गहराई को उजागर करता है। प्रथम पंक्ति में भक्त कहता है कि हे बनवारी (कृष्ण)! मेरे जीवन की नैया भवसागर में डगमगा रही है, कृपया मेरा हाथ थाम लीजिए। यहाँ भक्त की चतुरता देखिए—वह कहता है कि यदि मैं डूबा तो मेरा तो कुछ नहीं बिगड़ेगा, संसार मुझे हीन समझेगा, लेकिन हे प्रभु! आपकी कृपालु होने की ख्याति और आपकी 'लाज' (सम्मान) दांव पर लग जाएगी, क्योंकि भक्त की रक्षा करना भगवान का सबसे बड़ा कर्तव्य है।
दूसरे अंतरे में भक्त अपनी कमजोरियों और भूलों को स्वीकार करता है। वह कहता है कि मेरे सिर पर मेरे द्वारा किए गए पापों और कर्मों की बहुत भारी गठरी रखी हुई है। यह संसार रूपी सफर इतना कठिन है कि मैं इस भारी वजन को अकेले उठाने में असमर्थ हूँ। केवल आप ही अपनी कृपा दृष्टि से इस बोझ को हल्का कर सकते हैं और मुझे इस दलदल से निकाल सकते हैं।
तीसरे और अंतिम चरण में भक्त अपने परम समर्पण (Total Surrender) को प्रकट करता है। वह कहता है कि मैंने केवल आपके ही भरोसे इस संपूर्ण संसार और मोह-माया का त्याग कर दिया है। अब यदि मैं पुनः संसार की तरफ देखूँगा या सहायता मांगूँगा, तो मेरा यह समर्पण झूठा साबित हो जाएगा। इसलिए हे करुणासिंधु! अब मेरी लाज आपके हाथ में है। इस प्रकार यह भजन भक्त के संपूर्ण आत्म-समर्पण और भगवान की असीम करुणा का एक जीवंत दस्तावेज है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
इस भजन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सरलता, मार्मिकता और सीधा संवाद है। यह जटिल दार्शनिक बातों में न उलझकर सीधे हृदय को छूने का कार्य करता है। इसे गाते समय आँखों में आंसू और स्वर में विनय स्वतः आ जाती है।
- भक्ति रस: यह भजन दास्य और शांत भक्ति के साथ-साथ माधुर्य और सख्य भाव का भी सुंदर मिश्रण प्रस्तुत करता है।
- शरणागति का संदेश: यह सिखाता है कि जब मनुष्य चारों तरफ से निराश हो जाता है, तब भगवान की शरण में जाने से सभी संकट दूर हो जाते हैं।
- अहंकार का त्याग: 'हमारा कुछ न बिगड़ेगा' पंक्ति अहंकार के पूर्ण समर्पण को दर्शाती है, जहाँ भक्त अपना सब कुछ अपने आराध्य को सौंप देता है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
इस दिव्य भजन का गायन या श्रवण किसी भी समय किया जा सकता है, परंतु कुछ विशेष अवसरों पर इसका प्रभाव और अधिक बढ़ जाता है:
- संध्या वंदन एवं आरती के बाद: घर के मंदिर में संध्या बेला के समय जब आप भगवान श्री कृष्ण या खाटू श्याम के दर्शन करते हैं, तब इस भजन को गुनगुनाना मानसिक शांति प्रदान करता है।
- सत्संग और कीर्तन: एकादशी, जन्मोत्माष्टमी, गोपाष्टमी या किसी भी धार्मिक अनुष्ठान और जागरण के दौरान सामूहिक रूप से इस भजन को गाने से वातावरण पूरी तरह से भक्तिमय हो जाता है।
- मानसिक अशांति या संकट के समय: जब भी जीवन में कठिनाइयां आएं और मन विचलित हो, तब एकांत में बैठकर इस भजन का स्मरण करने से अद्भुत आत्मबल प्राप्त होता है।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
यह भजन मुख्य रूप से जगत के पालनहार भगवान श्री कृष्ण, उनके बांके बिहारी स्वरूप और कलियुग के अवतारी श्री खाटू श्याम बाबा को समर्पित है। ब्रज संस्कृति और कृष्ण भक्त परंपरा में इसे अत्यंत श्रद्धा से गाया जाता है। संत तुलसीदास, सूरदास और मीराबाई की परंपरा की तरह ही यह भजन भी जीव और ब्रह्म के मिलन की उस छटपटाहट को दर्शाता है जहाँ जीव अपने प्रियतम को पुकारता है। श्री कृष्ण के अनेक भजनों जैसे तेरे भरोसे हम तो सांवरे लिरिक्स और श्याम बाबा ने बुलाया है लिरिक्स के साथ इस भजन का भी विशेष स्थान है।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
यह भजन सरल ब्रज-प्रभावित हिंदी और खड़ी बोली के मिश्रण में रचा गया है। इसमें अनुप्रास और रूपक अलंकारों का सहज प्रयोग हुआ है जैसे 'पाप की गठरी', 'भंवर में नाव' और 'दया के सागर'। यह काव्यात्मक शैली आम जनमानस के हृदय में तुरंत उतर जाती है और बिना किसी कठिन शब्दार्थ के अर्थ को स्पष्ट कर देती है।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
यह भजन हमें जीवन के कई गहरे आध्यात्मिक पाठ पढ़ाता है:
- अहंकार का विसर्जन: अपने जीवन की नैया को खुद खेने के बजाय भगवान को सौंप देना ही सच्ची बुद्धिमत्ता है।
- प्रभु पर अटूट विश्वास: परिस्थितियां चाहे जितनी भी प्रतिकूल क्यों न हों, ईश्वर पर भरोसा कभी नहीं छोड़ना चाहिए।
- क्षमा और कृपा की कामना: मनुष्य अपनी गलतियों (पापों) को स्वीकार करते हुए जब क्षमा मांगता है, तो ईश्वर उसे अपनी शरण में अवश्य लेते हैं।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / वाक्यांश | सरल अर्थ | आध्यात्मिक संदर्भ |
|---|---|---|
| बनवारी | वन (वृंदावन) में विहार करने वाले, श्री कृष्ण | भक्तों के संकट हरने वाले भगवान |
| लाज | इज्जत, मान-सम्मान | भक्त की रक्षा करने पर ईश्वर की प्रतिष्ठा |
| पाप की गठरी | कर्मों का संचित भार | अज्ञानता और बुरे कर्मों का बोझ |
| भंवर | जल का चक्रवात | संसार के मोह-माया और संकट |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
पकड़ लो हाथ बनवारी, नहीं तो डूब जाएंगे - भक्त अपनी असमर्थता जताते हुए कहता है कि हे प्रभु, मेरा हाथ पकड़ लीजिए अन्यथा मैं इस भवसागर से पार नहीं उतर पाऊंगा।
हमारा कुछ न बिगड़ेगा, तुम्हारी लाज जाएगी - यह अनूठी हठ है; भक्त कहता है कि मैं तो पहले से ही पतित हूँ, डूब भी गया तो मेरा क्या बिगड़ेगा, संसार आपको ही ताने देगा कि आपके होते हुए आपका भक्त डूब गया।
धरी है पाप की गठरी, हमारे सर पे ये भारी - जन्म-जन्मांतर के संचित कर्मों और गलतियों का बोझ मेरे सिर पर बहुत अधिक है।
भंवर में नाव फंसी है और दूर है किनारा - जीवन रूपी नाव बीच मझधार में अटक गई है और मुक्ति का मार्ग दूर नजर आ रहा है, अब केवल आपकी ही कृपा से नैया पार हो सकती है।
भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
इस भजन के भाव को पुष्ट करने के लिए श्रीमद्भागवत गीता और पुराणों के इन श्लोकों का स्मरण किया जा सकता है:
"कृपा कृपानिधि करहु मोर सब काजू। जन्म-मरनु निबारहु भव सिन्धु जहाजु॥"
तथा
"अनन्याश्चिन्तयंतो मां యే जनाः पर्युपासते। तेषां नित्याभियुक्तानां योगक्षेमं वहाम्यहम्॥"
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| भजन का नाम | पकड़ लो हाथ बनवारी नहीं तो डूब जाएंगे |
|---|---|
| आराध्य देव | भगवान श्री कृष्ण / खाटू श्याम जी |
| संगीत शैली | पारंपरिक भक्ति गीत / कीर्तन |
| भाषा | सरल हिंदी / ब्रज भाव |
| मुख्य भाव | शरणागति, विनय, विरह और समर्पण |
| उपयुक्त अवसर | सत्संग, एकादशी, कृष्ण जन्मोत्माष्टमी, दैनिक प्रार्थना |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह लेख भक्तों की आध्यात्मिक जिज्ञासाओं और पारंपरिक संकीर्तन की विधियों को ध्यान में रखते हुए संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसमें प्रामाणिक भावार्थ, शब्दार्थ और सुगम्य संरचना का विशेष ध्यान रखा गया है ताकि पाठकों को पूर्ण भक्ति रस की प्राप्ति हो सके।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- श्रीमद्भागवत महापुराण - भक्ति एवं शरणागति प्रसंग
- पारंपरिक ब्रज लोकगीत एवं श्री कृष्ण संकीर्तन परंपरा
- भक्ति साहित्य और लोक भजन संग्रह
पाठकों के विचार (0)
भक्ति रस चर्चा में भाग लें